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गुरुवार, 15 जून 2017

सुपारी मीडिया कुछ भी कर सकता है (जो हुक्म मेरे आका)

शिवराज सिंह - योगी आदित्यनाथ - नरेंद्र मोदी - अमित शाह
पिछले काफी दिनों  से नोटिस कर रहा हूँ, अचानक से मीडिया में उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश की सरकारों की छवि बिगाड़ने वाली खबरे खूब चलाई जा रही है| तो मैंने इस पर मेरा खुद का एक विश्लेषण किया की ऐसा क्यों हो रहा है?

चलो एक बार फ्लैशबैक में चलते है, याद कीजिये उत्तरप्रदेश में भाजपा की विजय और सरकार बनना, आखिर में योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री पद मिलना और उन दिनों के मिडिया को ध्यान से याद कीजिये तब क्या था मिडिया चैनलों  में 24 घंटे?

योगी-योगी-योगी हर पल योगी जी उनकी इमेज मेकिंग हो रही थी, उनके पल पल की खबर मिडिया में कवर हो रही थी, आज यहाँ सोये, इतनी बार खर्राटे लिए, खिचड़ी खायी, जो खबर ना हो उसे भी खबर बनाया जा रहा था|
नतीजा? अचानक से मोदीजी गायब हो गए! योगी अब मोदी से भी ज्यादा पावरफुल लगने लगे और  वैसे वो है भी| एकतरफ जहाँ सारे भाजपा नेता मोदी और शाह के आगे नतमस्तक हो चुके है वही योगी ही ऐसा व्यक्ति है जिसने अपनी वेबसाइट में मोदी/शाह की फोटो तक नहीं लगाईं  और ना ही उनका कोई नाम या प्रशंसा (मुख्यमंत्री बनने से 1 दिन पहले  तक)|

आप सोच रहे होंगे इन सबसे वर्तमान की मीडिया खबरों का क्या लेना देना? बिलकुल इसी से लेना देना है! जैसे ही मोदी/शाह को ये खतरा महसूस हुआ की कही योगी की पोजीशन उनके लिए खतरा ना बन जाये, जब पूरी भाजपा को मोदी/शाह ने अपने अधीन कर लिया हो तो कोई और उनकी बराबरी कर सके ये उन्हें कब मंजूर होने वाला था|
तो मेरा ये मानना है कि शायद इन्ही सब कारणों से मोदी/शाह का मीडिया को आदेश हुआ की इसकी छवि ख़राब की जाए, अचानक से मीडिया में गुणगान की जगह आलोचना और तमाम ऐसी खबरे चलना शुरू हो गई जिससे ये लगे की योगी एक नाकारा मुख्यमंत्री है|

अब बात करते है मध्यप्रदेश की, मध्यप्रदेश में पिछले 15 साल से भाजपा की सरकार है, और शिवराज सिंह चौहान लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री है| अगले साल फिर से  मध्यप्रदेश में चुनाव है, सोचो अगर शिवराज सिंह फिर से मुख्यमंत्री बनने में सफल हो जाए तो मोदी से ज्यादा लोकप्रिय हो सकते है और भाजपा में अपनी पकड़ और मजबूत कर सकते है, केवल मुख्यमंत्री ही नहीं फिर उनके वहाँ से राज्य सभा की सीट और उन पर शिवराज सिंह की पकड़ रहना, हर बात शिवराज सिंह को मजबूत करेगी और मोदी/शाह को ना चाहते हुए भी शिवराज सिंह को सम्मान देना पडेगा|

तो मेरा ऐसा मानना है कि मध्यप्रदेश के मामले में मोदी/शाह का मिडिया को आदेश मिला होगा की जितना भी कर सको शिवराज सिंह की छवि खराब करो, मध्यप्रदेश सरकार की तमाम नाक़ामयाबियाँ मिडिया में दिखाओ ताकि शिवराज सिंह अपने आप कमजोर हो जाएगा या फिर खुद मोदी/शाह से समझौता करेगा अपने खिलाफ चलने वाली खबरे रुकवाने के लिए| तो यदि शिवराज सिंह मोदी/शाह से समझौता कर लेते है तो फिर अगले साल होने वाले चुनाव में शाह अपनी मर्जी चला सकेंगे और वहाँ पर भी सरकार पर अपना कब्जा कर लेंगे, और यदि ऐसा नहीं होता है तो शिवराज सिंह की छवि धूमिल कर भाजपा को ही हरवा देंगे ताकि मोदी/शाह से बड़ा पार्टी में कोई नहीं बन पाए|

