शुक्रवार, 21 अगस्त 2026

ज़िंदगी में जो थोड़ी मिठास थी वो भी हो गयी कड़वी चीनी की क़ीमतें आसमान पर

जब 40 रूपये किलो चीनी थी तो भाजपाई अपने चुनाव प्रचार में बोलते थे अगर आप चाहते हो की चीनी 13 रूपये किलो चाहिए तो कमल का बटन दबाकर भाजपा को जिताये। 

और जनता ने धड़ाधड़ कमल के बटन दबाये, इतने दबाये की लगभग भारत के हर राज्य में भाजपा सत्ता में है लेकिन चीनी? 

चीनी के भाव 13 तो नहीं हुए लेकिन 66 जरूर हो गए।  

मोदी के सत्ता में आने के बाद से अब तक चीनी के भाव आप निचे दिए ग्राफिक्स में देख सकते है, कम तो कभी नहीं हुए लेकिन बढ़ते ही गए और इतने बढे की चीनी भी अब आम आदमी के पहुंच से बाहर की बात हो गई है। 


स्मृति ईरानी ने चुनावी सभा के दौरान जनता से पूछा चीनी क्या भाव मिल रही है? 

४० की मिल रही है ना? 

कमल का बटन दबाओं चीनी १३ रुपए किलो मिलेगी 

मोदी जी ने कहा है की ६ तारीख़ को कमल का बटन दबाओ चीनी १३ रुपए किलो मिलेगी। 

अब वो चीनी कहाँ से कहाँ पहुँच गयी वो सबके सामने है। 

विडीयो स्मृति ईरानी चीनी 


किस तरह से जनता को बेवक़ूफ़ बनाया जाता है वोट लेने के लिए और वोट लेने के बाद उसी जनता को लूटने में कोई कसर नही छोड़ते। 

अभी एक और ख़बर पढ़ी 
भाजपा सरकार के केबिनेट मंत्री रणबीर गंगवा ने तो ये तक कह दिया की चीनी के बड़ते दामों में सरकार को कोई रोल नही है, चीनी का भाव बाज़ार तय करता है।  


अब कोई इन्हें पूछे फिर सरकार और सरकार के सभी मंत्री क्यों जनता के पैसे से ऐशो आराम करते है जब सरकार कुछ करती ही  नही है। 

एक और ख़बर पढ़ी,
सरकार ने चीनी के आयात को ड्यूटी फ़्री कर दिया है 


अब देखने वाली बात ये है की ये निर्णय लेकर आख़िर किसे फ़ायदा पहुँचाया गया है। 
कौन है जो चीनी बेचेगा, और कौन है जो विदेशी चीनी भारत में लाकर बेचेगा। 
असली फ़ायदा इन दोनो को पहुँचाना है चाहे फिर भारतियों की उसकी क़ीमत कुछ भी चुकानि पड़े। 

बुधवार, 19 अगस्त 2026

Raghav chadha Tweet

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