रविवार, 28 फ़रवरी 2016

Rohith Vemula's body was used as a political tool Smriti Irani Speech

Smriti Zubin Iraani, HRD Minister in Rajya Sabha
राज्य सभा में स्मृति जुबिन ईरानी जी का भाषण सुना।

यही वो भाषण था  जिसे देखने और सुनने की फुरसत हमारे प्रधानमंत्री जी नरेन्द्र मोदी को भी थी और उस पर तुरंत ट्वीट भी कर दिया।

वरना तो पिछले दिनों में जो देश में हो रहा है उस पर ना कोई ट्वीट ना मोदीजी के मुँह से दो शब्द। वैसे तो उनसे कोई सवाल करे ये किसी पत्रकार की हिम्मत ही नहीं है पर यदि कोई पूछ भी ले तो उनका बयान होगा मैंने अभी वीडियो नहीं देखी है या मुझे अभी इसकी कोई जानकारी नहीं है बोल देते। जैसा की अक्सर सभी राजनैतिक दल जिस घटना पर नहीं बोलना चाहते उसके लिए इस्तेमाल करते है।
Rohith Vemula

सबसे पहले तो स्मृति जी रोहित वेमुला जो की एक 28 साल का नौजवान युवा है को बच्चा कहकर सम्बोधित किया यही से उनकी सोच पर हंसी आती है, चाइल्ड? ईरानी जी फिल्मो की तरह ही राज्य सभा में डायलॉग डिलिवरी कर रही थी।

चलो ये सब छोटी बाते है बच्चा बोला या बूढ़ा बोला उनकी सोच, यदि स्मृति समझती है की वो 150 साल की बुढ़िया है तो बेशक उन्हें हक़ है रोहित वेमुला को बच्चा कहने का।

लेकिन मैं यहाँ पर स्मृति जुबिन ईरानी जी का वो व्यक्तव्य कोट करना चाहूँगा जहां पर वो कहती है "रोहित वेमुला की बॉडी को राजनैतिक टूल की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है"

बिलकुल मैं आपसे सहमत हूँ स्मृति जी पर इसी पर मेरे कुछ सवाल है आपसे है क्या आप इस अवस्था में है की इनके जवाब दे पाएंगी?

 उस जीते जागते होनहार रोहित वेमुला को बॉडी किसने बनाया?  

कौन  जिम्मेदार है उस जीते जागते हँसते खेलते संघर्ष करते रोहित वेमुला को एक बॉडी बनाने के लिए?
आप खुद माननीया HRD मिनिस्टर जी आप खुद जिम्मेदार है उस जीवित इंसान को बॉडी में बदलने के लिए, यदि आप चाहती तो समय पर उस पर एक्शन लेकर एक युवा नौजवान जिसे आप बच्चा कहती है को  बचा सकती है, बल्कि इससे उल्ट आपने तो विश्वविद्यालय प्रशासन को बार बार पत्र लिखकर उस नौजवान रोहित वेमुला का जीवन दूभर कर दिया और आखिर उसने पानी हार मान ली वो हार गया इस गन्दी राजनीती से लड़ने में और उसने वो रास्ता चुन लिया जो किसी को नहीं चुनना चाहिए और वो बॉडी बन गया।

अब बात आती है उसकी बॉडी पर राजनीती की, हाँ!  हूँ उसकी बॉडी पर राजनीती हो रही है पर मेडम कौन नहीं कर रहा है उसकी बॉडी राजनीती? सबसे ज्यादा राजनीती किसी ने रोहित वेमुला पर की है तो वो खुद आप हो स्मृति ईरानी जी! हाँ यही वो कड़वा सत्य है की बीजेपी ने जितनी राजनीती है और मैं तो कहूँगा जितनी घटिया राजनीती की है उतनी किसी ने नहीं की।

कभी आप उनकी माँ की जाति अरु गोत्र लोगो को बताती है, कभी रोहित दलित नहीं है ये बयान देती है, कभी आप जिस राजनैतिक दल से सम्बन्ध रखती है वो उस पर दोशद्रोही होने का आरोप मंढने की कोशिश करता है। तो कुल मिलाकर अगर रोहित वेमुला की बॉडी पर किसी ने गन्दी राजनीति की है तो वो खुद भारतीय जनता पार्टी है।

और हाँ एक बात और अगर आपको सच में दर्द  होता की रोहित की बॉडी पर राजनीती हो रही है तो आपके पास वो सारी पावर है जिससे ये राजनीति बंद की जा सकती है! दो रोहित वेमुला को न्याय, दो उन लोगो को सजा जिन्होंने रोहित को ये कदम उठाने पर मजबूर किया, स्वतः ही रोहित के शरीर पर राजनीति होना बंद हो जाएगी और ये नहीं आप एक अच्छा उदाहरण पेश कर पाएंगी की आपने एक दलित छात्र के न्याय किया। पर आप और केंद्र में बैठी भाजपा सरकार ऐसा नहीं करेगी क्योंकि आपको तो खुद उसके शरीर पर राजनीती करनी है, यही सत्य हा मैडम, आपको रोहित के शरीर पर राजनीति करनी है और इसलिए रोहित वेमुला की माँ न्याय की मांग में दर दर भटक रही है और केंद्र सरकार के इसारो पर दिल्ली पुलिस उस बेचारी रोहित की माँ को सड़क पर घसीटती है पीटती है।

डायलॉग बहुत अच्छा बोल लेती है स्मृति जी आप, पर शायद आप भूल गयी की राज्य सभा किसी धारावहिक की शूटिंग का सेट नहीं था वहाँ केवल डायलॉग के लिए शॉट ही नहीं देना था बल्कि कुछ करके भी दिखाना होता है और कुछ करके दिखाना आपके बस की बात नहीं है।

अगर आप सच में चाहती है की रोहित वेमुला की बॉडी पर कोई राजनीति नहीं हो तो कल ही उसे न्याय दीजिये और करवाइये बंद इस राजनीति को वरना आपके इन ढोंग और बनावटी चेहरों को अब जनता भली भांति जानने लग गयी है।

जय हिन्द
वन्दे मातरम


Rohith Vemula, Smriti Irani, Smriti Zubin Irani, Mona, India, Narendra modi, BJP, Bhartiya Janta Party

सोमवार, 22 फ़रवरी 2016

#CongressBurningHaryana Jat agitation in Haryana तो फिर भाजपा ने हरियाणा को जलने क्यों दिया?

हरियाणा में जाट आरक्षण को लेकर जो कुछ हुआ वो बहुत ही निंदनीय है। प्रोटेस्ट करना लोकतंत्र में हमारा अधिकार है, सरकार को अपनी बात मनवाने के लिए प्रदर्शन करना, धरना देना ये सभी लोकतंत्र में हमारे अधिकार है पर इन आरक्षण की लड़ाई लड़ने वालो को किसी के घर जलाने का अधिकार किसने दिया?

एक विधवा औरत दो बेटियों की माँ अपना छोटा सा रोजगार का साधन लिए बैठी थी, इन प्रदर्शनकारियों का उस विधवा औरत ने क्या बिगाड़ा था की उसकी रोजी रोटी देनी वाली उसकी दुकान ही जला डाली? क्या उस महिला के पास अधिकार था उन्हें आरक्षण देने का और वो दे नहीं रही थी तो उसकी दूकान जला डाली?
जो भी प्रदर्शन के नाम पर गुंडा गर्दी हुयी  वो बहुत ही गलत है उसे इस देश का प्रबुद्ध नागरिक कभी स्वीकार नहीं करेगा।

जिन लोगो की आपने गाड़ियाँ जला डाली उन्होंने आपका क्या बिगाड़ा था? क्या पता कितनी मेहनत से किसी ने अपने सपनो को साकार करते हुए वो कार या मोटर साइकिल खरीदी थी जो आपके इस प्रदर्शन की भेंट चढ़ गयी। ऐसा करना भी देशद्रोह से कम नहीं है, आपने किसी और को नहीं अपने ही भाइयो को नुकसान पहुंचाया है।

एक तरफ जहाँ प्रदर्शनकारियों ने इसे हिंसक रूप दिया वो गलत है वही दूसरी तरफ भाजपा राज्य सरकार और केंद्र सरकार ने जिस तरह इस मामले को हेंडल किया वो दोनों सरकारों की नाकामी को दर्शाती है, 12 लोग मर गए, अरबों रूपये की दूकान, फैक्ट्री, गाड़ी जला दी गयी और इस सबके बार राज्य सरकार घोषणा करती है की प्रदर्शनकारियों की मांग मान ली गयी है? सब कुछ जलाकर क्या माँग मान रहे हो साहब? क्या समय रहते सरकार अपने अहंकार को छोड़कर प्रदर्शनकारियों से बात कर लेती तो ये सब तबाही नहीं रोक सकती थी? लेकिन भाजपा सरकार जिस अहंकार में सत्ता में बैठी है उसने उन 12 का जीवन छीन लिया और हरियाणा में अरबो रूपये के कारोबार का नुक्सान हो गया तब जाकर सत्ता में बैठे लोगो की आँखे खुली।

अचंभित तो मैं तब रहा जब आज बीजेपी की IT cell सोशल मिडिया पर #CongressBurningHaryana ट्रेंड करवा रहे थे, ये क्या भाजपा कह रही है कांग्रेस ने हरियाणा को जला दिया? मैं यहाँ किसी का बचाव नहीं कर रहा हूँ मैं केवल ये बताना चाह रहा हूँ की ठीक है कांग्रेस ने हरियाणा जला दिया, मान लिया पर सत्ता में कौन बैठा है? भाजपा, केंद्र में सरकार किसकी भाजपा की, गृह मंत्रालय किसका भाजपा का सारी ताकत किसके पास है? भाजपा के पास?

