शुक्रवार, 30 अप्रैल 2021

रोहित सरदाना की मौत भी चढ़ गई TRP की भेंट

आज अचानक से सोशल मिडिया पर एक पोस्ट देखने को मिली हिंदी समाचार जगत के दिग्गज पत्रकार रोहित सरदाना की कोविड की वजह से मृत्यु हो गई।  

एकदम से ये पोस्ट दिखी तो यकीन नहीं कर पाया, तुरंत आज तक का ट्विटर हेंडल खोला (वह प्रतिष्ठान जहाँ  रोहित सरदाना काम करते थे) वहां पर ऐसे कोई पोस्ट नहीं थी।  

तुरंत आजतक चैनल खोला वहां पर ऐसी कोई खबर नहीं दिखाई जा रही है।  

Rohit Sardana
फोटो क्रेडिट : रोहित सरदाना ट्विटर प्रोफ़ाइल

मैं पोस्ट करने से डर  रहा था की कही ये खबर अफवाह तो नहीं है किसी ने ऐसे ही उड़ा दी होगी, लेकिन खबर पर यकीन भी करना जरुरी था क्योंकि ये पोस्ट किसी और ने नहीं बल्कि Zee  News  के पत्रकार सुधीर चौधरी की थी तो ऐसा हो नहीं सकता इतना जिम्मेदार व्यक्ति अफवाह के आधार पर कोई पोस्ट करेगा।  

मन मानने को तैयार नहीं था, इधर सोशल मिडिया पर रोहित सरदाना को श्रदांजलि देने के मेसेज की बाढ़ सी आ गई, फिर आजतक चैनल को देखा, फिर से आजतक के ट्विटर हेंडल को चेक किया कही कोई जिक्र तक नहीं था, मानो उन्हें पता ही नहीं हो या उन्हें इसकी कोई परवाह ही नहीं हो।  

सोशल मिडिया पर आवाज भी उठने लग गई की ये कैसा चैनल ही जो अपने पत्रकार की मृत्यु की खबर से ज्यादा एग्जिट पोल दिखाने को महत्त्वपूर्ण मानता है, लोग आजतक को लानत भेजने लग गए, लगभग एक घंटे से भी ज्यादा समय बीत गया पर आजतक अपनी मस्ती में मस्त था। 

फिर अचानक से आजतक के ट्विटर हेंडल पर भी पोस्ट आई और आजतक पर एक वीडियो क्लिप भी चलाई गई जिसमे रोहित सरदाना को श्रदांजलि दी जा रही थी, बैकग्राउंड में सिसकियों वाला साउंड डाला गया, फिर आगे क्लिप में दिखाया गया एंकर जो ये खबर दे रहे थे वो रो रहे थे, बोलते बोलते उनका गाला भर रहा था।  नीचे आजतक का वो वीडियो है आप खुद भी देखिये।  

अब मैं इसके पीछे की कल्पना कर रहा हूँ की आजतक के स्टूडियों में क्या हुआ होगा उस समय (परिस्थितियो के आधार पर ये मेरी एक कल्पना मात्र है अगर इसका हकीकत के साथ मेल होता है तो ये महज एक संयोग होगा)

स्टूडियों में खबर आई होगी, रोहित सरदाना जी नहीं रहे 

जिसे करंट खबर चलानी होती है (आज तक सबसे तेज) उसने ये हेडलाइन टाइप करना शुरू कर दिया होगा इतने में डायरेक्टर साहब (मालिक) का आदेश आ गया होगा 

रूको, अभी खबर नहीं चलानी है

इसके बाद जिस तरह से ये क्लिप बनाई गई है तो ऐसा हुआ होगा की 

आदेश दिया गया, शानदार क्लिप तैयार करो, एंकर को बैठाया गया होगा, उसे रोने की एक्टिंग करते हुए ये समाचार बोलने को कहा गया होगा।  

लाइट, कैमरा, एक्शन 

और शुरुआत 

क्या पता कई बार रीटेक भी हुआ होगा, कट  कट  कट ओवरएक्टिंग ज्यादा हो गई, रोने में फिलिंग नहीं आई वगैरह वगैरह .... 

इनके सबके बाद ये सभी क्लिप दी गई वीडियो एडिटर को, और वीडियो एडिटर ने शानदार बैकग्राउंड  म्युजिक और सिसकिया डाली गई, कई बार डायरेक्टर साहब ने देखा होगा कुछ मोडिफिकेशन भी करवाया होगा, आखिर में शायद ऐसे कुछ  कहा होगा 

शाबाश, शानदार अब तैयार हुई है शानदार क्लिप 

अब चलाओ मस्त TRP  आएगी 

और फिर ये क्लिप चली होगी 

अगर सच में ऐसा ही स्टूडियों में हुआ होगा तो

जिस संस्थान ने अपने वरिष्ठ पत्रकार की मृत्यु की खबर को भी अपनी TRP  की भेंट चढ़ा दी उस संस्थान से क्या उम्मीद करेंगे?

