शुक्रवार, 29 जनवरी 2016

तो क्या अब मोदीजी देश द्रोही हो गए?

चौंक गए पोस्ट का टाईटल देखकर?

बिलकुल मैं यही सवाल आपसे करना चाहता हूँ, क्या अब मोदीजी देश द्रोही हो गए? खैर मेरा ये सवाल एक ख़ास वर्ग के लिए है जो अत्यधिक भावुक वर्ग है, अपने आप को राष्ट्रवादी कहता है और राष्ट्रवाद के नाम पर उन्हें कोई कुछ भी कह दे वो बिना उस मामले को जाने, तुरंत भावावेश में आ जाते है, सोशल मिडिया पर गालियों की बौछार के साथ अपने देशभक्त होने का परिचय देने लगते है।
सामने वाले को पाकिस्तानी, देश्द्रोशी और बहुत ही अभद्र भाषा का प्रयोग केवल उस व्यक्ति ही नहीं बल्कि उसके पूरे खानदान को लेकर किया जाता है। इस पर भी यदि जिसे ये लोग कटघरे में खड़ा कर देते है उसका धर्म उनसे भिन्न हो तब तो मानो सामने वाले पर कहर टूट पड़ता है।
बस इस वर्ग विशेष की इसी भावुकता का फायदा कुछ राजनैतिक दल उठाते है और वो भी आग में घी डालने के लिए  संबंधित मुद्दे पर अभद्र कॉमेंट कर देते है।
बस अब क्या चाहिए इस भावुक जमात को हो जाते है अपने नेताओ के पीछे और सामने वाले की इज्जत की धज्जियाँ उड़ा देते है।
उनके ऐसा करने से सम्बंधित व्यक्ति थोड़ा हताश तो हो जाता है पर बेनकाब ये भीड़ हो जाती है जो बिना किसी तथ्य को जाने अंध भक्ति में मगन होकर अपना आपा खो बैठते है। यदि ये आपा  केवल सोशल  में ही खोते है तो कम से कम उन्हें कोई शारीरिक हानि नहीं होती है पर सोचो यदि  ये ऐसा वास्तविक जीवन में करने लगे तो अपना जीवन बर्बाद ही कर बैठेंगे और आपकी बर्बादी के दम पर ये राजनैतिक दल सत्ता हासिल कर जाते है और चाहकर भी वहाँ  वापस नहीं लौट पाते जहाँ पर आप इस भावुकता में बह गए थे।

ऐसा ही एक वाक्या 26 जनवरी 2015 को हुआ था।
अचानक से सोशल मिडिया के जरिये एक तस्वीर देश विदेश में सबके मोबाइल/कंप्यूटर पर शेयर होने लगी जिसमे भारत के उप-राष्ट्रपति महोदय हामिद अंसारी जी के तिरंगे को सलामी ना देने की तस्वीर दिखाई गयी और इस तस्वीर के जरिये इस भावुक वर्ग के दिलों में जहर घोलने की भरपूर कोशिश की गई।
शर्म तो तब आती है जब इसमें मिडिया भी शामिल हो जाता है, सुदर्शन चैनल ने इस पर पूरा 1 घंटे का प्रोग्राम कर डाला जिसमे वो उप राष्ट्रपति महोदय की देशभक्ति पर प्रश्न चिन्ह लगाते है।
सोशल मिडिया पर मानो आंधी आ गयी हो, ये भावुक वर्ग अँधा होकर उस आँधी के साथ उड़ने लगा और उप राष्ट्रपति महोदय के देश भक्ति पर एक बड़ा सा प्रश्न चिन्ह लगा दिया।
ये कुछ ट्वीट है जिनमे उप राष्ट्रपति महोदय को लेकर भद्दी टिप्पणी  की गयी



Is Narendra Modi insulted Tri Color, Modi deshdrohi hai? why Modi not salute Tiranga?
Is Narendra Modi Desh Drohi as he not salute TriColor?
अब आते है 26 जनवरी 2016 पर, वही स्थान, वही मौका और वही लोग पर इस बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने तिरंगे को सलामी नहीं दी!!!
तो यदि ये राष्ट्रभक्ति का ढोंग रचने वाले चंद लोग उस समय उप राष्ट्रपति महोदय को देशद्रोही और अन्य गलत शब्दों से सम्बोधित कर सकते है तो आज वही मापदंड नरेन्द्र मोदी के लिए क्यों नहीं? उस हिसाब से तो इस बार नरेंद्र मोदी देशद्रोही हो गए, उन्हें भारत में रहने का कोई हक नहीं रहा, वो तो पाकिस्तान जाकर वहाँ चरण वंदना करके आते है तो शायद इस बार उनके इस पाकिस्तान प्रेम ने उन्हें तिरंगे को अपमानित करने को उकसाया हो? शायद उन्होंने नवाज शरीफ के घर जाकर केक खाकर आये उसका कर्ज तिरंगे को सलामी ना देकर अदा किया हो? ऐसे हजारो बेहूदे सवाल हम भी उन अंध भक्तो और फर्जी राष्ट्रवादियों की तरह खड़े कर  सकते है पर हम ऐसा नहीं करेंगे।
हम केवल उन अंध भक्तो और फर्जी राष्ट्रवादियों को आइना दिखाना चाहेंगे की इस तरह गलत अफवाह फैलाकर देश में नफ़रत  का जहर मत घोलिये, इस भावुक वर्ग की भावनाओ के साथ मत खिलवाड़ करे, वरना जिस दिन ये भावुक वर्ग अपने आपे से बाहर आ गया तुम्हारे तख़्त और ताज को कोई बचाने वाला नहीं मिलेगा।
साथ ही साथ इस भावुक वर्ग से भी मैं अनुरोध करूँगा की किसी भी बात पर इतनी आसानी से आवेश में ना आये, कम से कम थोड़ा बहुत प्रयत्न सच्चाई जानने का भी करे, जितने देश भक्त आप है उतना ही देश भक्त भारत की धरती पर रहने वाला हर वो शख्स है जो इस मातृ भूमि से अपना पालन पोषण करता है।
धन्यवाद
वन्दे मातरम


"Jihadi sympathiser", "anti-India", "traitor", these were some of the names that the vice president of India was hurled at on the country's 66th Republic Day. Many tweeted demanding that Ansari be impeached, the more moderate ones wanted him to resign, the more outraged ones advised him to join the ISIS.

Line in english from the article: http://www.dailyo.in/politics/why-should-hamid-ansari-prove-his-patriotism-republic-day-narendra-modi-aamir-khan-pk-muslims/story/1/1684.html

मंगलवार, 26 जनवरी 2016

Padma Bhushan Anupam Kher #Award used word BhenCho*** after getting Award

जैसे ही इन पदम अवार्ड की घोषणा हुयी एक गीत कानों में गूंजने लगा

ये जो पब्लिक है सब जानती है ..... ये जो पब्लिक है

ठीक ही तो कहा है और इन अवार्ड की लिस्ट देखे तो आप समझ ही गए होंगे की इनमे से अधिकतर लोगो को ये पुरस्कार इनकी काबिलियत पर कम और किन्ही और कारणों से ज्यादा मिला है।
मैं कतई ये नहीं कह रहा की इन लोगो में काबिलियत नहीं है, हाँ इनमे काबिलियत है पर अफ़सोस ये पुरूस्कार इन्हे इनकी काबिलियत के दम पर नहीं बल्कि सत्ता की चौखट पर नाक रगड़ने से मिला है।
खुद ये लोग अवार्ड लेकर खुश भले ही होंगे और अपने बायोडाटा में सोशल साइट पर प्रोफाइल में पदम भूषण, पदम विभूषण, पदम श्री लिख लेंगे लेकिन जब कभी आईने के सामने खड़े होकर खुद से बात करेंगे तो इनका जमीर यदि ज़िंदा रहेगा तो कभी ये गवाही नहीं देगा की ये अवार्ड अपनी काबिलियत के दम पर मिला है।
कैसे ये नजरे मिलाएंगे अपने आप से? क्या किस्से सुनाएंगे अपने बच्चों या भावी पीढ़ी को? यही की हममे काबिलियत तो बहुत थी पर जब हमने सत्ता की चौखट पर नाक रगड़ा तो हमे ये अवार्ड मिला।

Anupam kher Padma Bhushan Award March protest
Anupam Kher Padma Bhushan Award
हम सब जानते है ये अवार्ड का केवल नाटक होता है जिन्हे दिया जाता है वो सब पहले से ही फिक्स होता है, और ऐसा मैं नहीं खुद अवार्ड पाने फ़िल्मी कलाकार और बीजेपी संसद किरण खैर के पति अनुपम खैर भी ये मानते है की अवार्ड पहले से फिक्स होते है और ये अवार्ड केवल एक मजाक बनकर रह गए।

अनुपम खैर का वो ट्वीट जिनमे वो खुद स्वीकार करते है की अवार्ड एक मजाक है और ये पहले से फिक्स होते है।

अवार्ड मिलने से ख़ुशी सबको होती है और होनी भी चाहिए ये गर्व की बात है चाहे फिर वो आपको अपने कार्य क्षेत्र में उपलब्धि से मिला हो या फिर किसी एक ख़ास राजनैतिक दल के लिए काम करने पर मिला हो।

अब आप कहेंगे नहीं भाई अनुपम खैर को उनके काबिलियत के दम पर ये अवार्ड मिला है, चलो कुछ पल के लिए मैं आपकी बात मान भी लेता हूँ, तो भाई ये पुरूस्कार उन्हें आज से पहले क्यों नहीं मिला?

