गुरुवार, 29 जनवरी 2015

Is Kiran Bedi a liar? तो क्या किरण बेदी झूठी है?

यही कहानी सुनते सुनते हम बड़े गए है "एक बहादुर पुलिस अधिकारी जिसने अपनी ड्यूटी निभाते हुए प्रधानमन्त्री की कार उठवा दी थी" और जब ये सुनते थे हम भी बहुत गर्व करते थे और दिल से यही निकलता था शाबास किरण बेदी तुम करोड़ो हिन्दुस्तानियों के  प्रेरणा हो। हमारे माँ बाप ने हमे यह कहानी सुनाई किरण बेदी की बहादुरी की मिसाल देते हुए और हम ये कहानी अपने बच्चो को सुनाते रहे उसी किरण बेदी की बहादुरी की मिसाल देते हुए पर ये क्या आज हमे पता लगा की ये सब झूठ था!!!
हमे पता लगा की किरण बेदी कैसे दुनिया से झूठ बोलती रही!!!
कैसे भारत की पहली महिला आईपीएस अधिकारी बनने वाली किरण बेदी अपनी शान में झूठ बोलकर लोगो को गुमराह करती रही?
आज मेरे ही बच्चो के सामने मैं झूठा हो गया, आज मेरे बच्चे मुझसे ये  सवाल करते है पापा आपने हमे झूठी कहानी क्यों सुनाई?
खैर मैंने तो इसलिए सुनाई क्योंकि ये झूठ खुद किरण बेदी ने फैलाया था और मैंने उस पर भरोषा कर लिया मुझे क्या पता था की किरण बेदी भरोषे करने लायक नहीं है, जो औरत इतना बड़ा झूठ बोल सकती है किसी और का काम का श्रेय भी खुद लेती है उस पर कोई कैसे भरोषा करे।
अब जैसे की वो भारतीय जनता पार्टी की सदस्य है (अभी दिल्ली बीजेपी की तरफ से विधानसभा चुनाव भी लड़ रही है और दिल्ली बीजेपी के मुख्यमंत्री पद की दावेदार भी) तो जरूर भाजपा के कार्यकर्ता ये सवाल करेंगे की नहीं उन्होंने ऐसा कभी नहीं कहा ये तो लोगो ने अफवाह फैला दी, तो दोस्तों यहाँ मैं कुछ ऐसे सबूत रखना चाहता हूँ जहाँ खुद बेदी ने कहा की उन्होंने कार उठायी थी, और अफ़सोस उन्हें जरा भी शर्म नहीं आई छोटे छोटे बच्चो के सामने झूठ बोलते हुए।
ये टाइम्स ऑफ़ इण्डिया के 27  अप्रेल 2010  के अखबार में छपी हुयी खबर है   
Times of India 27 April 2010
Cutting of News Paper Times of India
“I knew I will be transferred when I decided to tow Indira Gandhi’s car (for illegal parking). I gave a thought to it and decided to do what was right then,” Bedi said at a programme in Bhopal School of Social Sciences here She was replying to a student,who asked her about the daring incident to remove the car of the all-powerful Indira Gandhi. “I was transferred to Goa the next day, but that did not deter me from doing right things,” Bedi said.  B h o p a l : Going nostalgic, former IPS officer Kiran Bedi on Monday said she went on to remove former Prime Minister Indira Gandhi’s car for illegal parking despite being fully aware her action might earn her a transfer.


एक स्कूल के फंक्शन में खुद किरण बेदी ने ये बहुत बड़ा झूठ बच्चो के सामने कहा!
कुछ दिन पहले तक सोशल साईट ट्वीटर पर अपनी प्रोफाइल के बायो ने भी बड़ी शान से अपनी उपलब्धियों को गिनाती हुयी वो लिखती है 

Kiran Bedi (@thekiranbedi)
Former Cop, Magsaysay Awardee, UN Police Advisor, Asian Tennis Champion, Towed PM's car for Traffic violation, Voted Most Trusted Woman, Founded two NGOs, Author+

अब जब विवाद बढ़ा तो उन्होंने ये लाइन अपनी प्रोफाइल से डिलीट कर दी, लेकिन वेब की दुनिया भी निराली है बेदी की ट्वीटर प्रोफाइल की बैकअप फोटो इंटरनेट पर उपलब्ध है। 

इतना बड़ा झूठ बोलने वाली महिला को मोस्ट ट्रस्टेड वुमन भी चुना गया वाह क्या बात है !
धन्य है NDTV India के निर्भीक और ईमानदार पत्रकार रविश कुमार जिन्होंने इस गुत्थी को सुलझाया और सच हम सब तक पहुंचाया की वो कार किरण बेदी ने नहीं उठायी थी, इतना ही नहीं उन्होंने बहुत ही बहादुरी से इस पूरे घटनाक्रम और किरण बेदी के बड़े झूठ का पर्दाफ़ाश किया। 
वो कार बेदी ने नहीं बल्कि सब इंस्पेक्टर निर्मल सिंह ने उठायी थी और उस समय तत्कालीन प्रधानमन्त्री श्रीमती इंदिरा गांधी भारत में भी नहीं थी और कार भी उनकी निजी ना होकर प्रधानमन्त्री कार्यालय की कार थी अब कार्यालय की कार मतलब किसी की भी हो सकती है, बाबू अफसर कर्मचारी। और वो कार वहाँ पर मिस्त्री के यहाँ ठीक करवाने के लिए आई थी। 
चलो देर ही सही कम से कम धन्यवाद रविश जी का की आज उनकी बदौलत एक बहुत बड़ा झूठ जो दशको से चला आ रहा था खत्म हुआ और लोगो को सच का पता लगा। 

 Tag: Liar Bedi, Kiran Bedi, IPS officer, Indian lady IPS, PM's Car, BJP, BJP delhi CM, Ravish kumar, NDTV india, Big lier, Bhopal school function 