बहुत दुखद मौत को भी TRP की भेंट चढ़ा देना। 

अगर ऐसा नहीं हुआ होगा तो मेरी समझ से बाहर है, ये खबर फलेश करने में आजतक को एक घंटे से भी ज्यादा का समय क्यों लगा।  

दुनिया मैं कुछ भी कही भी होता है उसकी तुरंत सबसे पहले एक टेक्स्ट लाइन फलेश  हो जाती उसके बाद उस पर विस्तार से जानकारी आती रहती है और प्रोग्राम होते रहते है लेकिन इतनी बड़ी खबर को कोई जगह तक नहीं दी गई।  

शायद आजतक को भी ये एहसास था की सभी लोग इस खबर की पुष्टि के लिए आजतक को बार बार देख रहे है तो क्यों ना इतना शानदार वीडियो बनाया जाए जिससे खूब TRP  बटोरी जा सके।  

ईश्वर रोहित सरदाना जी आत्मा  को अपने श्री चरणों में स्थान दे और उनके परिवार को ये बड़ा दुःख सहन करने की शक्ति दे।  

और TRP के भूखे भेड़ियों को थोड़ी सद्बुध्दि दे।




शुक्रवार, 18 दिसंबर 2020

गौमांस की कमी नहीं आने देंगे - मोदी के मुख्यमंत्री प्रमोद सांवत का बयान

एक तरफ भाजपा गौमांस के नाम पर लोगो के घर में घुसकर गुंडागर्दी/हत्या तक कर आती है वही दूसरी तरफ ये भी सुनिश्चित करती है लोगो को खाने के लिए गौमांस की कमी ना हो।  

जी हाँ, आप ये पढ़कर सोच रहे होंगे ये कैसी बकवास है बीजेपी तो हिन्दू धर्म के रक्षा के लिए ही है, भाजपा तो गाय को देवता समझकर पूजा करती है उलटे जो गाय का मांस खाते है उन पर एक्शन लेती है तो ऐसे कैसे हो सकता है।  

लेकिन दुर्भाग्य से ये सच है, यही इन फर्जी हिन्दुवादियों का असली चेहरा है, यकीं नहीं आता तो निचे Press Trust of India का ट्वीट देखिये, इसका स्क्रीनशॉट भी डाल  रहा हूँ क्या पता कल सुबह तक भाजपा अपनी किरकिरी होने पर इस ट्वीट को ही डीलीट करवा दे।  

भारतीय जनता पार्टी के गोआ  के मुख्यमंत्री प्रमोद सांवत ने गोवा में गौमांस की कमी पर ये बयान  दिया है की जल्द ही वो प्रदेश में हो रही गौमांस की कमी को पूरा करेंगे, दूसरे प्रदेशो से गौमांस आयात कर इस कमी को पूरा करेंगे।  

Goa CM Pramod Sawant says his government is aware about beef shortage in state and arrangements are being made to resolve the issue.

 


यही है इन भाजपाइयों का असली चेहरा, पता नहीं इस देश की भोली भाली जनता को ये बात कब समझ में आएगी की ये लोग सत्ता के लिए कुछ भी कर सकते है।  

आपके लिए गाय पूजनीय है तो आपके यहाँ गाय के नाम पर वोट मांगेंगे, गोवा में गाय का मीट खाया जाता है तो वहां पर गाय के मांस के नाम पर वोट मांगेंगे।  

इन लोगो ना गाय से मतलब है, ना हिन्दू धर्म से और ना ही आपकी भावनाओं से इनका उल्लू सीधा होना चाहिए बस वोट मिलने चाहिए वो गौमांस पर मिलेंगे तो ये लोग गौमांस बेचेंगे और वो गाय माता के नाम पर  मिलेंगे तो गाय माता के नाम आपकी भावनाओं के साथ खिलवाड़ करके लेंगे। 


रविवार, 1 नवंबर 2020

कपड़ों से पहचाने जा सकते हैं हिंसा भड़काने वाले : PM Narendra Modi

पहले सुनिए  क्या कहा हमारे प्रधानमंत्री जी ने 

कपड़ो से ही पहचाने जा सकते है

अब देखिये गाजियाबाद पुलिस का ये tweet

 

गाजियाबाद पुलिस ने tweet मेंबताया की शातिर चोर को गिरफ्तार किया है औरजो फोटो फोटो में जिन्हें अरेस्ट किया उनमे से एक ने नमो अगेन की टीशर्ट पहन रखी तो ट्विटर यूजर्स ने तुरंत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कही बात को quot करना शुरू कर दिया

गाजियाबाद पुलिस ने ट्वीटर पर लोगो की प्रतिक्रिया देखि तो तुरंत अपने ट्वीट को डिलीट कर दिया 

गाजियाबाद पुलिस ने पता नहीं क्यों ये tweet डीलीट कर दिया, खैर screenshot की सुविधा उपलब्ध है 


 

रविवार, 16 अगस्त 2020

स्वतंत्रता दिवस और मैं - उन दिनों SMS के भी पैसे लगते थे

तब मेसेज भेजना आज की तरह फ्री नहीं था, ना ही सबके पास स्मार्टफोन और इंटरनेट होता था।  

उन दिनों SMS के भी पैसे लगते थे, उसमे भी अक्षर ज्यादा हो जाते तो 1 की जगह कई SMS गिने जाते है।  मेरा SMS इतना बड़ा बन ही जाता था की एक में ही दो के पैसे लगते थे, फिर भी हर स्वतंत्रता दिवस पहले से तैयारी करके रखता था और मेरे मोबाइल में जितने नम्बर सेव होते थे सभी को देशभक्ति से भरा शहीदों के गुणगान वाला और तब की सरकार की कमी का कुछ हिस्सा मेरे मेसेज में शामिल होता था जिसे भेजते समय मेरे मन में जो उमंग उत्साह होता था वो शब्दों में बयां कर पाना मुश्किल है।  

 जिसे भी मेरा SMS मिलता वो उसकी प्रशंसा भी करता, मेरे विचारो की तारीफ़ करता या यों  कहे की कई दोस्त तो मेरे SMS का इंतज़ार करते थे की इस बार क्या लिखकर भेजेगा।  

आज भी स्वतंत्रता दिवस था, मेसेज भी फ्री है और लिखकर भेजना भी बहुत आसान है लेकिन मन में वो उत्साह नहीं  था, कुछेक दोस्तों के मेसेज के जवाब के अतिरिक्त किसी को चलाकर मेसेज नहीं भेजा।  