तो फिर भाजपा ने हरियाणा को जलने क्यों दिया? 
 यही है मेरा सवाल!!

जब आपके पास सत्ता है, पुलिस है, सेना है सभी संसाधन है तो फिर आपने हरियाणा को जलने क्यों दिया? #CongressBurningHaryana ट्रेंड करवाकर आप भाजपा सरकार की कमजोरी ही लोगो को दिखा रहे है की उन्होंने जलाया पर हम हाथ में हाथ धरे बैठे रहे और तमाशा देखते रहे? या सरकार इतनी कमजोर है की वो हरियाणा को जलने से बचा नहीं सकी।

देश के प्रधानमंत्रीजी श्री नरेंद्र मोदी भाषण पर भाषण पेलने में लगे हुए थे पर उनके पास हरियाणा के लोगो को शांति बनाये रखने की अपील करने के लिए दो शब्द नहीं थे। हरियाणा के लोगो ने भी आपको वोट दिया था मोदीजी, और इन्ही प्रदर्शनकारियों ने भी आपको उस कुर्सी तक पहुचने में पूरा सहयोग किया था, ये ही नहीं उन्होंने तो केंद्र की सत्ता भी आपके हाथो में दे दी और राज्य की सत्ता भी आपकी लुभावनी बातो में आकर आपकी अपील पर आपके ही दल भारतीय जनता पार्टी को सौप दी, फिर भी अफ़सोस आपके पास अपने ही देश के उन नागरिको को सम्बोधित  करने के लिए दो शब्द  नहीं थे? ना आपने हरियाणा के लोगो से शान्ति बनाये रखने की अपील की और नाही हरियाणा में आपके द्वारा चुने गए मुख्यमंत्री को कोई आदेश दिए की अपने ही राज्य के नागरिको को ऐसे  बर्बादी करने से रोके। या फिर सच में आप यही चाहते थे की  कैसे भी करके हिंसा फैले?

लानत है ऐसी  सरकार पर जो अपने ही देश के नागरिको को सुरक्षा नहीं दे सकती, कोई आपके देश को जलाएगा और आप जलने देंगे? हाथ पर हाथ धरे बैठे रहेंगे? बस ज्यादा से ज्यादा आप ट्वीटर पर उन लोगो को ट्रेंड करवा देंगे जिन्होंने देश जलाया? यही है सरकार चलाना? क्या ऐसे ही अब भाजपा सरकार काम करेगी?

जहाँ तक मुझे पता है हर पुलिस थाने में गाँव के हर इलाके से मुखबिर होते है(मुझे सही नाम याद नहीं आ रहा) पर गाँव के कुछ लोग मनोनीत होते है जो उनके इलाके में कुछ भी घटना होती है तो सच्चाई बता सके या कोई षड्यंत्र रचा जा रहा है तो पहले से उसकी खबर पुलिस तक पहुँचा सके ताकि समय रहते उसे रोका जा सके।
अब यदि हरियाणा में ये सब सिस्टम है तो हरियाणा की पुलिस को ये खबर क्यों नहीं मिली की कांग्रेस हरियाणा को जलाने वाली है? और यदि मिल गयी तो भाजपा सरकार ने उसे रोका क्यों नहीं?

यानी टोटल सिस्टम फेलियर? 

गजब के लोग को सत्ता में बैठा दिया भाई जिनसे ना प्रदेश की सुरक्षा हो रही है ना देश की।
भगवान देश की रक्षा करे।

जय हिन्द
वन्दे मातरम
भारत माता की जय
जय वीर बजरंग बलि हनुमान

रविवार, 21 फ़रवरी 2016

JNU विवाद और अचानक से जागी देशभक्ति

जो कुछ इन दिनों देश में चल रहा है क्या सच में कुछ ऐसा ही है? या कही इन सबके पीछे कोई और कारण है?

मैं भी कुछ दिनों से यही सोच रहा हूँ और मैंने अपने विवेक से जो कल्पना की वो आप सबके साथ शेयर कर रहा हूँ, जो लिख रहा हूँ वो मेरी सोच और मेरी मान्यता है। यदि कुछ गलत हो तो मुझे क्षमा करे मेरा उद्देश्य किसी का दिल दुखाना नहीं है, मैं एक सच्चा राष्टवादी हूँ, देश में नहीं रहता फिर भी खुद के भारतीय होने पर गर्व है और भारत माता के लिए दिल में उतना ही सम्मान और गर्व है जितना देश में बैठे एक देशवासी के दिल में है।

तो चलो शुरुआत यहाँ  से करते है!

आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार का एक साल पूरा होने वाला है, पार्टी ने बड़ा जश्न (जैसा की राजस्थान की भाजपा मुख्यमंत्री ने किया) ना करते हुए इसे अपने एक साल में किये गए कामो की उपलब्धि गिनाने में करने का निर्णय लिया था।

सारी तैयारी हो चुकी, शोशल मीडिया टीम जोश के साथ एक एक काम की लिस्ट बनाने में लग गयी, खुद दिल्ली के मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री, सभी मंत्री अपने अपने विभाग में किये गए कामो की लिस्ट बना चुके ताकि दिल्ली की जनता ने जितने विशवास के साथ आम आदमी  पार्टी  की सरकार चुनी उन्हें एक साल का हिसाब दे सके।
आखिर जनता ही तो असली मालिक है इस लोकतंत्र की, तो उन्हें हक़ है ये जानने का की एक साल में उनके द्वारा चुनी हुयी सरकार ने क्या किया।

मीडिया में भी इसकी सुगबुगाहट होने लगी, चर्चाये होने लगी की वाह एक साल में इतने सारे काम कर दिए, बाकायदा मेनिफेस्टो उठा कर एक एक बिंदु की जांच करने लगे की कितने वादे पूरे हो चुके कितनो पर काम चल रहा है, बचे हुए कब तक पुरे हो जायेंगे।
जब ये सब तैयारी चल रही थी तो किसी एक सरकार को बहुत बड़ा संकट सामने दिखाई देने लगा, ऐसे सवाल सामने आते दिखाई देने लगे जिनके जवाब उनके पास नहीं है, क्योंकि जवाब के लिए केंद्र सरकार के पास केवल एक ही जवाब है 60 सालों का हिसाब ना देने वाले हमसे हिसाब मांगते है? यानि कुल मिलाकर मोदीजी के पास अपनी सरकार की उपलब्धि गिनाने के लिए कुछ नहीं था, जिन वादो के लेकर भारतीय जनता पार्टी लोकसभा चुनाव में उतरी थी उन सब पर  फ़ैल होती नजर आ रही थी, और मोदीजी और भाजपा को ये कतई मंजूर नहीं था की देश की जनता वो अधिकाँश भाग जो सोशल मिडिया पर एक्टिव नहीं है उन तक ये बात पहुँच जाए की मोदी सरकार हर वादे  फ़ैल हो चुकी है, चाहे वो फिर महंगाई का हो या पाकिस्तान का मसला, विदेश नीति हो या गिरता हुआ रुपया और सेंसेंक्स हर मुद्दे पर भाजपा सरकार की नाकामी। तो इसे छिपाना तो बहुत जरुरी है। बीजेपी और मोदी जी को डर हुआ की कहीं अब इस पर टीवी स्टूडियो में डिबेट ना होने लगे की अरविन्द केजरीवाल ने एक साल में इतने काम करके दिखा दिए तो अन्य राज्यों की सरकार  क्यों नहीं कर सकती, या केंद्र की मोदी सरकार क्यों नहीं कर रही है।
तो मेरा मानना है की अपनी ये चिंता उन्होंने अपने रक्षक दल(मिडिया, नजीब जंग, भीम बस्सी आदि) के सामने रखी और जैसे ही उन्होंने अपनी ये चिंता प्रकट की होगी इन सभी परम भक्त में होड़ लगी नंबर बनाने की, जो सबसे पहले इस मुद्दे से  भटकाकर दिखा देगा वही अपनी वफादारी ज्यादा दिखा पायेगा। तो मीडिया की नजर पड़ी JNU पर कन्हैया के उस भाषण पर जिसमे वो पूंजीपति, गरीबी, भुखमरी आदि से आजादी की बात कर रहा था, तो ये कुछ मिडिया वाले जो मोदी भक्त बने बैठे है अपनी कुटिल दिमाग से उस भाषण से बाकी बात काटकर केवल आजादी आजादी को जनता के सामने रखा और वो उसमे कामयाब रहे तुरंत चारो तरफ बाकि सभी मुद्दे भूलकर केवल  देशद्रोही और देशभक्त की बाते होने लग गयी।
अब बस्सी जी थोड़े  दिनों में सेवानिवृत होना है तो वो इस मौके पर किसी और को खुद से ज्यादा मोदी का वफादार होना कैसे स्वीकारते? तो वो भी तुरंत दौड़ पड़े और आनन फानन में कन्हैया कुमार को गिरफ्तार लिया और वो देशद्रोह के जुर्म में। जो आदेश थे वो तो पुरे कर दिए गए मीडिया और देश की जनता का सारा ध्यान अब देशद्रोही और देशप्रेमी की बहस पर केंद्रित हो गया, ना कोई अरविन्द केजरीवाल की दिल्ली सरकार द्वारा किये गए कामो की बात कर रहा है और ना कोई मोदीजी की केंद्र सरकार से सवाल कर रहा है। अपने इस लक्ष्य में तो ये कामयाब हो गए पर जल्दबाजी में कदम गलत उठा लिए जो की उन्हें महंगा पड़ गया।
धन्यवाद ABP न्यूज़ जिसने पूरा विडियो जनता के सामने रखा वरना तो देश ने तो कन्हैया पर देशद्रोही का  ठप्पा लगा ही दिया था, बस यही से भाजपा और दिल्ली पुलिस पर सवाल खड़े होने लगे, और बस्सी बैकफुट पर नजर आने लगे, गिरफ्तारी के समय ठोस  सबूत होने के दावे करने वाले बस्सी जी मिडिया में आकर कहने लगे यदि कन्हैया अपनी जमानत की अर्जी लगाए तो दिल्ली पुलिस इसका विरोध नहीं करेगी, अरे ये क्या? जब आप कह रहे है कि आपके पास ठोस सबूत है तो फिर आप किसी देशद्रोही को  यों ही छोड़ देंगे? उन्हें किसी को छोड़ने से  मतलब नहीं था वो जल्द जल्द अपनी इस गलती से छुटकारा पाना चाहते थे। पर अब इस बहस ने कुछ ज्यादा ही जोर पकड़ लिया और ये केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस के गले की हड्डी बन चुका था, अब इससे पीछा कैसे छुड़ाए? तो नंबर आया भाजपा की हरियाणा सरकार को अपनी वफादारी दिखाने का। शुरू हुआ जाट आरक्षण का मुद्दा, यदि राज्य सरकार चाहती तो आंदोलनकारियों से बात कर सहमति बना सकती थी पर ऐसा तो उन्हें करना ही नहीं था, उन्हें तो मीडिया जो अब कन्हैया पर केंद्रित हो गया  था को किसी दूसरी तरफ मोड़ना था। तो आंदोलनकारियों को ना विरोध किया और ना बात उन्हें छोड़ दिया मनमर्जी करने को, दुकाने लूटी गयी, मॉल लुटे गए, कार बसे आग की भेंट चढ़ गयी, कर्फ्यू लगा दिया गया, इंटरनेट सेवा हरियाणा में ठप्प कर दी इस बार भी बात नहीं बनी गोलीबारी के आदेश दिए गए और चार भारतीय इस आन्दोलन की भेंट चढ़ गए, शायद ही कोई ऐसा मौका हो जहां पुलिस ने आंदोलनकारियों पर गोलियाँ चलायी हो। खैर चार आदमियों की जान गयी पर खट्टर साहब अपनी वफादारी दिखाने में कामयाब हुए और एक बार टीवी बहस की दशा मोड़ दी गयी।
अब बजट सत्र में अपनी नाकामी फिर छिपानी है तो मेरा मानना है की उस समय कन्हैया को रिहा कर दिया जायेगा, शायद बस्सी या किसी मिडिया हॉउस को भी थोड़ा और अपनी वफ़ादारी दिखाने पड़े पर जुगाड़ पूरा है की कोई मोदी सरकार से सवाल ना कर बैठे की आपने दो साल  में क्या किया? जो पाँच साल के लिए आपने वादे किये थे उसमे से आपने अभी तक किसी पर भी काम क्यों नहीं किया? एक तरफ केंद्र शासित राज्य होने के बावजूद भी अरविन्द केजरीवाल की दिल्ली सरकार ने अपने घोषणा पत्र से 70 में 17 वादे पूरे दिए है 30 पर काम चल रहा है।
हो सकता है मेरी समझ गलत हो पर जो मेरी सोच है मैंने यहाँ लिख दी, मेरा उद्देश्य किसी को नीचा दिखाना नहीं है केवल अपने विचार व्यक्त करना है। मेरे इस लेख से मेरी देशभक्ति पर शक ना किया जाए, मैं इसी भारत माँ का लाल हूँ।
जय हिन्द
वन्दे मातरम
भारत माता की जय