अब आप कहेंगे पहले कांग्रेस पार्टी की सरकार थी तो उन्होंने नहीं दिया! भाई पिछले साल तो भाजपा की ही सरकार थी यही मोदीजी प्रधानमंत्री थे फिर ये पुरूस्कार उन्हें पिछले साल क्यों नहीं मिला?

जब आप इस सवाल का जवाब ढूंढने की कोशिश करेंगे की आखिर इस एक साल में इन जनाब ने ऐसा क्या कर दिया जिससे उन्हें पदम अवार्ड से सम्मानित किया गया? तो आपको जवाब में अपने आप पता लग जाएगा की ये अवार्ड उन्हें उनकी काबिलियत के दम पर नहीं बल्कि चापलूसी और सत्ता के हाथो नाचने के लिए मिला है। अभिनय तो खैर साहब है बहुत वर्षो तक किया है और कर भी रहे है बल्कि सत्ता के लिए किया गया अभिनय उन सभी फ़िल्मी दुनिया के अभिनय (जिनसे आप और हम अनुपम खैर को जानते है) पर भारी पड़ गया और आखिर ये अवार्ड उन्हें मोदी वफादारी के लिए मिल ही गया।

जिस समय देश में अहिष्णुता के खिलाफ समाज के जाने माने लेखक, कवि, फ़िल्मी कलाकार, समाज सेवी अपने अवार्ड वापस करने लगे और देश और दुनिया में मोदी सरकार की फजीहत होने लगी तब इन्ही अनुपम खैर ने मोदी की इज्जत एक मार्च निकालकर बचायी थी, उस इज्जत बचाने के बदले आखिर मोदीजी ने भी उन्हें इस इज्जत से नवाज ही दिया।

पर ये क्या अनुमप खैर साहब आप तो ये अवार्ड पाकर घमंड में आ गए? घमंड कभी भी किसी के लिए अच्छा नहीं होता और ना ही वो ज्यादा समय के लिए टिक पाता है।
अवार्ड मिलते ही आप जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में पब्लिक के बीच खड़े होकर माँ बहन की गाली निकालने लगते हो? खुद की  इज्जत ना करते कम से कम इस अवार्ड की तो इज्जत करते जिससे आपको नवाजा गया है?  एक मंच से खड़े होकर बेहन्चो*** बोलना आपको कहाँ तक शोभा देता है?
यही नहीं क्या आपका ये ट्वीट एक पद्म भूषण अवार्ड प्राप्त व्यक्ति का सा लगता है? जिसमे आपके बेहद ही छिछोरे और गली के आवारा लड़के की भाषा का उपयोग किया?

अर्थात 2010 में और 2013 में जब आपने ये ट्वीट किये थे तब क्या आपने बरनोल का सारा स्टॉक अकेले ने खरीद कर काम में लिया था? तभी तो शायद आपको ये अनुभव होगा की ऐसे समय में बर्नोल को उपयोग होता है? इतने सालो तक आपने तो खूब बरनॉल का उपयोग किया होगा?

सत्ता की चौखट पर नाक रगड़ कर या उनके आदेश से दुम हिलाकर तो ये अवार्ड कोई भी हासिल कर लेता है सरजी, मजा तो तब आता जब आप अपनी काबिलियत के दम पर ये अवार्ड पाते और गर्व से सीना तानकर सबको कह सकते की मुझे पदम भूषण अवार्ड मिला है, नाकि इस घमंड भरी भाषा का उपयोग करते।

"AWARDS in our country have become a mockery of our system.There is NO authenticity left in any one of them.B it films, National or now PADMA"

"Happy, Humbled & Honoured to share that i have been awarded The PADMA BHUSHAN by the Govt. of India. Greatest news of my life:) "

, #PadmaBhushan, #Award, #AnupamKher, #KiranKher, #Kiran, #Jaipur, #LitFest, #LitratureFestival 

रविवार, 17 जनवरी 2016

Thanks Bhawana Arora #KejriwalTheatrics #IncompetentDelhiPolice

धन्यवाद भावना अरोड़ा जी,
आपने आज जो भी किया उससे भी कई लोगों  पोल खुल गयी और एक सबसे बड़ी बात जो अरविन्द केजरीवाल सदा कहता है कि ये सुरक्षा नहीं दे रखी है बल्कि पुलिस के भेष में जासूस छोड़ रखे है को और भी स्पष्ट कर दिया।

अरविन्द केजरीवाल ने एक बार नहीं हजार बार कहा है मुझे नहीं चाहिए ये सुरक्षा वापिस ले लीजिये, लेकिन हकीकत यही है की सुरक्षा का तो केवल बहाना है मोदीजी ने अपने जासूस लगा रखे है ये पता करने के लिए की अरविन्द से कौन कौन मिलने आते है वो कहाँ कहाँ जाते है आदि आदि।

यदि सच में जो ये पुलिस मोदीजी ने अरविंदजी  आगे पीछे लगा रखी है वो उनकी सुरक्षा के लिए होती तो क्या आज भावना जी अपने जेब में स्याही लेकर अरविंदजी के ठीक सामने पहुँच पाती? क्या सच में  सुरक्षा होती तो ये पुलिस वाले जो सुरक्षा के नाम पर तैनात थे वो उस भावना जी अरविन्द जी तक पहुँचने से पहले रोककर ये नहीं जानना चाहते की वो महिला कौन है क्यों वो अरविंदजी के पास जाना चाहती है?

लेकिन सुरक्षा के नाम पर तैनात दिल्ली पुलिस के इन जासूसों ने ऐसा कुछ नहीं किया और भावना अरोड़ा को आसानी से अरविंदजी तक पहुँचने दिया तो स्तिथि स्वतः स्पष्ट हो जाती है की दिल्ली पुलिस अरविन्द के इर्द गिर्द उनकी सुरक्षा में नहीं अपितु उनकी जासूसी में तैनात है।

भावना जी आपकी स्याही ने कईयों के चेहरे से नकाब उतार दिए आज, पहला तो इससे दिल्ली पुलिस पूर्णतया बेनकाब हो गयी।
Bhawana Arora BJP Supporter working for BJP in Aam Aadmi Sena
भावना अरोड़ा, Bhawana Arora, BJP Supporter
मैं तो अब आपके बारे में सोच रहा हूँ भावनाजी, आपने स्याही तो किसी के कहने पर या किसी लालच में आकर फेंक दी लेकिन अपने खुद के लिए एक मुसीबत पाल ली आपने, जिसके भी कहने से आपने ये स्याही फेंकी है कल को वो आपको इसी घटना को लेकर कोई और अपराध करने का दबाव बना सकता है, वरना आपको कहेगा की अब ये नहीं करोगी तो मैं सबके सामने तुम्हारा सच बता दूंगा की कैसे और कितने रूपये लेकर आपने उस समय अरविंदजी पर स्याही फेंकी थी। कुछ तो सोचती ऐसा करने से पहले भावना जी, आप एक औरत है कल को एक माँ भी बनेगी क्या आप यही शिक्षा अपने बच्चे को भी देंगी की स्कूल में टीचर पर स्याही फेंक देना, नौकरी करो तो बॉस पर स्याही फेंक देना?