वरना आप सोचिये व्यापम जैसे इतने बड़े घोटाले, जिसमे कई जान तक गयी है उसे भी लेकर मिडिया में इतनी खबरे नहीं चली जितनी पिछले कुछ दिनों में चल रही है|

खैर ये मेरे निजी विचार है, जो मुझे लगा वो आप सभी के साथ सांझा किया है, केवल मेरा आंकलन है इससे सहमत/असहमत होना आपका अधिकार है| यदि मेरे विचारों से किसी की भावनाओ को ठेस पहुंची हो तो उसके लिए मैं अग्रिम क्षमा प्रार्थी हूँ|


शनिवार, 27 मई 2017

आखिर चुनाव आयोग मान ही गया कि EVMs हैक की जा सकती है

सुनकर आपको भी यकीन नहीं हो रहा होगा कि चुनाव आयोग ने ये स्वीकार किया है की इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन हैक की जा सकती है, पर आप भी इस पोस्ट को पूरा पढ़ेंगे तो मान जाएंगे की चुनाव आयोग ने अंततः स्वीकार कर ही लिया है की EVMs को मैनिपुलेट कर अपने  मन चाहे उम्मीदवार को जिताया जा सकता है चाहे उसे जनता ने एक भी वोट ना  दिया हो|

इससे पहले मैं आपको एक मेरे जीवन की सच्ची घटना बताता हूँ, मेरे ऑफिस में सभी ये मानते है की मैं हर समस्या (IT  रिलेटेड) का समाधान निकाल सकता हूँ, और सभी दिन में २-४ बार ये बात बोल ही देते है की मैं सब प्रॉब्लम सॉल्व कर सकता हूँ, अब मेरे एक सहकर्मी को इससे बहुत जलन होती है और वो हर रोज कोशिश करता है की कुछ ऐसा करे की वो मुझसे सॉल्व ना हो| तो उसने एक तरकीब तो ये निकाली की मुझे आवाज लगाता "राम, ये समस्या है" मैं जैसे ही उस सिस्टम तक जाता उस प्रॉब्लम को सॉल्व करने के लिए सिस्टम को हाथ लगाता और मुश्किल से १-२ मिनट निकलती और वो बोल पड़ता चल रहने दे तुमसे नहीं हो रहा तो तुम्हे और भी बहुत काम है छोडो रहने दो इसे, इसके बाद वो उस घटना का कई बार जिक्र करता उस दिन राम से भी नहीं हुई वो समस्या ठीक, राम ने भी देखा था उसके भी समझ में नहीं आई|

एक और घटना बताना हूँ इसी सहकर्मी की, एक दिन इसका मोबाइल हैंग हो गया था ना टच स्क्रीन कमांड ले रही थी और ना ही कोई बटन, ये मेरे पास आया "राम मेरा मोबाईल रेस्पोंड नहीं कर रहा, तुम तो हर चीज ठीक कर देते हो इसे देखो"
मैंने देखा स्क्रीन रेस्पॉन्ड, नही कर रही बटन रेस्पॉन्ड नहीं कर रहे तो मैंने कवर खोल कर बैटरी निकालकर उसे रीस्टार्ट करना चाहा, जैसे ही मैंने बैक कवर ओपन किया उसने मोबाइल मेरे हाथ से छीन लिया, ये कहते हुए
"ये क्या कर रहे हो, मोबाइल को खोल क्यों रहे हो, पूरा ऑफिस कहता है तुम हर समस्या का समाधान निकाल सकते हो ये झूंठ है तुमसे भी मेरा मोबाइल जो हैंग था वो सही नहीं हुआ"