|| वक्र-तुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ, निर्विघनम कुरुमेदेव सर्व कार्येषु सर्वदा ||

गुरुवार, 11 फ़रवरी 2016

है नमन उनको कि जो यशकाय को अमरत्व देकर - Dr. Kumar Vishvash

Lance Naik Hanamanthappa Koppad


है नमन उनको कि जो यशकाय को अमरत्व देकर,
इस जगत में शौर्य की जीवित कहानी हो गये है,
है नमन उनको कि जिनके सामने बौना हिमालय,
जो धरा पर गिर पडे पर आसमानी हो गये है.....
पिता,जिस के रक्त ने उज्जवल किया कुल-वंश-माथा,
माँ, वही जो दूध से इस देश की रज तोल आई ,
बहन,जिसने सावनों मे, भर लिया पतझर स्वयं ही,
हाथ ना उलझें, कलाई से जो राखी ख़ोल लाई
बेटियाँ,जो लोरियों मे भी प्रभाती सुन रही थीं,
"पिता तुम पर गर्व है" चुपचाप जा कर बोल आईं
प्रिया,जिस की चूड़ियों मे सितारे से टूटते थे,
मांग का सिंदूर दे कर जो उजाले मोल लाई
है नमन उस देहरी को जहाँ तुम खेले कन्हैया,
घर तुम्हारे, परम तप की राजधानी हो गये है....
है नमन उनको कि जिनके सामने बौना हिमालय ....
हमने लौटाए सिकन्दर सर झुकाए मात खाऐ,
हमसे भिडते है वे जिनका मन,धरा से भर गया है
नर्क में तुम पूछना अपने बुजुर्गों से कभी भी,
उन के माथों पर हमारी ठोकरों का ही बयाँ है
सिंह के दांतों से गिनती सीखने वालों के आगे,
शीश देने की कला में क्या गजब है? क्या नया है?
जूझना यमराज से आदत पुरानी है हमारी,
उत्तरों की खोज में फिर एक नचिकेता गया है
है नमन उनको कि जिनकी अग्नि से हारा प्रभंजन,
काल-कौतुक जिनके आगे पानी-पानी हो गये है
है नमन उनको कि जिनके सामने बौना हिमालय........
लिख चुकी है विधि तुम्हारी वीरता के पुण्य-लेखे,
विजय के उदघोष! गीता के कथन! तुमको नमन है
राखियों की प्रतीक्षा! सिन्दूरदानों की व्यथाऒं!
देशहित प्रतिबद्ध-यौवन कै सपन! तुमको नमन है
बहन के विश्वास! भाई के सखा! कुल के सहारे!
पिता के व्रत के फलित! माँ के नयन! तुमको नमन है
कंचनी-तन, चाँदनी-मन, आह,आंसू,प्यार,सपने,
राष्ट्र के हित कर गए सब कुछ हवन ,तुमको नमन है
है नमन उनको कि जिनको काल पाकर हुआ पावन,
शिखर जिनके चरण छूकर और मानी हो गये है.
है नमन उनको कि जिनके सामने बौना हिमालय,
जो धरा पर गिर पडे पर आसमानी हो गये....

मंगलवार, 2 फ़रवरी 2016

Delhi Police brutally assaulting student protesters outside RSS office

बहुत ही दुःखद जो कुछ आज देश की राजधानी दिल्ली में हुआ।
शायद ऐसा पहली बार हुआ होगा जब पुलिस और एक संगठन के लोग मिलकर एक दूसरे संगठन के लोगो को पीट रहे हो।
दिल्ली पुलिस की दरिंदगी का नंगा नाच जो इस वीडियो में दिखाई दिया और देखकर हर कोई बोल उठेगा, क्या? दिल्ली में आपातकाल लागू हो गया है? जिस तरह से दिल्ली पुलिस और आरएसएस के लोग मिलकर कुछ शांतिपूर्वक प्रदर्शनकारियों पर अचानक लाठी, डंडे, लात घूंसे बरसाने लगते है उसे देखकर तो यही महसूस होता है जैसे दिल्ली में मोदी सरकार ने आपातकाल लागु कर दिया है।
चलो आज तक आंदोलन और पर्दशन में पुलिस का बल प्रयोग तो सुना था पर पुलिस की सुरक्षा में उनके सहयोग से सरेआम RSS के लोग प्रदर्शनकारियों को दौड़ा दौड़ा कर पीटे ये कहाँ और किस देश का न्याय है?
उन प्रदर्शनकारियों का दोष केवल यही था की उनकी रैली RSS के ऑफिस के सामने से गुजरनी थी? क्या अब आरएसएस देश  संविधान से भी बड़ा हो गया है?
और दिल्ली पुलिस ने ये किसके दबाव में आकर किया? या किसके आदेश पर ये सब किया? ऐसे ही तो ये सब नहीं हुआ है, मैं फिर कह रहा हूँ लाठीचार्ज पहले भी होते आये है और इस सरकार ने पहले की सरकारों से हटकर कुछ नहीं किया। मोदी सरकार ने भी आंदोलन की आवाज कुचलने की कोशिश की। पर उससे भी हटकर जो हुआ की पुलिस और आरएसएस के लोग मिलकर सरेआम किसी की पिटाई करे?
उससे भी शर्म की बात है पुरुष पुलिसकर्मी छात्राओ के बाल पकड़कर घसीटे और लात घूंसों से छात्राओ की भी पिटाई करे, और पुलिस के सरक्षण में आरएसएस के गुंडे भी छात्राओ के कपड़े फाड़ दे ये कहाँ का न्याय है? ये तो सच में भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी जिस आपातकाल की तरफ इशारा कर रहे थे ये कहीं ये उसी आपातकाल की एक झलक तो नहीं है? जहां आप यदि आरएसएस और मोदी सरकार के खिलाफ कुछ भी बोलेंगे तो पुलिस और आरएसएस के गुंडे आपकी पिटाई कर देंगे?
अफ़सोस छोटी से छोटी घटना पर ट्वीट कर अपनी प्रतिक्रिया देने वाले देश के सवा सो करोड़ भारतियों की बात करने वाले हमारे प्रधानमंत्री ही इस घटना पर चुप्पी साध लेते है, क्या देश के प्रधानमंत्री होने के नाते उनकी जवाबदेही नहीं है की जिन पुलिसकर्मियों ने ये अमानवीय कार्य किया है उन्हें तुरंत सजा दे?
मोदीजी आपकी तो कथनी और करनी में रात दिन का अंतर आ गया, कहाँ आप बात करते है बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ और आज जब उन्ही बेटियों को दिल्ली पुलिस और आरएसएस के गुंडे सड़क पर दौड़ा दौड़ा कर पीट रहे है तो आप चुपचाप सब कुछ होने देते है, क्या आपकी चुप्पी इन सबको मौन स्वीकृति तो नहीं है?
सवा सो करोड़ का नाम भाषण में लेकर ताली बजवाना  आसान है मोदीजी पर  सवा सो करोड़  समान समझकर सबको न्याय और समान अधिकार दिलाने  की हिम्मत तो आपमें भी दिखाई नहीं देती है।
ये वो वीडियो है जिसमे आप साफ़ देख सकते है कैसे दिल्ली पुलिस बर्बरता पूर्वक आंदोलनकारियों को पीट रही है, कुछ युवक पुलिस की मौजूदगी में खुद भी प्रदर्शनकारियों को पीट रहे है, कैसे पुरुष पुलिसकर्मी छात्राओ को पीट रही है और कुछ न्यूज़ रिपोर्टर ने भी ट्वीट कर बताया की उन्हें भी कवरेज करने के कारण पीटा गया।
गजब की गुंडागर्दी है भाई, यानी दिल्ली पुलिस की गुंडागर्दी?