चलो आप अपने बच्चे को ये शिक्षा नहीं देंगी पर कोई ना कोई तो उसे ये बता ही देगा की उसकी माँ ने कैसे दिल्ली के मुख्यमंत्री पर स्याही फेंकी, और हो सकता है वो भी आपके नक्से कदम पर चले और एक दिन आपको अपने बच्चे के स्कूल की अनुशासन समिति से लेटर मिले की आपके बच्चे को टीचर पर स्याही फेंकने के कारण स्कूल से निष्काषित किया जाता है और उसके चरित्र वाले कॉलम में ये रिमार्क लगा दे तो आप क्या करोगी?
आप अपने बच्चे को किस मुहं से कहोगी की उसने ऐसा क्यों किया? उसे ऐसा नहीं करना चाहिए था? यदि आप उसे ऐसा कहेंगी तो वो आपको कहेगा की ये सब तो उसने आपसे ही सीखा है!!!

भावना जी कुछ लोगों के बहकावे में आकर क्या आपने सच में एक बहुत बड़ी गलती कर दी है?

चलो आपने जो भी किया कभी न कभी आप जब शांत मन से इस बारे में सोचेंगी तो स्वतः खुद को लानत देने लगेंगी और समझ जायेगी की आपने एक अच्छे नागरिक होने का परिचय तो नहीं दिया है। मैं तो आपको फ्हिर भी धन्यवाद ही करना चाहूँगा क्योंकि आपने एक तो सारे दिल्ली वासियों और भारत वर्ष के लोगो को ये दिखा दिया है की जो दिल्ली पुलिस अरविन्द जी के आगे पिछे लगा रखी है वो उनकी सुरक्षा के लिए कतई नहीं है अपितु वो उनकी जासूसी के लिए है, सुरक्षा के लिए होती तो आप  अरविंदजी तक पहुँच पाती और यदि पहुँच पाती तो उससे पहले आपकी तलाशी होती जिसमे आपके पास स्याही मिलते ही आपको सवाल किये जाते और आपको अरविंदजी के पास जाने से पहले ही गिरफ्तार कर लिया जाता।

खैर आपने एक और बात साबित करदी आज की अरविंदजी अब भी आम आदमी ही है और आम जनता उन तक अासानी से पहुँच सकती है जो की भारत के किसी भी मुख्यमंत्री के पास नहीं पहुँच सकती, अरविंदजी के पास आम आदमी तब भी पहुँच पाता था जब वे मुख्यमंत्री नहीं थे और आज भी पहुँच पाता है जब वो मुख्यमंत्री है, ऐसा मुख्यमंत्री भारत को पहली बार मिला है जिस तक हर कोई  पहुँच सकता है, मिल  सकता है, जिस मुख्यमंत्री के पास पहुँचने से पहले आपको कोई रोकता या टोकटा नहीं है, कितना आम और साधारण है ना अरविंदजी आज भी जब वो एक राज्य के मुख्यमंत्री है॥

#KejriwalTheatrics #IncompetentDelhiPolice  #DelhiPolice, #Delhi, #Police, Police, Delhi police, BS Bassi, Arvind Kejriwal, Ink, Bhawana Arora, Who is Bhawana Arora

दिल्ली सरकार की प्रदूषण के खिलाफ जंग #OddEvenPolicy

सबकी पोल खोलता दिल्ली सरकार की प्रदूषण के खिलाफ जंग Odd ईवन फार्मूला 

अब आप कहेंगे इसमें पोल खोलने वाली कौनसी बात है भाई? दिल्ली सरकार ने प्रदूषण कम करने के लिए एक फार्मूला Odd Even अपनाया जिसके तहत सम दिवस को सम नंबर की गाड़ियाँ और विषम दिवस पर विषम नम्बर की गाड़ियाँ चलेगी, बस इतना ही तो है इसमें किसकी क्या पोल खुल गयी?

अभी आप जैसे जैसे ये पढ़ते जायेंगे आपको समझ आएगी कैसे और किन किन लोगो की पोल दिल्ली सरकार के इस एक निर्णय ने खोल दी है। 

चलो इससे पहले की मैं दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार के odd even फोर्मुले का जिक्र करूँ मैं आपको भूतकाल की और लेकर जाना चाहता हूँ, जब केंद्र की मोदी सरकार ने स्वच्छता अभियान की शुरुआत की, क्या आपमें से कोई भी बता सकता है किसी ने उस स्वच्छता अभियान की खिलाफत की? नेता, पार्टी, सामाजिक संगठन, अभिनेता, टीवी चेनल, न्यूज़ एंकर कोई भी ऐसा होगा जिसने इसकी विरोध में कुछ कहा? मैं अभियान के घोषणा और शुरुआत की बात कर रहा हूँ, आप भ्रमित न हो जाए? क्यों इसके विरोध में भी बाते हुयी थी लेकिन वो बाद में जब मोदी सरकार के मंत्री केवल एक फोटोशूट के लिए हाथ में झाड़ू लेकर खड़े जाते है और सफाई का नाटक करने के लिए पहले कुछ कार्यकर्त्ता पेड़ो पत्ते वहाँ पर बिखेर देते है और बाद में भाजपा मंत्री हाथ में झाड़ू लेकर फोटो शेसन करके चले जाते है। 

मुझे तो कही भी ऐसा याद नहीं आ रहा जहाँ पर किसी भी टीवी चैनल, एंकर, संवाददाता किसी ने भी इसका विरोध किया हो या इसकी खिल्ली उड़ाई हो। 

चलो अब आते है आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार द्वारा प्रदूषण के खिलाफ जंग में सम विषम नियम की घोषणा, जैसे ही दिल्ली सरकार ने इसकी घोषणा की कुछ टीवी चैनल, एंकर और भाजपा व कांग्रेस के तमाम नेता व प्रवक्ताओ ने इसकी जबरदस्त खिलाफत की, चेनलो ने अपने आप से केवल इस अभियान की घोषणा भर मात्र पर प्रश्नचिन्ह लगाकर कुछ इस तरह की कोशिश की जैसे वो इस स्कीम के शुरू होने से पहले ही दिल्ली में ऐसा माहोल बनाने की कोशिश कर रहे हो की दिल्ली की जनता इसके खिलाफ होकर सड़को पर उत्तर आये और इस स्कीम को लागु न होने दिया जाए। 

आखिर क्या चाहते है ये टीवी चैनल व भाजपा कांग्रेस के नेता? दिल्ली की हवा जहरीली हो चुकी है, डॉ त्रेहान ने तो दिखाया है कैसे दिल्ली के लोगो के फेफड़े काले है जबकि अन्य राज्य के लोगो के फेफड़े काले नहीं है, उस कालेपन का कारण दिल्ली की हवा में घुला हुआ जहर है जिसे दिल्ली की जनता श्वांश के दवारा अंदर लेने को मजबूर है, ऐसी स्तिथि में यदि किसी सरकार इसे प्राथमिकता पर लेते हुए कुछ कठोर कदम उठाये है तो बजाय इसके की इस मुहीम का समर्थन किया जाए और इसे सफल बनाने में जितना योगदान दिया जा सके उतना योगदान दे के विपरीत सब के सब लग गए की कैसे भी करके इस  योजना को फेल किया जाए? भारतीय जनता पार्टी की सोशल मिडिया टीम ने बिलकुल इसके विरोध में सोशल मिडिया पर #OddEven_का_रायता नाम से हेश टैग भी लॉन्च किया। 

यदि किसी ने इसका विरोध नहीं किया तो वो थी दिल्ली की जनता, हाँ बिलकुल दिल्ली की जनता ने इस मुहीम का खुले दिल से स्वागत किया और दिल्ली की आबो हवा को साफ़ करने के लिए इस कठोर कदम का स्वागत ही नहीं किया अपितु अपनी तरफ से पूरा सहयोग किया, मानो  जनता ने इसे सरकारी आदेश ना मानते हुए  एक आंदोलन, एक मुहीम केरूप में स्वतः ही अपना लिया हो। 

जब जनता का साथ हो तो और क्या चाहिए, और वैसे भी ये दिल्ली की जनता के  लिए किया जा रहा था तो जो भाजपा, कांग्रेस के नेता और कुछ मीडिया वाले इसके खिलाफ थे उनकी क्या परवाह करना आखिर दिल वालो की दिल्ली का समर्थन जो मिल चुका था। 

हाँ यदि किसी चैनल ने इसका समर्थन किया तो मेरी नजर में वो चैनल है NDTV इंडिया हिंदी चैनल जिसने इस मुहीम का खुला समर्थन किया और अपनी तरह से भी एक मुहीम #ICantBreath शुरू की जिसमे वो बार बार दिल्ली की जनता से अपील करते रहे ओड ईवन का पालन करने की। 