ठीक यही कहानी चुनाव आयोग की इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के साथ हो रही है, जब हाल में सम्पन्न हुए चुनावों में एक नहीं अनेको उदाहरण ऐसे सामने आये है जहाँ EVM  में गड़बड़ी का उदाहरण हमारे सामने है, की जगह मशीन पकड़ी भी गयी है जिनमे गड़बड़ थी| लेकिन चुनाव आयोग केवल रटी रटाई एक ही लाइन बोलता रहता है ना जी EVMs एकदम सेफ है इनमे गड़बड़ हो ही नहीं सकती, इनमे गड़बड़ की ही नहीं जा सकती|

जब आम आदमी पार्टी ने चुनाव आयोग के इस चेलेंज को ललकारा और ये साबित किया की EVMs हैक की जा सकती है तो चुनाव आयोग अपनी छवि बचाने के लिए घोषणा करता है की हम सभी को चूनौती देते है की EVM हैक करके दिखाए, लेकिन उन्हें ये भी पता है की आम आदमी पार्टी के नेता जो पेशे से इंजीनियर थे जिनका काम ही टेक्नोलॉजी से खेलना, नये नए आविष्कार करना रहा था वो EVMs को हैक करके ये साबित कर देंगे की भारतीय चुनाव आयोग जिन मशीनों का इस्तेमाल करता है उन्हें हैक किया सकता है तो इससे बचने के लिए पहले से ही शर्त लगादी, वही जो मेरे साथ ऑफिस में हुआ|
EVMs हैक करके दिखाओ लेकिन आपको मशीन खोलने नहीं देंगे, केवल मशीन को बाहर से देखकर हैक करो|अब चुनाव आयोग यदि इतना ही आश्वस्त है की EMVs हैक नहीं की जा सकती तो फिर क्यों नहीं खुली छूट देता की ये लो ये रही मशीन और दिखाओ हैक करके, हम भी देखते है तुम क्या कर सकते हो, और यदि सच में चुनाव आयोग भारतीय लोकतंत्र को बचाना चाहता है और निष्पक्ष चुनाव का पक्षधर है तो चुनाव आयोग के पास तो सुनहरी अवसर है अपने सिस्टम को सुधारने की| उन्हें तो बिना पेमेंट किये अपनी मशीनों की कमियों का पता लग जाएगा जिन्हे वो सुधारकर एक स्वच्छ और निष्पक्ष चुनाव आयोग की छवि बना सकते है लेकिन ऐसा न करने की बजाय वो शर्ते लगा देते है की मशीन को खोल नहीं सकते, यानि चुनाव आयोग ये स्वीकार कर रहा है की मशीन को खोलकर हैक किया जा सकता है|


अब भाजपा की IT सेल में ट्रेनिंग मिले लोग सोशल मिडिया पर इसी पर आपको गालियाँ देंगे की अरे बेवकूफ हो, पागल हो आदि आदि वोट देने जाओगे तब मशीन कौन खोलने देगा तुम्हे हैक करने के लिए? लेकिन उन्हें भी अच्छी तरह से पता है की हैक करने वाला वोट देते समय मशीन नहीं खोलेगा उसे खोलने का काम पहले ही हो जाता है, चुनाव होने के बाद मशीने गोदाम में रहती है, जहाँ उनका रख रखाव और मेंटेनेंस किया जाता है उसी समय ये गड़बड़ की जा सकती है|

तभी तो दिल्ली नगर निगम के चुनाव में आम आदमी पार्टी के बार बार आग्रह करने के बाद भी दिल्ली चुनाव आयोग के पास मशीने होते हुए भी राजस्थान से EVMs  मंगाई जाती है और चुनाव उन्ही से करवाए जाते है| पहले आम आदमी पार्टी बैलेट पेपर से चुनाव करवाने की मांग कर रही थी जिसे चुनाव आयोग ने खारिज कर दिया, फिर आम आदमी पार्टी ने कहा ओके बैलेट से मत करवाओ पर मशीन तो लेटेस्ट टेक्नोलॉजी वाली मंगवा लो लेकिन चुनाव आयोग साफ़ अड़ा रहा की चुनाव राजस्थान की EVMs से ही होंगे क्योंकि गड़बड़ की सारी मेहनत उन पर कर चुके है अब यदि दूसरी मशीन लाएंगे तो उनमें गड़बड़ करनी पड़ेगी|

