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रविवार, 16 अगस्त 2020

स्वतंत्रता दिवस और मैं - उन दिनों SMS के भी पैसे लगते थे

तब मेसेज भेजना आज की तरह फ्री नहीं था, ना ही सबके पास स्मार्टफोन और इंटरनेट होता था।  

उन दिनों SMS के भी पैसे लगते थे, उसमे भी अक्षर ज्यादा हो जाते तो 1 की जगह कई SMS गिने जाते है।  मेरा SMS इतना बड़ा बन ही जाता था की एक में ही दो के पैसे लगते थे, फिर भी हर स्वतंत्रता दिवस पहले से तैयारी करके रखता था और मेरे मोबाइल में जितने नम्बर सेव होते थे सभी को देशभक्ति से भरा शहीदों के गुणगान वाला और तब की सरकार की कमी का कुछ हिस्सा मेरे मेसेज में शामिल होता था जिसे भेजते समय मेरे मन में जो उमंग उत्साह होता था वो शब्दों में बयां कर पाना मुश्किल है।  

 जिसे भी मेरा SMS मिलता वो उसकी प्रशंसा भी करता, मेरे विचारो की तारीफ़ करता या यों  कहे की कई दोस्त तो मेरे SMS का इंतज़ार करते थे की इस बार क्या लिखकर भेजेगा।  

आज भी स्वतंत्रता दिवस था, मेसेज भी फ्री है और लिखकर भेजना भी बहुत आसान है लेकिन मन में वो उत्साह नहीं  था, कुछेक दोस्तों के मेसेज के जवाब के अतिरिक्त किसी को चलाकर मेसेज नहीं भेजा।  

पिछले कुछ साल में बहुत कुछ बदल गया, पहले देशभक्ति का अर्थ वतन से प्यार ही होता था, सत्ता से हर रोज सवाल करते थे, महंगाई पर सरकार के खिलाफ बोलते थे पुतले जलाते थे, यदि कही कोई अवव्यस्था होती थी तो प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते थे ये सब तब देशभक्ति की  श्रेणी में ही आता था। 

अब देशभक्ति के मायने बदल गए, सरकार से सवाल करना देशद्रोह कहलाता  है,सरकार के किसी निर्णय का विरोध करना देश के खिलाफ बोलना होता है, सीमा पर मेरे ही भाई बहन शहीद हो और उनके परिवार को न्याय  दिलाने के लिए बोलने पर उसे शहीदों/सैनिको का अपमान समझा जाने लगा है।  

अब देशभक्ति का अर्थ है दूसरे देश को गालियां निकालों, यदि मैं केवल अपने देश ही प्यार करू तो उसे देशभक्ति में शामिल नहीं किया जाता, जब तक की मैं बार बार अपने कथन से पलटने वाली सरकार के अनुसार दूसरे देश को गाली ना निकालूँ, अपने  देश के नागरिकों में से कुछ एक को गद्दार न कह दूँ, या उन्हें पाकिस्तान चले जाओ कहकर धमका  नहीं दूँ, या फिर ये साबित नहीं कर दूँ की वो भारत में जन्म लेकर भी पाकिस्तानी है तब तक मेरी देशभक्ति पर प्रश्नचिन्ह लगा रहता है।  

तो आज मेरा मन विचलित सा था, सवालों से उलझा हुआ था, किसे स्वतंत्रता दिवस की बधाई दूँ, उन्हें जिन्होंने आजादी  गिरवी रखकर गुलाम रहना स्वीकार कर लिया। 

"गुलाम" हाँ, गुलाम ही तो है यदि आप बढ़ती महंगाई पर 5-6  पहले तक बोलते थे और आज नहीं बोल पा रहे तो क्यों न इसे गुलामी कहा जाए।  

जब आपके बच्चे को अच्छी शिक्षा नहीं मिल रही हो, या फिर शिक्षा महंगी हो और आप केवल इसीलिए चुप रहते है की अब सरकार से इस पर सवाल करने का मतलब देश के खिलाफ बोलना है तो फिर ये गुलामी ही तो है।  