शुक्रवार, 23 जनवरी 2015

किरण बेदी में नहीं है कोई प्रशासनिक क्षमता

मेरी नजर में किरण बेदी में कोई प्रशासनिक क्षमता नहीं है,  हाँ उसमे जो क्षमता मुझे दिखाई दी वो है मौका परस्ती और महत्वाकांक्षी होना और अपनी महत्वाकांक्षा को पूरी करने के लिये वो किसी भी हद तक गिर सकती है ये हाल ही मैं उनके राजनीति में आने के निर्णय से साफ़ झलकता है। 
जिस आन्दोलन की वजह से उन्हें दुनिया में पहचान मिली वो इन सभी भ्रष्ट राजनैतिक दलों के भ्रष्टाचार के खिलाफ था और आज वो खुद इन्हीं भ्रष्ट दलों में से एक दल भारतीय जनता पार्टी की सदस्य है। 
आखिर कौनसे ऐसे कारण थे जिनकी वजह से उन्होंने अपने जमीर को भी गिरवी रख दिया? शायद पैसा? या फिर उनके द्वारा किया गया ऐसा कोई भ्रष्टाचार जो की बीजेपी के हाथ लग गया और जैसे की अब बीजेपी की सरकार है सम्भवतः बीजेपी ने उन्हें ऑफर रख दिया होगा कि या तो उनकी पार्टी  में शामिल हो या फिर उन्हें उस कथित भ्रष्टाचार के आरोप में जेल भेजा जाएगा। 
कुछ तो जरूर हुआ है, वो केवल सेवा करने के लिए तो बीजेपी में नहीं आई है ये काम तो बखूबी वो पार्टी से बाहर रहकर भी कर सकती थी। जो भाजपा अपने सभी पुराने बड़े नेताओ को किनारे करकर किरण बेदी को मुख्यमंत्री पद  सकती है क्या वो किरण बेदी कोई सुझाव बिना पार्टी में शामिल हुए देती तो बीजेपी उस पर गौर नहीं करती क्या? यदि नहीं करती तब तो सवाल बीजेपी पर भी खड़े होते है कि क्या इस देश के नागरिक से भी बड़ी उनके लिए पार्टी हो गयी?
जो कार्यकर्ता भाजपा में वर्षो से अपना खून पसीना बहा रहे थे उनपर एकदम  पानी फेर दिया और उन सब नेताओं और कार्यकर्ताओं को ताक पर रखते हुए किरण बेदी को लाकर सबके ऊपर बैठा दिया। 
और मजे की बात है की किसी ने इसका खुलकर विरोध भी नहीं किया क्योंकि सबको पता है उसके ऊपर मोदी और अमित शाह का हाथ है और इसका विरोध करना यानी खुद ही अपनी मौत को बुलावा देना। 
शुरुआत में मैंने बेदी के प्रशासनिक क्षमताओं पर सवाल खड़ा किया क्योंकि जो मैंने उन्हें जाना है वो शोशल मीडिया पर जाना है और सोशल  पर उनका व्यवहार उनकी अपरिपक्वता को दर्शाता है। यदि कोई बेदी से सवाल करले तो वो उन्हें ब्लॉक कर देती है जिससे आप उन्हें सवाल नहीं कर सकते, उनसे बात केवल वो ही कर सकते है जो उनकी प्रशंसा करते हो। 
तो क्या कल को वो अपने क्षेत्र में निकलेंगी और कोई उनसे कहेगा मैंने आपको वोट दिया मेरे घर पानी क्यों नहीं आता है तो वो उसे जेल में डाल देंगी क्योंकि यहाँ पर ब्लॉक करने वाला ऑप्शन तो है नहीं तो जरूर वो उन्हें जेल   डालेंगी,यानी जनता उन्हें कोई सवाल करेगी तो वो सब को जेल में ब्लॉक कर देंगी?
एक अच्छा प्रशानिक अधिकारी यह नहीं  करता,वो जनता  के सवाल सुनेगा और उनके सवाल का जवाब देने की कोशिश करेगा, उनकी समस्याओं  का निदान करेगा। 
सवालों से भागना आपकी कायरता को दर्शाता है नाकि आपकी क्षमताओं को। । 
वन्दे मातरम ॥ जय हिन्द ॥ 


Tag: Kiran Bedi, BJP, Modi, Amit Shah, CM, Delhi, Political party, Corruption, Anna Aandolan, Anna Hazare, AAP, Bedi, Bhartiya jantaa party, Delhi assembly election, 2015, BJP CM Candidate

मंगलवार, 13 जनवरी 2015

Asaram witness murdered - क्या आसाराम को गवाहों के अभाव में निर्दोष साबित करने की तैयारी चल रही है?

जैसे ही भाजपा सरकार में आती है एक के बाद एक आसाराम के खिलाफ सरकारी गवाह बने व्यक्तियों की हत्या हो रही क्या ये गवाहों के अभाव में आसाराम को निर्दोष साबित करने की एक कोशिश है?

Asaram Akhil Gupta witness
Akhil Gupta Witness Surat Rape case
रविवार 11 जनवरी 2015 को आसाराम प्रकरण में अहम सरकारी गवाह अखिल गुप्ता की मुजफ्फरनगर में गोली मारकर हत्या कर दी गई।

इससे पहले एक अन्य अहम सरकारी गवाह अमृत प्रजापति की गोली मारकर हत्या करदी गई
पढ़े मेरा लेख

आसाराम बलात्कार प्रकरण में अहम गवाह की हत्या  

अब दूसरे महत्वपूर्ण गवाह की हत्या, अभी तक अमृत प्रजापति के हत्यारों को सरकार और प्रशासन पकड़ ही नहीं पायी और अब दूसरे गवाह की भी हत्या करवा दी गयी है।

हमारी सरकार क्या सन्देश देना चाहती है जनता है? कि  सरकार किसी भी सरकारी गवाह की रक्षा करने में समर्थ नहीं है? यदि ऐसा ही होता रहा तो कौन सरकारी गवाह बनेगा, कौन अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की कोशिश करेगा?

हमारी वर्तनाम भाजपा सरकार क्या केवल यही सन्देश देना चाहती है की अब यहां पर केवल तानाशाही चलेगी।
हाँ मुझे पता है कि मैं मेरे इस लेख में सरकार पर अंगुली उठा रहा हूँ जबकि मुद्दा आसाराम है, मैं बीजेपी सरकार पर अंगुली इसलिए उठा रहा हूँ की यदि वाकई में सरकार इस मामले में निष्पक्ष है तो क्यों नही तुरंत सरकार ने इन दोनों हत्याओ पर एक सीबीआई जाँच के आदेश दिए और उन हत्यारों को पकड़ कर सजा दिलवाने की कोशिश की यदि सरकार ये कदम नहीं उठा रही है तो सरकार पर अंगुली उठाना स्वाभाविक है।

किसी ने आसाराम जैसे लोगो के सच को उजागर करने की कोशिश की लेकिन हमारा भ्रष्ट तंत्र और तानाशाह सरकार उस आवाज को दबाने को भरपूर कोशिश कर रही है चाहे बदले में किसी को जान ही क्यों ना लेनी पड़े।

लोगो को इस षड़यंत्र का पता नहीं लगे इसके लिए समाचार पत्रो के मुख्य पृष्ठ पर गवाह की हत्या की खबर को जगह तक नहीं मिल पायी इसी से यह साफ़ हो जाता है की कैसे तानाशाही चल रही है इस महान भारत देश में, अब यदि कल को आसाराम को सरकार निर्दोष साबित करके बरी कर देती है इसमें कोई आश्चर्य वाली बात  नहीं होगी।
जैसे बीजेपी ने सत्ता में आते ही अमित शाह को निर्दोष साबित कर दिया तो आसाराम को भी करने की कवायद तेज हो चुकी है।