 
 Delhi Police and RSS Goons brutally assaulting student protesters outside RSS office
 

शुक्रवार, 29 जनवरी 2016

तो क्या अब मोदीजी देश द्रोही हो गए?

चौंक गए पोस्ट का टाईटल देखकर?

बिलकुल मैं यही सवाल आपसे करना चाहता हूँ, क्या अब मोदीजी देश द्रोही हो गए? खैर मेरा ये सवाल एक ख़ास वर्ग के लिए है जो अत्यधिक भावुक वर्ग है, अपने आप को राष्ट्रवादी कहता है और राष्ट्रवाद के नाम पर उन्हें कोई कुछ भी कह दे वो बिना उस मामले को जाने, तुरंत भावावेश में आ जाते है, सोशल मिडिया पर गालियों की बौछार के साथ अपने देशभक्त होने का परिचय देने लगते है।
सामने वाले को पाकिस्तानी, देश्द्रोशी और बहुत ही अभद्र भाषा का प्रयोग केवल उस व्यक्ति ही नहीं बल्कि उसके पूरे खानदान को लेकर किया जाता है। इस पर भी यदि जिसे ये लोग कटघरे में खड़ा कर देते है उसका धर्म उनसे भिन्न हो तब तो मानो सामने वाले पर कहर टूट पड़ता है।
बस इस वर्ग विशेष की इसी भावुकता का फायदा कुछ राजनैतिक दल उठाते है और वो भी आग में घी डालने के लिए  संबंधित मुद्दे पर अभद्र कॉमेंट कर देते है।
बस अब क्या चाहिए इस भावुक जमात को हो जाते है अपने नेताओ के पीछे और सामने वाले की इज्जत की धज्जियाँ उड़ा देते है।
उनके ऐसा करने से सम्बंधित व्यक्ति थोड़ा हताश तो हो जाता है पर बेनकाब ये भीड़ हो जाती है जो बिना किसी तथ्य को जाने अंध भक्ति में मगन होकर अपना आपा खो बैठते है। यदि ये आपा  केवल सोशल  में ही खोते है तो कम से कम उन्हें कोई शारीरिक हानि नहीं होती है पर सोचो यदि  ये ऐसा वास्तविक जीवन में करने लगे तो अपना जीवन बर्बाद ही कर बैठेंगे और आपकी बर्बादी के दम पर ये राजनैतिक दल सत्ता हासिल कर जाते है और चाहकर भी वहाँ  वापस नहीं लौट पाते जहाँ पर आप इस भावुकता में बह गए थे।

ऐसा ही एक वाक्या 26 जनवरी 2015 को हुआ था।
अचानक से सोशल मिडिया के जरिये एक तस्वीर देश विदेश में सबके मोबाइल/कंप्यूटर पर शेयर होने लगी जिसमे भारत के उप-राष्ट्रपति महोदय हामिद अंसारी जी के तिरंगे को सलामी ना देने की तस्वीर दिखाई गयी और इस तस्वीर के जरिये इस भावुक वर्ग के दिलों में जहर घोलने की भरपूर कोशिश की गई।
शर्म तो तब आती है जब इसमें मिडिया भी शामिल हो जाता है, सुदर्शन चैनल ने इस पर पूरा 1 घंटे का प्रोग्राम कर डाला जिसमे वो उप राष्ट्रपति महोदय की देशभक्ति पर प्रश्न चिन्ह लगाते है।
सोशल मिडिया पर मानो आंधी आ गयी हो, ये भावुक वर्ग अँधा होकर उस आँधी के साथ उड़ने लगा और उप राष्ट्रपति महोदय के देश भक्ति पर एक बड़ा सा प्रश्न चिन्ह लगा दिया।
ये कुछ ट्वीट है जिनमे उप राष्ट्रपति महोदय को लेकर भद्दी टिप्पणी  की गयी



Is Narendra Modi insulted Tri Color, Modi deshdrohi hai? why Modi not salute Tiranga?
Is Narendra Modi Desh Drohi as he not salute TriColor?
अब आते है 26 जनवरी 2016 पर, वही स्थान, वही मौका और वही लोग पर इस बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने तिरंगे को सलामी नहीं दी!!!
तो यदि ये राष्ट्रभक्ति का ढोंग रचने वाले चंद लोग उस समय उप राष्ट्रपति महोदय को देशद्रोही और अन्य गलत शब्दों से सम्बोधित कर सकते है तो आज वही मापदंड नरेन्द्र मोदी के लिए क्यों नहीं? उस हिसाब से तो इस बार नरेंद्र मोदी देशद्रोही हो गए, उन्हें भारत में रहने का कोई हक नहीं रहा, वो तो पाकिस्तान जाकर वहाँ चरण वंदना करके आते है तो शायद इस बार उनके इस पाकिस्तान प्रेम ने उन्हें तिरंगे को अपमानित करने को उकसाया हो? शायद उन्होंने नवाज शरीफ के घर जाकर केक खाकर आये उसका कर्ज तिरंगे को सलामी ना देकर अदा किया हो? ऐसे हजारो बेहूदे सवाल हम भी उन अंध भक्तो और फर्जी राष्ट्रवादियों की तरह खड़े कर  सकते है पर हम ऐसा नहीं करेंगे।
हम केवल उन अंध भक्तो और फर्जी राष्ट्रवादियों को आइना दिखाना चाहेंगे की इस तरह गलत अफवाह फैलाकर देश में नफ़रत  का जहर मत घोलिये, इस भावुक वर्ग की भावनाओ के साथ मत खिलवाड़ करे, वरना जिस दिन ये भावुक वर्ग अपने आपे से बाहर आ गया तुम्हारे तख़्त और ताज को कोई बचाने वाला नहीं मिलेगा।
साथ ही साथ इस भावुक वर्ग से भी मैं अनुरोध करूँगा की किसी भी बात पर इतनी आसानी से आवेश में ना आये, कम से कम थोड़ा बहुत प्रयत्न सच्चाई जानने का भी करे, जितने देश भक्त आप है उतना ही देश भक्त भारत की धरती पर रहने वाला हर वो शख्स है जो इस मातृ भूमि से अपना पालन पोषण करता है।
धन्यवाद
वन्दे मातरम


"Jihadi sympathiser", "anti-India", "traitor", these were some of the names that the vice president of India was hurled at on the country's 66th Republic Day. Many tweeted demanding that Ansari be impeached, the more moderate ones wanted him to resign, the more outraged ones advised him to join the ISIS.

Line in english from the article: http://www.dailyo.in/politics/why-should-hamid-ansari-prove-his-patriotism-republic-day-narendra-modi-aamir-khan-pk-muslims/story/1/1684.html

मंगलवार, 26 जनवरी 2016

Padma Bhushan Anupam Kher #Award used word BhenCho*** after getting Award

जैसे ही इन पदम अवार्ड की घोषणा हुयी एक गीत कानों में गूंजने लगा

ये जो पब्लिक है सब जानती है ..... ये जो पब्लिक है

ठीक ही तो कहा है और इन अवार्ड की लिस्ट देखे तो आप समझ ही गए होंगे की इनमे से अधिकतर लोगो को ये पुरस्कार इनकी काबिलियत पर कम और किन्ही और कारणों से ज्यादा मिला है।
मैं कतई ये नहीं कह रहा की इन लोगो में काबिलियत नहीं है, हाँ इनमे काबिलियत है पर अफ़सोस ये पुरूस्कार इन्हे इनकी काबिलियत के दम पर नहीं बल्कि सत्ता की चौखट पर नाक रगड़ने से मिला है।
खुद ये लोग अवार्ड लेकर खुश भले ही होंगे और अपने बायोडाटा में सोशल साइट पर प्रोफाइल में पदम भूषण, पदम विभूषण, पदम श्री लिख लेंगे लेकिन जब कभी आईने के सामने खड़े होकर खुद से बात करेंगे तो इनका जमीर यदि ज़िंदा रहेगा तो कभी ये गवाही नहीं देगा की ये अवार्ड अपनी काबिलियत के दम पर मिला है।
कैसे ये नजरे मिलाएंगे अपने आप से? क्या किस्से सुनाएंगे अपने बच्चों या भावी पीढ़ी को? यही की हममे काबिलियत तो बहुत थी पर जब हमने सत्ता की चौखट पर नाक रगड़ा तो हमे ये अवार्ड मिला।

Anupam kher Padma Bhushan Award March protest
Anupam Kher Padma Bhushan Award
हम सब जानते है ये अवार्ड का केवल नाटक होता है जिन्हे दिया जाता है वो सब पहले से ही फिक्स होता है, और ऐसा मैं नहीं खुद अवार्ड पाने फ़िल्मी कलाकार और बीजेपी संसद किरण खैर के पति अनुपम खैर भी ये मानते है की अवार्ड पहले से फिक्स होते है और ये अवार्ड केवल एक मजाक बनकर रह गए।

अनुपम खैर का वो ट्वीट जिनमे वो खुद स्वीकार करते है की अवार्ड एक मजाक है और ये पहले से फिक्स होते है।

अवार्ड मिलने से ख़ुशी सबको होती है और होनी भी चाहिए ये गर्व की बात है चाहे फिर वो आपको अपने कार्य क्षेत्र में उपलब्धि से मिला हो या फिर किसी एक ख़ास राजनैतिक दल के लिए काम करने पर मिला हो।

अब आप कहेंगे नहीं भाई अनुपम खैर को उनके काबिलियत के दम पर ये अवार्ड मिला है, चलो कुछ पल के लिए मैं आपकी बात मान भी लेता हूँ, तो भाई ये पुरूस्कार उन्हें आज से पहले क्यों नहीं मिला?