पिछले कुछ साल में बहुत कुछ बदल गया, पहले देशभक्ति का अर्थ वतन से प्यार ही होता था, सत्ता से हर रोज सवाल करते थे, महंगाई पर सरकार के खिलाफ बोलते थे पुतले जलाते थे, यदि कही कोई अवव्यस्था होती थी तो प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते थे ये सब तब देशभक्ति की  श्रेणी में ही आता था। 

अब देशभक्ति के मायने बदल गए, सरकार से सवाल करना देशद्रोह कहलाता  है,सरकार के किसी निर्णय का विरोध करना देश के खिलाफ बोलना होता है, सीमा पर मेरे ही भाई बहन शहीद हो और उनके परिवार को न्याय  दिलाने के लिए बोलने पर उसे शहीदों/सैनिको का अपमान समझा जाने लगा है।  

अब देशभक्ति का अर्थ है दूसरे देश को गालियां निकालों, यदि मैं केवल अपने देश ही प्यार करू तो उसे देशभक्ति में शामिल नहीं किया जाता, जब तक की मैं बार बार अपने कथन से पलटने वाली सरकार के अनुसार दूसरे देश को गाली ना निकालूँ, अपने  देश के नागरिकों में से कुछ एक को गद्दार न कह दूँ, या उन्हें पाकिस्तान चले जाओ कहकर धमका  नहीं दूँ, या फिर ये साबित नहीं कर दूँ की वो भारत में जन्म लेकर भी पाकिस्तानी है तब तक मेरी देशभक्ति पर प्रश्नचिन्ह लगा रहता है।  

तो आज मेरा मन विचलित सा था, सवालों से उलझा हुआ था, किसे स्वतंत्रता दिवस की बधाई दूँ, उन्हें जिन्होंने आजादी  गिरवी रखकर गुलाम रहना स्वीकार कर लिया। 

"गुलाम" हाँ, गुलाम ही तो है यदि आप बढ़ती महंगाई पर 5-6  पहले तक बोलते थे और आज नहीं बोल पा रहे तो क्यों न इसे गुलामी कहा जाए।  

जब आपके बच्चे को अच्छी शिक्षा नहीं मिल रही हो, या फिर शिक्षा महंगी हो और आप केवल इसीलिए चुप रहते है की अब सरकार से इस पर सवाल करने का मतलब देश के खिलाफ बोलना है तो फिर ये गुलामी ही तो है।  

और सबसे बड़ी बात आजकल जो एक नई प्रजाति पैदा हुई है जो हर किसी को पकड़कर बोलती है बोल "वन्दे मातरम" यदि कोई तुम्हे पकड़कर कहे की ये बोल और नहीं  बोलो आपके साथ बदतमीजी से लेकर हाथापाई और कई बार हत्या तक की नौबत आ जाए तो कैसे कह सकते हो की तुम आजाद हो, ये तो गुलामी ही हुई ना।  

बस इन्ही सवालों से पूरे दिन जूझता रहा और इस बार का स्वतंत्रता दिवस बीत गया।  

इस बार मैं वो सन्देश नहीं भेज पाया जो हर बार भेजता था। 

उम्मीद है अभी भी मैं देशभक्त ही कहलाऊंगा। 

जय हिन्द 

जय भारत 

वन्दे मातरम


शनिवार, 20 जून 2020

न वहां कोई हमारी सीमा में घुस आया है और न ही कोई घुसा हुआ है


दो किसान थे, दोनों की जमीन एक दुसरे से सटी हुई थी, दोनों ही अपने आप में काफी सामर्थ्यवान थे
जहाँ दोनों की सीमाए लगती थी वहां कभी कभी दुसरे किसान के बेटे इधर वाले किसान के खेत में घुस आते थे, फिर इधर वाले किसान के बेटे उन्हें समझा देते की भाई सीमा वहां पर आप हमारे खेत में घुस आये हो, कई बार बोलने पर मान जाते थे, कई बार थोड़ी तू तू मैं मैं हो जाती तो कई बार बड़ो को बीच में आना पड़ता लेकिन आखिर बात सुलट जाती थी, दुसरे वाले किसान के बेटे अपने खेत में चले और इधर वाले तो अपने खेत में थे ही।

जिंदगी चलती रही दोनों किसान खूब तरक्की करते रहे।
लेकिन अचानक से दोनों किसानो के बीच सम्बन्ध बढ़ने लगे, उधर वाला किसान इधर वाले किसान के घर आया तो इधर वाले किसान ने अपने बेटो से उस किसान की खूब आव भगत करवाई, उसकी जय जयकार के नारे लगवाये उसे मीठे मीठे पकवान खिलाये, झूला झुलाया, यहाँ तक की अपने बेटो को मजबूर कर दिया उस किसान के चेहरे के मास्क पहनकर उसके सामने बैठकर उसे खुश करने के लिए।

यहाँ तक की घर के एक काम करने वाले के मुहं से उधर वाले किसान के नाम का सही उच्चारण नहीं हुआ तो उसे नौकरी तक से निकाल दिया।
पूरे परिवार ने ये सब किया क्योंकि सबको लगता था की आपसी सम्बन्ध अच्छे हो तो दोनों की किसानो के लिए अच्छा है।

इधर वाला किसान बड़ी शान से सबको बताता कि उधर वाले किसान के साथ उसकी दोस्ती कितनी गहरी है, दोनों की बीच मिलने का सिलसिला जारी रहा।

