शनिवार, 27 मई 2017

आखिर चुनाव आयोग मान ही गया कि EVMs हैक की जा सकती है

सुनकर आपको भी यकीन नहीं हो रहा होगा कि चुनाव आयोग ने ये स्वीकार किया है की इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन हैक की जा सकती है, पर आप भी इस पोस्ट को पूरा पढ़ेंगे तो मान जाएंगे की चुनाव आयोग ने अंततः स्वीकार कर ही लिया है की EVMs को मैनिपुलेट कर अपने  मन चाहे उम्मीदवार को जिताया जा सकता है चाहे उसे जनता ने एक भी वोट ना  दिया हो|

इससे पहले मैं आपको एक मेरे जीवन की सच्ची घटना बताता हूँ, मेरे ऑफिस में सभी ये मानते है की मैं हर समस्या (IT  रिलेटेड) का समाधान निकाल सकता हूँ, और सभी दिन में २-४ बार ये बात बोल ही देते है की मैं सब प्रॉब्लम सॉल्व कर सकता हूँ, अब मेरे एक सहकर्मी को इससे बहुत जलन होती है और वो हर रोज कोशिश करता है की कुछ ऐसा करे की वो मुझसे सॉल्व ना हो| तो उसने एक तरकीब तो ये निकाली की मुझे आवाज लगाता "राम, ये समस्या है" मैं जैसे ही उस सिस्टम तक जाता उस प्रॉब्लम को सॉल्व करने के लिए सिस्टम को हाथ लगाता और मुश्किल से १-२ मिनट निकलती और वो बोल पड़ता चल रहने दे तुमसे नहीं हो रहा तो तुम्हे और भी बहुत काम है छोडो रहने दो इसे, इसके बाद वो उस घटना का कई बार जिक्र करता उस दिन राम से भी नहीं हुई वो समस्या ठीक, राम ने भी देखा था उसके भी समझ में नहीं आई|

एक और घटना बताना हूँ इसी सहकर्मी की, एक दिन इसका मोबाइल हैंग हो गया था ना टच स्क्रीन कमांड ले रही थी और ना ही कोई बटन, ये मेरे पास आया "राम मेरा मोबाईल रेस्पोंड नहीं कर रहा, तुम तो हर चीज ठीक कर देते हो इसे देखो"
मैंने देखा स्क्रीन रेस्पॉन्ड, नही कर रही बटन रेस्पॉन्ड नहीं कर रहे तो मैंने कवर खोल कर बैटरी निकालकर उसे रीस्टार्ट करना चाहा, जैसे ही मैंने बैक कवर ओपन किया उसने मोबाइल मेरे हाथ से छीन लिया, ये कहते हुए
"ये क्या कर रहे हो, मोबाइल को खोल क्यों रहे हो, पूरा ऑफिस कहता है तुम हर समस्या का समाधान निकाल सकते हो ये झूंठ है तुमसे भी मेरा मोबाइल जो हैंग था वो सही नहीं हुआ"



ठीक यही कहानी चुनाव आयोग की इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के साथ हो रही है, जब हाल में सम्पन्न हुए चुनावों में एक नहीं अनेको उदाहरण ऐसे सामने आये है जहाँ EVM  में गड़बड़ी का उदाहरण हमारे सामने है, की जगह मशीन पकड़ी भी गयी है जिनमे गड़बड़ थी| लेकिन चुनाव आयोग केवल रटी रटाई एक ही लाइन बोलता रहता है ना जी EVMs एकदम सेफ है इनमे गड़बड़ हो ही नहीं सकती, इनमे गड़बड़ की ही नहीं जा सकती|

जब आम आदमी पार्टी ने चुनाव आयोग के इस चेलेंज को ललकारा और ये साबित किया की EVMs हैक की जा सकती है तो चुनाव आयोग अपनी छवि बचाने के लिए घोषणा करता है की हम सभी को चूनौती देते है की EVM हैक करके दिखाए, लेकिन उन्हें ये भी पता है की आम आदमी पार्टी के नेता जो पेशे से इंजीनियर थे जिनका काम ही टेक्नोलॉजी से खेलना, नये नए आविष्कार करना रहा था वो EVMs को हैक करके ये साबित कर देंगे की भारतीय चुनाव आयोग जिन मशीनों का इस्तेमाल करता है उन्हें हैक किया सकता है तो इससे बचने के लिए पहले से ही शर्त लगादी, वही जो मेरे साथ ऑफिस में हुआ|
EVMs हैक करके दिखाओ लेकिन आपको मशीन खोलने नहीं देंगे, केवल मशीन को बाहर से देखकर हैक करो|अब चुनाव आयोग यदि इतना ही आश्वस्त है की EMVs हैक नहीं की जा सकती तो फिर क्यों नहीं खुली छूट देता की ये लो ये रही मशीन और दिखाओ हैक करके, हम भी देखते है तुम क्या कर सकते हो, और यदि सच में चुनाव आयोग भारतीय लोकतंत्र को बचाना चाहता है और निष्पक्ष चुनाव का पक्षधर है तो चुनाव आयोग के पास तो सुनहरी अवसर है अपने सिस्टम को सुधारने की| उन्हें तो बिना पेमेंट किये अपनी मशीनों की कमियों का पता लग जाएगा जिन्हे वो सुधारकर एक स्वच्छ और निष्पक्ष चुनाव आयोग की छवि बना सकते है लेकिन ऐसा न करने की बजाय वो शर्ते लगा देते है की मशीन को खोल नहीं सकते, यानि चुनाव आयोग ये स्वीकार कर रहा है की मशीन को खोलकर हैक किया जा सकता है|