जब सैया भये कोतवाल तो डर काहे का ॥

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गुरुवार, 9 अक्टूबर 2014

PM Modi on Cease fire violation - पाक की गोलीबारी पर पहली बार बोले मोदी

मेरे इस लेख से यदि किसी की भावना आहत होती है तो मैं उनसे हाथ जोड़ कर माफ़ी माँगता हूँ, पर आज जो कुछ भारत के वर्तमान प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है उससे देश और सीमा पर लड़ रहे जवानों की भावनाए जो आहत हुयी उसके आप गुनाहगार हो प्रधानमन्त्री मोदीजी ।

आपने कहा
बयानबाजी से जवानो का हौसला गिरता है? क्या मैं आपने जो कहा उस पर यकीन करके उसे सच मान लूँ ?
चलो मान लिया मैंने सच, तो कुछ महीने पहले तक जब बीजेपी विपक्ष में होती थी तो बीजेपी ने एक भी ऐसा मौका नहीं चुका जब सीमा पार से होने वाली घुसपैठ पर बयानबाजी ना की हो, हर बार जुलुस, प्रदर्शन और बयानबाजी आपका दैनिक कार्यक्रम होता था, जितने हमले सीमापार से नहीं होते थे उससे कही ज्यादा बीजेपी के नेता कांग्रेस सरकार पर करते थे, तो आपके वर्तमान कथनानुसार बीजेपी उस समय हमारे सैनिको को हौसला गिराने का काम करती थी? यदि ऐसा है तो बीजेपी सबसे बड़ी देशद्रोही हुयी, हालाँकि मैं ऐसा नहीं मानता हूँ की भारत का कोई भी राजनितिक दल देशद्रोही है पर आपने जो कुछ आज कहा है उसके अनुसार बीजेपी जब विपक्ष में थी और पाक की गोलीबारी पर बयानबाजी करती थी तो हमारे सैनिको का हौसला गिरता था? और बीजेपी ये जानबूझकर करती थी?

अपने कहा

आपके इस बयान ने तो हमारे सैनिको पर ही प्रश्नचिन्ह लगा दिया है मोदीजी, क्या आप या बीजेपी ने विपक्ष में रहकर कभी भी पाक की गोलीबारी पर ऐसा बयान दिया था की हमारे सैनिको ने पाकिस्तान को सही जवाब दिया? यदि आपने  या बीजेपी ने इससे पहले ऐसा कभी नहीं कहा तो आप ये कहना चाहते है इससे पहले हमारे सैनिक पाकिस्तान को कभी जवाब नहीं देते थे?

आपने कहा
तो चुनाव से पहले आपने और बीजेपी ने क्या किया था? आपकी हर चुनावी सभा में आपने क्या किया था? क्या आपने इसे राजनितिक लाभ के लिए मुद्दा नहीं बनाया था? इसके उल्ट आपको अधिकांश वोट ही इस वजह से  मिले थे की आपने इसे राजनितिक मुद्दा बनाया और उपचुनाव में बीजेपी की हार भी इसीलिए हुयी की आपने इसे केवल चुनावी मुद्दे तक ही सिमित रखा, जैसे बीजेपी सदा से करती है हर बार चुनाव के लिए एक मुद्दा बनाती है और चुनाव के बाद उसे भूल जाती है, जैसे राम मंदिर को आपने मुद्दा बनाया और चुनाव जीतने के बाद उसे भूल गए ।

आपके आज के व्यक्तव्व पर क्या कहूँ, आपको देशद्रोही आपके खुद ही की कथन ने साबित कर दिया हालाँकि  मैं ऐसा नहीं मानता हूँ पर फिर भी आपने जो कहा उसका क्या अर्थ है श्रीमानजी?

क्या आपको तनिक भी शर्म नहीं आती जो आप बोलते है उस पर?
सोचा था देश को एक मजबूत प्रधानमन्त्री मिला है पर आप तो पूर्व प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह से भी कमजोर और कायर सिद्द होते जा रहे है ।
जागो और अपनी आँखे खोलो मोदीजी, जिस जोश के साथ चुनावी सभा में पाकिस्तान पर वार करते थे वो अब कहाँ गायब हो गया?


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शुक्रवार, 19 सितंबर 2014

चीन की दादागिरी और मोदी की मेहमाननवाजी- Is this proove Modi is a weak PM

BJP leaders on Chinese incursion when not in Power
अभी पिछले ही साल की बात है जब भारतीय जनता पार्टी बीजेपी के समस्त बड़े बड़े पदाधिकारी एक साथ मिलकर देश के राष्ट्रपति महोदय मिलने जा रहे थे और सन्दर्भ था चीनी सेना हमारे देश की धरती पर आ गयी थी । उधर पार्टी के बड़े पदाधिकारी राष्ट्रपति महोदय से मिल रहे थे, इधर कार्यकर्ताओं की टीम सरकार  प्रति अपना गुस्सा सड़क पर जाहिर कर रही थी कि ये सरकार चीन के खिलाफ कुछ कर क्यों नहीं रही ।



सोशल मिडिया पर भी भाजपा के नेटवीर तत्कालीन प्रधानमन्त्री को बहुत कुछ भला बुरा कह रहे थे, यहाँ तक की कुछ लोग तो उन्हें नपुंसक तक बता बैठे । 



पर आज चारो तरफ शांति है, चीनी सैनिक फिर से हमारी सीमा में घुस चुके है, हजारो की संख्या में चीनी सैनिक और नागरिक भारत की सीमा में घुस चुके है और हमारे ही सैनिको को बंधक भी बनाये हुए है पर ना ही मिडिया को इस बात का दर्द है और ना ही बीजेपी समर्थक जो हर छोटी सी बात पर सड़को पर आ जाते थे उन्होंने कोई शिकायत है, आज चीन की ये घुसपैठ भी उन्हें अच्छी लगती है, इसके उल्ट यदि सोशल मिडिया पर कोई इस बार में बोले की चीनी सैनिक हमारी सीमा में है और सरकार कुछ नहीं कर रही तो बीजेपी के नेटवीर तुरंत गाली गलोच शुरू कर बन्दे को देशद्रोही करार दे देते है, पता नहीं चीनी सैनिको का विरोध करने पर एक आदमी देशद्रोही कैसे हो जाता है?

Narendra Modi, Indian PM with Xi jinping India visit
नजारा तो और भी घटिया तब लगता है जब हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन के राष्ट्रपति को दावत देते है, उनके लिए शाही इंतजाम करते है, उन्हें खड़े होकर खुद झूला झुलाते है । उनकी आवभगत इस तरह करते है जैसे वो ही हमारे देवता हो और ना जाने क्या देकर जाएंगे भारत को । जबकि वो भारत को देने कुछ नहीं आये थे उलटे भारत से लेने आये थे, जितना वो निवेश करेंगे उसका सारा मुनाफ़ा कहाँ जाएगा? 
चीन में जाएगा!! और बदले में भारत को क्या मिलेगा घटिया किस्म के उत्पाद?

उनकी बहुत जबरदस्त आवभगत की जाती है, अरे भाई किस उपलक्ष में ये मेहमाननवाजी? क्योंकि उनके सैनिक हमारी धरती पर तम्बू गाड़े बैठे है?

अब प्रधानमंत्रीजी कहते है वो हमारे देश में निवेश करेंगे!!!!