अब आप कहेंगे पहले कांग्रेस पार्टी की सरकार थी तो उन्होंने नहीं दिया! भाई पिछले साल तो भाजपा की ही सरकार थी यही मोदीजी प्रधानमंत्री थे फिर ये पुरूस्कार उन्हें पिछले साल क्यों नहीं मिला?

जब आप इस सवाल का जवाब ढूंढने की कोशिश करेंगे की आखिर इस एक साल में इन जनाब ने ऐसा क्या कर दिया जिससे उन्हें पदम अवार्ड से सम्मानित किया गया? तो आपको जवाब में अपने आप पता लग जाएगा की ये अवार्ड उन्हें उनकी काबिलियत के दम पर नहीं बल्कि चापलूसी और सत्ता के हाथो नाचने के लिए मिला है। अभिनय तो खैर साहब है बहुत वर्षो तक किया है और कर भी रहे है बल्कि सत्ता के लिए किया गया अभिनय उन सभी फ़िल्मी दुनिया के अभिनय (जिनसे आप और हम अनुपम खैर को जानते है) पर भारी पड़ गया और आखिर ये अवार्ड उन्हें मोदी वफादारी के लिए मिल ही गया।

जिस समय देश में अहिष्णुता के खिलाफ समाज के जाने माने लेखक, कवि, फ़िल्मी कलाकार, समाज सेवी अपने अवार्ड वापस करने लगे और देश और दुनिया में मोदी सरकार की फजीहत होने लगी तब इन्ही अनुपम खैर ने मोदी की इज्जत एक मार्च निकालकर बचायी थी, उस इज्जत बचाने के बदले आखिर मोदीजी ने भी उन्हें इस इज्जत से नवाज ही दिया।

पर ये क्या अनुमप खैर साहब आप तो ये अवार्ड पाकर घमंड में आ गए? घमंड कभी भी किसी के लिए अच्छा नहीं होता और ना ही वो ज्यादा समय के लिए टिक पाता है।
अवार्ड मिलते ही आप जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में पब्लिक के बीच खड़े होकर माँ बहन की गाली निकालने लगते हो? खुद की  इज्जत ना करते कम से कम इस अवार्ड की तो इज्जत करते जिससे आपको नवाजा गया है?  एक मंच से खड़े होकर बेहन्चो*** बोलना आपको कहाँ तक शोभा देता है?
यही नहीं क्या आपका ये ट्वीट एक पद्म भूषण अवार्ड प्राप्त व्यक्ति का सा लगता है? जिसमे आपके बेहद ही छिछोरे और गली के आवारा लड़के की भाषा का उपयोग किया?

अर्थात 2010 में और 2013 में जब आपने ये ट्वीट किये थे तब क्या आपने बरनोल का सारा स्टॉक अकेले ने खरीद कर काम में लिया था? तभी तो शायद आपको ये अनुभव होगा की ऐसे समय में बर्नोल को उपयोग होता है? इतने सालो तक आपने तो खूब बरनॉल का उपयोग किया होगा?

सत्ता की चौखट पर नाक रगड़ कर या उनके आदेश से दुम हिलाकर तो ये अवार्ड कोई भी हासिल कर लेता है सरजी, मजा तो तब आता जब आप अपनी काबिलियत के दम पर ये अवार्ड पाते और गर्व से सीना तानकर सबको कह सकते की मुझे पदम भूषण अवार्ड मिला है, नाकि इस घमंड भरी भाषा का उपयोग करते।

"AWARDS in our country have become a mockery of our system.There is NO authenticity left in any one of them.B it films, National or now PADMA"

"Happy, Humbled & Honoured to share that i have been awarded The PADMA BHUSHAN by the Govt. of India. Greatest news of my life:) "

, #PadmaBhushan, #Award, #AnupamKher, #KiranKher, #Kiran, #Jaipur, #LitFest, #LitratureFestival 

रविवार, 17 जनवरी 2016

Thanks Bhawana Arora #KejriwalTheatrics #IncompetentDelhiPolice

धन्यवाद भावना अरोड़ा जी,
आपने आज जो भी किया उससे भी कई लोगों  पोल खुल गयी और एक सबसे बड़ी बात जो अरविन्द केजरीवाल सदा कहता है कि ये सुरक्षा नहीं दे रखी है बल्कि पुलिस के भेष में जासूस छोड़ रखे है को और भी स्पष्ट कर दिया।

अरविन्द केजरीवाल ने एक बार नहीं हजार बार कहा है मुझे नहीं चाहिए ये सुरक्षा वापिस ले लीजिये, लेकिन हकीकत यही है की सुरक्षा का तो केवल बहाना है मोदीजी ने अपने जासूस लगा रखे है ये पता करने के लिए की अरविन्द से कौन कौन मिलने आते है वो कहाँ कहाँ जाते है आदि आदि।

यदि सच में जो ये पुलिस मोदीजी ने अरविंदजी  आगे पीछे लगा रखी है वो उनकी सुरक्षा के लिए होती तो क्या आज भावना जी अपने जेब में स्याही लेकर अरविंदजी के ठीक सामने पहुँच पाती? क्या सच में  सुरक्षा होती तो ये पुलिस वाले जो सुरक्षा के नाम पर तैनात थे वो उस भावना जी अरविन्द जी तक पहुँचने से पहले रोककर ये नहीं जानना चाहते की वो महिला कौन है क्यों वो अरविंदजी के पास जाना चाहती है?

लेकिन सुरक्षा के नाम पर तैनात दिल्ली पुलिस के इन जासूसों ने ऐसा कुछ नहीं किया और भावना अरोड़ा को आसानी से अरविंदजी तक पहुँचने दिया तो स्तिथि स्वतः स्पष्ट हो जाती है की दिल्ली पुलिस अरविन्द के इर्द गिर्द उनकी सुरक्षा में नहीं अपितु उनकी जासूसी में तैनात है।

भावना जी आपकी स्याही ने कईयों के चेहरे से नकाब उतार दिए आज, पहला तो इससे दिल्ली पुलिस पूर्णतया बेनकाब हो गयी।
Bhawana Arora BJP Supporter working for BJP in Aam Aadmi Sena
भावना अरोड़ा, Bhawana Arora, BJP Supporter
मैं तो अब आपके बारे में सोच रहा हूँ भावनाजी, आपने स्याही तो किसी के कहने पर या किसी लालच में आकर फेंक दी लेकिन अपने खुद के लिए एक मुसीबत पाल ली आपने, जिसके भी कहने से आपने ये स्याही फेंकी है कल को वो आपको इसी घटना को लेकर कोई और अपराध करने का दबाव बना सकता है, वरना आपको कहेगा की अब ये नहीं करोगी तो मैं सबके सामने तुम्हारा सच बता दूंगा की कैसे और कितने रूपये लेकर आपने उस समय अरविंदजी पर स्याही फेंकी थी। कुछ तो सोचती ऐसा करने से पहले भावना जी, आप एक औरत है कल को एक माँ भी बनेगी क्या आप यही शिक्षा अपने बच्चे को भी देंगी की स्कूल में टीचर पर स्याही फेंक देना, नौकरी करो तो बॉस पर स्याही फेंक देना?

चलो आप अपने बच्चे को ये शिक्षा नहीं देंगी पर कोई ना कोई तो उसे ये बता ही देगा की उसकी माँ ने कैसे दिल्ली के मुख्यमंत्री पर स्याही फेंकी, और हो सकता है वो भी आपके नक्से कदम पर चले और एक दिन आपको अपने बच्चे के स्कूल की अनुशासन समिति से लेटर मिले की आपके बच्चे को टीचर पर स्याही फेंकने के कारण स्कूल से निष्काषित किया जाता है और उसके चरित्र वाले कॉलम में ये रिमार्क लगा दे तो आप क्या करोगी?
आप अपने बच्चे को किस मुहं से कहोगी की उसने ऐसा क्यों किया? उसे ऐसा नहीं करना चाहिए था? यदि आप उसे ऐसा कहेंगी तो वो आपको कहेगा की ये सब तो उसने आपसे ही सीखा है!!!

भावना जी कुछ लोगों के बहकावे में आकर क्या आपने सच में एक बहुत बड़ी गलती कर दी है?