प्राइम टाइम शो में रविश कुमार ने तो इस बार खुली बहस भी करवाई और कई रिपोर्ट पेश कर इसका समर्थन करते हुए यहां तक कहा की 1 जनवरी का इन्तजार क्या करना इसे तुरंत लागू करना  चाहिए दिल्ली की हवा पूरी तरह जहरीली हो चुकी  थी और इसे रोकना अत्यधिक जरूरी थी, ये भले किसी को बाहरी तौर पर आसानी से दिखाई ना दे पर इसे आप एक महामारी से भयंकर मान सकते हो, दिसंबर माह में दिल्ली में प्रदूषण का स्तर हर दिन खतरे से ऊपर था जिसे रोकना बेहद जरुरी था, अब इन सब बातो का तमाम समाचार चैनल वालो, भाजपा, कांग्रेस सबको पता था लेकिन फिर भी दल्ली सरकार के इस कदम का साथ ना देकर इसकी खिलाफत करना? 
क्या सिद्ध करता है? की अपनी राजनितिक विरोधी पार्टी को निचा दिखाने के लिए वो किसी भी हद्द तक गिर सकते है? बहुत अफ़सोस होता है इन पार्टियों के नेताओ पर जो इस तरह की ओछी हरकत से भी बाज नहीं आये, ये तो लाख लाख शुक्र है दिल्ली की जनता का हो इनके किसी बहकावे ने नहीं आई और खुले दिल से इस मुहीम का स्वागत ही नही किया अपितू पूरी दुनिया के सामने एक उदाहरण पेश किया की कैसे दिल्ली की जनता सरकार के इस फैसले के साथ खड़ी होकर इसे सफल करवाती है। 

आया समझ में कैसे और किनकी पोल खोली इस मुहीम ने? 

ये मिडिया वाले कुछ चैनल, और देश के  प्रमुख पार्टियाँ जिन्होंने अब तक इस देश पर राज किया वो तो बिलकुल से ही बेनकाब हो गयी, चलो इसी बहाने लोगो को इन पार्टियों और मीडिया हॉउस की सच्चाई और मानसिकता तो पता लगी। 

जब दिल्ली में ओड ईवन चल रहा था तब NDTV ने इसकी सच्चाई जानने के लिए एक एम्बुलेंस के द्वारा परीक्षण किया तो पाया की एक निश्चित दुरी जिसे पूरा करने में इस मुहीम के शुरू होने  35  मिनट लगती थी, ओड इवन के दौरान वहीं दूरी मात्र 18 मिनट में पूरी की। तो आप अंदाजा लगा  सकते है कैसे ये स्कीम  के हित में थी। 
धन्यवाद दिल्ली ये सब केवल आपके सहयोग से संभव हो पाया। 

#OddEvenPolicy, #OddEvenFormula, #OddEven, #OddEvenSuccess, #ThanksDelhi, #धन्यवाद_दिल्ली, #सम_विषम_नियम, Aam Aadmi party, Delhi Government, Arvind Kejriwal

शुक्रवार, 15 जनवरी 2016

वाह मोदीजी वाह - Vaah Modiji Vaah #MakeInIndia

वाह मोदीजी वाह,
मेरा भारत, सवा सो करोड़ भारतीय, हिन्दुस्तान की काबिलियत
आप ने एक पल में इन सबको ताक पर रख दिया?
भारत माँ के लाडलो पर एक तरफ जहाँ सारी दुनिया नाज करती है और उनकी बुद्धिमता का लोहा मानती है आपने उसी भारत माँ के लाडलो पर तनिक भी भरोसा नहीं किया?
अफ़सोस!!!
अफ़सोस आपने एक पल के लिए भी नहीं सोचा की  इन सवा सो करोड़ भारतीयों में इस अदने से काम के लिए किसी में  भी काबिलियत नहीं है?
मेक इन इंडिया Make In India
बात करते हो मेक इन इंडिया "Make In India" की और उसी की नींव आपने विदेशी हाथो में दे दी?
जी हाँ मैं उसी मेक इन इण्डिया की बात कर रहा हूँ,  जिसकी बात आप बड़े गर्व से करते है, पर अफ़सोस इसकी नींव रखने का मौका भी आपने उस भारत को नहीं दिया जिस भारत में आप बनाना चाहते है।
क्या करूँ आपके इस दोगलेपन पर हंसु या गुस्सा करूँ या सारी दुनिया के सामने चिल्ला चिल्ला कर कहूँ की ये देखो हमने शुरुआत की मेक इन इंडिया की लेकिन हमे उसी इंडिया पर कोई भरोसा नहीं है जिसके लिए हम आपसे कह रहे है की आओ और हमारे भारत  में निर्माण करो।
हाँ आपसे कहूँगा  की भारत में आकर बनाओ, मेक इन इंडिया लेकिन मैं इसी मेक इन इंडिया का लोगो तक इस भारत में नहीं बनवाऊंगा।
कितने दुर्भाग्य की बात है भारत और भारतवासियों के लिए की मोदीजी ने उन्हें इस लायक भी नहीं समझा की वो एक लोगो तैयार कर सके।
मैं तो सोच रहा हूँ आप किस मुहँ से दुनिया को कह रहे हो की आइये और हमारे भारत में निर्माण कीजिये, निवेश कीजिये।
सोचो आप किसी देश में बड़े बड़े पूंजीपतियों, आद्योगिक घरानो के सामने आवाहन कर रहे है "आइये और  हमारे भारत में निवेश कीजिये, आप भारत में अपना प्रोडक्शन किजिये, हममे मेक इन इंडिया  शुरू की है"
और ठीक उसी पल उस  भीड़ में से कोई एक आदमी खड़ा होकर आपसे कहे
"मोदीजी किस भारत मैं आकर निवेश करे? उसी में जो अपनी इस मुहीम का लोगो तक नहीं बना सकता, एक छोटा सा लोगो तो आपको विदेशो में बनवाना पड़ता है और हमे आप कह रहे है की भारत में आकर निर्माण करे?"
क्या आप उस समय उन सब लोगो से नजरे मिलाकर बात कर सकोगे?
क्या मजबूरियां है आपकी मोदीजी जो आप इस सवा सो करोड़ भारतीयों को इस गर्व का मौका नहीं देना चाहते?
कितना अच्छा होता इसी भारत का कोई लाल ये #मेक_इन_इंडिया का लोगो बनाता और उसकी पीढ़िया भी ये किस्से दुनिया भर को सुनाती की हमारे वंशज ने मेक इन इंडिया की नींव में अपना योगदान दिया था।
भारतीय बहुत ही खुले दिल के होते है मोदीजी आपकी जो  मजबूरियां है सबके सामने सच्चे दिल से रखो, ये भारत माँ के लाल आपके साथ खड़े दिखाई देंगे पर ऐसे इनका अपमान तो मत करो प्लीज॥
ये रही वो RTI की खबर के लिंक जिनसे इस बात का खुलासा हुआ कि "#MakeInIndia" का लोगो विदेश में बना है।
 http://economictimes.indiatimes.com/news/economy/policy/make-in-india-logo-designed-by-foreign-firm-says-rti/articleshow/50574597.cms?platform=hootsuite

 

बुधवार, 13 जनवरी 2016

#OddEvenFormula - सम विषम नियम विदेशी मिडिया कवरेज

#सम_विषम_फार्मूला #OddEvenPolicy
अरविन्द केजरीवाल के नेतृत्व ने बनी आम आदमी पार्टी की  दिल्ली सरकार ने दिल्ली वासियों के काले फेफड़ो की कालिख को मिटाने का ऐतिहासिक और बहुत साहसिक कदम उठाया, जिसे दिल्ली की जनता ने ही नहीं देश और विदेशो में भी सराहा गया।

एक तरफ दुनिया भर के तमाम मिडिया में इसे कवरेज मिला तो दूसरी तरफ दिल्ली की जनता ने इसे दिल सा प्यार किया और अपनाया, आखिर दिल्ली की जनता की ही भलाई के  लिए था तो अपनाना तो स्वाभाविक था।
दिल्ली सरकार द्वारा हाई कोर्ट  में पेश की गयी रिपोर्ट के मुताबिक़ दिल्ली में प्रदूषण काफी हद तक कम हुआ है।

इटली की सबसे प्रमुख समाचार एजेंसी ANSA ने भी इसे कुछ इस तरह अपनी वेबसाइट पर लिखा है।

Link of original news

हिंदी अनुवाद :-

दिल्ली में अल्टेरनेटिव नंबर प्लेट, धुंध(smog) में गिरावट 

सरकार का कहना १० दिन बाद ५०% तक गिरावट 


नई दिल्ली सरकार का कहना है की पहली जनवरी से लागू किये गए अल्टरनेटिव नंबर प्लेट फॉर्मूले की वजह से यातायात ट्राफिक में भारी गिरावट आई और इसकी वजह से दिल्ली में वातावरण प्रदूषण ५०% तक कम हुआ है।
विशेष रूप से PM 10 और PM ,5 बहुत तेजी से गिरा है।