एक दिन फिर से वैसा ही हुआ जो पहले होता था उधर वाले किसान के बेटे इधर वाले किसान की जमीन में घुस आये, और सदा की तरह इधर वाले किसान के बेटे उन्हें समझाने लगे की आप हमारी जमीन में आ गये हो, बात ज्यादा बढ़ गई और नौबत हाथा पाई पर आ गई, उधर वाले किसान के बेटे आक्रामक हो गए और इधर वाले किसान के कुछ बेटे इस झगड़े में मारे गए।

इधर वाले किसान के बेटे आश्वस्त थे की उनका बाप उधर वाले किसान को सबक सिखाएगा, लेकिन ये क्या इधर वाला किसान तो उधर वाले किसान की भाषा बोलने लग गया।
इधर वाले किसान ने अपने बेटो को कहाँ कि "उधर वाले किसान के बेटे ना तो हमारी जमीन में घुसे है, ना हमारी जमीन पर कब्जा किया है"
अब इधर वाले किसान के बेटे तो वैसे ही अपने परिवार के सदस्य की मौत से दुखी थे, ऊपर से उन्हें ये समझ नहीं आ रहा था की उनके बाप ने उधर वाले किसान की भाषा क्यों बोली, जिस जमीन को सदा वो अपनी समझकर उसकी हिफाजत करते आये उसके लिए उन्ही का बाप ऐसा क्यों बोल रहा है?

अब जब इधर वाले किसान ने जो कहा उसका पता उधर वाले किसान को चला तो वो सीना चौड़ा करके उस जमीन पर अपना हक़ ये बोलकर जताने लग गया की इधर वाले किसान ने खुद कहा की जहाँ पर मेरे बेटे खड़े थे वो जमीन उसकी है ही नहीं।


दुनियाँ से शिकायत क्या करते जब तूने हमें समझा ही नहीं गैरों को भला क्या समझाते जब अपनों ने समझा ही नहीं।

जो शहीद हुए है उनकी  जरा याद करो कुर्बानी
जो शहीद हुए है उनकी  जरा याद करो कुर्बानी

मंगलवार, 7 अप्रैल 2020

सोचो भारत कब मजबूत था?

PM Modi Vs PM Dr. Manmohan Singh
PM Modi Vs PM Dr. Manmohan Singh

एक वो दिन था जब भारत ने यूरोप को भी घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था, जब इटली ने हमारे मछुआरो के हत्यारों सैनिको को इटली बुलाकर वापस नहीं भेजा तो तात्कालीन प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने इटली के राजदूत को ही भारत में बंदी बनाकर इटली को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था और जो इटली बोल रही थी की हम सैनिको को वापस इंडिया नहीं भेजेंगे उन्हें झक मारकर वापस भेजना पड़ा.. उसे कहते है देश का सम्मान बढ़ाना, देश के सम्मान के आगे कोई समझोता नहीं

एक आज का दिन है की जिस ट्रंप के लिए अभी 1 महीने पहले ही सब कुछ दांव पर लगा दिया, करोडो रूपये पानी की तरह बहा दिया और आज वही ट्रम्प खुले आम धमकी देता है की यदि भारत Hydroxychloroquine की सप्लाई नहीं करता है तो परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहे, जिस ट्रम्प के लिए भारत का करोडो रुपया बर्बाद कर दिया और मिडिया दिखा रहा था की कैसे मोदी और ट्रम्प दोस्त है और अमेरिका भी भारत के आगे कुछ नहीं वही अमेरिका भारत को धमकी देता है और भारत फिर तुरंत झुक जाता है और कहता है की हम Hydroxychloroquine की सप्लाई अमेरिका को भेज रहे है

सोचो भारत कब मजबूत था?
जब भारत ने इटली को झुकने पर मजबूर कर दिया तब या
आज जब भारत अमेरिका के आगे झुक गया तब?



शनिवार, 9 नवंबर 2019

क्या कह रहा है अनुभव सिन्हा से ड्राईवर?

ये पहली बार नहीं हुआ है की ड्राईवर ने मेसेज किया हो अनुभव सिन्हा ने उसे सोशल मिडिया पर शेयर किया हो, इससे पहले भी वो ऐसा करते आये है लेकिन इस बार ड्राईवर कुछ ज्यादा ही मेसेज कर रहा है, पता नहीं वो खुद परेशान है या बार बार मेसेज और कॉल से किसी को परेशान करना चाहता है?




इस बार ये सिलसिला 1 नवम्बर से शुरू हुआ जो अभी तक चल रहा है, मैं इस पोस्ट में ड्राईवर  के वो सारे मेसेज आप सबके साथ शेयर  कर रहा हूँ जो अनुभव सिन्हा जी ने अपने ट्विटर हेंडल पर शेयर किये है



My driver just called to say "सर कार नहीं बन रही"
















इतना ही नहीं, ड्राईवर के इतने मेसेज शेयर करने की वजह से लोगो ने सिन्हा जी से सवाल भी किये जिनका जवाब भी उन्हें दिया





 

शुक्रवार, 1 नवंबर 2019

दिल्ली की बिगड़ती हवा Vs दिल्ली का साफ़ नीला आसमान

इस पोस्ट में जो मुझे लगता है #DelhiAirQuality के बारे में वो लिखने जा रहा हूँ, पूरा पोस्ट जरूर पढना और फिर आपको लगे मैं गलत हूँ तो अपने कमेंट द्वारा मुझे सही करने की कोशिश करना,धन्यवाद।

शुरुआत करते है दीवाली से पहले के कुछ दिनों से, दिल्ली के मुख्यमंत्री @ArvindKejriwal जी और बहुत से लोग रोज दिल्ली के आसमान का नजारा दिखाते हुए फोटो पोस्ट करते थे, और सबको उस पर गर्व होता था की वाह दिल्ली ने पोलुशन के खिलाफ ये जंग भी बड़े हद्द तक जीत ली है।