अब भाजपा की IT सेल में ट्रेनिंग मिले लोग सोशल मिडिया पर इसी पर आपको गालियाँ देंगे की अरे बेवकूफ हो, पागल हो आदि आदि वोट देने जाओगे तब मशीन कौन खोलने देगा तुम्हे हैक करने के लिए? लेकिन उन्हें भी अच्छी तरह से पता है की हैक करने वाला वोट देते समय मशीन नहीं खोलेगा उसे खोलने का काम पहले ही हो जाता है, चुनाव होने के बाद मशीने गोदाम में रहती है, जहाँ उनका रख रखाव और मेंटेनेंस किया जाता है उसी समय ये गड़बड़ की जा सकती है|

तभी तो दिल्ली नगर निगम के चुनाव में आम आदमी पार्टी के बार बार आग्रह करने के बाद भी दिल्ली चुनाव आयोग के पास मशीने होते हुए भी राजस्थान से EVMs  मंगाई जाती है और चुनाव उन्ही से करवाए जाते है| पहले आम आदमी पार्टी बैलेट पेपर से चुनाव करवाने की मांग कर रही थी जिसे चुनाव आयोग ने खारिज कर दिया, फिर आम आदमी पार्टी ने कहा ओके बैलेट से मत करवाओ पर मशीन तो लेटेस्ट टेक्नोलॉजी वाली मंगवा लो लेकिन चुनाव आयोग साफ़ अड़ा रहा की चुनाव राजस्थान की EVMs से ही होंगे क्योंकि गड़बड़ की सारी मेहनत उन पर कर चुके है अब यदि दूसरी मशीन लाएंगे तो उनमें गड़बड़ करनी पड़ेगी|

चाहे चुनाव आयोग ये हेकाथॉन के नाम पर जोकाथॉन करवाकर मीडिया में महीनो तक ये हेडलाइन चलवा दे की मशीने को हैक नहीं किया जा सका, जैसे मेरा वो सहकर्मी पूरे ऑफिस में कहता है की "राम से भी ये समस्या सॉल्व नहीं हुई" लेकिन पता सबको है की भारत का लोकतंत्र खतरे में है, चुनाव आयोग सरकार के हाथो की कठपुतली बन गया है|

नोट: मेरे लिखे विचारो से आप सहमत/असहमत हो सकते है ये आपको हक है, ये मेरे निजी विचार है यदि मेरे इस लेख से कोई आहत होता है तो मैं उसके लिए क्षमा चाहता हूँ|

जय हिन्द
वन्दे मातरम
भारत माता की जय

Huffingpost पर भी एक बहुत शानदार लेख है इस सन्दर्भमें 

Election commission of India, EVMs, EVM, Electronic Voting machine, Hack, Hackthon, JokAthon, Aam Aadmi Party, BJP, Congress, Election, Democracy, Saurabh Bhardwaj

शनिवार, 29 अप्रैल 2017

इसी मिडिया ने तुम्हे खड़ा किया और आज इसके खिलाफ बोल रहे

जब भी आम आदमी पार्टी से कोई मिडिया को कुछ बोलता है तो तुरंत भक्तो की गैंग आ जाती है इसी मिडिया ने तुम्हे खड़ा किया और आज इसके खिलाफ बोल रहे है|

मैं मेरा निजी विश्लेष्ण बताता हूँ, "आम आदमी पार्टी" को मिडिया ने खडा नहीं किया ऐसा मेरा मानना है, उलटे मिडिया ने तो मानो पहले ही दिन से "आप" को खत्म करने की सुपारी ले ली थी, मिडिया ने केवल "आन्दोलन" को पूरी तरह कवर किया था जिस समय आम आदमी पार्टी थी भी नहीं, और उस समय कवर किया गया था केवल और केवल तत्कालीन कांग्रेस सरकार के प्रति लोगो में गुस्सा पैदा करने के लिए और वो हुआ भी, उसके बाद जैसे ही पार्टी बनाने की घोषणा हुई तब से मिडिया ने "आप" को खत्म करने में कोई कसर नहीं छोड़ी, अन्ना को धोखा दिया, अन्ना साथ नहीं है, अरविन्द को लालच आ गया, सत्ता का लालच आदि आदि|