(और यहां पर भारतीय मीडिया की पोल भी खोल दी ये लाइन मेरा कमेंट है ANSA की न्यूज़ का अंश नहीं है )

हालांकि भारतीय मिडिया का कहना है की हवाओं की वजह से महानगर पर छाया धुआँ (कोहरा, स्मोग) हट गया। अल्टेरनेटिव नंबर प्लेट 15 जनवरी तक जारी रहेगी।
 

रविवार, 27 दिसंबर 2015

#MannKiBaat विकलांग की जगह दिव्यांग का प्रयोग करे

Modiji on Mann ki Baat Vikaalng Divyang
#MannKiBaat PM Narendra Modi
आज फिर वो रविवार था जब हमारे प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदीजी को रेडियों पर मन की बात करनी थी, हाँ कुछ ऐसा ही नाम दिया है इस कार्यक्रम को #मन_की_बात।
देश के असंख्य लोगो को इन्तजार भी रहता है की शायद आज मोदी जी मन की बात की जगह कोई ढंग की बात करेंगे या यो कहे कोई काम की बात करेंगे।
अफ़सोस इस बार भी देश को निराशा ही हाथ लगी, जो आज की मन की बात का मुख्य बिंदु रहा वो है प्रधानमंत्री जी देशवासियों को कहा है की विकलांगो को दिव्यांग कह कर पुकारे!!!
चलो प्रधानमंत्रीजी आपकी बात मान ली विकलांगो को दिव्यांग कह कर बुला दिया अब क्या हुआ? क्या वो दिव्यांग ठीक हो गया? क्या उसकी स्तिथि में कुछ सुधार हो गया? नाम बदलने से क्या हो गया मेरी तो समझ से बाहर की बात है।
भारत वर्ष में महिलाओ के नाम के आगे देवी लगाया जाता है, लेकिन सारी दुनिया जानती है उन देवियों की हालत क्या है, आज भी हमारा समाज उन्हें देवी जैसा सम्मान नहीं दे पाया, नई वधु को जब घर में प्रवेश करवाते है तो उसे गृह लक्ष्मी कहते है पर ना जाने कितनी ही गृह लक्ष्मियों को शादी के कुछ ही महीनो बाद अनगिनत प्रताड़नाओं का सामना करना पड़ता है और बहुत सी गृह लक्ष्मिया ये जीवन छोड़ने पर मजबूर हो जाती है।
पूरे देश का तो पता नहीं पर हमारे राजस्थान में महिलाओ को घर की मालकिन कह कर पुकारा जाता है, जब भी कोई बात होती है तो यही कहते है
"भाया मालकण नै पूछणो पड़सी"
पर वो केवल नाम की ही मालकिन है उनकी दशा जो घर में होती है वो तो नौकर से भी बदतर होती है।
तो फिर विकलांगो को दिव्यांग कहने से क्या बदल जाएगा मोदीजी?

अच्छा तो होता आप देश के प्रधानमंत्री है, और वो भी पूर्ण बहुमत से कुछ ऐसी घोषणा करते जिससे उन विकलांगो को अंग प्रत्यारोपण में सरकार सहयोग करती और उन्हें सच में दिव्यांग बनाया जा सकता, इन ढकोसलों और थोथी बातो की जगह कोई काम के बात की घोषणा करते।

आज विज्ञान ने इतनी तरक्की कर ली है की किसी भी अंग का प्रत्यारोपण होना संभव हो गया है, यदि आप सच में विकलांगो/दिव्यांगों के लिए कुछ करना चाहते थे सरकार की तरफ से ऐसे नए हॉस्पिटल की घोषणा करते जहां उन विकलांगो को सरकार फ्री या बहुत कम खर्च में अंग प्रत्यारोपण करती वो होता सच में एक प्रधानमंत्री  का काम।

चलो इतना बड़ा काम भी आप  नहीं करना चाहते तो ये तो सारी दुनिया को पता है कि दिल्ली विश्व में सबसे प्रदूषित शहरो की गिनती में आता है और उस प्रदूषण की वजह से ना जाने कितनी बीमारियाँ लोगो को जकड रही है और आने वाली पीढ़िया शायद दिव्यांग पैदा होने लग जाए, आज दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने उस प्रदूषण रूपी दानव को खत्म करने के  लिए पहल की है, अच्छा होता आप मन की बात में केवल १ मिनट भी उस पर बोलते, दिल्ली वासियों को आग्रह करते की ये कदम उन्ही के बच्चो के स्वास्थ्य के लिया उठाया जा रहा है उसमे सहयोग करे, जैसे आपने स्वच्छ भारत का आग्रह किया था प्रदूषण मुक्त दिल्ली का भी आग्रह कर सकते थे?
या केवल ये सब इसीलिए नहीं किया की ये दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार कर रही है, तो आप उनके किसी भी अच्छे काम को सफल होता कैसे देख सकते है?

इतनी भी क्या दुश्मनी प्रधानमंत्रीजी? और फिर दुश्मनी किस बात की? क्या आप दिल्ली की जनता के प्रधानमंत्री नहीं है? दिल्ली पूर्ण राज्य नहीं है अर्थात आपकी तो और भी ज्यादा जिम्मेदारी बनती है दिल्ली की जनता के प्रति तो फिर अपने घमंड और अहम से बाहर आकर दिल्ली की जनता से बहुत बड़ी हार की जलन आज भी आपकी रातो की नींद हराम करती है उसे सच्चे दिल से स्वीकार करे, जिस प्रधानमंत्री को पूरे देश यहां तक की दिल्ली भी बहुत भारी बहुमत से उस पद तक पहुंचाया है उसी दिल्ली ने उन्हें इतनी बड़ी हार कुछ ना कुछ सन्देश देने के लिए दी है तो उस सन्देश को समझे और दिल्ली की जनता के हित में हो रहे कार्यों पर खुलकर समर्थन करे और अपना सहयोग दे, वरना तो जो दिल्ली की जनता ने दिया था वो अन्य राज्य भी आप तक पहुँचा  सकते है।

धन्यवाद । जय हिन्द ॥

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शनिवार, 26 दिसंबर 2015

Vasundhra Raje Celebrate 2 year - वसुंधरा राजे का 2 साल का सेलेब्रेसन

राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया ने अपने दो साल पूरे होने पर एक भव्य आयोजन किया जिसमे पूरे प्रदेश से बसे भरकर भरकर लोगो को इस समारोह को सफल बनाने और भीड़ जुटाने के लिए लाया गया।
खैर मैं ही लेट हूँ ये ब्लॉग लिखने में वसुंधरा राजे ने ये महोत्सव कई दिन पहले ही मना लिया था।

मैंने काफी कश्मकश के बाद भी इस सवाल का जवाब नहीं खोज पाया कि आखिर ये किस बात का जश्न मनाया गया?
ऐसा कौनसा काम राजस्थान की भाजपा सरकार ने इन 2 साल में कर दिया जिससे की उसे एक जश्न मनाकर प्रदेश की जनता को दिखाने की जरुरत पड़ गयी। मैंने  वसुंधराजी के सम्बोधन को भी सुना ये जानने के लिए कि आखिर वे कुछ तो बताएंगी प्रदेश की जनता को की आखिर वो क्या दिखाने के लिए जश्न मना रही है।
अफ़सोस उनके सम्बोधन में भी मेरे इस सवाल का जवाब नहीं ढूंढ पाया।

फिर मुझे ख्याल आया अपने कुछ भाजपा मित्रों को फोन करने  का, तो लगे हाथो मैंने  राजस्थान भाजपा के दो सक्रिय कार्यकर्ताओ को फ़ोन करके उनसे कुशल क्षेम पूछने के बाद मैं अपने असली मुद्दे पर आ गया।

मैंने कहा: और तो ज्यां आया के वसुंधरा का जश्न में 
दोस्त: क्याका ज्या आया यार, फ़ालतू में कतरी जनता परेशान होगी, जोरामरदी लोगां ने पकड़ पकड़ कर लेगा और सगळा बठै थू थू ही कर रया  हां, बिना फ़ालतू का नाटक। 

