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शनिवार, 27 मई 2017

आखिर चुनाव आयोग मान ही गया कि EVMs हैक की जा सकती है

सुनकर आपको भी यकीन नहीं हो रहा होगा कि चुनाव आयोग ने ये स्वीकार किया है की इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन हैक की जा सकती है, पर आप भी इस पोस्ट को पूरा पढ़ेंगे तो मान जाएंगे की चुनाव आयोग ने अंततः स्वीकार कर ही लिया है की EVMs को मैनिपुलेट कर अपने  मन चाहे उम्मीदवार को जिताया जा सकता है चाहे उसे जनता ने एक भी वोट ना  दिया हो|

इससे पहले मैं आपको एक मेरे जीवन की सच्ची घटना बताता हूँ, मेरे ऑफिस में सभी ये मानते है की मैं हर समस्या (IT  रिलेटेड) का समाधान निकाल सकता हूँ, और सभी दिन में २-४ बार ये बात बोल ही देते है की मैं सब प्रॉब्लम सॉल्व कर सकता हूँ, अब मेरे एक सहकर्मी को इससे बहुत जलन होती है और वो हर रोज कोशिश करता है की कुछ ऐसा करे की वो मुझसे सॉल्व ना हो| तो उसने एक तरकीब तो ये निकाली की मुझे आवाज लगाता "राम, ये समस्या है" मैं जैसे ही उस सिस्टम तक जाता उस प्रॉब्लम को सॉल्व करने के लिए सिस्टम को हाथ लगाता और मुश्किल से १-२ मिनट निकलती और वो बोल पड़ता चल रहने दे तुमसे नहीं हो रहा तो तुम्हे और भी बहुत काम है छोडो रहने दो इसे, इसके बाद वो उस घटना का कई बार जिक्र करता उस दिन राम से भी नहीं हुई वो समस्या ठीक, राम ने भी देखा था उसके भी समझ में नहीं आई|

एक और घटना बताना हूँ इसी सहकर्मी की, एक दिन इसका मोबाइल हैंग हो गया था ना टच स्क्रीन कमांड ले रही थी और ना ही कोई बटन, ये मेरे पास आया "राम मेरा मोबाईल रेस्पोंड नहीं कर रहा, तुम तो हर चीज ठीक कर देते हो इसे देखो"
मैंने देखा स्क्रीन रेस्पॉन्ड, नही कर रही बटन रेस्पॉन्ड नहीं कर रहे तो मैंने कवर खोल कर बैटरी निकालकर उसे रीस्टार्ट करना चाहा, जैसे ही मैंने बैक कवर ओपन किया उसने मोबाइल मेरे हाथ से छीन लिया, ये कहते हुए
"ये क्या कर रहे हो, मोबाइल को खोल क्यों रहे हो, पूरा ऑफिस कहता है तुम हर समस्या का समाधान निकाल सकते हो ये झूंठ है तुमसे भी मेरा मोबाइल जो हैंग था वो सही नहीं हुआ"



ठीक यही कहानी चुनाव आयोग की इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के साथ हो रही है, जब हाल में सम्पन्न हुए चुनावों में एक नहीं अनेको उदाहरण ऐसे सामने आये है जहाँ EVM  में गड़बड़ी का उदाहरण हमारे सामने है, की जगह मशीन पकड़ी भी गयी है जिनमे गड़बड़ थी| लेकिन चुनाव आयोग केवल रटी रटाई एक ही लाइन बोलता रहता है ना जी EVMs एकदम सेफ है इनमे गड़बड़ हो ही नहीं सकती, इनमे गड़बड़ की ही नहीं जा सकती|

जब आम आदमी पार्टी ने चुनाव आयोग के इस चेलेंज को ललकारा और ये साबित किया की EVMs हैक की जा सकती है तो चुनाव आयोग अपनी छवि बचाने के लिए घोषणा करता है की हम सभी को चूनौती देते है की EVM हैक करके दिखाए, लेकिन उन्हें ये भी पता है की आम आदमी पार्टी के नेता जो पेशे से इंजीनियर थे जिनका काम ही टेक्नोलॉजी से खेलना, नये नए आविष्कार करना रहा था वो EVMs को हैक करके ये साबित कर देंगे की भारतीय चुनाव आयोग जिन मशीनों का इस्तेमाल करता है उन्हें हैक किया सकता है तो इससे बचने के लिए पहले से ही शर्त लगादी, वही जो मेरे साथ ऑफिस में हुआ|
EVMs हैक करके दिखाओ लेकिन आपको मशीन खोलने नहीं देंगे, केवल मशीन को बाहर से देखकर हैक करो|अब चुनाव आयोग यदि इतना ही आश्वस्त है की EMVs हैक नहीं की जा सकती तो फिर क्यों नहीं खुली छूट देता की ये लो ये रही मशीन और दिखाओ हैक करके, हम भी देखते है तुम क्या कर सकते हो, और यदि सच में चुनाव आयोग भारतीय लोकतंत्र को बचाना चाहता है और निष्पक्ष चुनाव का पक्षधर है तो चुनाव आयोग के पास तो सुनहरी अवसर है अपने सिस्टम को सुधारने की| उन्हें तो बिना पेमेंट किये अपनी मशीनों की कमियों का पता लग जाएगा जिन्हे वो सुधारकर एक स्वच्छ और निष्पक्ष चुनाव आयोग की छवि बना सकते है लेकिन ऐसा न करने की बजाय वो शर्ते लगा देते है की मशीन को खोल नहीं सकते, यानि चुनाव आयोग ये स्वीकार कर रहा है की मशीन को खोलकर हैक किया जा सकता है|