चलो आपने जो भी किया कभी न कभी आप जब शांत मन से इस बारे में सोचेंगी तो स्वतः खुद को लानत देने लगेंगी और समझ जायेगी की आपने एक अच्छे नागरिक होने का परिचय तो नहीं दिया है। मैं तो आपको फ्हिर भी धन्यवाद ही करना चाहूँगा क्योंकि आपने एक तो सारे दिल्ली वासियों और भारत वर्ष के लोगो को ये दिखा दिया है की जो दिल्ली पुलिस अरविन्द जी के आगे पिछे लगा रखी है वो उनकी सुरक्षा के लिए कतई नहीं है अपितु वो उनकी जासूसी के लिए है, सुरक्षा के लिए होती तो आप  अरविंदजी तक पहुँच पाती और यदि पहुँच पाती तो उससे पहले आपकी तलाशी होती जिसमे आपके पास स्याही मिलते ही आपको सवाल किये जाते और आपको अरविंदजी के पास जाने से पहले ही गिरफ्तार कर लिया जाता।

खैर आपने एक और बात साबित करदी आज की अरविंदजी अब भी आम आदमी ही है और आम जनता उन तक अासानी से पहुँच सकती है जो की भारत के किसी भी मुख्यमंत्री के पास नहीं पहुँच सकती, अरविंदजी के पास आम आदमी तब भी पहुँच पाता था जब वे मुख्यमंत्री नहीं थे और आज भी पहुँच पाता है जब वो मुख्यमंत्री है, ऐसा मुख्यमंत्री भारत को पहली बार मिला है जिस तक हर कोई  पहुँच सकता है, मिल  सकता है, जिस मुख्यमंत्री के पास पहुँचने से पहले आपको कोई रोकता या टोकटा नहीं है, कितना आम और साधारण है ना अरविंदजी आज भी जब वो एक राज्य के मुख्यमंत्री है॥

#KejriwalTheatrics #IncompetentDelhiPolice  #DelhiPolice, #Delhi, #Police, Police, Delhi police, BS Bassi, Arvind Kejriwal, Ink, Bhawana Arora, Who is Bhawana Arora

दिल्ली सरकार की प्रदूषण के खिलाफ जंग #OddEvenPolicy

सबकी पोल खोलता दिल्ली सरकार की प्रदूषण के खिलाफ जंग Odd ईवन फार्मूला 

अब आप कहेंगे इसमें पोल खोलने वाली कौनसी बात है भाई? दिल्ली सरकार ने प्रदूषण कम करने के लिए एक फार्मूला Odd Even अपनाया जिसके तहत सम दिवस को सम नंबर की गाड़ियाँ और विषम दिवस पर विषम नम्बर की गाड़ियाँ चलेगी, बस इतना ही तो है इसमें किसकी क्या पोल खुल गयी?

अभी आप जैसे जैसे ये पढ़ते जायेंगे आपको समझ आएगी कैसे और किन किन लोगो की पोल दिल्ली सरकार के इस एक निर्णय ने खोल दी है। 

चलो इससे पहले की मैं दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार के odd even फोर्मुले का जिक्र करूँ मैं आपको भूतकाल की और लेकर जाना चाहता हूँ, जब केंद्र की मोदी सरकार ने स्वच्छता अभियान की शुरुआत की, क्या आपमें से कोई भी बता सकता है किसी ने उस स्वच्छता अभियान की खिलाफत की? नेता, पार्टी, सामाजिक संगठन, अभिनेता, टीवी चेनल, न्यूज़ एंकर कोई भी ऐसा होगा जिसने इसकी विरोध में कुछ कहा? मैं अभियान के घोषणा और शुरुआत की बात कर रहा हूँ, आप भ्रमित न हो जाए? क्यों इसके विरोध में भी बाते हुयी थी लेकिन वो बाद में जब मोदी सरकार के मंत्री केवल एक फोटोशूट के लिए हाथ में झाड़ू लेकर खड़े जाते है और सफाई का नाटक करने के लिए पहले कुछ कार्यकर्त्ता पेड़ो पत्ते वहाँ पर बिखेर देते है और बाद में भाजपा मंत्री हाथ में झाड़ू लेकर फोटो शेसन करके चले जाते है। 

मुझे तो कही भी ऐसा याद नहीं आ रहा जहाँ पर किसी भी टीवी चैनल, एंकर, संवाददाता किसी ने भी इसका विरोध किया हो या इसकी खिल्ली उड़ाई हो। 

चलो अब आते है आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार द्वारा प्रदूषण के खिलाफ जंग में सम विषम नियम की घोषणा, जैसे ही दिल्ली सरकार ने इसकी घोषणा की कुछ टीवी चैनल, एंकर और भाजपा व कांग्रेस के तमाम नेता व प्रवक्ताओ ने इसकी जबरदस्त खिलाफत की, चेनलो ने अपने आप से केवल इस अभियान की घोषणा भर मात्र पर प्रश्नचिन्ह लगाकर कुछ इस तरह की कोशिश की जैसे वो इस स्कीम के शुरू होने से पहले ही दिल्ली में ऐसा माहोल बनाने की कोशिश कर रहे हो की दिल्ली की जनता इसके खिलाफ होकर सड़को पर उत्तर आये और इस स्कीम को लागु न होने दिया जाए। 

आखिर क्या चाहते है ये टीवी चैनल व भाजपा कांग्रेस के नेता? दिल्ली की हवा जहरीली हो चुकी है, डॉ त्रेहान ने तो दिखाया है कैसे दिल्ली के लोगो के फेफड़े काले है जबकि अन्य राज्य के लोगो के फेफड़े काले नहीं है, उस कालेपन का कारण दिल्ली की हवा में घुला हुआ जहर है जिसे दिल्ली की जनता श्वांश के दवारा अंदर लेने को मजबूर है, ऐसी स्तिथि में यदि किसी सरकार इसे प्राथमिकता पर लेते हुए कुछ कठोर कदम उठाये है तो बजाय इसके की इस मुहीम का समर्थन किया जाए और इसे सफल बनाने में जितना योगदान दिया जा सके उतना योगदान दे के विपरीत सब के सब लग गए की कैसे भी करके इस  योजना को फेल किया जाए? भारतीय जनता पार्टी की सोशल मिडिया टीम ने बिलकुल इसके विरोध में सोशल मिडिया पर #OddEven_का_रायता नाम से हेश टैग भी लॉन्च किया। 

यदि किसी ने इसका विरोध नहीं किया तो वो थी दिल्ली की जनता, हाँ बिलकुल दिल्ली की जनता ने इस मुहीम का खुले दिल से स्वागत किया और दिल्ली की आबो हवा को साफ़ करने के लिए इस कठोर कदम का स्वागत ही नहीं किया अपितु अपनी तरफ से पूरा सहयोग किया, मानो  जनता ने इसे सरकारी आदेश ना मानते हुए  एक आंदोलन, एक मुहीम केरूप में स्वतः ही अपना लिया हो। 

जब जनता का साथ हो तो और क्या चाहिए, और वैसे भी ये दिल्ली की जनता के  लिए किया जा रहा था तो जो भाजपा, कांग्रेस के नेता और कुछ मीडिया वाले इसके खिलाफ थे उनकी क्या परवाह करना आखिर दिल वालो की दिल्ली का समर्थन जो मिल चुका था। 

हाँ यदि किसी चैनल ने इसका समर्थन किया तो मेरी नजर में वो चैनल है NDTV इंडिया हिंदी चैनल जिसने इस मुहीम का खुला समर्थन किया और अपनी तरह से भी एक मुहीम #ICantBreath शुरू की जिसमे वो बार बार दिल्ली की जनता से अपील करते रहे ओड ईवन का पालन करने की। 

प्राइम टाइम शो में रविश कुमार ने तो इस बार खुली बहस भी करवाई और कई रिपोर्ट पेश कर इसका समर्थन करते हुए यहां तक कहा की 1 जनवरी का इन्तजार क्या करना इसे तुरंत लागू करना  चाहिए दिल्ली की हवा पूरी तरह जहरीली हो चुकी  थी और इसे रोकना अत्यधिक जरूरी थी, ये भले किसी को बाहरी तौर पर आसानी से दिखाई ना दे पर इसे आप एक महामारी से भयंकर मान सकते हो, दिसंबर माह में दिल्ली में प्रदूषण का स्तर हर दिन खतरे से ऊपर था जिसे रोकना बेहद जरुरी था, अब इन सब बातो का तमाम समाचार चैनल वालो, भाजपा, कांग्रेस सबको पता था लेकिन फिर भी दल्ली सरकार के इस कदम का साथ ना देकर इसकी खिलाफत करना? 
क्या सिद्ध करता है? की अपनी राजनितिक विरोधी पार्टी को निचा दिखाने के लिए वो किसी भी हद्द तक गिर सकते है? बहुत अफ़सोस होता है इन पार्टियों के नेताओ पर जो इस तरह की ओछी हरकत से भी बाज नहीं आये, ये तो लाख लाख शुक्र है दिल्ली की जनता का हो इनके किसी बहकावे ने नहीं आई और खुले दिल से इस मुहीम का स्वागत ही नही किया अपितू पूरी दुनिया के सामने एक उदाहरण पेश किया की कैसे दिल्ली की जनता सरकार के इस फैसले के साथ खड़ी होकर इसे सफल करवाती है। 

आया समझ में कैसे और किनकी पोल खोली इस मुहीम ने? 

