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Mera Vichar Mera Adhikar - Feel free to Say what you think
रविवार, 11 दिसंबर 2016
शुक्रवार, 2 दिसंबर 2016
BJP leader arrested for raping daughter for 8 years
The Punjab police said a Bharatiya Janata Party leader has been arrested after his 20-year-old daughter complained he had sexually exploited her for the last eight years.
Source of news:http://indiatoday.intoday.in/story/BJP+leader+arrested+for+raping+daughter+for+8+years/1/33933.html
शुक्रवार, 11 नवंबर 2016
Is Demonetisation really a Secret mission of Narendra Modi?
Is Demonetisation really a Secret mission या भाजपा नेता अपना काला धन पहले से ही सेट कर चुके?
जिस तरीके से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने खुद वो लंबा चौड़ा भाषण देकर 500 और 1000 के नोट को बंद करने की घोषणा की ये कहते हुए की यदि मैं इसकी घोषणा कर रहा हूँ तो आप समझ सकते हो किसी को इसका पता नहीं था शक तो यही से शुरू हो जाता है की आखिर प्रधानमंत्री को क्या जरुरत आ गयी अपने कीमती समय में समय निकालकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस (राष्ट्र के नाम सन्देश) करने की। वो उन्होंने इसीलिए किया ताकि लोगो को भरोसा हो सके की सच में इस मिशन के बारे में किसी को पता नहीं था।
लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा कुछ भी नहीं था, भाजपा नेता और तमाम पूंजीपति पहले से ही अपने काले धन को ठिकाने लगा चुके थे क्योंकि उन्हें पहले से सब बता दिया गया था। तभी तो पंजाब के भाजपा नेता और भाजपा के लीगल सेल के कन्वीनर संजीव कम्बोज के पास 5 नवम्बर को ही 2000 के नोट पहुँच चुके थे, उन्होंने अति उत्साह में उस समय ये ट्वीट भी कर दिया था जो की आज उन्ही के नेता नरेंद्र मोदी की पोल खोल रहा है।
हो सकता है अब ये ट्वीट वायरल हो गया है तो वो डिलीट कर दे, तो मैंने इसका स्क्रीनशॉट भी ले लिया है। ध्यान से देखिये इस ट्वीट को इसके वो टैग करते है ज़ी न्यूज को मानो कह रहे हो देख भाई मैंने तो लगा दिए ठिकाने आपने लगाए या नहीं अभी तक?


जिस तरीके से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने खुद वो लंबा चौड़ा भाषण देकर 500 और 1000 के नोट को बंद करने की घोषणा की ये कहते हुए की यदि मैं इसकी घोषणा कर रहा हूँ तो आप समझ सकते हो किसी को इसका पता नहीं था शक तो यही से शुरू हो जाता है की आखिर प्रधानमंत्री को क्या जरुरत आ गयी अपने कीमती समय में समय निकालकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस (राष्ट्र के नाम सन्देश) करने की। वो उन्होंने इसीलिए किया ताकि लोगो को भरोसा हो सके की सच में इस मिशन के बारे में किसी को पता नहीं था।
लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा कुछ भी नहीं था, भाजपा नेता और तमाम पूंजीपति पहले से ही अपने काले धन को ठिकाने लगा चुके थे क्योंकि उन्हें पहले से सब बता दिया गया था। तभी तो पंजाब के भाजपा नेता और भाजपा के लीगल सेल के कन्वीनर संजीव कम्बोज के पास 5 नवम्बर को ही 2000 के नोट पहुँच चुके थे, उन्होंने अति उत्साह में उस समय ये ट्वीट भी कर दिया था जो की आज उन्ही के नेता नरेंद्र मोदी की पोल खोल रहा है।
हो सकता है अब ये ट्वीट वायरल हो गया है तो वो डिलीट कर दे, तो मैंने इसका स्क्रीनशॉट भी ले लिया है। ध्यान से देखिये इस ट्वीट को इसके वो टैग करते है ज़ी न्यूज को मानो कह रहे हो देख भाई मैंने तो लगा दिए ठिकाने आपने लगाए या नहीं अभी तक?