अब भाजपा की IT सेल में ट्रेनिंग मिले लोग सोशल मिडिया पर इसी पर आपको गालियाँ देंगे की अरे बेवकूफ हो, पागल हो आदि आदि वोट देने जाओगे तब मशीन कौन खोलने देगा तुम्हे हैक करने के लिए? लेकिन उन्हें भी अच्छी तरह से पता है की हैक करने वाला वोट देते समय मशीन नहीं खोलेगा उसे खोलने का काम पहले ही हो जाता है, चुनाव होने के बाद मशीने गोदाम में रहती है, जहाँ उनका रख रखाव और मेंटेनेंस किया जाता है उसी समय ये गड़बड़ की जा सकती है|

तभी तो दिल्ली नगर निगम के चुनाव में आम आदमी पार्टी के बार बार आग्रह करने के बाद भी दिल्ली चुनाव आयोग के पास मशीने होते हुए भी राजस्थान से EVMs  मंगाई जाती है और चुनाव उन्ही से करवाए जाते है| पहले आम आदमी पार्टी बैलेट पेपर से चुनाव करवाने की मांग कर रही थी जिसे चुनाव आयोग ने खारिज कर दिया, फिर आम आदमी पार्टी ने कहा ओके बैलेट से मत करवाओ पर मशीन तो लेटेस्ट टेक्नोलॉजी वाली मंगवा लो लेकिन चुनाव आयोग साफ़ अड़ा रहा की चुनाव राजस्थान की EVMs से ही होंगे क्योंकि गड़बड़ की सारी मेहनत उन पर कर चुके है अब यदि दूसरी मशीन लाएंगे तो उनमें गड़बड़ करनी पड़ेगी|

चाहे चुनाव आयोग ये हेकाथॉन के नाम पर जोकाथॉन करवाकर मीडिया में महीनो तक ये हेडलाइन चलवा दे की मशीने को हैक नहीं किया जा सका, जैसे मेरा वो सहकर्मी पूरे ऑफिस में कहता है की "राम से भी ये समस्या सॉल्व नहीं हुई" लेकिन पता सबको है की भारत का लोकतंत्र खतरे में है, चुनाव आयोग सरकार के हाथो की कठपुतली बन गया है|

नोट: मेरे लिखे विचारो से आप सहमत/असहमत हो सकते है ये आपको हक है, ये मेरे निजी विचार है यदि मेरे इस लेख से कोई आहत होता है तो मैं उसके लिए क्षमा चाहता हूँ|

जय हिन्द
वन्दे मातरम
भारत माता की जय

Huffingpost पर भी एक बहुत शानदार लेख है इस सन्दर्भमें 

Election commission of India, EVMs, EVM, Electronic Voting machine, Hack, Hackthon, JokAthon, Aam Aadmi Party, BJP, Congress, Election, Democracy, Saurabh Bhardwaj

शनिवार, 29 अप्रैल 2017

इसी मिडिया ने तुम्हे खड़ा किया और आज इसके खिलाफ बोल रहे

जब भी आम आदमी पार्टी से कोई मिडिया को कुछ बोलता है तो तुरंत भक्तो की गैंग आ जाती है इसी मिडिया ने तुम्हे खड़ा किया और आज इसके खिलाफ बोल रहे है|

मैं मेरा निजी विश्लेष्ण बताता हूँ, "आम आदमी पार्टी" को मिडिया ने खडा नहीं किया ऐसा मेरा मानना है, उलटे मिडिया ने तो मानो पहले ही दिन से "आप" को खत्म करने की सुपारी ले ली थी, मिडिया ने केवल "आन्दोलन" को पूरी तरह कवर किया था जिस समय आम आदमी पार्टी थी भी नहीं, और उस समय कवर किया गया था केवल और केवल तत्कालीन कांग्रेस सरकार के प्रति लोगो में गुस्सा पैदा करने के लिए और वो हुआ भी, उसके बाद जैसे ही पार्टी बनाने की घोषणा हुई तब से मिडिया ने "आप" को खत्म करने में कोई कसर नहीं छोड़ी, अन्ना को धोखा दिया, अन्ना साथ नहीं है, अरविन्द को लालच आ गया, सत्ता का लालच आदि आदि|

मुझे तो किसी भी चेनल का कोई भी लाइव नहीं याद आता जिसमे पार्टी बनने के बाद किसी ने अरविन्द केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, कुमार विश्वाश या पार्टी की तारीफ़ में कसीदे पढ़े हो उलटे किसी ना किसी तरह ये कोशिश की गयी की इनको खत्म कर दिया जाए, रोज रोज टीवी डिबेट में कितने ही लोगो को टोपी पहनाकर बिठा दिया जाता था अन्ना सपोर्टर बनाकर और "आप" के प्रवक्ताओ को कटघरे में खड़ा कर दिया जाता था| फिर आरोपों की बौछार, आंदोलन को धोखा क्यों दिया, क्या आपकी पहले से यही नियत थी, आंदोलन किसी ने किया मलाई कोई खा गया और ना जाने कितने ही अनगिनत सवाल| क्योंकि आम आदमी पार्टी उस आंदोलन की उपज थी तो उस समय तमाम कोशिशे की गई थी की आंदोलन से सहानुभूति रखने वाले लोग आम आदमी पार्टी और अरविन्द केजरीवाल से नफरत करने लगे लेकिन उनके इस बुरा चाहने से थोड़ा बहुत नुक्सान हुआ पर "आप" खत्म नहीं हुई खड़ी हो गई|