गरज है चीन को तो निवेश कर रहा है कोई उपकार नहीं कर रहा भारत पर, हमारे प्रधानमन्त्री को चाहिए था की चलो उन्हें बुला लिया थोड़ी मेहमाननवाजी भी करली पर अब तो उन्हें ये कहते है की यदि आप चाहते है की भारत और चीन के बीच व्यापारिक रिस्ता हो तो सबसे पहले अपने सैनिको को सीमा से वापिस बुलाओ, यदि वो विवादित क्षेत्र भी है तो बात करो जब तक विवाद नहीं सुलझता उस क्षेत्र में कोई नहीं जाएगा और किसी भी समझौते से पहले इस विवाद को निपटाना होगा, मोदीजी आपके पास सुनहरा मौका था, आप चाहते तो भारत के मजबूत होने का सबूत पूरी दुनिया को दे सकते थे और देशवासियों का सर गर्व से ऊंचा कर सकते थे पर आपने ऐसा नही किया । 

उलटे आपने दुनिया को बहुत गलत सन्देश दिया है की थोड़े से रुपयो के लिए हमने सीमा पर घुसपैठ को भी नजरअंदाज कर दिया है, वाह मोदीजी कहाँ तो आप चुनाव से पहले गाते थे " मैं देश नहीं झुकने दूंगा" और कहाँ आपके ये कार्य जो देश को झुकाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे । 

एक सशक्त प्रधानमंत्री के रूप में पेश आते, भारत को चीन की गरज नहीं है, चीन को भारत की गरज है आज अरबो खरबो रुपयो का उनका माल भारत में बिकता है यदि चीन ज्यादा हेंकड़ी करे तो चीन के सब माल पर प्रतिबंध लगा सकते थे और इस मामले को आसानी से सुलझा सकते थे पर आप तो इसके उल्ट कर रहे थे । 

इधर आप खातिरदारी में लगे  हुए थे और उधर चीनी सैनिक भारत माँ की अस्मिता के साथ खिलवाड़ कर रहे थे, हमारे देश के सैनिक  आपको और आपले लाडले चीनी राष्ट्रपति को सुरक्षा दे रहे थे और दूसरी और चीनी सैनिको सामने खड़े हुए थे, क्या आपको तनिक भी ये सोच नहीं आया की कैसे मैं उस इंसान की खातिरदारी कर रहा हूँ जो खुद तो आया ही है साथ में अपने सैनिको को भी लेकर आया है की चलो करलो कब्जा भारत पर, खैर कब्जा तो चीन ने भारत पर कर ही रखा है देश के हर कोने में चीनी सामन मिल जाएगा और आपने इसमें और सहयोग कर दिया चीन को न्योता देकर की आओ  और खूब बेचो अपना सामान हमारे देश में । 

कुछ भी हो आपके समर्थक शायद मुझे गालिया दे पर आज मुझे आप एक बेहद कमजोर प्रधानमन्त्री लगे, जब आप चुनाव प्रचार में हुंकार भरते थे "एक इंच भी नहीं दूंगा" तो लगता था एक मजबूत प्रधानमन्त्री देश को मिलेगा लेकिन आज आपने जो कुछ किया इससे तो आप एक बेहद कमजोर प्रधानमंत्री साबित हुए है माननीय मोदीजी । 

Some Links of Chinese incursion:








Narendra modi, xi jinping, India, China, चीनी घुसपैठ, भारतीय सैनिक, सीमा तनाव, भारत-चीन 

गुरुवार, 4 सितंबर 2014

Teacher's day or Prime minister's day?

Modi order students to listen him on Teacher's day
मोदीजी की शिक्षक दिवस पर क्लास 
ये कैसे देश के सेवक है जिन्होंने मासूम बच्चो को भी अपने निजी स्वार्थ के लिए काम में लेना शुरू कर दिया है । 

शिक्षक दिवस के उपलक्ष में भारत सरकार ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दे दिया है की शिक्षक दिवस के दिन भारत के प्रधानमन्त्री देश के बच्चो को सम्बोधित करेंगे और इसके लिए सभी स्कूलों को पर्याप्त सुविधा करेंगे ताकि बच्चे प्रधानमन्त्री का भाषण सुन सके । 

ये कैसी जिद करली प्रधानमन्त्री जी आपने? क्या आपको पता भी है शिक्षक दिवस का मतलब क्या है जो आप अपना भाषण लेकर बीच में घुस गए? शिक्षक दिवस के दिन बच्चे और शिक्षक के बीच मधुर वार्तालाप होता है, बच्चे अपने प्रिय शिक्षक को उपहार देते है आदि आदि । 

लेकिन  HRD मिनिस्टर ने ये क्या आदेश दे दिया, स्कूलों को व्यवस्था करनी पड़ेगी, आप जेनेरेटर लाइए, स्पीकर लाइए, टीवी, कंप्यूटर, आदि आदि और पूरी व्यवस्था करनी पड़ेगी और इसकी सारी जानकारी 2 सितम्बर से पहले सभी प्रधानाध्यापको को  जिला मुख्यालय पर सूचित करना पडेगा की सभी तैयारी करली गयी है, और भाषण के दिन सभी जिला शिक्षा अधिकारी गाड़ी से चक्कर लगाएंगे और देखेंगे ये सुनिश्चित करेंगे की जैसा आदेश दिया गया है वैसा ही हो रहा है या नहीं । 

यदि इसमें लापरवाही हुयी तो इसे गम्भीरता से लिया जाएगा । 

सरकारी स्कूल में इस सबके लिए को खर्चा आएगा वो VKS fund (विद्यालय कल्याण समिति) के फंड से लिया जाएगा और निजी स्कूल ये अपने स्तर पर करेंगे । 

अब सवाल ये है कितना खर्चा आएगा इस सब पर, कितने शिक्षक पढ़ाई छोड़कर इन सब व्यस्था में लगे रहेंगे, रिपोर्टिंग करना की सभी तैयारी हो गयी है और कार्यक्रम होने के बाद फिर रिपोर्टिंग फीडबैक के लिए फिर सभी शिक्षा अधिकारी गाड़ियों से चक्कर लगाएंगे आदि आदि क्या ये सब उचित है इतना खर्चा केवल इस लिए करना क्योंकि आज हमारे प्रधानमंत्री बच्चो को भाषण देना चाहते है । 

क्या इससे ज्यादा अच्छा ये नहीं होता की आप आदेश देते की इतना खर्चा उन स्कूल में शौचालय बनाने में किया जाए, या विधालय के ब्लेकबोर्ड की मरम्मत की जाए, बच्चो के लिए बैठने के लिए दरी या मेज खरीदते आदि आदि, क्या जरूरत आ गयी इतना सब खर्चा करने का आप टीवी पर भाषण देते सभी अपने आप अपने अपने घर पर देख लेते, बच्चे भी देखते अभिभावक भी देखते सारा देश आपका भाषण सुन लेता लेकिन इसमें इतना सब खर्चा करने की जरुरत क्या हो गयी?