और सबसे बड़ी बात आजकल जो एक नई प्रजाति पैदा हुई है जो हर किसी को पकड़कर बोलती है बोल "वन्दे मातरम" यदि कोई तुम्हे पकड़कर कहे की ये बोल और नहीं  बोलो आपके साथ बदतमीजी से लेकर हाथापाई और कई बार हत्या तक की नौबत आ जाए तो कैसे कह सकते हो की तुम आजाद हो, ये तो गुलामी ही हुई ना।  

बस इन्ही सवालों से पूरे दिन जूझता रहा और इस बार का स्वतंत्रता दिवस बीत गया।  

इस बार मैं वो सन्देश नहीं भेज पाया जो हर बार भेजता था। 

उम्मीद है अभी भी मैं देशभक्त ही कहलाऊंगा। 

जय हिन्द 

जय भारत 

वन्दे मातरम


सोमवार, 15 अगस्त 2016

आजादी अभी बाकी है

आजादी के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाये

केवल अंग्रेज राज खत्म हुआ वो एक तरह की आजादी थी पर अभी भी हम हजारों तरह की गुलामियों में जी रहे है, जिनसे भी आजाद होना बाकि है।

उदाहरण के तौर पर हम सभी सोशल मिडिया यूजर यदि आज मानसिक तौर पर आजाद हो पाए तो बहुत बड़ी आजादी की जीत होगी।


आज ही के दिन तय करले की बिना किसी मेसेज की सत्यता का पता लगाए मैं उसे आगे फॉरवर्ड नहीं करूँगा।

ये जो हम जोश और भावुकता में बिना तथ्यों को जाने मेसेज एक ग्रुप से दूसरे में फॉरवर्ड करते है ये हमारी मानसिक गुलामी है आइये कम से कम इससे तो आजाद हो आज के दिन, ना किसी से लड़ना है, ना धरना प्रदर्शन करना, ना पुलिस की लाठियाँ खानी केवल अपने सोये हुए विवेक को जगाना है।

जय हिन्द। जय भारत। वन्दे मातरम
राम किरोड़ीवाल

शुक्रवार, 29 जनवरी 2016

तो क्या अब मोदीजी देश द्रोही हो गए?

चौंक गए पोस्ट का टाईटल देखकर?

बिलकुल मैं यही सवाल आपसे करना चाहता हूँ, क्या अब मोदीजी देश द्रोही हो गए? खैर मेरा ये सवाल एक ख़ास वर्ग के लिए है जो अत्यधिक भावुक वर्ग है, अपने आप को राष्ट्रवादी कहता है और राष्ट्रवाद के नाम पर उन्हें कोई कुछ भी कह दे वो बिना उस मामले को जाने, तुरंत भावावेश में आ जाते है, सोशल मिडिया पर गालियों की बौछार के साथ अपने देशभक्त होने का परिचय देने लगते है।
सामने वाले को पाकिस्तानी, देश्द्रोशी और बहुत ही अभद्र भाषा का प्रयोग केवल उस व्यक्ति ही नहीं बल्कि उसके पूरे खानदान को लेकर किया जाता है। इस पर भी यदि जिसे ये लोग कटघरे में खड़ा कर देते है उसका धर्म उनसे भिन्न हो तब तो मानो सामने वाले पर कहर टूट पड़ता है।
बस इस वर्ग विशेष की इसी भावुकता का फायदा कुछ राजनैतिक दल उठाते है और वो भी आग में घी डालने के लिए  संबंधित मुद्दे पर अभद्र कॉमेंट कर देते है।
बस अब क्या चाहिए इस भावुक जमात को हो जाते है अपने नेताओ के पीछे और सामने वाले की इज्जत की धज्जियाँ उड़ा देते है।
उनके ऐसा करने से सम्बंधित व्यक्ति थोड़ा हताश तो हो जाता है पर बेनकाब ये भीड़ हो जाती है जो बिना किसी तथ्य को जाने अंध भक्ति में मगन होकर अपना आपा खो बैठते है। यदि ये आपा  केवल सोशल  में ही खोते है तो कम से कम उन्हें कोई शारीरिक हानि नहीं होती है पर सोचो यदि  ये ऐसा वास्तविक जीवन में करने लगे तो अपना जीवन बर्बाद ही कर बैठेंगे और आपकी बर्बादी के दम पर ये राजनैतिक दल सत्ता हासिल कर जाते है और चाहकर भी वहाँ  वापस नहीं लौट पाते जहाँ पर आप इस भावुकता में बह गए थे।