किरण बेदी और जनरल वी के सिंह भी इसी आंदोलन से निकले थे  उनसे कभी सवाल नहीं किये गए, उन्हें किसी मिडिया हॉउस ने अपने डिबेट में कटघरे में खड़ा नहीं किया की आज उनके मन में लालच आ गया, कुर्सी के लिए मंत्री पद के लिए आंदोलन में आये थे, अन्ना को अकेला छोड़कर बीजेपी के दामन में चले गए| सवाल हुए केवल आम आदमी पार्टी में जो लोग आंदोलन से आ गए उनसे, यदि ये सब भी बीजेपी में चले जाते तो कोई सवाल नहीं होते इनसे|

ये सब मेरी निजी राय/आकलन है.... मुझे कभी भी नहीं लगता की मिडिया ने "आप" का साथ दिया है हाँ उन्होंने खत्म करने की जितनी कोशिश की उससे हमे ये फायदा हुआ की हम उस अवसर का फायदा उठाकर अपनी बात, अपने विचार लोगो तक पहुंचा पाए, उन्होंने खत्म करने की कोशिश की हम आबाद हो गये|

मिडिया आन्दोलन के समय भी बीजेपी के लिए काम कर रहा था और आज भी बीजेपी के लिए काम कर रहा है, वरना जिस आन्दोलन को मिडिया ने इतना उठाया 24 घंटे लाइव किया, आज उसी लोकपाल के लिए मिडिया में 1-2 रविश जैसो को छोड़कर किसी में हिम्मत तक नहीं है ये बताने की कि मोदी सरकार ने लोकपाल का विरोध किया है, SC ने जब लोकपाल की नियुक्ति का आदेश दिया तो SC को ही उलटे जवाब दिया की SC हमारे काम में दखल ना दे यदि सच में मिडिया ने उस समय आन्दोलन का साथ दिया,तो आज मिडिया के पास क्यों समय नहीं इस सरकार से सवाल करने का की लोकपाल की नियुक्ति क्यों नही हो रही? जिस लोकपाल कानून के लिए पूरा देश सड़क पर आ गया था और जिसकी बदौलत भाजपा आज पूर्ण बहुमत की सरकार के साथ सत्ता में है आज 3 साल होने को आये लोकपाल की नियुक्ति क्यों नहीं हो रही|

अभी हाल में रविश कुमार ने बहुत शानदार प्रोग्राम किया लोकपाल को लेकर इससे पहले भी १-२ बार रविश ने ये बात उठाई है मानो विपक्ष और जनता की आवाज अब केवल रविश ही हो|

तो जिन्हें भी लगता है "आप" को मिडिया ने खड़ा किया है वो गलतफहमी में है, मिडिया ने कांग्रेस के प्रति गुस्सा पैदा कर मोदी सरकार बनाई है,मिडिया तो पहले दिन से ही "आप" को कटघरे में खड़े किये रखता है और आज भी यही कर रहा है|
 

सोमवार, 13 मार्च 2017

who cares about voter turnout when the EVM machines can be tampered!!!

who cares about voter turnout when the EVM machines can be tampered!!!

जब भाजपा विपक्ष में होती थी तब वोटिंग मशीन को लेकर इन्ही आशंकाओ को व्यक्त करते थे, जब आज वो खुद सत्ता में है तो उन्ही EVM से इतना प्यार क्यों?
यदि तब उन्हें लगता था की EVM आसानी से टेम्पर की जा सकती है तो आज वो सत्ता में है क्यों नहीं EVM का यूज़ बंद कर देते है?
पर इन EVM का पहले कांग्रेस ने फायदा उठाया तो अब भाजपा पीछे क्यों रहे?
जैसे पहले CBI का गलत उपयोग कांग्रेस करती थी आज CBI का गलत प्रयोग भाजपा कर रही है।
बदला कुछ भी तो नहीं है

GVL Narasimha Rao (National Spokesperson, Bharatiya Janata Party) qustioning about EVM's tempering.

EVMs are being debated in Censor board! Film Rajniti has 'derogatory' references on how EVMs are manipulated by ruling parties. ECI proud?
EVMs are being debated in Censor board! Film Rajniti has 'derogatory' references on how EVMs are manipulated by ruling parties. ECI proud?
 


 




Priti Gandhi, National Executive Member - BJP Mahila Morcha speaking that Tempering EVM's is so easy.

An autorickshaw driver in Mumbai today laughed and told me that EVM's and autorickshaw meters have similar methods of tampering!! - Priti Gandhi







शनिवार, 11 मार्च 2017

पंजाब गोवा चुनाव परिणाम

आज जो तस्वीर पंजाब और गोवा के चुनाव परिणामो के बाद सामने आयी है मुझ जैसे हजारो आप समर्थकों/कार्यकर्ताओं के लिए दुखद है लेकिन हम सब को ये हार स्वीकार करनी चाहिए, जरूर हमारे में ही कुछ कमी रह गयी जो हम जनता को  हमारे साथ नहीं कर पाए। जरूर पार्टी इस पर विचार मंथन करेगी और उन कारणों का पता लगाएगी जिनकी वजह से हमे जहां पंजाब में हम दिल्ली से ज्यादा समर्थन मिल रहा था वो वोट में कन्वर्ट नहीं हो पाया।
लेकिन इन सबके बीच मुझे लगता है आज पाँच राज्यों के जो परिणाम आये है वो कहीं ना कहीं अच्छे के लिए हुए है (ऐसा मेरा मानना है)। 