क्यों नन्हे मुन्हे बच्चो का उपयोग आप अपने निजी स्वार्थ या राजनीति के लिए कर रहे है?

   

 

 

 

 

 

 



Key word: टीचर डे, शिक्षक दिवस, मोदी, स्मृति ईरानी, HRD, Modi, Teacher's day, India, Circular on teacher's day, Smriti Iraani, Minister 



शुक्रवार, 22 अगस्त 2014

Rape is Small for BJP - भाजपा के लिए अब रेप एक छोटी घटना हो गयी है

अभी कुछ ही महीने पहले की बात है  जब नजारा कुछ और था
हजारों की भीड़ में खड़े होकर महान भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री बड़े ही जोश से बोलते थे
"रेप जैसे जघन्य अपराध को हम कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे"
"महिला सुरक्षा हमारे लिए सबसे ऊपर है" आदि आदि

लेकिन ये क्या ?
अभी से इतना बदलाव इनकी कथनी और करनी में?
मोदी सरकार के वित्त मंत्री अब रेप जैसे जघन्य अपराध को बिजनेस के रूप में देखने लग गए है?
अब वित्त मंत्री अरुण जेटली के लिए महिलाओ की सुरक्षा से ज्यादा जरुरी विदेशी पर्यटक हो गए है?
और अफ़सोस उनके ऐसे बयान पर मोदीजी की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं? क्या अपनी सरकार में मुख्य प्रतिनिधि होने के कारण उनका नैतिक दायित्व नहीं बनता की अपने मंत्री के साथ जनता के सामने खड़े होकर माफ़ी मांगे और ऐसी गंदी सोच पर अपने मंत्री को एक जोरदार लताड़ लगाए?

शर्म भी नहीं आये अरुण जेटली को ऐसा बयान देते हुए? जिस निर्भया रेप घटना ने पूरी दुनिया और मानवता को हिलाकर रख दिया था उसी पर मोदी सरकार के वित्त मंत्री ने इतना घटिया बयान दिया!!! क्या यहीं इन लोगो की मानसिकता है? क्या यहीं है इन लोगो की सोच? तो फिर कैसे इस देश में महिलाये सुरक्षित महसूस करेगी?
ये है अरुण जेटली का बयान
Arun Jaitley BJP, Modi Sarkaar Rape is small thing
Arun Jaitley says "Rape is small thing"

Arun Jaitley BJP says Rape is small thing
Arun jaitley have no problem on rape but very serious for turism in India

मुझे अच्छी तरह याद है जब वसुंधरा राजे ने कुछ घायलो को अस्पताल पहुँचाया (जो की एक सच को छुपाने के लिए किया गया था पढ़े पूरी कहानी Here link Vasundhra Raje Motorcade ) तो मोदी ने ४-५ ट्वीट किये उनकी तरफदारी में, तो क्या आज उनका कर्तव्य नहीं बनता की अपने मंत्री को लताड़ भी लगाए और भी एक ऐसी मुद्दे पर जिस पर बीजेपी ने बड़े जोर शोर से चुनाव से पहले प्रचार किया था?

#ArunJaitley #BJP #Modi #RapeSmall4BJP #BigMinisterSmallRape, Narendra modi, PMO India, Vasundhra raje, Rape in India, BJP no seriuos on Rape


शुक्रवार, 27 जून 2014

Vasundhara raje motorcade hit motorcyclist 2 died - वसुंधरा राजे के काफिले से मोटर साइकिल सवार की टक्कर दो की हादसे में मौत

वसुंधरा राजे के काफिले से कल एक मोटर साइकिल सवार की टक्कर हो गयी और अफ़सोस मोटर साइकिल पर सवार दोनों व्यक्ति इस दुर्घटना में अपना जीवन खो चुके, टक्कर इतनी भयंकर थी की मोटर साइकिल सवार दोनों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया । 

दुर्घटना से भी ज्यादा बड़ी दुर्घटना तो ये हुयी की टक्कर राजस्थान के बीजेपी की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के काफिले के साथ हुयी और इसे मिडिया में तोड़ मरोड़ कर सच को छुपाते हुए बहुत ही अलग तरह से प्रस्तुत किया । 
वसुंधरा की जान लेने वाली ना बताकर बचाने वाली के रूप में पेश किया गया । 

इसका तो पता भी नहीं चलता वो तो दैनिक भास्कर ने ट्वीट कर दिया जिससे पता चला की कार वसुंधरा के काफिले से हुयी हो सकता है खुद वसुंधरा की कार से हुयी हो, जो भी इन दो लोगो की मौत की जिम्मेदार वसुंधरा राजे है ।  

अब दैनिक भास्कर ने ट्वीट तो कर दिया पर मुझे लगता है उन पर तुरंत दबाव, धमकी या लालच का डंडा चलाया गया होगा और आनन फानन में दैनिक भास्कर ने अपना वो ट्वीट डिलीट कर दिया, बस शक की सुई यही से घूमती है यदि वो ट्वीट भूल में हो गया था तो भास्कर को एक और ट्वीट में माफ़ी मांगनी चाहिए थी ये कहते हुए की पहले गलती में ट्वीट हो गया लेकिन वाकई में हादसा ये था । 

लेकिन इस मामले पर दैनिक भास्कर की चुप्पी यही दर्शाती है की मामले को दबाया गया है, अब राजस्थान में बीजेपी की सरकार है और केंद्र में भी बीजेपी की सरकार है तो कौन हिम्मत कर सकता है उनके खिलाफ लिखने की, परिणाम ये हुआ की एक बार फिर सच ने सत्ता और ताकत के सामने घुटने टेक दिए ।

ये केवल पहली बार नहीं हुआ है पहले भी ऐसे कई समाचार जो बीजेपी के काले कारनामो को उजागर करते हो डिलीट करवाये गये है और इसीलिए मैंने मौका रहते भास्कर के उस ट्वीट का स्क्रीनशॉट ले लिया था जिसमे उन्होंने इस बात की पुष्टि की थी की राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के काफिले से टक्कर में दो मोटर साइकिल सवारों की मौत । 

ये है वो ट्वीट जो दैनिक भास्कर ने किया था 
Tweet dainik bhaskar, vasundhra raje
#DainikBhaskar #Raje #VasundharaRaje #BJP #Rajsthaan #CM #Truth

अब इस मामले को दबाने के लिए तुरंत हमारे प्रधानमंत्रीजी नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट किया राजे की प्रशंशा में की उन्होंने एक्सीडेंट में घायलों के लिए अपना काफिला रोका और मानवता का उदाहरण पेश किया, वसुंधरा राजे ने भी अपने बचाव में तुरंत ट्वीट किया की एक्सीडेंट ETV की वैन से हुआ था । 

ये है वसुंधरा राजे के ट्वीट 
#वसुंधराराजे #दैनिकभास्कर #श्रीगंगानगर #एक्सीडेंट #राजस्थान 