अरविन्द केजरीवाल को पहले से पता था की सामने दिवाली है, और लोग पटाखे तो जलाएंगे ही और उससे प्रदूषण बढेगा, तो दिल्ली सरकार ने उसका भी हल निकाला, और दिल्ली में सामूहिक दीवाली लेजर वाली बनाने का निर्णय लिया।

तब तक दिल्ली का आकाश बिलकुल साफ़ था, दिल्ली सरकार सहित दिल्ली वाले भी खुश थे, लेकिन कुछ लोग थे जिन्हें इसका दर्द था की क्यों ये कामयाब हो गया इसमें, जो दिल्ली सदा प्रदूषण में नम्बर 1 रहती है उसकी हवा इतनी साफ़ क्यों है, लेकिन उन्हें उम्मीद थी की दीवाली पर पटाखों से कुछ होगा



जिसमे भाजपा के बड़े बड़े नेताओं सहित #LashkarENoida भी शामिल था, और उन्होंने बाकायादा लोगो को इसके लिए उकसाया की पटाखे चलाओ, सबसे बड़ी शर्म की बात खुद देश के प्रधानमंत्री ने मन की बात में पटाखे चलाने की बात कही, यदि सच में वो भारत देश के नागरिको का भला चाहते तो अपने उसी व्यक्तव्य में ये भी बोल सकते थे की जहाँ जहाँ प्रदुषण की समस्या है वहां कम चलाये, या सामूहिक रूप से चलाये, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया, अर्थात कहीं ना कहीं ये एक वर्ग यही चाहता था की दिल्ली की हवा जहरीली हो लेकिन दिल्ली वाले अपने लाडले मुख्यमंत्री के साथ थे, लेजर लाईट और सामूहिक दीवाली का कार्यक्रम सफल हो रहा था, दिल्ली की हवा साफ़ थी, और पटाखे भी नहीं चल रहे थे, खुद केजरीवाल जी ने इसके लिए दिल्ली को धन्यवाद के लिए ट्वीट किया था और दिल्ली वालो को सेल्यूट किया

एजेंसियां भी बताती है की इस साल दिल्ली में बहुत कम पटाखे चले, यानि कुल मिलाकर दिल्ली ने कमाल कर दिया. पर तभी उसी दिवाली की रात अचानक से पंजाब और हरियाणा में पराली जलना शुरू होती है, विशेष ध्यान दिया जाए, दीवाली की रात जब पटाखों से प्रदुषण नहीं फैला तो उसके बाद आधी रात से पराली जलना शुरू हुआ, दीवाली का त्यौहार जहाँ सब लोग त्योहार की खुशियाँ मनाने में लगे थे वहां ये कौन लोग थे जो पराली जलाने चले गए? और आखिर क्यों वो दीवाली वाली रात ही गए?

एक बार Steve Jobs ने कहा था "Connect the dots" इन सभी संदर्भो को आपस में जोडिये आपको अपने आप समझ आएगा कितना बड़ा षडयंत्र रचा गया केवल इसीलिए की चर्चा इस पर ना हो की इस बार दिल्ली ने सामूहिक दिवाली मनाकर प्रदूषण के खिलाफ जंग जीत ली बल्कि चर्चा दिल्ली की बिगड़ती हवा पर हो, फिर #LashkarENoida तो है ही जो कारणों पर चर्चा नहीं करेगा बस यही दिखाएगा की दिल्ली की हवा में सांस नहीं लिया जा रहा, वो नहीं बताएगा की इसके लिए कौन जिम्मेदार है



अच्छा ये पराली जलाने के लिए दिवाली की रात का इन्तजार क्यों किया गया? दीवाली के पहले क्यों नहीं जलाई? या तो शायद हवा का बहाव दिल्ली की तरफ नहीं था, या फिर पहले जला लेते तो वो खुलेआम पटाखे जलाने की बात किस बेशर्मी से करते (हालाँकि वो बेशर्म है कर सकते थे ऐसा भी)

चलो मान लेता हूँ मैं तो आम आदमी पार्टी का समर्थक हूँ तो अरविन्द केजरीवाल सरकार का गुणगान ही करूँगा, आप बताइए आपको क्या लगता है, मैंने जो लिखा है उसमे कौनसा तथ्य गलत है, या केजरीवाल और क्या कर सकता था इस हवा को सुधारने के लिए?

गुरुवार, 17 अक्टूबर 2019

नोएडा फिल्म सिटी के निचे है प्राचीन हनुमान मंदिर


आज गुरुवार को ट्व‍िटर पर #NoidaFilmCityExcavation अचानक ट्रेंड (Twitter Trends) करने लगा। जिसमे बजरंग बलि हनुमान जी से जुडी एक रोचक कहानी बताई गई है
कहानी बताने वाले RoflGandhi_ के अनुसार
रोहतक यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर बलवान दहिया जी हिंदू अध्यात्म के रिसर्चर हैं। हनुमानजी पर गहरा अध्ययन किया है। उनकी रिसर्च है कि जब हनुमानजी संजीवनी लेकर लौट रहे थे तो उनकी गदा पर लगा एक मनका नीचे गिर गया था। हजारों साल बीत गये। नौवीं सदी में वो मनका एक गरीब कृपाराम को मिला।
देखते-देखते कृपाराम की किस्मत बदल गयी।उसने चावल का काम शुरू किया और वो लखपति हो गया। तब उस रहस्यमयी मनके की महिमा समझ आयी। उसकी पत्नी भामादेवी ने मनके को मंदिर में स्थापना करने की सलाह दी। कृपाराम ने भव्य बजरंगी मंदिर बनवाकर मनका स्थापित कर दिया।