ये मिडिया वाले कुछ चैनल, और देश के  प्रमुख पार्टियाँ जिन्होंने अब तक इस देश पर राज किया वो तो बिलकुल से ही बेनकाब हो गयी, चलो इसी बहाने लोगो को इन पार्टियों और मीडिया हॉउस की सच्चाई और मानसिकता तो पता लगी। 

जब दिल्ली में ओड ईवन चल रहा था तब NDTV ने इसकी सच्चाई जानने के लिए एक एम्बुलेंस के द्वारा परीक्षण किया तो पाया की एक निश्चित दुरी जिसे पूरा करने में इस मुहीम के शुरू होने  35  मिनट लगती थी, ओड इवन के दौरान वहीं दूरी मात्र 18 मिनट में पूरी की। तो आप अंदाजा लगा  सकते है कैसे ये स्कीम  के हित में थी। 
धन्यवाद दिल्ली ये सब केवल आपके सहयोग से संभव हो पाया। 

#OddEvenPolicy, #OddEvenFormula, #OddEven, #OddEvenSuccess, #ThanksDelhi, #धन्यवाद_दिल्ली, #सम_विषम_नियम, Aam Aadmi party, Delhi Government, Arvind Kejriwal

शुक्रवार, 15 जनवरी 2016

वाह मोदीजी वाह - Vaah Modiji Vaah #MakeInIndia

वाह मोदीजी वाह,
मेरा भारत, सवा सो करोड़ भारतीय, हिन्दुस्तान की काबिलियत
आप ने एक पल में इन सबको ताक पर रख दिया?
भारत माँ के लाडलो पर एक तरफ जहाँ सारी दुनिया नाज करती है और उनकी बुद्धिमता का लोहा मानती है आपने उसी भारत माँ के लाडलो पर तनिक भी भरोसा नहीं किया?
अफ़सोस!!!
अफ़सोस आपने एक पल के लिए भी नहीं सोचा की  इन सवा सो करोड़ भारतीयों में इस अदने से काम के लिए किसी में  भी काबिलियत नहीं है?
मेक इन इंडिया Make In India
बात करते हो मेक इन इंडिया "Make In India" की और उसी की नींव आपने विदेशी हाथो में दे दी?
जी हाँ मैं उसी मेक इन इण्डिया की बात कर रहा हूँ,  जिसकी बात आप बड़े गर्व से करते है, पर अफ़सोस इसकी नींव रखने का मौका भी आपने उस भारत को नहीं दिया जिस भारत में आप बनाना चाहते है।
क्या करूँ आपके इस दोगलेपन पर हंसु या गुस्सा करूँ या सारी दुनिया के सामने चिल्ला चिल्ला कर कहूँ की ये देखो हमने शुरुआत की मेक इन इंडिया की लेकिन हमे उसी इंडिया पर कोई भरोसा नहीं है जिसके लिए हम आपसे कह रहे है की आओ और हमारे भारत  में निर्माण करो।
हाँ आपसे कहूँगा  की भारत में आकर बनाओ, मेक इन इंडिया लेकिन मैं इसी मेक इन इंडिया का लोगो तक इस भारत में नहीं बनवाऊंगा।
कितने दुर्भाग्य की बात है भारत और भारतवासियों के लिए की मोदीजी ने उन्हें इस लायक भी नहीं समझा की वो एक लोगो तैयार कर सके।
मैं तो सोच रहा हूँ आप किस मुहँ से दुनिया को कह रहे हो की आइये और हमारे भारत में निर्माण कीजिये, निवेश कीजिये।
सोचो आप किसी देश में बड़े बड़े पूंजीपतियों, आद्योगिक घरानो के सामने आवाहन कर रहे है "आइये और  हमारे भारत में निवेश कीजिये, आप भारत में अपना प्रोडक्शन किजिये, हममे मेक इन इंडिया  शुरू की है"
और ठीक उसी पल उस  भीड़ में से कोई एक आदमी खड़ा होकर आपसे कहे
"मोदीजी किस भारत मैं आकर निवेश करे? उसी में जो अपनी इस मुहीम का लोगो तक नहीं बना सकता, एक छोटा सा लोगो तो आपको विदेशो में बनवाना पड़ता है और हमे आप कह रहे है की भारत में आकर निर्माण करे?"
क्या आप उस समय उन सब लोगो से नजरे मिलाकर बात कर सकोगे?
क्या मजबूरियां है आपकी मोदीजी जो आप इस सवा सो करोड़ भारतीयों को इस गर्व का मौका नहीं देना चाहते?
कितना अच्छा होता इसी भारत का कोई लाल ये #मेक_इन_इंडिया का लोगो बनाता और उसकी पीढ़िया भी ये किस्से दुनिया भर को सुनाती की हमारे वंशज ने मेक इन इंडिया की नींव में अपना योगदान दिया था।
भारतीय बहुत ही खुले दिल के होते है मोदीजी आपकी जो  मजबूरियां है सबके सामने सच्चे दिल से रखो, ये भारत माँ के लाल आपके साथ खड़े दिखाई देंगे पर ऐसे इनका अपमान तो मत करो प्लीज॥
ये रही वो RTI की खबर के लिंक जिनसे इस बात का खुलासा हुआ कि "#MakeInIndia" का लोगो विदेश में बना है।
 http://economictimes.indiatimes.com/news/economy/policy/make-in-india-logo-designed-by-foreign-firm-says-rti/articleshow/50574597.cms?platform=hootsuite

 

बुधवार, 13 जनवरी 2016

#OddEvenFormula - सम विषम नियम विदेशी मिडिया कवरेज

#सम_विषम_फार्मूला #OddEvenPolicy
अरविन्द केजरीवाल के नेतृत्व ने बनी आम आदमी पार्टी की  दिल्ली सरकार ने दिल्ली वासियों के काले फेफड़ो की कालिख को मिटाने का ऐतिहासिक और बहुत साहसिक कदम उठाया, जिसे दिल्ली की जनता ने ही नहीं देश और विदेशो में भी सराहा गया।

एक तरफ दुनिया भर के तमाम मिडिया में इसे कवरेज मिला तो दूसरी तरफ दिल्ली की जनता ने इसे दिल सा प्यार किया और अपनाया, आखिर दिल्ली की जनता की ही भलाई के  लिए था तो अपनाना तो स्वाभाविक था।
दिल्ली सरकार द्वारा हाई कोर्ट  में पेश की गयी रिपोर्ट के मुताबिक़ दिल्ली में प्रदूषण काफी हद तक कम हुआ है।

इटली की सबसे प्रमुख समाचार एजेंसी ANSA ने भी इसे कुछ इस तरह अपनी वेबसाइट पर लिखा है।

Link of original news

हिंदी अनुवाद :-

दिल्ली में अल्टेरनेटिव नंबर प्लेट, धुंध(smog) में गिरावट 

सरकार का कहना १० दिन बाद ५०% तक गिरावट 


नई दिल्ली सरकार का कहना है की पहली जनवरी से लागू किये गए अल्टरनेटिव नंबर प्लेट फॉर्मूले की वजह से यातायात ट्राफिक में भारी गिरावट आई और इसकी वजह से दिल्ली में वातावरण प्रदूषण ५०% तक कम हुआ है।
विशेष रूप से PM 10 और PM ,5 बहुत तेजी से गिरा है।

(और यहां पर भारतीय मीडिया की पोल भी खोल दी ये लाइन मेरा कमेंट है ANSA की न्यूज़ का अंश नहीं है )

हालांकि भारतीय मिडिया का कहना है की हवाओं की वजह से महानगर पर छाया धुआँ (कोहरा, स्मोग) हट गया। अल्टेरनेटिव नंबर प्लेट 15 जनवरी तक जारी रहेगी।
 

रविवार, 27 दिसंबर 2015

#MannKiBaat विकलांग की जगह दिव्यांग का प्रयोग करे

Modiji on Mann ki Baat Vikaalng Divyang
#MannKiBaat PM Narendra Modi
आज फिर वो रविवार था जब हमारे प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदीजी को रेडियों पर मन की बात करनी थी, हाँ कुछ ऐसा ही नाम दिया है इस कार्यक्रम को #मन_की_बात।
देश के असंख्य लोगो को इन्तजार भी रहता है की शायद आज मोदी जी मन की बात की जगह कोई ढंग की बात करेंगे या यो कहे कोई काम की बात करेंगे।
अफ़सोस इस बार भी देश को निराशा ही हाथ लगी, जो आज की मन की बात का मुख्य बिंदु रहा वो है प्रधानमंत्री जी देशवासियों को कहा है की विकलांगो को दिव्यांग कह कर पुकारे!!!
चलो प्रधानमंत्रीजी आपकी बात मान ली विकलांगो को दिव्यांग कह कर बुला दिया अब क्या हुआ? क्या वो दिव्यांग ठीक हो गया? क्या उसकी स्तिथि में कुछ सुधार हो गया? नाम बदलने से क्या हो गया मेरी तो समझ से बाहर की बात है।
भारत वर्ष में महिलाओ के नाम के आगे देवी लगाया जाता है, लेकिन सारी दुनिया जानती है उन देवियों की हालत क्या है, आज भी हमारा समाज उन्हें देवी जैसा सम्मान नहीं दे पाया, नई वधु को जब घर में प्रवेश करवाते है तो उसे गृह लक्ष्मी कहते है पर ना जाने कितनी ही गृह लक्ष्मियों को शादी के कुछ ही महीनो बाद अनगिनत प्रताड़नाओं का सामना करना पड़ता है और बहुत सी गृह लक्ष्मिया ये जीवन छोड़ने पर मजबूर हो जाती है।
पूरे देश का तो पता नहीं पर हमारे राजस्थान में महिलाओ को घर की मालकिन कह कर पुकारा जाता है, जब भी कोई बात होती है तो यही कहते है
"भाया मालकण नै पूछणो पड़सी"
पर वो केवल नाम की ही मालकिन है उनकी दशा जो घर में होती है वो तो नौकर से भी बदतर होती है।
तो फिर विकलांगो को दिव्यांग कहने से क्या बदल जाएगा मोदीजी?