मुझे तो किसी भी चेनल का कोई भी लाइव नहीं याद आता जिसमे पार्टी बनने के बाद किसी ने अरविन्द केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, कुमार विश्वाश या पार्टी की तारीफ़ में कसीदे पढ़े हो उलटे किसी ना किसी तरह ये कोशिश की गयी की इनको खत्म कर दिया जाए, रोज रोज टीवी डिबेट में कितने ही लोगो को टोपी पहनाकर बिठा दिया जाता था अन्ना सपोर्टर बनाकर और "आप" के प्रवक्ताओ को कटघरे में खड़ा कर दिया जाता था| फिर आरोपों की बौछार, आंदोलन को धोखा क्यों दिया, क्या आपकी पहले से यही नियत थी, आंदोलन किसी ने किया मलाई कोई खा गया और ना जाने कितने ही अनगिनत सवाल| क्योंकि आम आदमी पार्टी उस आंदोलन की उपज थी तो उस समय तमाम कोशिशे की गई थी की आंदोलन से सहानुभूति रखने वाले लोग आम आदमी पार्टी और अरविन्द केजरीवाल से नफरत करने लगे लेकिन उनके इस बुरा चाहने से थोड़ा बहुत नुक्सान हुआ पर "आप" खत्म नहीं हुई खड़ी हो गई|

किरण बेदी और जनरल वी के सिंह भी इसी आंदोलन से निकले थे  उनसे कभी सवाल नहीं किये गए, उन्हें किसी मिडिया हॉउस ने अपने डिबेट में कटघरे में खड़ा नहीं किया की आज उनके मन में लालच आ गया, कुर्सी के लिए मंत्री पद के लिए आंदोलन में आये थे, अन्ना को अकेला छोड़कर बीजेपी के दामन में चले गए| सवाल हुए केवल आम आदमी पार्टी में जो लोग आंदोलन से आ गए उनसे, यदि ये सब भी बीजेपी में चले जाते तो कोई सवाल नहीं होते इनसे|

ये सब मेरी निजी राय/आकलन है.... मुझे कभी भी नहीं लगता की मिडिया ने "आप" का साथ दिया है हाँ उन्होंने खत्म करने की जितनी कोशिश की उससे हमे ये फायदा हुआ की हम उस अवसर का फायदा उठाकर अपनी बात, अपने विचार लोगो तक पहुंचा पाए, उन्होंने खत्म करने की कोशिश की हम आबाद हो गये|

मिडिया आन्दोलन के समय भी बीजेपी के लिए काम कर रहा था और आज भी बीजेपी के लिए काम कर रहा है, वरना जिस आन्दोलन को मिडिया ने इतना उठाया 24 घंटे लाइव किया, आज उसी लोकपाल के लिए मिडिया में 1-2 रविश जैसो को छोड़कर किसी में हिम्मत तक नहीं है ये बताने की कि मोदी सरकार ने लोकपाल का विरोध किया है, SC ने जब लोकपाल की नियुक्ति का आदेश दिया तो SC को ही उलटे जवाब दिया की SC हमारे काम में दखल ना दे यदि सच में मिडिया ने उस समय आन्दोलन का साथ दिया,तो आज मिडिया के पास क्यों समय नहीं इस सरकार से सवाल करने का की लोकपाल की नियुक्ति क्यों नही हो रही? जिस लोकपाल कानून के लिए पूरा देश सड़क पर आ गया था और जिसकी बदौलत भाजपा आज पूर्ण बहुमत की सरकार के साथ सत्ता में है आज 3 साल होने को आये लोकपाल की नियुक्ति क्यों नहीं हो रही|

अभी हाल में रविश कुमार ने बहुत शानदार प्रोग्राम किया लोकपाल को लेकर इससे पहले भी १-२ बार रविश ने ये बात उठाई है मानो विपक्ष और जनता की आवाज अब केवल रविश ही हो|

तो जिन्हें भी लगता है "आप" को मिडिया ने खड़ा किया है वो गलतफहमी में है, मिडिया ने कांग्रेस के प्रति गुस्सा पैदा कर मोदी सरकार बनाई है,मिडिया तो पहले दिन से ही "आप" को कटघरे में खड़े किये रखता है और आज भी यही कर रहा है|
 

शुक्रवार, 28 अप्रैल 2017

सैनिकों की शहादत और बहादुरी कितना कुछ बदल गया?

सच में बहुत कुछ बदल गया है पहले जब हमारे सैनिक बहादुरी से दुश्मनों को जवाब देते थे तब गुणगान उन सैनिकों की बहादुरी का ही होता था, हालांकि सरकार सदा इसका श्रेय लेना चाहती थी और चाहती रहेगी लेकिन फिर भी पहले सैनिकों को आगे रखा जाता था और अब सैनिकों की बहादुरी पर सबसे पहला श्रेय सरकार लेना चाहती है जैसा सर्जिकल स्ट्राइक के बाद में पूरे देश भर में लगे होर्डिंग और अखबारों में छपे विज्ञापन में सैनिकों का नाम बारीक अक्षरों में और मोदी सरकार भाजपा के नाम मोटे मोटे अक्षरों में और बड़ी-बड़ी तस्वीरों में थे, जिनमें यह दिखाया गया हो मानो सीमा पर सैनिकों ने तो कुछ किया ही नहीं मोदी ही बंदूक लेकर सीमा पर दुश्मनों से लड़ कर आया हो| 
 
