Friday, November 1, 2019

दिल्ली की बिगड़ती हवा Vs दिल्ली का साफ़ नीला आसमान

इस पोस्ट में जो मुझे लगता है #DelhiAirQuality के बारे में वो लिखने जा रहा हूँ, पूरा पोस्ट जरूर पढना और फिर आपको लगे मैं गलत हूँ तो अपने कमेंट द्वारा मुझे सही करने की कोशिश करना,धन्यवाद।

शुरुआत करते है दीवाली से पहले के कुछ दिनों से, दिल्ली के मुख्यमंत्री @ArvindKejriwal जी और बहुत से लोग रोज दिल्ली के आसमान का नजारा दिखाते हुए फोटो पोस्ट करते थे, और सबको उस पर गर्व होता था की वाह दिल्ली ने पोलुशन के खिलाफ ये जंग भी बड़े हद्द तक जीत ली है।

अरविन्द केजरीवाल को पहले से पता था की सामने दिवाली है, और लोग पटाखे तो जलाएंगे ही और उससे प्रदूषण बढेगा, तो दिल्ली सरकार ने उसका भी हल निकाला, और दिल्ली में सामूहिक दीवाली लेजर वाली बनाने का निर्णय लिया।

तब तक दिल्ली का आकाश बिलकुल साफ़ था, दिल्ली सरकार सहित दिल्ली वाले भी खुश थे, लेकिन कुछ लोग थे जिन्हें इसका दर्द था की क्यों ये कामयाब हो गया इसमें, जो दिल्ली सदा प्रदूषण में नम्बर 1 रहती है उसकी हवा इतनी साफ़ क्यों है, लेकिन उन्हें उम्मीद थी की दीवाली पर पटाखों से कुछ होगा



जिसमे भाजपा के बड़े बड़े नेताओं सहित #LashkarENoida भी शामिल था, और उन्होंने बाकायादा लोगो को इसके लिए उकसाया की पटाखे चलाओ, सबसे बड़ी शर्म की बात खुद देश के प्रधानमंत्री ने मन की बात में पटाखे चलाने की बात कही, यदि सच में वो भारत देश के नागरिको का भला चाहते तो अपने उसी व्यक्तव्य में ये भी बोल सकते थे की जहाँ जहाँ प्रदुषण की समस्या है वहां कम चलाये, या सामूहिक रूप से चलाये, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया, अर्थात कहीं ना कहीं ये एक वर्ग यही चाहता था की दिल्ली की हवा जहरीली हो लेकिन दिल्ली वाले अपने लाडले मुख्यमंत्री के साथ थे, लेजर लाईट और सामूहिक दीवाली का कार्यक्रम सफल हो रहा था, दिल्ली की हवा साफ़ थी, और पटाखे भी नहीं चल रहे थे, खुद केजरीवाल जी ने इसके लिए दिल्ली को धन्यवाद के लिए ट्वीट किया था और दिल्ली वालो को सेल्यूट किया

एजेंसियां भी बताती है की इस साल दिल्ली में बहुत कम पटाखे चले, यानि कुल मिलाकर दिल्ली ने कमाल कर दिया. पर तभी उसी दिवाली की रात अचानक से पंजाब और हरियाणा में पराली जलना शुरू होती है, विशेष ध्यान दिया जाए, दीवाली की रात जब पटाखों से प्रदुषण नहीं फैला तो उसके बाद आधी रात से पराली जलना शुरू हुआ, दीवाली का त्यौहार जहाँ सब लोग त्योहार की खुशियाँ मनाने में लगे थे वहां ये कौन लोग थे जो पराली जलाने चले गए? और आखिर क्यों वो दीवाली वाली रात ही गए?

एक बार Steve Jobs ने कहा था "Connect the dots" इन सभी संदर्भो को आपस में जोडिये आपको अपने आप समझ आएगा कितना बड़ा षडयंत्र रचा गया केवल इसीलिए की चर्चा इस पर ना हो की इस बार दिल्ली ने सामूहिक दिवाली मनाकर प्रदूषण के खिलाफ जंग जीत ली बल्कि चर्चा दिल्ली की बिगड़ती हवा पर हो, फिर #LashkarENoida तो है ही जो कारणों पर चर्चा नहीं करेगा बस यही दिखाएगा की दिल्ली की हवा में सांस नहीं लिया जा रहा, वो नहीं बताएगा की इसके लिए कौन जिम्मेदार है



अच्छा ये पराली जलाने के लिए दिवाली की रात का इन्तजार क्यों किया गया? दीवाली के पहले क्यों नहीं जलाई? या तो शायद हवा का बहाव दिल्ली की तरफ नहीं था, या फिर पहले जला लेते तो वो खुलेआम पटाखे जलाने की बात किस बेशर्मी से करते (हालाँकि वो बेशर्म है कर सकते थे ऐसा भी)

चलो मान लेता हूँ मैं तो आम आदमी पार्टी का समर्थक हूँ तो अरविन्द केजरीवाल सरकार का गुणगान ही करूँगा, आप बताइए आपको क्या लगता है, मैंने जो लिखा है उसमे कौनसा तथ्य गलत है, या केजरीवाल और क्या कर सकता था इस हवा को सुधारने के लिए?

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