अब तो ये सवाल और पेचीदा होने लग गया और खुद को संतुष्ट करने के लिए एक तर्क संगत जवाब पाना भी जरुरी था, खैर वसुंधरा राजे ने अपने सम्बोधन में दो तीन बार ये तो जरूर कहा की उन्होंने इन दो सालो में बहुत काम किये है, पर बताया एक भी नहीं, अब कौनसे काम किये है वो ही जाने, प्रदेश की जनता त्राहि त्राहि कर रही है, बिजली की दाम दोगुने से भी ज्यादा कर दिए, सरकारी प्राइमरी स्वास्थ्य केंद्र को निजी हाथो में दे दिया, रोडवेज कर्मचारी कई महीनों से बिना तनख्वाह के बैठे है और अंततः मजबूर होकर धरने प्रदर्शन भी करते है, बिजली विभाग के कर्मचारी भी हड़ताल पर चले जाते है, महंगाई तो बेटी की तरह बढ़ती ही जा रही है और आम आदमी रोज इसी चिंता में डूबा रहता है की आज का दिन तो निकल गया अब कल का कैसे निकलेगा।

खैर मैंने जो एक तर्क संगत निष्कर्ष निकाला उससे ये निकलकर सामने आया कि कहीं ये सारी कवायद मोदीजी को ये दिखाने के लिये तो नहीं की कैसे उनकी लाख कोशिशो के बावजूद भी वो उस कुर्सी पर  मजबूती से टिकी हुयी है और मोदीजी उसका कुछ नहीं बिगाड़ पाये, बिगाड़ पाना तो दूर उनसे इस्तीफा भी नहीं ले पाये।
मोदीजी और वसुंधरा राजे के बीच में रिश्ते सामान्य नहीं है ये तो सर्व विदित है, चाहे वो राजे के बेटे दुष्यंत कुमार को मंत्री पद का मामला हो, या ललित गेट कांड में मोदीजी सहित केंद्र भाजपा की चुप्पी, या फिर वसुंधरा सरकार के एक चहेते अधिकारी के यहां CBI का छापा, अब मोदीजी की इतनी तो हिम्मत नहीं हुयी की अरविन्द केजरीवाल के दफ्तर की तरह वसुंधरा राजे के दफ्तर में CBI भेज सकते पर किसी तरह है उन्हें आरोपों के घेरे में लेने के लिए उनके एक अधिकारी के यहां तक CBI जरूर भिजवा दी गयी।

ललित मोदी काण्ड के समय तो समस्त भाजपा चुप थी, आज जिस तरह अरुण जेटली को बचाने तमाम भाजपा नेता उनके पक्ष में सामने आ रहे है, या फिर इसी ललित मोदी काण्ड में सुषमा स्वराज को बचाने के लिए जिस तरह भाजपा आगे आई वो फुर्ती वसुंधरा राजे के लिए केंद्र भाजपा द्वारा नहीं दिखाई गई, जैसे की मोदी मण्डली को मौका मिल गया हो वसुंधरा को घेर कर उन पर इस्तीफे के लिए दबाव बनाने का।

खुद अमित शाह राजस्थान में आये ये पता करने के लिए की यदि वसुंधरा को जबरदस्ती पद छोड़ने पर मजबूर किया जाए तो पार्टी को क्या नुक्सान हो सकता है, पर इस बात की तो तारीफ़ करनी पड़ेगी की राजस्थान भाजपा का एक बहुत बड़ा हिस्सा मजबूती से वसुंधरा राजे के साथ खड़ा था, तो अमित शाह को जब लगा की इससे तो पार्टी में बड़ी भयंकर गुटबाजी सामने आएगी और इसका खामियाजा उन्हें अन्य प्रदेशों में भी भुगतना पड़ सकता है, हो सकता है फिर एंटी मोदी गुट वाली भाजपा एकजुट हो जाये और शायद एक बहुत बड़ी विद्रोह की लहर सामने आ जाए।

जब इन सारे पहलुओ पर विचार किया तब कही जाकर केंद्र भाजपा की तरफ से वसुंधरा के बचाव में कुछ आवाजे मज़बूरी में निकलकर सामने आई।

तो जरूर वसुंधरा राजे को हक़ बनता है कि वो मोदीजी को एक जश्न के माध्यम से ये सन्देश दे सके की देखलो कर दिए दो साल पूरे, कोशिश करने वालो ने बहुत की थी इस कुर्सी से धकेलने की पर मैं फिर भी बैठी हूँ और अपनी इस कामयाबी को दिखाने के लिए एक जश्न तो बनता ही है.....

मेरे इस लेख से किसी की भावनाए आहत हुयी हो तो मैं उनसे करबद्ध क्षमा चाहता हूँ, मन के विचार यदि यहां भी नहीं लिखूंगा तो कहाँ लिखू, खैर मैं ये सब बाते बिना किसी प्रमाण के लिए लिख रहा हूँ, सब मेरे अपने निजी विचार है।
धन्यवाद । जय हिन्द । वन्दे मातरम
 

रविवार, 20 दिसंबर 2015

Kirti Azad save Arun Jaitley or Expose?

पता नहीं क्यों मुझे नहीं लगता की आज कीर्ति आजाद अरुण जेटली को DDCA के घोटालो में एक्सपोज़ करेगा।
जिस तरह है भाजपा कीर्ति आजाद पर सॉफ्ट कार्नर बनाये हुए है उसे देखकर तो ये  लगता है की आज कीर्ति आजाद इस पूरे मामले को एक नया मोड़ देंगे।
हाँ वो DDCA के भ्रष्टाचार पर बात जरूर करेंगे, कुछ लोगो को उसमे घेरेंगे भी पर किसी ना किसी तरह वो भी शायद आज अरुण जेटली को क्लीन चीट दे ही देंगे।
यदि ऐसा नहीं होता तो अब तक भाजपा नेता कीर्ति आजाद के खिलाफ मोर्चा  खोल चुके होते, अब तक तो वो कीर्ति आजाद पर हजारो मन गढंत आरोप लगा चुके होते।
जैसा की अब तक भाजपा करती आई है, यदि कोई भी उनके भीतर से पार्टी के खिलाफ या किसी बड़े नेता के खिलाफ आवाज उठाता है तो तुरंत भाजपा का एक वर्ग उस पर हमला बोल देता है, या उसके किसी  अन्य पार्टी से लेकर समबन्धों को उजागर करने लग जाते है।
ना तो भाजपा का सोशल मीडिया कीर्ति आजाद पर कोई हमला बोल रहा है, और ना ही पार्टी के प्रवक्ता या नेता उन पर किसी तरह के आरोप प्रत्यारोप कर रहे है।
इन सबको लेकर तो यही लगता है की कहीं ना कहीं सारा मामला सेट है, आज कीर्ति आजाद की प्रेस कॉन्फ्रेंस और अरुण जेटली को फाइनली क्लीन चिट, क्योंकि आखिर पिछले कई वर्षो से कीर्ति आजाद DDCA के घोटालो पर लगातार बोल रहे है तो यदि उनसे जेटली जी को क्लीन चिट दिलवा दी जाए तो वो सबसे बड़ी क्लीन चिट होगी, और जहां तक मुझे लगता है भाजपा की यही रणनीति होगी जिससे वो इस मुद्दे को लेकर जिन्होंने भी अरुण जेटली को घेरा है उन पर हमला कर सके और जेटली को पाक साफ़ घोषित किया जा सके।
चलो देखते है क्या होता है, थोड़ी ही देर में PC शुरू होने वाली है।
मैं भी आपके साथ यही बैठा हूँ देखने के लिए क्या होता है आज की PC में, क्या कीर्ति आजाद अरुण जेटली को बचा ले जाएंगे या उन पर भ्रष्टाचार के आरोप को मजबूती प्रदान करेंगे
जय हिन्द

सोमवार, 26 अक्टूबर 2015

तो क्या अभी तक मोदी सरकार ने कोई काम नहीं किया?

हाँ, बिलकुल सही पढ़ा आपने, मैं अपने आप से यही सवाल पूछ रहा हूँ कि क्या मोदीजी ने सरकार बनने के डेढ़ साल में भी कोई काम नहीं किया?

अब आप पूछोगे कि आखिर मैं ऐसा क्या सोच रहा हूँ?

इसके पीछे भी कारण है बिहार की चुनाव रैली जिनमे प्रधानमन्त्री सब कुछ भूलकर एक पार्टी के प्रचारक के रूप में चुनावी सभा करते घूम रहे है, मैंने कुछ चुनावी सभाओ में मोदीजी का सम्बोधन सुना और उससे सुनने के बाद ही मेरे  मन में ये सवाल आया कि आखिर मोदीजी के पास ऐसा कुछ भी नहीं जिसे वे अपनी उपलब्धि के रूप में सबको बता सके?