चलो ठीक है सरकार ने एक साहसिक कदम उठाया और हम मानते हैं कि सरकार को इसका श्रेय लेना चाहिए और लिया भी, लेकिन अभी कुछ दिन पहले जब नक्सलियों ने हमारे सीआरपीएफ के जवानों पर हमला किया और 26 जवान शहीद हुए तब यह सरकार मुंह छुपाती फिर रही थी और अपने एजेंट मीडिया के द्वारा इस तरीके से माहौल बनाने की कोशिश की जा रही थी कि कोई सरकार से सवाल करे ही नहीं की 
  • यह घटना क्यों हुई? 
  • क्यों सरकार और सरकारी एजेंसियां हमारे सैनिकों को बचा नहीं पाई?  
  • गृह मंत्रालय क्या कर रहा था?  
  • हमारा इंटेलिजेंस ब्यूरो क्या कर रहा था? 
ऐसे एक नहीं खाने को उदाहरण आप को गिना सकता हूं जिनमें सरकार ने अपनी नाकामी तो औरों पर थोपने की कोशिश की और किसी भी व्यक्ति या संस्था के अच्छे कामों का श्रेय खुद लेना चाहा| चाहे फिर वह हमारे वैज्ञानिकों द्वारा मंगलयान का प्रक्षेपण हो या फिर हमारे सैनिकों द्वारा सर्जिकल स्ट्राइक हर अच्छे काम का श्रेय मोदी को चाहिए हर काम के पीछे ऐसे दिखाया जाता है जैसे मानो वह सबकुछ मोदी ने ही किया हो|  मंगलयान के पीछे वैज्ञानिकों को तो कोई काम ही नहीं था, मोदी ने ही मंगलयान बनाया और खुद ही लेकर मंगल तक पहुंच भी गया हो| 
सर्जिकल स्ट्राइक में मानो सैनिकों ने तो कुछ किया ही नहीं हो मोदी ही पीएमओ से निकलकर सीमा की तरफ दौड़ा दौड़ा गया और दुश्मनों को मार कर वापस आ गया लेकिन यही मोदी इस समय कहां छुप जाता है जब हमारे सैनिक शहीद होते हैं तब भी उन्हें सामने आ कर कहना चाहिए कि हां हमारी भूल हुई हमारी कमी रह गई हम इससे बच सकते थे| 
यदि श्रेय लेना चाहते हो तो नाकामियों को भी अपने माथे पर लीजिए जनाब और मीडिया के द्वारा जो लोगों के दिलों में जहर घोला जा रहा है भगवान के लिए इसे बंद कीजिए क्योंकि नफरत है वह सब कुछ जला देती है| 

मोदी के सत्ता में आने से पहले जब भी दुर्भाग्य से हमारे सैनिक शहीद होते थे तो तमाम मीडिया और खुद भाजपा बहुत तीखे सवाल करती थी
गृहमंत्री को इस्तीफा देना चाहिए
प्रधानमंत्री को इस्तीफा देना चाहिए,
यह प्रधानमंत्री की नाकामी है
इस सरकार की नाकामी है 
हमारे सैनिकों को शहीद होना पड़ा 
और आज वही मोदी और भाजपा अपने समर्थकों द्वारा अपनी नाकामी को इस तरीके से छुपाते हैं सैनिकों पर कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए इस मुद्दे पर हमें कोई कमेंट नहीं करना चाहिए या अब कहां है वह जो अमन की बात करते हैं अब कहां गए वह जो कहते हैं कि वह निर्दोष हैं बजाय इसके कि अब भी वह कहें कि हां हमारे गृह मंत्रालय की कुछ ना कुछ कमी रही है और आगे से हम इसका ध्यान रखेंगे हम इसमें सुधार लाएंगे| 
 
यदि मोदी समर्थक भाजपा समर्थक सच में खुद को देशभक्त मानते हैं तो हमारे सैनिकों के बलिदान पर उन्हें अपनी सरकार से सवाल करना चाहिए कि कैसे हमारे सैनिक शहीद हो गए जवाबदेही तय कीजिए सुनिश्चित कीजिए हमारे सैनिकों को कि आगे से ऐसा नहीं होगा| 
 
मैंने हाल ही में हुई नक्सली घटना में बयान सुने हैं जिनमें कहा गया है कि नक्सलियों को हमारी हर एक्टिविटी का पूरा पता था उन्होंने उसे पूरा मॉनिटराइज कर रखा था कि हम कैसे-कैसे मूव करते हैं और किस समय वह हम पर हमला कर सकते हैं जब उन नक्सलियों के पास में इतनी क्षमता है कि वह हमारे सैनिकों के हर एक्टिविटी को मॉनिटर कर सकते हैं तो हमारे सरकार के पास में क्या ऐसी कोई संस्था नहीं है कि जो हमारे सैनिकों की सुरक्षा को सुनिश्चित करें और नक्सलियों या माओवादियों की एक्टिविटी को मॉनिटर कर सके कि वह कब और कैसे हमला कर सकते हैं? या हमला करने वाले हैं उससे पहले ही हमारे सैनिकों को बचा लिया जाए| 
 
प्रीति गाँधी का ट्वीट जब वो विपक्ष में थे, और अब जब वो सत्ता में है- देखिये इन लोगो का दोगलापन

गुरुवार, 27 अप्रैल 2017

काजल के पर्वत पर चढ़ना


एक बार जीवन का रथ, बढ़ा शुक्र के पथ पर,
और राजनीति ने डोरे डाले फिर सेवा के व्रत पर !