मंदिर के आस-पास शहर बस गया। शहर इतना खुशहाल था कि सोने की ईंटों के फर्श लगे थे। शहर का नाम था नवोदय। फिर 11वीं शताब्दी में नवोदय नगरी के राजा अजेयनाथ और टीपू खान के बीच भयंकर जंग हुई। इससे पहले की टीपू नवोदय नगर को लूट पाता कुलदेवी महामाया ने शहर को पाताल में छुपा दिया।
प्रोफेसर दहिया की रिसर्च और मशहूर पुरातत्व विशेषज्ञ कगिशो आर्चर की रिपोर्ट कहती है कि जहाँ सोने की नवोदय नगरी थी, वहाँ आज नोयडा शहर आबाद है। मनका जड़ित भव्य बजरंगी मंदिर की अग्जेक्ट लोकेशन सेक्टर 16 A फ़िल्म सिटी बतायी गयी है। शायद मंदिर भूतल से लगभग 3000 मीटर नीचे है।
प्रोफेसर दहिया के दादाजी भलेराम दहिया भी एक बार नेहरू जी से मिले थे और बजरंगी मंदिर की खोज के लिये खुदाई की माँग की थी। लेकिन उन्हें अनसुना कर दिया गया। आज फ़िल्म सिटी में बहुत सारे न्यूज़ स्टूडियो आबाद हैं और धरातल में कैद है एक चमत्कारी रहस्य जो भारत की किस्मत बदल सकता है।


प्रोफेसर दहिया अब प्रधानमंत्री जी से उम्मीद कर रहे हैं जैसे वो नेहरू जी की अन्य गलतियों को सुधार रहे हैं, वैसे ही नवोदय नगरी के बजरंगी मंदिर की खोज करके एक और इतिहास ठीक कर देंगे। न्यूज़ स्टूडियो तो कहीं भी बस सकते हैं, लेकिन बजरंगी का निवास एक विशेष स्थल ही होता है।
आज नहीं तो कल देश की जनता इसका जवाब जरूर मांगेगी। आस्था के ऊपर कुछ नहीं, न्यूज स्टूडियो तो बिल्कुल नहीं।
वर्तमान में भूख से कुपोषित बच्चों के मामलो में भारत पाकिस्तान और नेपाल से भी नीचे चला गया, यानि पाकिस्तान नेपाल अधिक समर्थ हो गए और भारत पीछड़ गया, RoflGandhi_ का ये भी मानना है की इस भूख का एक ही इलाज है 'मनका'। जब नोयडा में मनका मिलेगा, बच्चे बच्चे को उसके मन का खाना मिलेगा।
एक अन्य यूजर ने बताया : कहा जाता है कि मनका पोटली में रखा हुआ है।ध्यान से देखने पे आपको इस मीडियाप्लेक्स का आकार भी पोटली जैसा दिखेगा।इससे ये बात साफ हो जाता है कि मनका इसी जगह पर है। अब हमें जल्द से जल्द इस पवित्र स्थल को खाली करा एक भव्य हनुमान मंदिर का निर्माण करना चाहिए।

प्राचीन हनुमान मंदिर
Hanuman mandir
Hanuman ji ka mandir, Noida
Hanuman ji ki gada ka manka, noida






रविवार, 13 अक्टूबर 2019

प्रधानमंत्री द्वारा जनता के पैसो की बर्बादी - Publicity Stunt



प्रधानमंत्री मोदीजी ने आज तमिलनाडु में समुद्र किनारे से कचरा साफ किया इस पर मेरे विचार
ये प्रधानमंत्री मोदी के अनेको पब्लिसिटी स्टंट (खुद के प्रचार) में से एक है इसके अलावा कुछ नहीं है, जनता के पैसो की बर्बादी, केवल खुद को पूरे दिन टीवी पर दिखाने के लिए।

एक प्रधानमंत्री का काम कचरा उठाना नहीं होता है बल्कि ऐसे कानून बनाना होता है जिनसे कचरा फैले ही ना, लेकिन ऐसा करने से उनका वीडियो फोटो टीवी पर नहीं आती।

जनता के पैसे की बर्बादी:  जब प्रधानमंत्री कहीं भी जाते है, ठहरते है तो उस जगह और उसके आस पास के इलाके की पूरी तरह से चेकिंग की जाती है जिसमे पूरा प्रशासन और हजारों कर्मचारी लगे होते है, तभी आपने देखा होगा ना तो उस वीडियो में दूर दूर तक कही कोई व्यक्ति दिखाई दे रहा था और ना ही समुद्र के अन्दर कोई जहाज या व्यक्ति था क्योंकि वो जगह पहले खाली करवाई जाती है फिर उसकी हजारों कर्मचारियों द्वारा पूरी जांच होती है, सिक्युरिटी आदि की। कुछ भी संदिग्ध वस्तु/कचरा दिखाई देता है उसे हटाया जाता है उसके बाद प्रधानमंत्री उस जगह पर जा स

PM Narendra Modi: Plogging at a beach in Mamallapura
अब ये पब्लिसिटी स्टंट करवाना था तो सारी जाँच होने के बाद वहाँ पर ये दो चार पेपर प्लास्टिक आदि (जिनकी पहले से जांच की गई होगी) वहां पर डाले जाते है और फिर प्रधानमंत्री जी कैमरे के साथ वहाँ पर जाते है, उसकी फिल्म बनवाते है, कैमरामेन भी एक्सपर्ट होता है कभी वो उसमे मोदी का हाथ दिखाता है कभी ज़ूम करके कचरे की थैली और फिर अंत में कचरा जिस व्यक्ति को दिया जाता है उसे बोलते हुए वो शब्द, इतना ही नहीं शूटिंग होने के बाद पूरी फिल्म की एडिटिंग होती है कौनसा सीन रखना है कौनसा हटाना है आदि। किसलिए इतनी सब नौटंकी? क्या देश का पैसा अपने इन फिजूल के प्रचार प्रसार में खर्च किया जा रहा है?