यदि इन डेढ़ साल में कुछ काम किया होता तो आज बिहार की चुनावी सभाओ में मोदीजी को लालू और नितीश को गाली देने के बजाय अपने काम गिनाने से ही फुर्सत नहीं होती और बिहार की जनता से वोट भी यही कहकर माँगते की देखो आपने मुझे केंद्र की सत्ता दी तो मैंने ये ये काम केंद्र सरकार में किया है, ये देखिये मैंने कैसे देश में विकास की गंगा बहा दी है, ये देखिये हमने लोकसभा चुनाव से पहले जनता से ये वादे किये थे और जनता ने हमे इन्ही वादो को पूरा करने के लिए पांच साल  के लिए सत्ता सौपी थी और आज डेढ़ साल में हमने आपसे किये वादो में इतने वादे पूरे कर दिए है, इन वादो पर काम चालू हो चुका है, इन वादो पर अभी विचार विमर्श चल रहा है आदि आदि!

सच में यदि केंद्र में मोदी सरकार इन डेढ़ साल में कुछ काम करती तो  बिहार की जनता को उन्हें सुनाने के लिए गाली और व्यंग की जगह अपने कामो की लिस्ट होती जो की उनके पास नहीं है।
ना ही लोकसभा चुनाव के वादो का जिक्र है और उससे भी हैरानी की बात है सरकार बनने के बाद ज्यादातर समय विदेशो में बिताने वाले प्रधानमन्त्री के पास तो अपने विदेशी दौरों की भी कोई बताने लायक उपलब्धि नहीं है वरना तो वो इसी का बखान करते रहते।

हाँ उनके पास कुछ है  तो वो है झूठे वादे या अमित शाह की भाषा में  कहे तो उनके पास है जुमले हाजी वही जुमले जो लोकसभा चुनाव से पहले वादो के रूप में जनता से किये गए और चुनाव जितने के बाद एक पत्रकार को बुलाकर अपने वादो को जुमला घोषित कर दिया जाता है, आज वही खेल बिहार में कर रहे है, हम ऐसा कर देंगे, हम वैसा कर देंगे, अरे भाई कर देंगे, कर देंगे? ये भी  बताओ केंद्र में पूर्ण बहुमत की सरकार है वहां पर आपके क्या किया है?

है कुछ बताने लायक? नहीं है ना?

बहुत हुई महंगाई की मार, अबकी बार मोदी सरकार!!

सुन सुनकर कान पक चुके थे लोकसभा चुनाव से पहले लेकिन ख़ुशी थी जब केंद्र में पूर्ण बहुमत वाली भाजपा की मोदी सरकार बनी, एक तसल्ली थी की कम से कम अब महंगाई पर तो लगाम लगेगी, पर ये कैसे लगाम ऐसा लग रहा है जैसे लगाम तो लगादी मोदीजी ने महंगाई पर, लेकिन वो लगाम किसी और(कुछ पूंजीपतियों) को सौप दी तभी तो आज सब्जी, प्याज, दाल, टमाटर हर चीज के भाव आसमान छू रहे है, दाल तो मानो आम आदमी की पहुँच से बाहर की बात हो गयी है, हम हॉस्टल में थे तो अक्सर दाल ही बनाते थे क्योंकि यदि खाना खाते समय भी दो दोस्त और आ जाते तो चूल्हे पर पड़ी दाल में एक गिलास पानी और ज्यादा कर देते और हंसकर बोलते "दे दाल में पानी" अब तो दाल आम आदमी की पहुँच से बाहर हो गयी है और केंद्र की मोदी सरकार चुपचाप हाथ पर हाथ धरी बैठी है, आखिर कौनसी महँगाई कम करने की बात लोकसभा चुनाव से पहले मोदीजी करते थे?
खैर ऐसा लगता है इन डेढ़ सालो में वर्तमान मोदी सरकार के पास यदि कुछ है तो वो है विफलताओं की एक लम्बी लिस्ट और जाहिर है कोई भी सरकार अपनी विफलताएं किसी को  बताएगी, तो अब चुनावी सभा में कुछ बोलने को बचा है तो वो है सामने वालो को जी भरकर गाली निकालो, जनता के सामने झूठे वादो की झड़ी लगादो और ये काम मोदीजी बखूबी कर रहे है।

आशा है बिहार की जनता सब कुछ देख और सोच समझ रही होगी, और अपना वोट देने से पहले सही और गलत को परखकर बिहार के उज्जवल भविष्य के लिए सही आदमी को चुनेगी।

जय हिन्द॥

वन्दे मातरम॥


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शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2015

ऐसी होती है माँ - Copied

एक माँ चटाई पर लेटी आराम से सो रही थी......
मीठे सपनों से अपने मन को भिगो रही थी.......

तभी उसका बच्चा यूँ ही घूमते हुये समीप आया....
माँ के तन को छूकर हल्के हल्के से हिलाया.....

माँ अलसाई सी चटाई से बस थोड़ा उठी ही थी....
तभी उस नन्हें ने हलवा खाने की जिद कर दी....

माँ ने उसे पुचकारा और अपनी गोदी में ले लिया.....
फिर पास ही रखे ईटों के चूल्हे का रुख किया....

फिर उसने चूल्हे पर एक छोटी सी कढाई रख दी...
और आग जलाकर कुछ देर मुन्ने को ताकती रही....

फिर बोली बेटा जब तक उबल रहा है ये पानी....
क्या सुनोगे तब तक कोई परियों बाली कहानी...

मुन्ने की आंखें अचानक खुशी से थी खिल गयी....
जैसे उसको कोई मुँह मांगी मुराद ही मिल गयी...

माँ उबलते हुये पानी में कल्छी ही चलती रही....
परियों का कोई किस्सा मुन्ने को सुनाती रही....

फिर वो बच्चा उन परियों में ही जैसे खो गया....
चटाई पर बैठे बैठे ही लेटा और फिर वहीं सो गया.....

माँ ने उसे गोद में ले लिया और धीरे से मुस्कायी.....
फिर न जाने क्यूँ उसकी आंख भर आयी.....

जैसा दिख रहा था वहां पर, सब वैसा नहीं था.....
घर में रोटी की खातिर एक पैसा भी नहीं था....

राशन के डिब्बों में तो बस सन्नाटा पसरा था....
कुछ बनाने के लिए घर में कहाँ कुछ धरा था....

न जाने कब से घर में चूल्हा ही नहीं जला था.....
चूल्हा भी तो माँ के आंसुओं से ही बुझा था......

फिर मुन्ने को वो बेचारी हलवा कहां से खिलाती....
अपने जिगर के टुकड़े को रोता भी कैसे देख पाती.....

अपनी मजबूरी उस नन्हें मन को मां कैसे समझाती....
या फिर फालतू में ही मुन्नें पर क्यों झुंझलाती.....

हलवे की बात वो कहानी में टालती रही.....
जब तक वो सोया नहीं बस पानी उबालती रही.....

ऐसी होती है माँ

नोट: ये रचना मेरी नहीं है, पर मुझे बहुत ही अच्छी लगी तो आप सभी के साथ शेयर करने के लिए यहाँ कॉपी-पेस्ट कर दिया। 

बुधवार, 14 अक्टूबर 2015

माता रानी स्वागत है आपका पूरे एक साल बाद

Maata Rani ka Darbar at Ram Kiroriwal House, 2015
माता रानी का दरबार, नवरात्रि 2015
सर्व मंगल मांगलेय, शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्य त्र्यंबके गौरी नारायणी नमोस्तुते॥

शारदीय नवरात्रे यानि माता रानी से मिलने का मौका, वैसे तो माँ सदा बेटे के पास ही होती है पर ये 9 दिन कुछ ख़ास होते है, सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक बस माता रानी ही दिलो दिमाग पर छायी रहती है।

आज सुबह जल्दी उठा और तैयारी शुरू करदी माता के आगमन की, अरे भाई माता रानी आने वाली है तो सब कुछ उनके स्वागत में तैयार तो करना ही है, वैसे तो तैयारी रविवार को शुरू हो गयी थी, जो आवश्यक चीजे है पूजा पाठ के लिए उनकी खरीददारी तो पहले ही कर ली थी, तो आज का काम रह गया था माता के लिए आसान सजाना और पूजा की शुरुआत करना।