लक्ष्मण रेखा बड़ी क्षीण है, बड़ी क्रूर है काई,
कदम कदम पर फिसलायेगी रेशम सी चिकनाई !!

काजल के पर्वत पर चढ़ना, और चढ़ कर पार उतरना,
बहुत कठिन है निष्कलंक रह करके ये सब करना !!!

पर जब जब आप सहारा देते, इनका सर सहलाते,
जब जब इनको अपना कहकर अपने गले लगाते,
तब तब मुझको लगता है,  ये जीवन जी लेंगे,
नीलकंठ कि तरह यहाँ का सारा विष पी लेंगे !!!!"


काजल के पर्वत पर चढ़ना, और चढ़ कर पार उतरना
काजल के पर्वत पर चढ़ना, और चढ़ कर पार उतरना


शनिवार, 22 अप्रैल 2017

MCD election और मेरा डर

कल दिल्ली में चुनाव है और पूरा देश दिल्ली को एक उम्मीद भरी नजरों  से देख रहा है|
पिछले दस साल से MCD में भाजपा का राज है और पूरी दिल्ली  इन सालो में भाजपा के भ्रष्टाचार और निकम्मेपन से परेशान रही है|
वही दूसरी तरफ आम आदमी  पार्टी की दिल्ली सरकार ने पिछले 2 साल में इतने काम किये है की दिल्ली वालो को इस बार किसे वोट करना है ये सोचने में जरा भी मुश्किल नहीं होगी यदि सच में उन्हें दिल्ली को सुधारना है, दिल्ली को साफ़ सुथरी देखना है MCD में फैले भ्रष्टाचार को खत्म करना है तो दिल्ली कल भारी बहुमत से आम आदमी पार्टी को जिताने वाली है|

लेकिन इसी बीच मेरा डर है EVMs  को लेकर क्योंकि MCD आम आदमी पार्टी का आने का मतलब है पिछले 2-3 साल से बीजेपी ने जो गंदगी फैलाई है उसका सच बाहर आना|
 यदि MCD कर्मचारियों को समय पर वेतन मिलने लगेगा, जो MCD घाटे में चल रही है हर समय पैसो का रोना रो रही है अगर वो हाउस टेक्स माफ़ करने के बाद भी फायदे में जायेगी तो बीजेपी के काले कारनामे सबके सामने आ जायेंगे!

MCD की करोडो की वेबसाइट, मृत व्यक्तियों को पेंशन देने का बड़ा भ्रष्टाचार और उससे भी बड़ा MCD के अधीन आने वाले दो Adevertise विभाग और पार्किंग से जो MCD को कमाई होनी चाहिए वो ईमानदारी से होने लगेगी और उसके आंकड़े जब देश के सामने आएंगे की कैसे इतने सालो से बीजेपी दिल्ली के लोगो को लूट रही थी तो कही ना कही भाजपा का दोगला चेहरा सामने आने लगेगा और दिल्ली से धीरे धीरे समस्याएं खत्म होने लगेंगी तो आम आदमी पार्टी और ज्यादा मजबूत होगी जो की भाजपा की राजनीतिक सेहत के लिए अच्छा नहीं होगा तो हो सकता है की बीजेपी इस बार भी EVMs टेम्परिंग करके आम आदमी पार्टी को रोक पाए जिससे भाजपा के काले कारनामे सामने नहीं आये|

खैर देखना है होता क्या है, ये 3-4 दिन जब तक परिणाम नहीं आता डर में गुजारने ही और उसके बाद हकीकत से रूबरू भी होना है|

गुरुवार, 6 अप्रैल 2017

MCD Election - AAP, BJP & Congress Delhities have to choose

फोटो. http://www.universityex.com/wp-content/uploads/2017/02/AAP_BJP_Congress.jpg
दिल्ली में MCD चुनाव है सभी राजनीतिक दल अपना पूरा जोर लगा कर यह चुनाव लड़ रहे हैं। 
 
बहुत सी क्षेत्रीय और छोटे दलो (अभी अभी जन्मे) के अलावा 3 सबसे बड़ी पार्टियां - आम आदमी पार्टी, भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस चुनावी मैदान में है। 
 
इन तीनों के लिए ही यह चुनाव नाक का सवाल है, एक तरफ आम आदमी पार्टी है जो अप्रत्याशित बहुमत के साथ 70 में से 67 सीट जीत कर दिल्ली में अपनी सरकार बनाई और जन हितेषी अनेक काम करने का दावा कर रही है तो उनके लिए यह चुनाव जीतना अत्यंत जरुरी है जिससे वह यह साबित कर सके कि हाँ, हमने काम किया है और दिल्ली की जनता ने हमारे काम को स्वीकारा है। 
दूसरी तरफ कांग्रेस जो अपना जनाधार खो चुकी है एक के बाद एक हर तरफ हार का ही मुंह देखना पड़ रहा है तो उन्हें दुबारा से राजनीति में अपनी पकड़ बनाने के लिए यह दिखाने के लिए कि अभी वह हैं यह चुनाव जीतना उनके लिए भी जरूरी है और तीसरा भारतीय जनता पार्टी जो पूरे देश में दावा कर रही है कि केवल उन्हीं की पार्टी को लोग चाहते हैं लोग मोदी जी के कामों से खुश हैं और उन्हीं से प्रेरित होकर अब हर जगह केवल कमल का फूल ही खिलेगा। 
 
तो मैं सोच रहा था यह पार्टियां अपने मतदाताओं से कैसे वोट मांगेंगे तीनों ही पार्टियों की बात करते हैं यह अपने मतदाताओं को जाकर दिल्ली के वोटरों को जाकर क्या कहेंगे कि हमें वोट क्यों दीजिए? 
 