मुझे लगता है अब तक बहुत से लोग बुद्धिजीवी वर्ग जो अपनी ही मस्ती में खोया हुआ था जिसे लग रहा था की चलो आम आदमी पार्टी लड़ तो रही है उन्हें क्या जरुरत है बोलने की या सामने आने की, पंजाब में आप को बहुमत ना  और MP में भाजपा को सम्पूर्ण बहुमत मिलने के बाद या तो ये लोग एकदम से भाजपा के सामने नतमस्तक होकर जो हो रहा है उसे स्वीकार कर लेंगे या सबके सीने में वो आग दिखाई देगी की नहीं यार "enough is enough" अब मुझे बोलना ही होगा, अब मुझे आगे आना ही होगा, अब मैं और चुपचाप ये सब नहीं देख सकता, तो इस तरह से अच्छे लोग, ईमानदार लोग संगठित होकर सामने आएंगे और देश में बदलाव का जो आंदोलन चला है और ज्यादा मजबूत होगा।

दूसरा पंजाब में आप को बहुमत ना मिलने अन्य राज्यो में कई मौका परस्त लोग जो पद लालसा में संगठन के साथ जुड़ गये थे वो इसके बाद स्वतः दूर चले जायेगी या अपनी राजनीतिक इच्छाओं की पूर्ति के लिए वापस वही लौट जाएंगे जहाँ से वो ट्रांसप्लांट हो रहे थे।

तीसरा खुद आम आदमी पार्टी भी अपनी रणनीति को और बेहतर कर पायेगी और यदि आप के  भी किसी नेता या विधायक में कुछ अहंकार आ गया था वो दूर हो जायेगा और धरातल से जुड़े कार्यकर्ताओं के साथ पुनः संवाद स्थापित कर और अधिक मजबूत होकर आगे बढ़ेंगे।

चौथा जो आम आदमी पार्टी के शुरुआत से समर्थक है वो जब जब पार्टी संकट से गुजरती है तो स्वतः संगठित हो जाते है तो ये परिणाम भी  हमे संगठित करेंगे और अधिक मजबूत और परिपक़्व बनाएंगे और मुझे पूरा भरोसा है अरविन्द केजरीवाल पर जो जल्द पूरी ऊर्जा के साथ हम सभी के सामने आगे का प्लान रखेंगे।

 

रविवार, 13 मार्च 2016

क्या सच में अब आम आदमी पार्टी बदल गयी है?

 एक बार फिर कुछ दिनों से आम आदमी पार्टी के समर्थक, वॉलिटियर्स पार्टी के खिलाफ बोल रहे है और  मुद्दा है "यमुना"।

यमुना किनारे हो रहे श्री श्री रविशंकर के आर्ट ऑफ़ लिविंग का विश्व स्तरीय आयोजन।

सभी आरोप लगा रहे है की अरविन्द केजरीवाल और आम आदमी पार्टी ने इसका विरोध क्यों नहीं किया? उन्होंने क्यों इन सबसे समझोता कर लिया? तो क्या अब अरविन्द बदल गया है? बहुत से सवाल है और कई बार इन सवालों का जवाब किसी के पास नहीं होता है या यो कहे जवाब हमे खुद ही तलाशना होता है। अरविंदजी और आम आदमी पार्टी को तो हमने कटघरे में खड़ा कर ही दिया है तो अब वो तो आरोपी हो गए और इसके उत्तर में वो केवल जवाब ही दे सकते है और जो भी जवाब देंगे उसी जवाब से फिर नए सवाल खड़े होंगे और इसी तरह हम और ज्यादा उलझते जाएंगे। सवाल का जवाब ही नया सवाल बन जाएगा अतः कई बार ऐसे सवालों को नजर अंदाज भी करना जरुरी हो जाता है और इस परिस्तिथि में विशेष रूप से क्योंकि आप केवल उसका विरोध ही कर सकते थे उसे रोक नहीं पाते किसी भी हालत में। जब सीधे सीधे केंद्र सरकार और मोदीजी इसमें सरकारी पैसा, सरकारी संसाधन, हमारी सेना जो दुश्मनो से हमारी रक्षा करती है उसे भी श्री श्री रविशंकर की खिदमत में मोदीजी ने लगा दिया तो आप समझ सकते है अरविन्द केजरीवाल के विरोध करने से ये इवेंट कभी नहीं रूकता उलटे इसके कई नकारात्मक प्रभाव होते है।

खैर मैं आपको स्पष्ट करदु, ये केवल मेरे विचार है जैसा मैं सोच रहा हूँ, इसका पार्टी या पार्टी की विचारधारा या उनकी सोच से कहीं कोई सम्बन्ध नहीं है।

नकारात्मक प्रभाव की बात कर रहा था, जैसे की यदि आम आदमी पार्टी इसका विरोध करती तो सबसे पहले तो हिन्दू विरोधी, पाकिस्तान प्रेमी, इस तरह के आरोपों की बौछार हो जाती, तरह तरह की कहानियाँ, कार्टून गालियाँ सोशल मीडिया पर चल जाती जिसमे एक बार फिर से अरविन्द जी को हिन्दू विरोधी के तौर पर पेश किया जाता, वैसे Art of living के इस आयोजन का विरोध नहीं किया तो भी कुछ एक मेसेज तो विरोधियों की मिडिया सेल ने सोशल मिडिया पर चला दिए ऐसा लगता है जैसे उन्होंने पहले से ही तैयार कर रखे थे जैसे की उन्हें भी पूरा भरोसा था की अरविंदजी यमुना के लिए इसका विरोध करेंगे तो विरोधियों की साइबर सेल ने इसके लिए पहले से मेसेज तैयार कर लिए थे और विरोध ना करने पर भी इन्हे चला दिया।