अब यदि ये हादसा Etv की वैन से हुया तो क्यों दैनिक भास्कर ने दुबारा ट्वीट कर इस घटना में माफ़ी माँगते हुयी सत्य सामने रखा, क्यों Etv की तरफ से कोई ट्वीट नहीं है की दुर्भाग्यवश उनकी वैन से टक्कर हो गयी जिसने दो जिंदगियां लील ली? इसके उलट Etv ने वसुंधरा राजे की प्रशंसा में ट्वीट किये । 

ये है etv, राजस्थान के ट्वीट 

अब जिस तरह से वसुंधरा अपने मंत्री चिकित्सा मंत्री को आदेश देती है, इन सब से यही लगता है की कहीं ना कहीं मामले को दबाने की कोशिश की गयी है और गलत जानकारी लोगो के सामने रखी गयी है । 


राजस्थान में क्या पूरे देश में रोज एक्सीडेंट होते है पर कितने एक्सीडेंट ने वसुंधरा राजे चिकित्सा मंत्री को आदेश देती है? कितने दुर्घटना ने घायलो से मिलने जाती है? अब तो वो पूरे  राज्य ने घूम रही है कितनी बार अब तक वो किसी दुर्घटना ने घायल लोगो से मिलने गयी है ? इस मामले में ही क्यों नरेंद्र मोदी भी ट्वीट करते है, क्या और कोई मुख्यमंत्री कोई सराहनीय कार्य नहीं कर रहे? जिस तरीके से ये सब हुआ है इसीसे स्पष्ट होता है की मामला कुछ और था उसे दबाकर किसी और तरह से पेश किया गया है । 

मैंने दैनिक भास्कर को भी ट्वीट किया की वो इस मामले में अपना ट्वीट डिलीट कर चुप क्यों है, उसका भी कोई जवाब दैनिक भास्कर की तरफ से नहीं आया, चुप रहने से सत्य को छुपाया नहीं जा सकता । 


अब किस पर विशवास करे जब भारत का मीडिया भी सच को झूठ और झूठ को सच दिखाने लग जाए, इस बार तो सच और झूठ से ऊपर उठकर दो जिंदगियां थी, किस माँ-बाप ने अपना बेटा खोया है और गुनाहगार खुला घूम रहा है, उलटे गुनाहगार को देवता के रूप में पेश किया जा रहा है, कब तक मीडिया यों ही चुप रहेगा, ताकत और सत्त्ता के सामने घुटने टेकता रहेगा?

यदि दैनिक भास्कर इस मामले में कुछ स्पष्टीकरण देता तो शायद ये शक इतना गहरा नहीं होता , लेकिन दैनिक भास्कर की चुप्पी और मंत्रियों की इस मामले इतनी गहरी दिलचस्पी इसी बात को दर्शाती है की मामले को पूरी तरह से दबाया गया और असली गुनाहगार को बचाया गया है । 

#BJP #Rajsthaan, #VasundhraRaje, accident victims, emergency care, Vasundhara Raje, Narendra modi, Dainik Bhaskar, Midia not show truth, Sriganganagar

शुक्रवार, 20 जून 2014

मोदी का हिंदी के साथ खिलवाड़ - Modi playing with emotion of Indians and Hindi

मोदी का हिंदी के साथ खिलवाड़

राष्ट्रवाद, जातिवाद, धर्म की छवि बने बीजेपी और नरेंद्र मोदी बहुत से मुद्दो को लेकर सरकार में आये |

जब सत्ता संभाली तो इन सभी मुद्दो जिन पर वो चुनाव जीतकर आये है अभी तक एक भी काम नहीं किया, ऐसे लगता है जैसे बीजेपी और मोदी सरकार अपने हर वादे पर उलटे पाँव लौट रही है और अब उन्हीं के वोट बैंक में कुछ कमी आने लग गयी है तो लोगो को फिर से बेवकूफ कैसे बनाया जाए बिना अम्बानी अडानी को नुक्सान पहुंचाए तो एक अच्छा सी चाल उनके कुटिल दिमाग में आ ही गयी "हिंदी" हिंदी हिन्दुस्तान की माँ है और ये क्या बीजेपी और मोदी ने तो इसी माँ के साथ खिलवाड़ करना शुरू कर दिया?

बहुत अच्छा निर्णय है हिंदी को बढ़ावा देने का मैं इसका विरोध नहीं कर रहा है पर ये समझाने की कोशिश कर रहा हूँ की कैसे ये बीजेपी और मोदी की एक कुटिल चाल है लोगो को बेवकूफ बनाने के लिए |

मोदी कभी हिंदी से प्रेम नहीं करते और अब जो कर रहे है वो केवल और केवल दिखावे के लिए कर रहे है |

गुजरात विधानसभा

मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि यदि मोदी को हिंदी से प्यार होता तो बताओ उन्होंने गुजरात में हिंदी के लिए क्या किया? गुजरात विधानसभा की वेबसाइट केवल दो ही भाषाओ में उपलब्ध है गुजराती और अंग्रेजी यानी मोदी के लिए अंग्रेजी हिंदी से भी बड़ी हो गयी?
यदि उन्हें हिंदी की इतनी ही चिंता थी तो आज तक गुजरात में हिंदी के लिए कुछ क्यों नहीं किया?



Blog Narendra Modi
चलो ये तो सरकारी है, नरेंद्र मोदी ब्लॉग भी लिखते है उसमे क्यों वो केवल अंग्रेजी में लिखते है? कभी हिंदी में नहीं लिखा? तो क्या मोदी के लिए हिंदी माँ केवल खिलवाड़ करने के लिए है और अंग्रेजी से मोदी को प्यार है?
मोदी सोशल नेटवर्क पर भी है और सब जगह केवल अंग्रेजी काम में लेते है तो ये सब क्या साबित करता है? मोदी का हिंदी के लिए आदर या हिंदी के साथ खिलवाड़?


जो आदमी हिंदी को सम्मान देने की बात करता है वो खुद तो उसका हर रोज अपमान कर रहा है |

ये तो वही हो गया की आप दूसरों को कहे की रोज सुबह अपने माता पिता की चरण स्पर्श करे और खुद उठते ही माता पिता को दो चार गालिया निकालते हो |

अब कोई आपको ये कहते सुने की माता पिता के चरण स्पर्श करने चाहिए तो जरूर यही कहेगा की देखो कितना आदर्शवादी इंसान है पर आपकी करतूत को भी तो कोई जाने |


हिंदी को सम्मान के लिए आपके आदेश की जरुरत नहीं है प्रधानमंत्रीजी, उसे अपनाओ सबसे पहले अपने जीवन में अपनाओ और लोगो को दिखाओ की आपने अपनाया लोग स्वतः ही उसे अपना लेंगे |

तो ये हिंदी के नाम पर नाटक करना बंद करे और कृपया हिंदी माँ के साथ खिलवाड़ ना करे |

मेरा उद्देश्य किसी को आहात करना नहीं है और यदि मेरे इस लेख से किसी को चोट पहुंचती है तो क्षमा चाहता हूँ पर सच्चाई तो आपके सामने रख ही सकता हूँ |