जागो देशवासियों ये भाजपा सरकार देश के आम आदमी, गरीब, किसान, मजदूर, छोटे व्यापारी की दुश्मन है तभी तो बड़े कारोबारियों को राहत देकर आम आदमी को आज सड़क पर लाकर खड़ा कर दिया।Reserve Bank #RBI to issue Rs 2000 currency note in India soon pic.twitter.com/sTOMR5Um6I— Sanjeev Kamboj (@kambojOffice) 6 novembre 2016
बुधवार, 2 नवंबर 2016
Anna Hazare on ex-serviceman Ram kishan's suicide
आज भारत के इतिहास में एक और काला दिन लिखा जायेगा, जब सीमा पर लड़ने वाले एक सेवानिवृत सैनिक को आत्महत्या करनी पड़ी।
एक तरफ मोदी सरकार पूरे देश के साथ झूँठ बोल रही है की उन्होंने OROP लागू कर दिया है, वही दूसरी तरफ सैनिक राम किशन की आत्महत्या सरकार के इस दावे की पोल खोलती है।
खैर केवल राम किशन ही नहीं हजारो लाखो सैनिक अभी भी OROP के लिए आंदोलन कर रहे है, अगर सरकार ने OROP लागू कर दिया है तो फिर ये आंदोलन कैसे हो रहा है? अर्थात सरकार झूँठ बोल रही है, देश का प्रधानमंत्री सैनिको से झूंठ बोलने में जरा भी नहीं शर्म करता।
आज दिल्ली में मोदी सरकार द्वारा लोकतंत्र की जो धज्जियां उड़ाई गयी है वो आपको आने वाले खतरे से आगाह करवाता है, जागो अभी समय है इस देश को बचाना चाहते हो तो वरना ये हिटलर मोदी सब कुछ बर्बाद कर देगा।
एक तरफ मोदी सरकार पूरे देश के साथ झूँठ बोल रही है की उन्होंने OROP लागू कर दिया है, वही दूसरी तरफ सैनिक राम किशन की आत्महत्या सरकार के इस दावे की पोल खोलती है।
खैर केवल राम किशन ही नहीं हजारो लाखो सैनिक अभी भी OROP के लिए आंदोलन कर रहे है, अगर सरकार ने OROP लागू कर दिया है तो फिर ये आंदोलन कैसे हो रहा है? अर्थात सरकार झूँठ बोल रही है, देश का प्रधानमंत्री सैनिको से झूंठ बोलने में जरा भी नहीं शर्म करता।
आज दिल्ली में मोदी सरकार द्वारा लोकतंत्र की जो धज्जियां उड़ाई गयी है वो आपको आने वाले खतरे से आगाह करवाता है, जागो अभी समय है इस देश को बचाना चाहते हो तो वरना ये हिटलर मोदी सब कुछ बर्बाद कर देगा।
Unfortunate that ex-serviceman committed suicide.On one hand Govt glorifies soldiers &on the other hand doesn't fulfil promises:Anna Hazare pic.twitter.com/H2vz56BpbT— ANI (@ANI_news) 2 novembre 2016
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| AAP leader Dilip Pandey arrested and bad handled by Delhi Police |
गुरुवार, 13 अक्टूबर 2016
Police have seized country-made bombs and other weapons from a group of RSS/BJP workers
Country made bombs, weapons seized near BJP office in Kannur, party member arrestedhttps://t.co/h5sAcvOstn pic.twitter.com/qVvJBTr3PG— TheNewsMinute (@thenewsminute) 13 ottobre 2016
Original news link
http://www.thenewsminute.com/article/country-made-bombs-weapons-seized-near-bjp-office-kannur-party-member-arrested-51279
रविवार, 9 अक्टूबर 2016
भांड पत्रकारिता के दौर में देश का मनोबल बढ़ा हुआ है
रविश कुमार का ये लेख बहुत कुछ कह जाता, समय निकालकर सभी जरूर पढ़े
कंटेंट की कॉपी पेस्ट नहीं कर रहा हूँ क्योंकि लेख रविश का है तो अच्छा होगा उन्ही के ब्लॉग पर जाकर पढ़े।
यही ईमानदारी होगी।
केवल ये कुछ लाइन कॉपी पेस्ट की है बाकि सब रविश के ब्लॉग नई सड़क पर मिलेगा
धन्यवाद
कंटेंट की कॉपी पेस्ट नहीं कर रहा हूँ क्योंकि लेख रविश का है तो अच्छा होगा उन्ही के ब्लॉग पर जाकर पढ़े।
यही ईमानदारी होगी।
जब जनता ही साथ नहीं है तो पत्रकार क्या करे। बेहतर है अख़बार के उस कागज़ पर जूता रगड़ दिया जाए जिस पर लिखकर हम कमाते हैं। उसे न तो पत्रकारिता की ज़रूरत है न पत्रकार की। एक भांड चाहिए,सो हज़ारों भांड दे दो उसे। ठूंस दो इस देश के दर्शकों के मुंह में भांड।
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| Ravish Kumar - http://naisadak.org/desh-ka-manobal-and-journalism/ |
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| Ravish Kumar - http://naisadak.org/desh-ka-manobal-and-journalism/ |
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| Ravish Kumar NDTV - Blog Nai Sadak |
केवल ये कुछ लाइन कॉपी पेस्ट की है बाकि सब रविश के ब्लॉग नई सड़क पर मिलेगा
धन्यवाद
Hate In India replaces Make In India
Dadri accused wrapped in tricolor (like Bal Thackrey), Nawazuddin forced
out of Ramlila Bcoz he's Muslim- HateInIndia replaces MakeInIndia
Dadri accused wrapped in tricolor (like Bal Thackrey), Nawazuddin forced out of Ramlila Bcoz he's Muslim- HateInIndia replaces MakeInIndia— Shehzad Poonawalla (@Shehzad_Ind) 7 ottobre 2016
अंग्रेज़ो की मुखबिरी करने वाले इन नारंगी खटमलों से और उम्मीद भी क्या की जा सकती है ! #RSSBJPInsultsIndianTricolor pic.twitter.com/uoOTTb9GtY— PK (@naam_pk) 7 ottobre 2016
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| #RSSBJPInsultIndianTricolor, BJP, Modi, Narendra Modi |
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| #RSSBJPInsultIndianTricolor, Modi, Narendra Modi |
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| #RSSBJPInsultIndianTricolor, Modi, Narendra Modi |
सोमवार, 3 अक्टूबर 2016
रोहित सरदाना तुम हो किसकी तरफ?