यानि अरविन्द जी के विरोध पर ये इवेंट तो नहीं रूकता लेकिन एक बार फिर मिडिया को अरविंदजी के खिलाफ नेगेटिव चलाने का अच्छा मौका मिल जाता, पूरे दिन मिडिया में यही बहस चलती "आखिर क्यों हिंदुओ के खिलाफ है आम आदमी पार्टी" जबकि इसमें वास्तिवकता या सत्य की कही कोई जगह नहीं है। आम आदमी पार्टी ही वो पार्टी है जो "सर्व धर्म समभाव" जो हमारे संविधान में है को पूरी तरह मानती है।

तो शायद इस बार अरविंदजी और आम आदमी पार्टी ने इन सब तरह के सवालों को रोकने के लिए ये निर्णय लिया होगा, हालाँकि सवाल तो खड़े हुए ही अब दूसरे सवाल खड़े हो गए पर शायद उन सवालो से कही कम? या यों कहे अपने इस निर्णय से पार्टी और पार्टी के तमाम प्रवक्ताओ को कई कठिन सवालों का सामना करने से बचा लिया?

एक और कारण हो सकता है इस आयोजन का विरोध ना करने का, की शायद इसी बहाने "यमुना" पर बात तो हुयी, और लोगो का "यमुना" की तरफ दिन आकर्षित हुआ और शायद "यमुना" को साफ़ करने और "गंगा" की तरह ही "यमुना के घाट" को विकसित करने और सुन्दर बनाने में मदद मिलेगी?

खैर जो भी हो केवल इस एक निर्णय से हम ना तो अरविंदजी पर सवाल खड़े कर सकते है और ना ही आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार पर। हमारे विचार भिन्न हो सकते है मेरे खुद के विचार भिन्न है पर जरूर कुछ अच्छे के लिए पार्टी और दिल्ली सरकार ने इसका विरोध ना करने निर्णय लिया होगा।

जय हिन्द
वन्दे मातरम

बुधवार, 2 मार्च 2016

"Free the Tree" campaign of Delhi Govt covered by ANSA Italian news agency

आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार किस तरह पर्यावरण और प्रदूषण के प्रति गंभीर है ये हमे दिल्ली सरकार द्वारा उठाये गए बहुत से कदमो से दिखाई देता है, चाहे फिर वो कठिन से कठिन निर्णय (वोट बैंक को प्रभावित कर सकता है) सम विषम नियम हो या फिर कार फ्री डे या दिल्ली की सड़को की वैक्यूम क्लीनिंग।
एक के बाद एक लगातार प्रयास दिल्ली की आबो हवा को सुधारने का, इसी कड़ी में दिल्ली सरकार के पर्यटन मंत्री श्री कपिल मिश्रा द्वारा एक अभियान शुरू किया गया "फ्री द ट्री" (पेड़ो को आजाद करो, मुक्त करो) जिसको इटालियन समाचार एजेंसी ANSA ने भी अपनी वेबसाइट पर जगह दी है।

ओरिजिनल न्यूज़ लिंक 

हिंदी अनुवाद:


शहर के पेड़ो को नुकसानदायक वस्तुओं, बिजली के तार और होर्डिंग से "मुक्ति" के लिए नई दिल्ली का आदेश

Delhi Govt Aam Aadmi Party
 (ANSA) न्यू डेल्ही, 25 फरवरी -  नई दिल्ली के अधिकारियों द्वारा राजधानी जो की पिछले साल सूक्ष्म धुल कणो के स्टार के कारण विश्व का सबसे प्रदूषित शहर बन गया था की हरी सम्पति को नुकसान से बचाने के लिए "पेड़ो को मुक्त करो" फ्री द ट्री ग्रीन अभियान की शुरुआत की। दिल्ली के पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने पेड़ो के तने और डालियों से "विज्ञापन बोर्ड, बिजली के तार और अन्य हानिकारक वस्तुओ" को हटाने के आदेश दिए। अक्सर गलियों और चौराहो पर पेड़ नाई, मोची, टैक्सी चालकों, मैकेनिकों आदि द्वारा अपने काम के लिए काम में लिए जाते है।

बहुत से पेड़ टेलेफोन या बिजली के तारो के जंजाल में घिरे होते है या पेड़ो पर ट्रेफिक सिग्नल सहित सड़क चिन्ह के बोर्ड लगे होते है। मंत्री ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा की पेड़ो के तने के इर्द गिर्द पर्याप्त स्थान हो और वे सीमेंट, डामर, या पगडण्डी से घिरे हुए ना हो।
 

रविवार, 17 जनवरी 2016

Thanks Bhawana Arora #KejriwalTheatrics #IncompetentDelhiPolice

धन्यवाद भावना अरोड़ा जी,
आपने आज जो भी किया उससे भी कई लोगों  पोल खुल गयी और एक सबसे बड़ी बात जो अरविन्द केजरीवाल सदा कहता है कि ये सुरक्षा नहीं दे रखी है बल्कि पुलिस के भेष में जासूस छोड़ रखे है को और भी स्पष्ट कर दिया।