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बुधवार, 11 जून 2014

आसाराम बलात्कार प्रकरण में अहम गवाह की हत्या

Aasaaram baapu 
आसाराम प्रकरण बहुत लम्बे समय से हमारे सामने है, कुछ भी नया नहीं है और जिस तरह से आसाराम के खिलाफ गवाही देने वालो को डराया धमकाया जा रहा है वो भी सबको ज्ञात है । 

पिछले महीनों में आसाराम के खिलाफ गवाही देने वालो पर बहुत बार हमले हुए, उन्हें डराया जा रहा है की किसी भी तरह से वो आसाराम के खिलाफ गवाही ना दे लेकिन इस बार जो कुछ हुआ वो एक सोचे समझे षडयंत्र का हिस्सा लग रहा है । 

और षडयंत्र है आसाराम को गवाहों के अभाव में बाइज्जत बरी करवाने का । 

इसी के तहत दिनाँक 10 जून  2014, मंगलवार को आसाराम के खिलाफ आवाज उठाने वाले एक अहम गवाह (अमृत प्रजापति) को जान से मार दिया गया । 

हालांकि अमृत प्रजापति बहुत वर्षो से आसाराम के काले कारनामो के खिलाफ आवाज उठाते आ रहे है लेकिन गत 23 मई को गुजरात के राजकोट में उन्हें गोली मर दी गई इसके बाद उनका अलग अलग अस्पताल में इलाज हुआ लेकिन सब व्यर्थ रहा अंततः मंगलवार 10 जून  को उनका देहावसान हो गया । 

हो सकता है इसमें कुछ भी ऐसा ना हो जो मैं सोच रहा हूँ लेकिन फिर भी सवाल तो पैदा हो ही जाते है । 

वर्षो से अमृत प्रजापति आसाराम के खिलाफ आवाज बुलंद किये हुए है । 

Amrit Prajaapti
आसाराम प्रकरण में अमृत प्रजापति एक अहम गवाह है । 
पिछले महीनो में कई गवाहों पर हमले किये गए । 
तो क्या प्रशाशन की जवाबदेही नहीं थी अमृत प्रजापति को सुरक्षा मुहैया करवाना?
चलो माना चूक हो गयी प्रसाशन से तो जब उन पर गोली लगी लेकिन क्या उसके बाद प्रसाशन की जिम्मेदारी नहीं थी उन्हें उचित चिकित्सा उपलब्ध करवाना?
और उससे भी बड़ा सवाल बनता है समय को लेकर । 
जब बीजेपी को पूर्ण बहुमत मिल गया और नरेंद्र मोदी को प्रधानमन्त्री पद के शपथ की घोषणा हो चुकी उसके बाद उन पर हमला होना । 
हमला गुजरात में होना और गुजरात पुलिस द्वारा अब तक भी हत्यारे को नहीं पकड़ना । 

बहुत से सवाल खड़े हो जाते है । 

अमृत प्रजापति को मारना इसीलिए जरुरी था की वो केवल बलात्कार प्रकरण ही नहीं बल्कि आश्रम में होने वाली हर काली करतूत के बारे में जानता था, वो हर एक राज से वाकिफ था और उसकी गवाही आसाराम उसके बेटे नारायण साईं और आश्रम सबकी पोल खोल सकती थी, यदि वो केवल बलात्कार की घटना का ही गवाह होता तो इतना अहम नहीं था क्योंकि यदि जिसने बलात्कार का आरोप लगाया है उसे ही चुप करवा दिया जाए तो अमृत प्रजापति की गवाही कोई मायना नहीं रखती लेकिन वो तो आश्रम में होने वाली हर काली करतूत का प्रत्यक्ष गवाह था । 

तो कहीं ना कहीं ये मेसेज देने की कोशिश की गयी की देखो आसाराम के खिलाफ गवाही देने पर ये हाल होगा, अब सारे काले कारनामो का अहम गवाह नहीं रहा और अन्य गवाह इसी डर से शायद कोर्ट ही ना आये और आसाराम को गवाहों के अभाव में बाइज्जत बरी कर दिया जाए । 

हो सकता है अब अन्य गवाहों को खरीद लिया जाए और वे अब कोर्ट में आसाराम के खिलाफ गवाही देने के बजाय ये गवाही दे दे की वो सब अब तक ये ऐसा कर रहे थे क्योंकि अमृत प्रजापति उनसे ये करवा रहा था, उसका आसाराम से झगड़ा हो गया था और वो आश्रम से अलग हो गया तब से वो आसाराम से बदला लेना चाहत था और इसके लिए प्रजापति ने इन सब गवाहों को आसाराम के खिलाफ गवाही देने पर मजबूर कर दिया । 

अगर ऐसा होता है तो हमारे कानून पर एक बहुत बड़ा प्रश्न चिन्ह लग सकता है । 

इस पूरे प्रकरण में यदि कोई गैर जिम्मेदार है तो वो है प्रसाशन, गुजरात में बीजेपी की सरकार है और अब तो देश में भी बीजेपी की सरकार है प्रसाशन की जिम्मेदारी थी अमृत प्रजापति और उनके ही जैसे अन्य सभी गवाहों को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया करवाना और जब प्रजापति को गोली लगी तो उनका उचित इलाज करवाना, और कम से कम प्रजापति को गोली लगने के बाद उनका बयान रेकॉर्ड करना जिससे आसाराम के खिलाफ उसकी गवाही कोर्ट में पेश की जा सकती । 

कहीं ना कहीं प्रसाशन की मिली भगत लगती है आसाराम को जेल से बाहर लाने में । 

खैर ये सब केवल मेरे मन में उठ रही शंकाए है हो सकता है इनमे अंश मात्र भी सच्चाई ना हो यदि ऐसा होता है तो मैं अपने लिखे हुए शब्दों के लिए पहले से ही माफ़ी मांगता हूँ, लेकिन फिर भी बार बार ये सवाल मन को झकझोरता है की बीजेपी के सत्ता में आते ही ऐसा क्यों हुआ की आसाराम के खिलाफ बने अहम गवाह को जान से मार दिया गया और जिस गुजरात की मोदीजी इतनी तारीफ़ करते है उस गुजरात पुलिस से अभी तक हत्यारों को पकड़ा नहीं गया हो?

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गुरुवार, 29 मई 2014

BJP invite Pakistan PM Navaaj Sarif - U turn BJP

एक बार फिर भारत ने पहल की और हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान प्रधानमन्त्री को भारत आने  न्यौता भेज ही दिया और बहादुरी पडोसी मुल्क के प्रधानमंत्री ने भी दिखाई कि वो हमारे न्योते पर भारत आ गए ।

लेकिन इस बार कुछ अलग हुआ, ना ही हमारे निमंत्रण पर और ना ही उनके भारत आने पर कहीं पर भी किसी भी प्रकार  का कोई विरोध प्रदर्शन  नहीं हुआ, ना ही किसी ने पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाए और ना ही किसी ने कोई धमकी दी, क्या हुआ? इस देश में खुद को हिंदूवादी समझने वाले जो चुनाव के कुछ दिन पहले तक  फाड़  फाड़ कर कह रहे थे कि पाकिस्तान से कोई बात नहीं होगी, एक के बदले दस सर लाएंगे वो अचानक  से कहाँ गायब गए?