अच्छा तो होता आप देश के प्रधानमंत्री है, और वो भी पूर्ण बहुमत से कुछ ऐसी घोषणा करते जिससे उन विकलांगो को अंग प्रत्यारोपण में सरकार सहयोग करती और उन्हें सच में दिव्यांग बनाया जा सकता, इन ढकोसलों और थोथी बातो की जगह कोई काम के बात की घोषणा करते।

आज विज्ञान ने इतनी तरक्की कर ली है की किसी भी अंग का प्रत्यारोपण होना संभव हो गया है, यदि आप सच में विकलांगो/दिव्यांगों के लिए कुछ करना चाहते थे सरकार की तरफ से ऐसे नए हॉस्पिटल की घोषणा करते जहां उन विकलांगो को सरकार फ्री या बहुत कम खर्च में अंग प्रत्यारोपण करती वो होता सच में एक प्रधानमंत्री  का काम।

चलो इतना बड़ा काम भी आप  नहीं करना चाहते तो ये तो सारी दुनिया को पता है कि दिल्ली विश्व में सबसे प्रदूषित शहरो की गिनती में आता है और उस प्रदूषण की वजह से ना जाने कितनी बीमारियाँ लोगो को जकड रही है और आने वाली पीढ़िया शायद दिव्यांग पैदा होने लग जाए, आज दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने उस प्रदूषण रूपी दानव को खत्म करने के  लिए पहल की है, अच्छा होता आप मन की बात में केवल १ मिनट भी उस पर बोलते, दिल्ली वासियों को आग्रह करते की ये कदम उन्ही के बच्चो के स्वास्थ्य के लिया उठाया जा रहा है उसमे सहयोग करे, जैसे आपने स्वच्छ भारत का आग्रह किया था प्रदूषण मुक्त दिल्ली का भी आग्रह कर सकते थे?
या केवल ये सब इसीलिए नहीं किया की ये दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार कर रही है, तो आप उनके किसी भी अच्छे काम को सफल होता कैसे देख सकते है?

इतनी भी क्या दुश्मनी प्रधानमंत्रीजी? और फिर दुश्मनी किस बात की? क्या आप दिल्ली की जनता के प्रधानमंत्री नहीं है? दिल्ली पूर्ण राज्य नहीं है अर्थात आपकी तो और भी ज्यादा जिम्मेदारी बनती है दिल्ली की जनता के प्रति तो फिर अपने घमंड और अहम से बाहर आकर दिल्ली की जनता से बहुत बड़ी हार की जलन आज भी आपकी रातो की नींद हराम करती है उसे सच्चे दिल से स्वीकार करे, जिस प्रधानमंत्री को पूरे देश यहां तक की दिल्ली भी बहुत भारी बहुमत से उस पद तक पहुंचाया है उसी दिल्ली ने उन्हें इतनी बड़ी हार कुछ ना कुछ सन्देश देने के लिए दी है तो उस सन्देश को समझे और दिल्ली की जनता के हित में हो रहे कार्यों पर खुलकर समर्थन करे और अपना सहयोग दे, वरना तो जो दिल्ली की जनता ने दिया था वो अन्य राज्य भी आप तक पहुँचा  सकते है।

धन्यवाद । जय हिन्द ॥

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शनिवार, 26 दिसंबर 2015

Vasundhra Raje Celebrate 2 year - वसुंधरा राजे का 2 साल का सेलेब्रेसन

राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया ने अपने दो साल पूरे होने पर एक भव्य आयोजन किया जिसमे पूरे प्रदेश से बसे भरकर भरकर लोगो को इस समारोह को सफल बनाने और भीड़ जुटाने के लिए लाया गया।
खैर मैं ही लेट हूँ ये ब्लॉग लिखने में वसुंधरा राजे ने ये महोत्सव कई दिन पहले ही मना लिया था।

मैंने काफी कश्मकश के बाद भी इस सवाल का जवाब नहीं खोज पाया कि आखिर ये किस बात का जश्न मनाया गया?
ऐसा कौनसा काम राजस्थान की भाजपा सरकार ने इन 2 साल में कर दिया जिससे की उसे एक जश्न मनाकर प्रदेश की जनता को दिखाने की जरुरत पड़ गयी। मैंने  वसुंधराजी के सम्बोधन को भी सुना ये जानने के लिए कि आखिर वे कुछ तो बताएंगी प्रदेश की जनता को की आखिर वो क्या दिखाने के लिए जश्न मना रही है।
अफ़सोस उनके सम्बोधन में भी मेरे इस सवाल का जवाब नहीं ढूंढ पाया।

फिर मुझे ख्याल आया अपने कुछ भाजपा मित्रों को फोन करने  का, तो लगे हाथो मैंने  राजस्थान भाजपा के दो सक्रिय कार्यकर्ताओ को फ़ोन करके उनसे कुशल क्षेम पूछने के बाद मैं अपने असली मुद्दे पर आ गया।

मैंने कहा: और तो ज्यां आया के वसुंधरा का जश्न में 
दोस्त: क्याका ज्या आया यार, फ़ालतू में कतरी जनता परेशान होगी, जोरामरदी लोगां ने पकड़ पकड़ कर लेगा और सगळा बठै थू थू ही कर रया  हां, बिना फ़ालतू का नाटक। 

अब तो ये सवाल और पेचीदा होने लग गया और खुद को संतुष्ट करने के लिए एक तर्क संगत जवाब पाना भी जरुरी था, खैर वसुंधरा राजे ने अपने सम्बोधन में दो तीन बार ये तो जरूर कहा की उन्होंने इन दो सालो में बहुत काम किये है, पर बताया एक भी नहीं, अब कौनसे काम किये है वो ही जाने, प्रदेश की जनता त्राहि त्राहि कर रही है, बिजली की दाम दोगुने से भी ज्यादा कर दिए, सरकारी प्राइमरी स्वास्थ्य केंद्र को निजी हाथो में दे दिया, रोडवेज कर्मचारी कई महीनों से बिना तनख्वाह के बैठे है और अंततः मजबूर होकर धरने प्रदर्शन भी करते है, बिजली विभाग के कर्मचारी भी हड़ताल पर चले जाते है, महंगाई तो बेटी की तरह बढ़ती ही जा रही है और आम आदमी रोज इसी चिंता में डूबा रहता है की आज का दिन तो निकल गया अब कल का कैसे निकलेगा।

खैर मैंने जो एक तर्क संगत निष्कर्ष निकाला उससे ये निकलकर सामने आया कि कहीं ये सारी कवायद मोदीजी को ये दिखाने के लिये तो नहीं की कैसे उनकी लाख कोशिशो के बावजूद भी वो उस कुर्सी पर  मजबूती से टिकी हुयी है और मोदीजी उसका कुछ नहीं बिगाड़ पाये, बिगाड़ पाना तो दूर उनसे इस्तीफा भी नहीं ले पाये।
मोदीजी और वसुंधरा राजे के बीच में रिश्ते सामान्य नहीं है ये तो सर्व विदित है, चाहे वो राजे के बेटे दुष्यंत कुमार को मंत्री पद का मामला हो, या ललित गेट कांड में मोदीजी सहित केंद्र भाजपा की चुप्पी, या फिर वसुंधरा सरकार के एक चहेते अधिकारी के यहां CBI का छापा, अब मोदीजी की इतनी तो हिम्मत नहीं हुयी की अरविन्द केजरीवाल के दफ्तर की तरह वसुंधरा राजे के दफ्तर में CBI भेज सकते पर किसी तरह है उन्हें आरोपों के घेरे में लेने के लिए उनके एक अधिकारी के यहां तक CBI जरूर भिजवा दी गयी।

ललित मोदी काण्ड के समय तो समस्त भाजपा चुप थी, आज जिस तरह अरुण जेटली को बचाने तमाम भाजपा नेता उनके पक्ष में सामने आ रहे है, या फिर इसी ललित मोदी काण्ड में सुषमा स्वराज को बचाने के लिए जिस तरह भाजपा आगे आई वो फुर्ती वसुंधरा राजे के लिए केंद्र भाजपा द्वारा नहीं दिखाई गई, जैसे की मोदी मण्डली को मौका मिल गया हो वसुंधरा को घेर कर उन पर इस्तीफे के लिए दबाव बनाने का।

खुद अमित शाह राजस्थान में आये ये पता करने के लिए की यदि वसुंधरा को जबरदस्ती पद छोड़ने पर मजबूर किया जाए तो पार्टी को क्या नुक्सान हो सकता है, पर इस बात की तो तारीफ़ करनी पड़ेगी की राजस्थान भाजपा का एक बहुत बड़ा हिस्सा मजबूती से वसुंधरा राजे के साथ खड़ा था, तो अमित शाह को जब लगा की इससे तो पार्टी में बड़ी भयंकर गुटबाजी सामने आएगी और इसका खामियाजा उन्हें अन्य प्रदेशों में भी भुगतना पड़ सकता है, हो सकता है फिर एंटी मोदी गुट वाली भाजपा एकजुट हो जाये और शायद एक बहुत बड़ी विद्रोह की लहर सामने आ जाए।

जब इन सारे पहलुओ पर विचार किया तब कही जाकर केंद्र भाजपा की तरफ से वसुंधरा के बचाव में कुछ आवाजे मज़बूरी में निकलकर सामने आई।

तो जरूर वसुंधरा राजे को हक़ बनता है कि वो मोदीजी को एक जश्न के माध्यम से ये सन्देश दे सके की देखलो कर दिए दो साल पूरे, कोशिश करने वालो ने बहुत की थी इस कुर्सी से धकेलने की पर मैं फिर भी बैठी हूँ और अपनी इस कामयाबी को दिखाने के लिए एक जश्न तो बनता ही है.....

मेरे इस लेख से किसी की भावनाए आहत हुयी हो तो मैं उनसे करबद्ध क्षमा चाहता हूँ, मन के विचार यदि यहां भी नहीं लिखूंगा तो कहाँ लिखू, खैर मैं ये सब बाते बिना किसी प्रमाण के लिए लिख रहा हूँ, सब मेरे अपने निजी विचार है।
धन्यवाद । जय हिन्द । वन्दे मातरम