अरविन्द केजरीवाल ने एक बार नहीं हजार बार कहा है मुझे नहीं चाहिए ये सुरक्षा वापिस ले लीजिये, लेकिन हकीकत यही है की सुरक्षा का तो केवल बहाना है मोदीजी ने अपने जासूस लगा रखे है ये पता करने के लिए की अरविन्द से कौन कौन मिलने आते है वो कहाँ कहाँ जाते है आदि आदि।

यदि सच में जो ये पुलिस मोदीजी ने अरविंदजी  आगे पीछे लगा रखी है वो उनकी सुरक्षा के लिए होती तो क्या आज भावना जी अपने जेब में स्याही लेकर अरविंदजी के ठीक सामने पहुँच पाती? क्या सच में  सुरक्षा होती तो ये पुलिस वाले जो सुरक्षा के नाम पर तैनात थे वो उस भावना जी अरविन्द जी तक पहुँचने से पहले रोककर ये नहीं जानना चाहते की वो महिला कौन है क्यों वो अरविंदजी के पास जाना चाहती है?

लेकिन सुरक्षा के नाम पर तैनात दिल्ली पुलिस के इन जासूसों ने ऐसा कुछ नहीं किया और भावना अरोड़ा को आसानी से अरविंदजी तक पहुँचने दिया तो स्तिथि स्वतः स्पष्ट हो जाती है की दिल्ली पुलिस अरविन्द के इर्द गिर्द उनकी सुरक्षा में नहीं अपितु उनकी जासूसी में तैनात है।

भावना जी आपकी स्याही ने कईयों के चेहरे से नकाब उतार दिए आज, पहला तो इससे दिल्ली पुलिस पूर्णतया बेनकाब हो गयी।
Bhawana Arora BJP Supporter working for BJP in Aam Aadmi Sena
भावना अरोड़ा, Bhawana Arora, BJP Supporter
मैं तो अब आपके बारे में सोच रहा हूँ भावनाजी, आपने स्याही तो किसी के कहने पर या किसी लालच में आकर फेंक दी लेकिन अपने खुद के लिए एक मुसीबत पाल ली आपने, जिसके भी कहने से आपने ये स्याही फेंकी है कल को वो आपको इसी घटना को लेकर कोई और अपराध करने का दबाव बना सकता है, वरना आपको कहेगा की अब ये नहीं करोगी तो मैं सबके सामने तुम्हारा सच बता दूंगा की कैसे और कितने रूपये लेकर आपने उस समय अरविंदजी पर स्याही फेंकी थी। कुछ तो सोचती ऐसा करने से पहले भावना जी, आप एक औरत है कल को एक माँ भी बनेगी क्या आप यही शिक्षा अपने बच्चे को भी देंगी की स्कूल में टीचर पर स्याही फेंक देना, नौकरी करो तो बॉस पर स्याही फेंक देना?

चलो आप अपने बच्चे को ये शिक्षा नहीं देंगी पर कोई ना कोई तो उसे ये बता ही देगा की उसकी माँ ने कैसे दिल्ली के मुख्यमंत्री पर स्याही फेंकी, और हो सकता है वो भी आपके नक्से कदम पर चले और एक दिन आपको अपने बच्चे के स्कूल की अनुशासन समिति से लेटर मिले की आपके बच्चे को टीचर पर स्याही फेंकने के कारण स्कूल से निष्काषित किया जाता है और उसके चरित्र वाले कॉलम में ये रिमार्क लगा दे तो आप क्या करोगी?
आप अपने बच्चे को किस मुहं से कहोगी की उसने ऐसा क्यों किया? उसे ऐसा नहीं करना चाहिए था? यदि आप उसे ऐसा कहेंगी तो वो आपको कहेगा की ये सब तो उसने आपसे ही सीखा है!!!

भावना जी कुछ लोगों के बहकावे में आकर क्या आपने सच में एक बहुत बड़ी गलती कर दी है?

चलो आपने जो भी किया कभी न कभी आप जब शांत मन से इस बारे में सोचेंगी तो स्वतः खुद को लानत देने लगेंगी और समझ जायेगी की आपने एक अच्छे नागरिक होने का परिचय तो नहीं दिया है। मैं तो आपको फ्हिर भी धन्यवाद ही करना चाहूँगा क्योंकि आपने एक तो सारे दिल्ली वासियों और भारत वर्ष के लोगो को ये दिखा दिया है की जो दिल्ली पुलिस अरविन्द जी के आगे पिछे लगा रखी है वो उनकी सुरक्षा के लिए कतई नहीं है अपितु वो उनकी जासूसी के लिए है, सुरक्षा के लिए होती तो आप  अरविंदजी तक पहुँच पाती और यदि पहुँच पाती तो उससे पहले आपकी तलाशी होती जिसमे आपके पास स्याही मिलते ही आपको सवाल किये जाते और आपको अरविंदजी के पास जाने से पहले ही गिरफ्तार कर लिया जाता।

खैर आपने एक और बात साबित करदी आज की अरविंदजी अब भी आम आदमी ही है और आम जनता उन तक अासानी से पहुँच सकती है जो की भारत के किसी भी मुख्यमंत्री के पास नहीं पहुँच सकती, अरविंदजी के पास आम आदमी तब भी पहुँच पाता था जब वे मुख्यमंत्री नहीं थे और आज भी पहुँच पाता है जब वो मुख्यमंत्री है, ऐसा मुख्यमंत्री भारत को पहली बार मिला है जिस तक हर कोई  पहुँच सकता है, मिल  सकता है, जिस मुख्यमंत्री के पास पहुँचने से पहले आपको कोई रोकता या टोकटा नहीं है, कितना आम और साधारण है ना अरविंदजी आज भी जब वो एक राज्य के मुख्यमंत्री है॥