तो मेरी नजर में प्रधानमंत्री मोदी यदि आज ये कचरा उठाने का इवेंट ना करते तो देश की जनता की गाढ़ी मेहनत की कमाई के करोडो रूपये और हजारों कर्मचारियों को जो इस इवेंट में शामिल किया गया उससे बचा जा सकता था

मंगलवार, 8 अक्टूबर 2019

क्या आपको सर्दी नहीं लग रही?

"क्या आपको सर्दी नहीं लग रही है?"
मेरे इस सवाल का जो जवाब उनसे मिला अचानक मेरी सर्दी गायब हो गई हो और मैं उस शख्श  की और देखता रहा जब तक वो मेरी आँखों से ओझल नहीं हो गया।

पिछले माह परिवार सहित माता वैष्णो देवी के दर्शन को गए थे, कटरा से माता वैष्णो देवी दर्शन के लिए चढ़ाई शुरू होती है, कोई पैदल ये चढ़ाई पार करता है तो कोई घोड़े, पालकी या हेलीकॉप्टर से इसे पार कर माता रानी के भवन पहुँच कर माँ वैष्णो देवी के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करता है।

हमारे साथ छोटे बच्चे थे तो हमने घोड़े लेना ठीक समझा और ये चढ़ाई घोड़ो पर बैठकर तय की, माता के भवन पहुँच चुके थे, आरती का समय हो गया था तो 2 घंटे के लिए दर्शन बंद थे, लाइन में लगकर माता रानी को याद करते, धन्यवाद देते समय बीत गया और आख़िरकार माता रानी के दर्शन हो गए, बहुत ही सुखद अनुभव रहा।  रात के 11 बज चुके थे, अब बाहर आकर एक रेस्टोरेंट में खाना खाने लगे इतने में तेज बारिश ने अचानक मौसम बदल दिया, जहाँ  कुछ देर पहले तक गर्मी लग रही थी वो मौसम अचानक से सर्द  हो गया।  वैष्णों  माता के दर्शन के बाद 3.5 KM की ऊंचाई पर स्तिथ भैंरो बाबा के दर्शन करने की मान्यता है तो खाना खाने के बाद हम सब इस चढ़ाई को चढ़ने के लिए निकल पड़े, रास्ते में फिर बारिश शुरू हो गई, कभी रुकते कभी तेज तेज मंजिल की तरफ बढ़ते जा रहे थे, आधे से ज्यादा रास्ता तय हो चूका था, लेकिन इस बार बहुत तेज हवा और बारिश ने सब को कँपकँपा के रख दिया, हर कोई खुद को सर्द हवा से बचाने के लिए कोई छिपने की जगह ढूंढ रहा था या बैग में जो कुछ ओढ़ने की चीज थी उसका सहारा ले रहा था, हमारे पास भी टॉवल और एक एक एक्स्ट्रा टी-शर्ट थी, जिनमे से कुछ से कुछ को ढका तो कुछ बच्चों को ढकने में काम ली, पर सर्दी फिर भी लग रही थी।  मुझे एक दीवार की ओट में बैठने की जगह मिल गई, आरामदायक तो नहीं थी पर सीधी हवा से वो दीवार मुझे बचा रही थी, इतने में मेरी नजर एक परिवार पर पड़ी जो थोड़ी देर पहले ठीक मेरे पास वाली सीट पर खाना खा रहे थे, वो भी सर्दी से काँप रहे थे उनके साथ एक गुड़िया थी वो भी काँप रही उसे मैंने अपने पास बुलाकर अपने सीने से लगाकर हवा से बचाने का प्रयास किया। थोड़ी देर में बारिश कम हुई तो थोड़ी हलचल हुई लोग आगे बढ़ने लगे भैरों बाबा के दर्शन के लिए,  हम भी चल पड़े।


एक घुमाव पर मैं कुछ लोगो से आगे निकल रहा था की अचानक मेरी नजर उस नौजवान पर पड़ी जिसकी वजह से ये पोस्ट लिख रहा हूँ।
जहाँ सभी लोग सर्दी से काँप रहे थे वही वो व्यक्ति एक सेंडो बनियान में चल रहा था, मेरे मुहं से अचानक निकल गया
"सभी सर्दी से काँप रहे है और आप बनियान में है, आपको सर्दी नहीं लगती?"
उसका जवाब सुनकर मेरी सर्दी अचानक गायब हो गयी और मेरी आँखों में आंसू थे।
उस युवक ने कहा, "सर्दी तो लगती है सर, लेकिन मेरा बेटा सर्दी से काँप रहा था तो मैंने अपना शर्ट निकालकर उसे उढ़ा (ओढ़ा) दिया।"
कुछ देर तक मैं वही खड़ा खड़ा उसे देखता रहा और सोचता रहा एक पिता अपने संतान के लिए कितना त्याग करता है, कितना सहन करता है।

पिता के त्याग की बहुत कम कहानियाँ देखने को मिलती है, लेकिन इस पिता के त्याग को आप सब तक पहुंचाने का प्रयास किया है यदि अच्छी लगी हो तो जरूर अपने कमेंट से मुझे बताये।
पढ़ने के लिए धन्यवाद
राम किरोड़ीवाल

सोमवार, 12 अगस्त 2019

Kashmir reality by Vijaita Singh Journalist, The Hindu

Here is what Vijaita Singh tweeted in a thread. I have just copy paste all tweet of this thread. Just to keep this in history.