तो आम आदमी पार्टी जरूर कह भी रही है और कहेगी कि हमने दिल्ली में सत्ता में आने के बाद जनता से किये वादे पूरे किये है। 
 
  • हमने दिल्ली में 
  • पानी फ्री किया
  • बिजली के दाम आधे किये 
  • मोहल्ला क्लीनिक खोले
  • सरकारी स्कूलों का नवीनीकरण कर उन्हें  आधुनिक बनाकर उन्हें निजी स्कूलों से भी अच्छा बनाया 
  • निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगाईं 
  • दिल्ली में सभी दवा और जाँच फ्री किया 
  • फ्लाई ओवर के निर्माण में भ्रष्टाचार पर लगाम लगाकर दिल्ली की जनता के टेक्स के पैसे बचाये 
  • बजट में टेक्स बढ़ाने की बजाय टेक्स में कटौती की है 
  • झुग्गी झोपड़ी की जगह शानदार अपार्टमेंट दिए है 
 
तो उनके पास में एक देश है जिसे वह दिखा कर कहेंगे कि यह देखिए हमने कुछ करके दिखाया है आप हमें वोट दीजिए जिससे हम और ज्यादा आपके लिए कर सके। 
 
अब बात करते हैं भारतीय जनता पार्टी की तो समझ में नहीं आ रहा कि वह वोट किस आधार पर मांगेंगे पिछले 10 साल से एमसीडी में भाजपा है तो 
 
क्या भाजपा यह कहने की हिम्मत कर पाएगी कि जैसा हमने पिछले 10 साल में एमसीडी में किया है वैसा ही करेंगे?
 
क्या यदि वह ऐसा नहीं कहते हैं तो इसका मतलब है कि उन्होंने पिछले 10 साल में एमसीडी में कुछ भी नहीं किया जो किया वह गलत किया है तो अब उन पर कैसे भरोसा किया जाए कि वह आगे गलत नहीं करेंगे?
 
यदि भाजपा अपनी चुनावी सभाओं में यह कहने की हिम्मत कर सकती है कि हमने जो किया है पिछले 4 साल में 5 साल में 10 साल में एमसीडी में वही करेंगे वैसा ही हम करते रहेंगे तब मान जाऊंगा कि भाजपा ने वास्तव में एमसीडी में कुछ करके दिखाया है 
लेकिन भाजपा यह गलती नहीं करेगी क्योंकि पूरी दिल्ली को पता है कि भारतीय जनता पार्टी क्योंकि  पूरी दिल्ली को पता है कि भाजपा ने एमसीडी को भ्रष्टाचार का अड्डा बना दिया है इन 10 साल में दिल्ली के लोगों को हर कदम पर जो भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ा चाहे वह जाति प्रमाण पत्र बनवाना हो जन्म प्रमाण पत्र बनवाना हो या निर्माण कार्य की स्वीकृति लेनी हो छोटे से छोटे काम के लिए जिस तरीके से एमसीडी में रिश्वतखोरी होती थी उससे दिल्ली की जनता दुखी है तो उन्हें पता है कि भाजपा को तो इस बार हमें नहीं चुनना है 
 
वरना जो नर्क की जिंदगी 10 साल बिताई है उससे भी बुरी हालत अब और करेंगे क्योंकि अब उनमें कॉन्फिडेंस आ जाएगा कि हम चाहे कितनी भी गलतियां करें हम चाहे जनता को कितना भी परेशान करें यह लोग हमें ही वोट देंगे 
 
तीसरा आता है कांग्रेस तो हो सकता है कि वह पिछले कुछ सालों में जो दिल्ली में आम आदमी पार्टी बनाम भाजपा या दिल्ली सरकार बनाम MCD जो खेल चलाया गया उसका फायदा कांग्रेस उठा ले वह वोटरों को यह कहकर लुभा सके कि जब हम होते थे तो यह लड़ाई-झगड़े नहीं होते थे क्योंकि हमें सरकार चलानी आती है क्योंकि हमें पता है कैसे काम होते हैं इन लोगों को नहीं पता तो यह लड़ते रहते हैं हमें पता है तो हम बिना लड़े झगड़े आपके काम कर सकते हैं तो शायद यह मुद्दा बनाकर कांग्रेस है वह अपनी वापसी करने की कोशिश कर सकती है 
 