#KejriwalTheatrics #IncompetentDelhiPolice  #DelhiPolice, #Delhi, #Police, Police, Delhi police, BS Bassi, Arvind Kejriwal, Ink, Bhawana Arora, Who is Bhawana Arora

दिल्ली सरकार की प्रदूषण के खिलाफ जंग #OddEvenPolicy

सबकी पोल खोलता दिल्ली सरकार की प्रदूषण के खिलाफ जंग Odd ईवन फार्मूला 

अब आप कहेंगे इसमें पोल खोलने वाली कौनसी बात है भाई? दिल्ली सरकार ने प्रदूषण कम करने के लिए एक फार्मूला Odd Even अपनाया जिसके तहत सम दिवस को सम नंबर की गाड़ियाँ और विषम दिवस पर विषम नम्बर की गाड़ियाँ चलेगी, बस इतना ही तो है इसमें किसकी क्या पोल खुल गयी?

अभी आप जैसे जैसे ये पढ़ते जायेंगे आपको समझ आएगी कैसे और किन किन लोगो की पोल दिल्ली सरकार के इस एक निर्णय ने खोल दी है। 

चलो इससे पहले की मैं दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार के odd even फोर्मुले का जिक्र करूँ मैं आपको भूतकाल की और लेकर जाना चाहता हूँ, जब केंद्र की मोदी सरकार ने स्वच्छता अभियान की शुरुआत की, क्या आपमें से कोई भी बता सकता है किसी ने उस स्वच्छता अभियान की खिलाफत की? नेता, पार्टी, सामाजिक संगठन, अभिनेता, टीवी चेनल, न्यूज़ एंकर कोई भी ऐसा होगा जिसने इसकी विरोध में कुछ कहा? मैं अभियान के घोषणा और शुरुआत की बात कर रहा हूँ, आप भ्रमित न हो जाए? क्यों इसके विरोध में भी बाते हुयी थी लेकिन वो बाद में जब मोदी सरकार के मंत्री केवल एक फोटोशूट के लिए हाथ में झाड़ू लेकर खड़े जाते है और सफाई का नाटक करने के लिए पहले कुछ कार्यकर्त्ता पेड़ो पत्ते वहाँ पर बिखेर देते है और बाद में भाजपा मंत्री हाथ में झाड़ू लेकर फोटो शेसन करके चले जाते है। 

मुझे तो कही भी ऐसा याद नहीं आ रहा जहाँ पर किसी भी टीवी चैनल, एंकर, संवाददाता किसी ने भी इसका विरोध किया हो या इसकी खिल्ली उड़ाई हो। 

चलो अब आते है आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार द्वारा प्रदूषण के खिलाफ जंग में सम विषम नियम की घोषणा, जैसे ही दिल्ली सरकार ने इसकी घोषणा की कुछ टीवी चैनल, एंकर और भाजपा व कांग्रेस के तमाम नेता व प्रवक्ताओ ने इसकी जबरदस्त खिलाफत की, चेनलो ने अपने आप से केवल इस अभियान की घोषणा भर मात्र पर प्रश्नचिन्ह लगाकर कुछ इस तरह की कोशिश की जैसे वो इस स्कीम के शुरू होने से पहले ही दिल्ली में ऐसा माहोल बनाने की कोशिश कर रहे हो की दिल्ली की जनता इसके खिलाफ होकर सड़को पर उत्तर आये और इस स्कीम को लागु न होने दिया जाए। 

आखिर क्या चाहते है ये टीवी चैनल व भाजपा कांग्रेस के नेता? दिल्ली की हवा जहरीली हो चुकी है, डॉ त्रेहान ने तो दिखाया है कैसे दिल्ली के लोगो के फेफड़े काले है जबकि अन्य राज्य के लोगो के फेफड़े काले नहीं है, उस कालेपन का कारण दिल्ली की हवा में घुला हुआ जहर है जिसे दिल्ली की जनता श्वांश के दवारा अंदर लेने को मजबूर है, ऐसी स्तिथि में यदि किसी सरकार इसे प्राथमिकता पर लेते हुए कुछ कठोर कदम उठाये है तो बजाय इसके की इस मुहीम का समर्थन किया जाए और इसे सफल बनाने में जितना योगदान दिया जा सके उतना योगदान दे के विपरीत सब के सब लग गए की कैसे भी करके इस  योजना को फेल किया जाए? भारतीय जनता पार्टी की सोशल मिडिया टीम ने बिलकुल इसके विरोध में सोशल मिडिया पर #OddEven_का_रायता नाम से हेश टैग भी लॉन्च किया। 

यदि किसी ने इसका विरोध नहीं किया तो वो थी दिल्ली की जनता, हाँ बिलकुल दिल्ली की जनता ने इस मुहीम का खुले दिल से स्वागत किया और दिल्ली की आबो हवा को साफ़ करने के लिए इस कठोर कदम का स्वागत ही नहीं किया अपितु अपनी तरफ से पूरा सहयोग किया, मानो  जनता ने इसे सरकारी आदेश ना मानते हुए  एक आंदोलन, एक मुहीम केरूप में स्वतः ही अपना लिया हो। 

जब जनता का साथ हो तो और क्या चाहिए, और वैसे भी ये दिल्ली की जनता के  लिए किया जा रहा था तो जो भाजपा, कांग्रेस के नेता और कुछ मीडिया वाले इसके खिलाफ थे उनकी क्या परवाह करना आखिर दिल वालो की दिल्ली का समर्थन जो मिल चुका था। 