चाहे चुनाव आयोग ये हेकाथॉन के नाम पर जोकाथॉन करवाकर मीडिया में महीनो तक ये हेडलाइन चलवा दे की मशीने को हैक नहीं किया जा सका, जैसे मेरा वो सहकर्मी पूरे ऑफिस में कहता है की "राम से भी ये समस्या सॉल्व नहीं हुई" लेकिन पता सबको है की भारत का लोकतंत्र खतरे में है, चुनाव आयोग सरकार के हाथो की कठपुतली बन गया है|

नोट: मेरे लिखे विचारो से आप सहमत/असहमत हो सकते है ये आपको हक है, ये मेरे निजी विचार है यदि मेरे इस लेख से कोई आहत होता है तो मैं उसके लिए क्षमा चाहता हूँ|

जय हिन्द
वन्दे मातरम
भारत माता की जय

Huffingpost पर भी एक बहुत शानदार लेख है इस सन्दर्भमें 

Election commission of India, EVMs, EVM, Electronic Voting machine, Hack, Hackthon, JokAthon, Aam Aadmi Party, BJP, Congress, Election, Democracy, Saurabh Bhardwaj

शनिवार, 29 अप्रैल 2017

इसी मिडिया ने तुम्हे खड़ा किया और आज इसके खिलाफ बोल रहे

जब भी आम आदमी पार्टी से कोई मिडिया को कुछ बोलता है तो तुरंत भक्तो की गैंग आ जाती है इसी मिडिया ने तुम्हे खड़ा किया और आज इसके खिलाफ बोल रहे है|

मैं मेरा निजी विश्लेष्ण बताता हूँ, "आम आदमी पार्टी" को मिडिया ने खडा नहीं किया ऐसा मेरा मानना है, उलटे मिडिया ने तो मानो पहले ही दिन से "आप" को खत्म करने की सुपारी ले ली थी, मिडिया ने केवल "आन्दोलन" को पूरी तरह कवर किया था जिस समय आम आदमी पार्टी थी भी नहीं, और उस समय कवर किया गया था केवल और केवल तत्कालीन कांग्रेस सरकार के प्रति लोगो में गुस्सा पैदा करने के लिए और वो हुआ भी, उसके बाद जैसे ही पार्टी बनाने की घोषणा हुई तब से मिडिया ने "आप" को खत्म करने में कोई कसर नहीं छोड़ी, अन्ना को धोखा दिया, अन्ना साथ नहीं है, अरविन्द को लालच आ गया, सत्ता का लालच आदि आदि|

मुझे तो किसी भी चेनल का कोई भी लाइव नहीं याद आता जिसमे पार्टी बनने के बाद किसी ने अरविन्द केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, कुमार विश्वाश या पार्टी की तारीफ़ में कसीदे पढ़े हो उलटे किसी ना किसी तरह ये कोशिश की गयी की इनको खत्म कर दिया जाए, रोज रोज टीवी डिबेट में कितने ही लोगो को टोपी पहनाकर बिठा दिया जाता था अन्ना सपोर्टर बनाकर और "आप" के प्रवक्ताओ को कटघरे में खड़ा कर दिया जाता था| फिर आरोपों की बौछार, आंदोलन को धोखा क्यों दिया, क्या आपकी पहले से यही नियत थी, आंदोलन किसी ने किया मलाई कोई खा गया और ना जाने कितने ही अनगिनत सवाल| क्योंकि आम आदमी पार्टी उस आंदोलन की उपज थी तो उस समय तमाम कोशिशे की गई थी की आंदोलन से सहानुभूति रखने वाले लोग आम आदमी पार्टी और अरविन्द केजरीवाल से नफरत करने लगे लेकिन उनके इस बुरा चाहने से थोड़ा बहुत नुक्सान हुआ पर "आप" खत्म नहीं हुई खड़ी हो गई|