अब सोचना दिल्ली के वोटरों को होगा कि उन्हें किसे सुनना है 
  • आम आदमी पार्टी जिसने दिल्ली की जनता से किये वादे पूरे करके दिखाए है और MCD चुनाव में भी जो ऐतिहासिक वायदा हाउस टेक्स माफ़ करने का किया है उसे पूरा करके दिखाएँगे
  • कांग्रेस जो भ्रष्टाचार में पूर्णतया लिप्त है एक नहीं अनेक उदाहरण हैं उनके भ्रष्टाचार के 
  • भाजपा जिसने एमसीडी की दुर्दशा कर दी प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत अभियान की भी उन्हें कोई फिक्र नहीं रही वह उसे भी लागू नहीं करवा पाए अलग से विशेष फंड एमसीडी को मिला स्वच्छ भारत अभियान के तहत उसका भी वह उपयोग करके दिल्ली को स्वच्छ नहीं बना पाए और भ्रष्टाचार जितना फैला हुआ है वह तो दिल्ली की जनता वाकिफ है तो मुझे नहीं लगता कि दिल्ली के लोग इन सब चीजों को नजरअंदाज कर के केवल जो माहौल देश में बनाया जा रहा है राष्ट्रवाद,देश भक्ति, हिंदू मुस्लिम, गाय बकरी भैस घोड़े गधे इनके इन बहकावे में आकर दिल्ली के लिए एक बार फिर से वही नर्क की जिंदगी चुनेंगे। 
दिल्ली के वोटरों में  मेरा बहुत विशवास है, आशा है वो मीडिया के प्रोपोगेंडा, या भाजपा की IT सेल के व्हाट्स अप्प फॉरवर्ड मेसेज के बहकावों में ना आकर अपने लिए, दिल्ली के लिए सही को चुन पाएंगे।
 

सोमवार, 13 मार्च 2017

who cares about voter turnout when the EVM machines can be tampered!!!

who cares about voter turnout when the EVM machines can be tampered!!!

जब भाजपा विपक्ष में होती थी तब वोटिंग मशीन को लेकर इन्ही आशंकाओ को व्यक्त करते थे, जब आज वो खुद सत्ता में है तो उन्ही EVM से इतना प्यार क्यों?
यदि तब उन्हें लगता था की EVM आसानी से टेम्पर की जा सकती है तो आज वो सत्ता में है क्यों नहीं EVM का यूज़ बंद कर देते है?
पर इन EVM का पहले कांग्रेस ने फायदा उठाया तो अब भाजपा पीछे क्यों रहे?
जैसे पहले CBI का गलत उपयोग कांग्रेस करती थी आज CBI का गलत प्रयोग भाजपा कर रही है।
बदला कुछ भी तो नहीं है

GVL Narasimha Rao (National Spokesperson, Bharatiya Janata Party) qustioning about EVM's tempering.

EVMs are being debated in Censor board! Film Rajniti has 'derogatory' references on how EVMs are manipulated by ruling parties. ECI proud?
EVMs are being debated in Censor board! Film Rajniti has 'derogatory' references on how EVMs are manipulated by ruling parties. ECI proud?
 


 




Priti Gandhi, National Executive Member - BJP Mahila Morcha speaking that Tempering EVM's is so easy.

An autorickshaw driver in Mumbai today laughed and told me that EVM's and autorickshaw meters have similar methods of tampering!! - Priti Gandhi







शनिवार, 11 मार्च 2017

पंजाब गोवा चुनाव परिणाम

आज जो तस्वीर पंजाब और गोवा के चुनाव परिणामो के बाद सामने आयी है मुझ जैसे हजारो आप समर्थकों/कार्यकर्ताओं के लिए दुखद है लेकिन हम सब को ये हार स्वीकार करनी चाहिए, जरूर हमारे में ही कुछ कमी रह गयी जो हम जनता को  हमारे साथ नहीं कर पाए। जरूर पार्टी इस पर विचार मंथन करेगी और उन कारणों का पता लगाएगी जिनकी वजह से हमे जहां पंजाब में हम दिल्ली से ज्यादा समर्थन मिल रहा था वो वोट में कन्वर्ट नहीं हो पाया।
लेकिन इन सबके बीच मुझे लगता है आज पाँच राज्यों के जो परिणाम आये है वो कहीं ना कहीं अच्छे के लिए हुए है (ऐसा मेरा मानना है)। 

मुझे लगता है अब तक बहुत से लोग बुद्धिजीवी वर्ग जो अपनी ही मस्ती में खोया हुआ था जिसे लग रहा था की चलो आम आदमी पार्टी लड़ तो रही है उन्हें क्या जरुरत है बोलने की या सामने आने की, पंजाब में आप को बहुमत ना  और MP में भाजपा को सम्पूर्ण बहुमत मिलने के बाद या तो ये लोग एकदम से भाजपा के सामने नतमस्तक होकर जो हो रहा है उसे स्वीकार कर लेंगे या सबके सीने में वो आग दिखाई देगी की नहीं यार "enough is enough" अब मुझे बोलना ही होगा, अब मुझे आगे आना ही होगा, अब मैं और चुपचाप ये सब नहीं देख सकता, तो इस तरह से अच्छे लोग, ईमानदार लोग संगठित होकर सामने आएंगे और देश में बदलाव का जो आंदोलन चला है और ज्यादा मजबूत होगा।