सवाल तो बनता है? आखिर क्या बदल गया इस बार?

हाँ एक बात तो है सरकार बदल गयी, यानि जो लोग भारत पाक के रिश्तोके के खिलाफ हर बार विरोध करते थे, नारे लगाते थे, रास्ते बंद करते थे तत्कालीन सरकार को कायर नामर्द कमजोर बताते थे वो ही लोग अब उस कुर्सी पर बैठ गये है जहाँ बैठकर ये निमंत्रण भेजे जाते है, जो हर सम्भव प्रयास करते है दोनों देशों के बीच शांति बहाल हो।

इसका मतलब विरोध यही लोग करते थे जो आज न्योता भेज रहे है, अरे हाँ जिन्होंने ये निमंत्रण भेजा वो खुद ही तो वोट लेने के लिए बड़े जोर जोर से बोलते थे हम इस देश से कोई बात नहीं करेंगे, सर का बदला सर से लेंगे, एक के बदले दस सर लायेंगे आदि आदि ।

खैर मैं स्पष्ट करदूँ मैं इस निमंत्रण के खिलाफ नहीं हूँ, खिलाफ तो भाजपा के दोगलेपन के हूँ जो उन्होंने कुर्सी मिलते ही दिखाना शुरू कर दिया, बेचारे करोड़ो भारतीयों के साथ गद्दारी की, उन्हें कहा कुछ और ही था वोट लेने के लिए और अब कर कुछ और ही रहे है।

यानि जब जब भी भाजपा के अलावा किसी और सरकार ने पाक के साथ कभी बात करने की कोशिश की तो बीजेपी को सदा ही उससे परेशानी होती थी, नारे, हो हल्ला, प्रदर्शन शुरू हो जाते थे और बेचारी सरकार कुछ नहीं कर पाती थी, यानि भारत पाक मुद्दा ना होते हुए भी बीजेपी ने अपने निजी स्वार्थो के लिए इस मुद्दे को ज़िंदा रखा और जब जब किसी सरकार ने इसे हल करने की कोशिश की तो बीजेपी ने पुरजोर इसका विरोध किया, ताकि इस मुद्दे पर उन्हें वोट मिल सके और अब उन्हें वोट मिल चुके है कम से कम पाँच साल तो उन्हें कोई हिला नहीं सकता तो फिर अपने वादो से पलटने में  बीजेपी को कोई परेशानी नहीं।

जो भी लोगो को एक बार फिर अपने वोट के इस्तेमाल पर निराशा ही हाथ लगी ।

देश यो ही चलता रहेगा, हम यो ही चिल्लाते रहेंगे लेकिन करेंगे भाजपा-कांग्रेस की सरकार वही जो वर्षो से करते आये है ।

अब एक आशावादी की तरह यही शुभकामना देता हूँ हमारे प्रधानमंत्रीजी को की देश में शान्ति स्थापित हो इसी में सबका भला है, विरोध केवल बीजेपी करती थी जो की अब सरकार में है तो कोई विरोध नहीं कर रहा खुल कर फैसले ले और दोनों देशो के बीच मित्रता कायम हो ।

वन्दे मातरम

बुधवार, 21 मई 2014

Arvind Kejriwal arrested and sent to Tihad Jail - अरविन्द केजरीवाल को बीजेपी नेता के खिलाफ बोलने पर जेल

आज आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविन्द केजरीवाल को बीजेपी के पूर्व राष्ट्रिय अध्यक्ष नितिन गडकरी के खिलाफ मानहानि के केस में जेल भेजा गया |

चलो ये सब एक कानूनी प्रक्रिया है जिसके तहत नितिन गडकरी को लगा की अरविन्द केजरीवाल ने उनकी मानहानि की है तो स्वाभाविक है की वो अरविन्द के खिलाफ कोर्ट में केस करे, इसमें कही कोई गलत नहीं है |

आज जब अरविन्द कोर्ट में केस की सुनवाई पर गए तो कोर्ट ने उन्हें आदेश दिया की आप 10000 का बांड भरे और जमानत ले ले, अरविन्द ने मना कर दिया की मैं जमानत नहीं लूंगा तो कोर्ट ने उन्हें जेल भेज दिया | जो की सही है हमारी न्याय व्यवस्था ने अपना काम किया कानून के तहत |

अब साहब मीडिया और बीजेपी को परेशानी हो गयी की अरविन्द ने जमानत की अर्जी क्यों नहीं लगाईं? 

अरविन्द अपराधी है तो मिडिया और बीजेपी को तो इस पर गर्व होना चाहिए की आखिरकार हमने एक अपराधी को जेल भेजा है और उसे कड़ी से कड़ी सजा देनी चाहिए | भारतीय जनता पार्टी और भारत के प्रधानमन्त्री को तो एक राष्ट्र के नाम सन्देश देना चाहिए की देखिये हमारी सरकार में हम अपराधी को छोड़ेंगे नहीं, सरकार में आते ही भाजपा ने अपराधी को सजा देने का काम किया है |

लेकिन इसके उल्ट बीजेपी और मीडिया लगे हुए है अरविन्द ने बेल लेने से मना किया, सभी ऐसे केस के बेल ले लेते है पर अरविन्द ने बेल नहीं ली, अरविन्द राजनितिक स्टंट कर रहे है, क्या अरविन्द के पास केवल 10000 हजार रूपये भी नहीं है अपनी बेल नहीं लेने के लिए? 

बात यहां पर बेल या 10000 रूपये की नहीं है, बात ये है की यदि अरविन्द अपराधी है तो बहुत अच्छी बात है की भाजपा सरकार ओह सॉरी मोदी सरकार और हमारी न्याय व्यवस्था ने एक अपराधी को जेल भेज दिया, और मिडिया को हमारी न्याय व्यवस्था और मोदी
सरकार (भाजपा सरकार) का गुणगान करना चाहिए की देश में न्याय व्यवस्था कायम है और एक अपराधी को जेल भेज दिया गया और यदि अरविन्द अपराधी नहीं है तो मीडिया को ये दिखाना चाहिए की अरविन्द को जेल भेजना गलत है, बीजेपी ने सत्ता में आते ही एक ईमानदार आदमी को जेल भेज दिया |

मीडिया कैसे आम आदमी पार्टी को ख़त्म करने में लगा हुआ है इसका एक और नमूना आज देखने को मिला अब मिडिया किसके इसारे पर ये सब कर रहा है ये तो ऊपर वाला ही जाने वैसे जानते सब है पर यदि मैं नाम ले लूंगा तो मुझे भी कल जेल भेज देंगे
 
खैर अच्छे दिन आ गए लगते है 


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