किरण बेदी और जनरल वी के सिंह भी इसी आंदोलन से निकले थे  उनसे कभी सवाल नहीं किये गए, उन्हें किसी मिडिया हॉउस ने अपने डिबेट में कटघरे में खड़ा नहीं किया की आज उनके मन में लालच आ गया, कुर्सी के लिए मंत्री पद के लिए आंदोलन में आये थे, अन्ना को अकेला छोड़कर बीजेपी के दामन में चले गए| सवाल हुए केवल आम आदमी पार्टी में जो लोग आंदोलन से आ गए उनसे, यदि ये सब भी बीजेपी में चले जाते तो कोई सवाल नहीं होते इनसे|

ये सब मेरी निजी राय/आकलन है.... मुझे कभी भी नहीं लगता की मिडिया ने "आप" का साथ दिया है हाँ उन्होंने खत्म करने की जितनी कोशिश की उससे हमे ये फायदा हुआ की हम उस अवसर का फायदा उठाकर अपनी बात, अपने विचार लोगो तक पहुंचा पाए, उन्होंने खत्म करने की कोशिश की हम आबाद हो गये|

मिडिया आन्दोलन के समय भी बीजेपी के लिए काम कर रहा था और आज भी बीजेपी के लिए काम कर रहा है, वरना जिस आन्दोलन को मिडिया ने इतना उठाया 24 घंटे लाइव किया, आज उसी लोकपाल के लिए मिडिया में 1-2 रविश जैसो को छोड़कर किसी में हिम्मत तक नहीं है ये बताने की कि मोदी सरकार ने लोकपाल का विरोध किया है, SC ने जब लोकपाल की नियुक्ति का आदेश दिया तो SC को ही उलटे जवाब दिया की SC हमारे काम में दखल ना दे यदि सच में मिडिया ने उस समय आन्दोलन का साथ दिया,तो आज मिडिया के पास क्यों समय नहीं इस सरकार से सवाल करने का की लोकपाल की नियुक्ति क्यों नही हो रही? जिस लोकपाल कानून के लिए पूरा देश सड़क पर आ गया था और जिसकी बदौलत भाजपा आज पूर्ण बहुमत की सरकार के साथ सत्ता में है आज 3 साल होने को आये लोकपाल की नियुक्ति क्यों नहीं हो रही|

अभी हाल में रविश कुमार ने बहुत शानदार प्रोग्राम किया लोकपाल को लेकर इससे पहले भी १-२ बार रविश ने ये बात उठाई है मानो विपक्ष और जनता की आवाज अब केवल रविश ही हो|

तो जिन्हें भी लगता है "आप" को मिडिया ने खड़ा किया है वो गलतफहमी में है, मिडिया ने कांग्रेस के प्रति गुस्सा पैदा कर मोदी सरकार बनाई है,मिडिया तो पहले दिन से ही "आप" को कटघरे में खड़े किये रखता है और आज भी यही कर रहा है|
 

सोमवार, 13 मार्च 2017

who cares about voter turnout when the EVM machines can be tampered!!!

who cares about voter turnout when the EVM machines can be tampered!!!

जब भाजपा विपक्ष में होती थी तब वोटिंग मशीन को लेकर इन्ही आशंकाओ को व्यक्त करते थे, जब आज वो खुद सत्ता में है तो उन्ही EVM से इतना प्यार क्यों?
यदि तब उन्हें लगता था की EVM आसानी से टेम्पर की जा सकती है तो आज वो सत्ता में है क्यों नहीं EVM का यूज़ बंद कर देते है?
पर इन EVM का पहले कांग्रेस ने फायदा उठाया तो अब भाजपा पीछे क्यों रहे?
जैसे पहले CBI का गलत उपयोग कांग्रेस करती थी आज CBI का गलत प्रयोग भाजपा कर रही है।
बदला कुछ भी तो नहीं है

GVL Narasimha Rao (National Spokesperson, Bharatiya Janata Party) qustioning about EVM's tempering.

EVMs are being debated in Censor board! Film Rajniti has 'derogatory' references on how EVMs are manipulated by ruling parties. ECI proud?
EVMs are being debated in Censor board! Film Rajniti has 'derogatory' references on how EVMs are manipulated by ruling parties. ECI proud?
 


 




Priti Gandhi, National Executive Member - BJP Mahila Morcha speaking that Tempering EVM's is so easy.

An autorickshaw driver in Mumbai today laughed and told me that EVM's and autorickshaw meters have similar methods of tampering!! - Priti Gandhi