तो उठते ही तैयारी शुरू, स्नान करने के पश्चात माता का कमरा सजा कर, पोंछा लगा दिया एक काम तो हुआ, अब पूजा के लिए फल एक एक को धोकर शुद्ध करना, फिर अखंड ज्योत का दीपक, कलश, नारियल व् अन्य सामग्री को एक एक कर रखना, अब बचा दूब और पुष्प तोड़कर लाना, रात से ही बारिश हो रही थी पर माँ आ रही है तो बारिश की क्या परवाह, उलटे मन में विचार आया वाह माता रानी दूब और पुष्प तो आप बारिश से धो रही है, तो जल्दी से सीढ़ियों से निचे उतरा कुछ दूर चलने पर गुलाब का पेड़ था और उससे थोड़ी आगे दूब एक एक तार चुनकर फिर फूल लिए और वापस घर की तरफ रवानगी।

और अब शुरू हुआ माँ का आवाहन, अब पूजन करना है तो सर्वप्रथम प्रथम पूजित विघ्न विनाशक गणेशजी महाराज को तो बुलाना ही था तो सर्वप्रथम गणेशजी का आवाहन कर आसान ग्रहण करने की प्रार्थना की और फिर माता रानी का आवाहन एक अजीब सी उमंग और उत्साह था, चेहरे पर मुस्कान तो ह्रदय माँ से मिलने के लिए भाव विभोर माता की तस्वीर को देखते ही फिर चेहरे पर मुस्कान दौड़ पड़ती और फिर बड़े प्यार से माँ को आसान ग्रहण करवाकर जैसे मुझे आती है वैसे पूजा शुरू की।

दिल बहुत खुश है, माँ घर में विराजमान है अब काम पर जाने से पहले रोज माँ को बोलकर जाना माँ मैं जा रहा हूँ और काम पर से आते ही हाथ मुहं धोकर सीधे माँ के दरबार में जाकर बोलना माँ मैं आ गया हूँ, इस सबमे कुछ और ही आनंद की अनुभूति होते है जो शब्दों के जरिये कहना बहुत मुश्किल है।

बस मन कर रहा था आप सबके साथ मेरा ये दिन साँझा करने का तो लिख दिया।
माता रानी अपने सभी बेटो की उनके हित में सभी मुरादे पूरी करे और हमे जीवन की कठिनाइयों से पार होने के लिए शक्ति प्रदान करे, इन्ही शुभ कामनाओ के साथ सभी आगंतुकों को नवरात्री की हार्दिक शुभकामनाये।

जय माता दी॥

सोमवार, 21 सितंबर 2015

मोदी, मिडिया, केजरीवाल और प्याज

देश के एक जाने माने समाचार चैनल "आजतक" पर आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार को लेकर एक अफवाह सुबह से चल रही थी, प्याज घोटाला, कहाँ गए प्याज के पैसे सोशल मिडिया भी कहाँ पीछे रहने वाला था अपनी तरफ से सवालों की बौछार करने लगा। 

बिना सत्य को जाने कुछ लोगो ने एक ईमानदार सरकार को अपराधी बनाकर कटघरे में खड़ा कर दिया। यही वो टीस है जिस देश के लाडले पत्रकार सुपर जर्नलिस्ट रविश कुमार भी लिखते है, भाड़े की गैंग सोशल मिडिया पर बिना तथ्य को जाने झूठ को भी सच बनाकर परोस देती है। 

कुछ ही घंटो  में सरकार की तरफ से भी  अपना पक्ष रखा गया स्तिथि को स्पष्ट करने के लिए और जनता के सामने आया की दिल्ली सरकार ने कही ऐसा कोई घोटाला नहीं किया गया या जिस तरह का आरोप दिल्ली सरकार पर लगाया गया की 18 रूपये किलो  में प्याज खरीदकर 40 रूपये किलो में बेचे गए ऐसा कहीं नहीं पाया गया, सरकार ने अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए प्याज की खरीद के सभी दस्तावेज मीडिया के बुद्धिजीवी वर्ग के बीच रख दिए। 

अब जिस समाचार चैनल ने ये खबर चलायी वो इतना बेवकूफ तो नहीं होगा की उसे सच्चाई का पता पहले से नहीं हो, और यदि सच में उन्हें नहीं पता था तब तो आजतक की विश्वशनीयता पर ये बहुत बड़ा प्रशन चिन्ह होगा की एक समाचार चेनल बिना किसी बात की पूरी जांच पड़ताल किये यो ही झूठी खबरे चला देता है?

मैंने स्वविवेक से इस पूरी घटना को समझकर ये समझने की कोशिश कीआखिर क्यों एक समाचार चेनल झूठी खबर दिखाएगा। 

जाहिर सी बात है किसी भी भले आदमी को बदनाम करना हो तो उसके खिलाफ मनगढ़न्त और झूठी कहानी बनाकर लोगो को सुनाओ और उसे बदनाम करदो, बिलकुल ठीक उसी तर्ज पर इस समाचार चेनल ने किसके इशारे पर ये सब किया वो तो वो खुद ही बता सकते है पर दिल्ली और पूरे देश में दिन-ब-दिन लोकप्रिय होती जा रही आम आदमी पार्टी की सरकार को बदनाम करने के इस काम को उन्होंने अंजाम दे ही दिया।

अब भाजपा और समाचार चेनल ने दावा किया की 18 रूपये किलो में प्याज खरीदकर 40 रूपये किलो में बेचे, अब इसमें ये बात तो सही है की जहाँ से प्याज चला यानी नासिक मंडी से वहाँ पर प्याज 18 रूपये किलो ही बिका था, लेकिन ये प्याज दिल्ली सरकार ने नहीं बल्कि केंद्र सरकार की एक एजेंसी SFAC ने नासिक से ख़रीदे और दिल्ली सरकार को 32.86 रूपये किलो में बेचे, अब इस पर ट्रांसपोर्ट, बेचने के लिए टेम्पो और कर्मचारी की तनख्वाह आदि मिलाये तो प्याज की दिल्ली सरकार को लागत मूल्य आई 39.86 रूपये प्रति किलो। राज्य सरकार ने अपनी तरफ से 9.86 रूपये प्रति किलो सब्सिडी देकर दिल्ली की जनता को 30  रूपये प्रति किलो के हिसाब से प्याज उपलब्ध करवाये। 

अब सवाल केंद्र में बैठी मोदी सरकार की नियत पर उठता है, जब नासिक मंडी में प्याज 18 रूपये/किलो मिल रहा था तो केंद्र सरकार ने क्यों प्याज के बढ़ते हुए दामों पर अंकुश नहीं लगाया, पूरे देश में प्याज 70 से लेकर 100 रूपये किलो तक बिका और मोदी सरकार इस पर मौन होकर बैठी रही, आखिर केंद्र सरकार व मोदीजी किन लोगो को फायदा पहुँचाना चाह रहे थे? जाहिर सी बात है आम जनता को तो नहीं पहुँचा रहे थे तो फिर फायदा केवल और केवल इन पूँजीपति मुनाफाखोरों को हो रहा था जिसे यदि  सरकार चाहती तो रोक सकती थी और जिस प्रकार दिल्ली में अरविन्द केजरीवाल की सरकार ने सस्ते दामों में जनता को प्याज उपलब्ध करवाकर चंद पूँजीपति मुनाफाखोरों पर अंकुश लगाया उसी प्रकार पूरे देश में ये किया जा सकता है। 

पर मोदी सरकार ने ऐसा नहीं किया अर्थात देश की गरीब जनता के हित में ना सोचकर कुछ पूँजीपतियों को देश की आम जनता को लूटने की खुली छूट दे दी। 

पर दिल्ली में वो ऐसा नहीं कर पाये, शायद यही आग उनके सीने में सुलग रही थी की इस केजरीवाल ने कुछ गिने चुने पूँजीपतियों की बजाय दिल्ली की आम जनता को राहत  दी, बस उसी बदला लेने के लिए ऐसी मनगढ़ंत और झूठीं खबर चलाकर दिल्ली की केजरीवाल सरकार बदनाम करने की साजिश रची गयी। 

और यदि ये खबर सच है तो इस कथित समाचार चैनल की जनता के प्रति  जवाबदेही बनती है की वो इसके पक्ष में सारे सबूत जनता के सामने रखे और यदि वो ऐसा करने में फ़ैल होते है तो उसी समाचार चैनल में जिस तरह चौबीस घंटे ब्रेकिंग न्यूज़ झूठी खबर की चलायी गयी ठीक उसी तरह 24 घंटे ब्रेकिंग न्यूज़ जनता को गुमराह करने के लिए जनता से और दिल्ली सरकार को  करने के लिए  दिल्ली सरकार और केजरीवाल से इसके लिए माफ़ी की खबर भी चलानी चाहिए। 



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