हाँ यदि किसी चैनल ने इसका समर्थन किया तो मेरी नजर में वो चैनल है NDTV इंडिया हिंदी चैनल जिसने इस मुहीम का खुला समर्थन किया और अपनी तरह से भी एक मुहीम #ICantBreath शुरू की जिसमे वो बार बार दिल्ली की जनता से अपील करते रहे ओड ईवन का पालन करने की। 

प्राइम टाइम शो में रविश कुमार ने तो इस बार खुली बहस भी करवाई और कई रिपोर्ट पेश कर इसका समर्थन करते हुए यहां तक कहा की 1 जनवरी का इन्तजार क्या करना इसे तुरंत लागू करना  चाहिए दिल्ली की हवा पूरी तरह जहरीली हो चुकी  थी और इसे रोकना अत्यधिक जरूरी थी, ये भले किसी को बाहरी तौर पर आसानी से दिखाई ना दे पर इसे आप एक महामारी से भयंकर मान सकते हो, दिसंबर माह में दिल्ली में प्रदूषण का स्तर हर दिन खतरे से ऊपर था जिसे रोकना बेहद जरुरी था, अब इन सब बातो का तमाम समाचार चैनल वालो, भाजपा, कांग्रेस सबको पता था लेकिन फिर भी दल्ली सरकार के इस कदम का साथ ना देकर इसकी खिलाफत करना? 
क्या सिद्ध करता है? की अपनी राजनितिक विरोधी पार्टी को निचा दिखाने के लिए वो किसी भी हद्द तक गिर सकते है? बहुत अफ़सोस होता है इन पार्टियों के नेताओ पर जो इस तरह की ओछी हरकत से भी बाज नहीं आये, ये तो लाख लाख शुक्र है दिल्ली की जनता का हो इनके किसी बहकावे ने नहीं आई और खुले दिल से इस मुहीम का स्वागत ही नही किया अपितू पूरी दुनिया के सामने एक उदाहरण पेश किया की कैसे दिल्ली की जनता सरकार के इस फैसले के साथ खड़ी होकर इसे सफल करवाती है। 

आया समझ में कैसे और किनकी पोल खोली इस मुहीम ने? 

ये मिडिया वाले कुछ चैनल, और देश के  प्रमुख पार्टियाँ जिन्होंने अब तक इस देश पर राज किया वो तो बिलकुल से ही बेनकाब हो गयी, चलो इसी बहाने लोगो को इन पार्टियों और मीडिया हॉउस की सच्चाई और मानसिकता तो पता लगी। 

जब दिल्ली में ओड ईवन चल रहा था तब NDTV ने इसकी सच्चाई जानने के लिए एक एम्बुलेंस के द्वारा परीक्षण किया तो पाया की एक निश्चित दुरी जिसे पूरा करने में इस मुहीम के शुरू होने  35  मिनट लगती थी, ओड इवन के दौरान वहीं दूरी मात्र 18 मिनट में पूरी की। तो आप अंदाजा लगा  सकते है कैसे ये स्कीम  के हित में थी। 
धन्यवाद दिल्ली ये सब केवल आपके सहयोग से संभव हो पाया। 

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बुधवार, 13 जनवरी 2016

#OddEvenFormula - सम विषम नियम विदेशी मिडिया कवरेज

#सम_विषम_फार्मूला #OddEvenPolicy
अरविन्द केजरीवाल के नेतृत्व ने बनी आम आदमी पार्टी की  दिल्ली सरकार ने दिल्ली वासियों के काले फेफड़ो की कालिख को मिटाने का ऐतिहासिक और बहुत साहसिक कदम उठाया, जिसे दिल्ली की जनता ने ही नहीं देश और विदेशो में भी सराहा गया।

एक तरफ दुनिया भर के तमाम मिडिया में इसे कवरेज मिला तो दूसरी तरफ दिल्ली की जनता ने इसे दिल सा प्यार किया और अपनाया, आखिर दिल्ली की जनता की ही भलाई के  लिए था तो अपनाना तो स्वाभाविक था।
दिल्ली सरकार द्वारा हाई कोर्ट  में पेश की गयी रिपोर्ट के मुताबिक़ दिल्ली में प्रदूषण काफी हद तक कम हुआ है।

इटली की सबसे प्रमुख समाचार एजेंसी ANSA ने भी इसे कुछ इस तरह अपनी वेबसाइट पर लिखा है।

Link of original news

हिंदी अनुवाद :-

दिल्ली में अल्टेरनेटिव नंबर प्लेट, धुंध(smog) में गिरावट 

सरकार का कहना १० दिन बाद ५०% तक गिरावट 


नई दिल्ली सरकार का कहना है की पहली जनवरी से लागू किये गए अल्टरनेटिव नंबर प्लेट फॉर्मूले की वजह से यातायात ट्राफिक में भारी गिरावट आई और इसकी वजह से दिल्ली में वातावरण प्रदूषण ५०% तक कम हुआ है।
विशेष रूप से PM 10 और PM ,5 बहुत तेजी से गिरा है।

(और यहां पर भारतीय मीडिया की पोल भी खोल दी ये लाइन मेरा कमेंट है ANSA की न्यूज़ का अंश नहीं है )

हालांकि भारतीय मिडिया का कहना है की हवाओं की वजह से महानगर पर छाया धुआँ (कोहरा, स्मोग) हट गया। अल्टेरनेटिव नंबर प्लेट 15 जनवरी तक जारी रहेगी।