दूसरा पंजाब में आप को बहुमत ना मिलने अन्य राज्यो में कई मौका परस्त लोग जो पद लालसा में संगठन के साथ जुड़ गये थे वो इसके बाद स्वतः दूर चले जायेगी या अपनी राजनीतिक इच्छाओं की पूर्ति के लिए वापस वही लौट जाएंगे जहाँ से वो ट्रांसप्लांट हो रहे थे।

तीसरा खुद आम आदमी पार्टी भी अपनी रणनीति को और बेहतर कर पायेगी और यदि आप के  भी किसी नेता या विधायक में कुछ अहंकार आ गया था वो दूर हो जायेगा और धरातल से जुड़े कार्यकर्ताओं के साथ पुनः संवाद स्थापित कर और अधिक मजबूत होकर आगे बढ़ेंगे।

चौथा जो आम आदमी पार्टी के शुरुआत से समर्थक है वो जब जब पार्टी संकट से गुजरती है तो स्वतः संगठित हो जाते है तो ये परिणाम भी  हमे संगठित करेंगे और अधिक मजबूत और परिपक़्व बनाएंगे और मुझे पूरा भरोसा है अरविन्द केजरीवाल पर जो जल्द पूरी ऊर्जा के साथ हम सभी के सामने आगे का प्लान रखेंगे।

 

बुधवार, 8 फ़रवरी 2017

मर्यादा खोता प्रधानमंत्री पद

आज लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का संबोधन सुना तो मैं दंग रह गया उन्हें सुनकर।
 
जिस तरह से उन्होंने भूकंप पर ठहाका लगाया उसे सुनकर एक बार तो मुझे अपने कानों पर और आंखों पर यकीन नहीं हो रहा था कि मैं भारत की ही संसद और भारत के ही प्रधान मंत्री को देख और सुन रहा हूं।
उत्तराखंड में भूकंप आया आपको बता दूं कि उत्तराखंड हमारे अखंड भारत का ही हिस्सा है तो इस देश के प्रधानमंत्री होने के नाते मोदी जी को दुख होना चाहिए था कि हमारे ही देश के एक हिस्से में भूकंप आया वह वहां जान माल की हानि हुई, लेकिन जो संसद में देखने को मिला वह बहुत ही दुर्भाग्यजनक था मोदी जी भूकंप पर ठहाका लगाते हैं और इस ठहाके में उनका साथ देते हैं भारतीय जनता पार्टी के सांसद जो मेज बजाते हैं तालियां बजाते हैं और ठहाका लगाते हैं कि आखिर भूकंप आ ही गया।
 
आखिर मोदी जी भारत देश से और हम भारतवासियों से इतनी नफरत क्यों करते हैं उन्हें किस बात की खुशी हुई जिसके लिए वह ठहाका लगा रहे थे भूकंप भारत में आया तो उन्हें खुशी कैसे हो सकती है?
 
आज सच में मुझे लगता है कि जिन 31 प्रतिशत लोगों ने भारतीय जनता पार्टी को वोट देकर मोदी जी को प्रधानमंत्री चुना उन्होंने एक बहुत बड़ी भूल कर दी उन्होंने अपने ही देश के दुखों पर हंसने वाले आदमी को प्रधानमंत्री का पद दे दिया।

गुरुवार, 29 दिसंबर 2016

Shocking video allegedly from one of the Army training camp.




शनिवार, 17 दिसंबर 2016

कोशिश तो करे, उड़ान भरकर तो देखे

एक भाई का बहन के लिए प्यार और भावनाये जो शब्दों के सहारे बाहर निकल आई 
 
 "भाई" ये नाम जब तुम्हारे जहन में आता होगा 
तपती दुपहरी में जैसे मिल गयी हो छाँव 
ये अहसास दिलाता होगा। 

पुरुष की नजरो से निकलती वो धूप झुलसाने वाली 

तुझे उनसे बचा पाऊँ यही कोशिश में करता हूँ 
उन नजरो की आग जो पहुँचने वाली है तुम तक 
रोक तो लेता हूँ उन्हें पर मैं खुद भी डरता हूँ 

कब तक संग रहूँगा तेरे, 
बचा पाऊंगा में कितनी बार 
क्यों तेरा औरत होना ही 
बन जाती है तेरी सबसे बड़ी हार 

हिम्मत आये खुद तुझमे 
जो उस सुलसती आग से टकरा जाओ 
जो चाहती है झुलसाना तुझे 
उन्हें बनकर शोला जला आओ 

नारी हो ये सुनकर तुम 
कब तक अपने कदम रोकती रहोगी 
इस पुरुष प्रधान समाज के बंधन 
हर बार क्यों तुम ही सहोगी 

हूँ साथ तुम्हारे एक दोस्त की तरह, 
आओ मिलकर कदम बढ़ाते है 
है कुछ तो वजूद तुम्हारा भी 
इस दुनिया को अब दिखलाते है 

वो सपने वो कभी तुमने भी पाले होंगे 
आओ मिलकर उन सपनो को पंख लगाते है 
कोशिश तो करे, उड़ान भरकर तो देखे 
आखिर कहाँ तक पहुँच पाते है॥