Thread Link: https://twitter.com/vijaita/status/1160041091258732545

I will be tweeting and reporting what I saw and heard in Srinagar and not what I wanted to see and hear. #Article370
Some voices: "They have taken away our crown. We don't want repeat of 90s but the situation is such that guns will be picked on ration cards"

"They cannot protect women in rest of the country and they want to protect us?"

"They talk about poverty? Every one here owns a house.".

"I am not sure about the benefits or lack of this move, but the way it was done is simply wrong. You put leaders in jail, snap communication, do not consult anyone and say this is for our good?"

Except one person, I didn't meet anyone who supported the government's decision to annul Article 370. This person said:
"we have seen so much bloodshed, I don't want a repeat. But how do you explain this to the younger generation?"

These observations are based on interactions in Srinagar city, we don't know how what is happening in other parts of the Valley.The downtown area in Srinagar is fortified.I couldn't reach our correspondent @peerashiq who lives there,only met him yday, that too by chance

Only music channels on local cable network allowed to air, the news channels are blocked. Delhi based news channels are airing and they are the only modes of information. People said none of them gave a correct picture.Local journos were asked to delete footage by security forces

I asked a young man, what he made of NSA Ajit Doval's outreach, he asked, "Who is he? I saw someone meeting the locals on TV news"

Diesel is easily available, so big taxis are operating. Since most private small cars run on petrol, it's sold only for a couple of hours, after midnight. Public transport is skeletal, people come on the roads and if lucky are able to hitch rides with fellow commuters.

Sample pass for residents to move around in Srinagar city. Not everyone can get this "curfew" pass though. 1st pic- sample 144 CrPc restriction pass. 2nd pic- a notice outside DM office that no "curfew pass" issued 👇

In case you don't know how a concertina wire looks. Srinagar is a maze of these wires.

At one of the helplines in Srinagar, I met Harvinder Kaur. " If you are going to Delhi please tell my son I am fine and ask him to recharge the TV. I do not have any other issue,” she told this reporter.

The son was in Jammu when I called him this morning. There was no Internet connectivity there. He said he would recharge TV once he reached Pathankot, where he works. He sent this message. Now Ms Kaur can watch TV

Shashi Kapoor's song plays on a local music channel in Srinagar, a scroll runs on the screen announcing the cancellation of marriage ceremonies. With no Internet and no connectivity, this is how relatives were informed to not to come for the party. Video by


Prof C.L Vishen, a Kashmiri Pandit living in Srinagar had had a death in family, wanted to call to know when the rituals were planned and had to book airline tickets. Our video story on people queuing at DC office to make calls. Video was shot yday 
https://www.thehindu.com/news/national/other-states/kashmir-srinagar-residents-are-not-a-phone-call-away/article28974576.ece

Somewhere in Anantnag, Mr. Doval teases the little boy: schools are closed....are you happy? An elderly person interjects: arre khush kaun hai yahan? (Who is happy here)

A person in the background, inko pehchaante ho aap? (Do you recognise him?) Seller: Jee Nahin. Person in the background: he is NSA Ajit Doval

Administration giving wi fi access to some chosen few journos from Delhi. This is how they are able to tweet and report. It was so sad to see local journos at the Kashmir Press Club typing stories, but nowhere to publish or air.

Chief Secretary and DGP Dilbagh Singh clarified that people should not believe any mischevious and motivated news regarding firing incidents in the valley. The police have not fired a single bullet so far in 6 days: J&K police  

Again, I did not meet anyone who said they looked up to Pakistan or wanted it's help. Stop living in a cuckoo land. And you are right, the imaginary conversations you are having is motivated. 

With communication lines down and the Internet blocked,any kind of news,information or rumour was being passed around by word of mouth.For the past week,the Valley was abuzz with murmurs that arms had been taken away frm J&K police.The Hindu toured the city on Aug8,9,we found 

most policemen were seen wielding polycarbonate lathis and were deployed along with the armed CRPF men and were guarding lanes ringed with coils of concertina fencing.However, the policemen guarding govt buildings and those providing security cover to officials had weapons

“We are under the blanket, have had no communication with our family,” shouted a J&K policeman from a tin-roofed bunker outside a government building, his finger firmly on a gun’s trigger. He was asked if he had been able to speak to his family.
 https://www.thehindu.com/news/national/curbs-eased-in-srinagar-people-throng-streets-to-buy-essentials/article28979258.ece

The tin shed that's his work space.
“Do you know how a mule works,it has to go up and come down the same path with same baggage on its back;this is the condition of the police,”said an elderly policeman, holding an AK-47.“My duty starts at 1 p.m.,but due to travel restrictions I start my day at 5 a.m,can't be late"

Another cop said after Burhan Wani was killed in 2016, he couldn’t go home for six months. “The uniforms were soiled due to continuous wear but we were not allowed to leave our posts....We do not know how long the restrictions would continue this time, we are in for a long haul."

Another policeman suggested it was good that the State had been downgraded to a Union Territory. “We will get better pay and benefits like the central forces,” he hopefully added.

Dharmendra, an Assistant Commandant with the CRPF, said he had been posted in Srinagar for two years. “We work with J&K Police shoulder to shoulder. The reports of CRPF taking over their responsibilities is not correct,” Mr. Dharmendra asserted.

In the absence of any communication, the Srinagar hospital has not been able to identify the unconscious “Number 12” and so her family is in all likelihood unaware about her condition, the hospital staff said.  This gut wrenching story by
People are angry mainly on two counts. One,they feel their decades-long privileges were undemocratically and unceremoniously curtailed.Two, they are distraught by a total communication blackout for most part of the past week..via