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| Dr. Kumar Vishwas in live Concert |
पूरी दुनिया अपना घर है ये ही बचपन से सुना है॥
हम कि जो सरहद से दुरी पर हैं लेकिन लाम पर हैं।
हम की जो होली दिवाली ईद पर भी काम पर है॥
हमने पतझर भर लिया है खुद ही अपने सावनो में।
तब कही चुन चुन किरण भेजी है घर के आँगनों में॥
रौशनी के इस बड़े मेले में हम खोये नहीं है।
आंसुओ का एक समुन्दर हैं मगर रोए नहीं हैं॥
पापियो का कल मिटाकर खुद ही खुद को आज देगा।
हम इसी आशा में जीते हैं वतन आवाज देगा॥
क्रांति की ज्वाला यहाँ भी खुद में सुलगाएँ हैं हम।
हम हैं देसी हम हैं देसी हम हैं देसी हाँ मगर हर देश में छाए हैं हम॥
नई लाइने
डॉ कुमार विश्वास

Bohut acha poem hein
जवाब देंहटाएंI love this poem
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