ऐसा ही एक वाक्या 26 जनवरी 2015 को हुआ था।
अचानक से सोशल मिडिया के जरिये एक तस्वीर देश विदेश में सबके मोबाइल/कंप्यूटर पर शेयर होने लगी जिसमे भारत के उप-राष्ट्रपति महोदय हामिद अंसारी जी के तिरंगे को सलामी ना देने की तस्वीर दिखाई गयी और इस तस्वीर के जरिये इस भावुक वर्ग के दिलों में जहर घोलने की भरपूर कोशिश की गई।
शर्म तो तब आती है जब इसमें मिडिया भी शामिल हो जाता है, सुदर्शन चैनल ने इस पर पूरा 1 घंटे का प्रोग्राम कर डाला जिसमे वो उप राष्ट्रपति महोदय की देशभक्ति पर प्रश्न चिन्ह लगाते है।
सोशल मिडिया पर मानो आंधी आ गयी हो, ये भावुक वर्ग अँधा होकर उस आँधी के साथ उड़ने लगा और उप राष्ट्रपति महोदय के देश भक्ति पर एक बड़ा सा प्रश्न चिन्ह लगा दिया।
ये कुछ ट्वीट है जिनमे उप राष्ट्रपति महोदय को लेकर भद्दी टिप्पणी  की गयी



Is Narendra Modi insulted Tri Color, Modi deshdrohi hai? why Modi not salute Tiranga?
Is Narendra Modi Desh Drohi as he not salute TriColor?
अब आते है 26 जनवरी 2016 पर, वही स्थान, वही मौका और वही लोग पर इस बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने तिरंगे को सलामी नहीं दी!!!
तो यदि ये राष्ट्रभक्ति का ढोंग रचने वाले चंद लोग उस समय उप राष्ट्रपति महोदय को देशद्रोही और अन्य गलत शब्दों से सम्बोधित कर सकते है तो आज वही मापदंड नरेन्द्र मोदी के लिए क्यों नहीं? उस हिसाब से तो इस बार नरेंद्र मोदी देशद्रोही हो गए, उन्हें भारत में रहने का कोई हक नहीं रहा, वो तो पाकिस्तान जाकर वहाँ चरण वंदना करके आते है तो शायद इस बार उनके इस पाकिस्तान प्रेम ने उन्हें तिरंगे को अपमानित करने को उकसाया हो? शायद उन्होंने नवाज शरीफ के घर जाकर केक खाकर आये उसका कर्ज तिरंगे को सलामी ना देकर अदा किया हो? ऐसे हजारो बेहूदे सवाल हम भी उन अंध भक्तो और फर्जी राष्ट्रवादियों की तरह खड़े कर  सकते है पर हम ऐसा नहीं करेंगे।
हम केवल उन अंध भक्तो और फर्जी राष्ट्रवादियों को आइना दिखाना चाहेंगे की इस तरह गलत अफवाह फैलाकर देश में नफ़रत  का जहर मत घोलिये, इस भावुक वर्ग की भावनाओ के साथ मत खिलवाड़ करे, वरना जिस दिन ये भावुक वर्ग अपने आपे से बाहर आ गया तुम्हारे तख़्त और ताज को कोई बचाने वाला नहीं मिलेगा।
साथ ही साथ इस भावुक वर्ग से भी मैं अनुरोध करूँगा की किसी भी बात पर इतनी आसानी से आवेश में ना आये, कम से कम थोड़ा बहुत प्रयत्न सच्चाई जानने का भी करे, जितने देश भक्त आप है उतना ही देश भक्त भारत की धरती पर रहने वाला हर वो शख्स है जो इस मातृ भूमि से अपना पालन पोषण करता है।
धन्यवाद
वन्दे मातरम


"Jihadi sympathiser", "anti-India", "traitor", these were some of the names that the vice president of India was hurled at on the country's 66th Republic Day. Many tweeted demanding that Ansari be impeached, the more moderate ones wanted him to resign, the more outraged ones advised him to join the ISIS.

Line in english from the article: http://www.dailyo.in/politics/why-should-hamid-ansari-prove-his-patriotism-republic-day-narendra-modi-aamir-khan-pk-muslims/story/1/1684.html