आज सुबह सुबह अरविंदजी का एक वीडियो आया जिसमे उन्होंने कुछ दिनों पहले हमारी सेना द्वारा किये गए सर्जिकल स्ट्राइक की प्रशंसा करते हुए प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ करते हुए कहा की मैं उन्हें सल्यूट करता हूँ।
ज्ञात रहे विधानसभा के विशेष सत्र में भी आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार के सभी विधायको/मंत्रियो ने भारत सरकार के इस कदम की सराहना करते हुए, हमारे देश की सेना, प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, रक्षामंत्री, सभी सेनाध्य्क्षो और भारत की जनता को बधाई सम्बंधित विधेयक भी पारित किया था।
लेकिन कुछ दिनों से जिस तरह पाकिस्तान विदेशी मिडिया को लेकर इस बात का भ्रम फैला रहा है की भारत ने ऐसा कुछ नहीं किया तो देश में बैठे हर देशभक्त के सीने में आग लगती है की कैसे कोई देश हमारे सैनिको की इस बहादुरी को झूंठा बता सकता है, वो नकारते रहे वो उनकी प्रॉब्लम है पर यदि विदेश मिडिया तक ये कहने लग जाए की भारत झूठ बोल रहा है तो हर देशभक्त का खून खौलने लग जाना चाहिए। हमारे सैनिक जो अपनी जान की परवाह किये बिना दुश्मन देश में घुसकर उसी की धरती पर उसे सबक सिखाकर आये जिससे हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हुआ और आज यदि पाकिस्तान के साथ साथ विदेशी मीडिया (CNN वीडियो लिंक) भी ये कहने लग जाए की भारत झूठ बोल रहा है तो ये मेरे उन बहादुर सैनिको की बहादुरी का अपमान है ऐसे में एक सच्चे देशभक्त का कर्तव्य बनता है की वो सारे फुटेज (जो की भारत सरकार कह रही है की हमने पूरी कार्यवाही को ड्रोन से फिल्माया भी है) को पाकिस्तान और इन विदेशी मीडिया के मुँह पर दे मारना चाहिए जिससे हमारे सैनिको का सीना भी गर्व से और चौड़ा हो।
सोचिये जब भारत वो वीडियो सबके सामने रखेगा तो उन तमाम विदेशी मिडिया की कितनी किरकिरी होगी, वो भारत के सामने नजर मिलाने लायक नहीं रहेंगे।
पर अरविंदजी के ऐसा कहने पर कुछ लोगो को बहुत दर्द हुआ (आप समझ रहे होंगे पाकिस्तानियों को? नहीं भाई पाकिस्तानियों को नहीं कुछ लोग हमारे ही देश में मौजूद है जिन्हें दर्द हुआ की अरविंदजी ने पाकिस्तान के झूठ को बेनकाब करने की बात कैसे की) इनमे से एक है रोहित सरदाना।
कहने को तो रोहित सरदाना भारतीय है और एक पत्रकार भी है लेकिन वो क्यों पाकिस्तान के झूठ को बेनकाब नहीं करने देना चाहता? आखिर रोहित तुम हो किसकी तरफ जिस देश की धरती पर सांस ले रहे हो उसकी तरफ या उस झूंठे पाकिस्तान की तरफ?
तुमने सवाल किया की अरविन्द जी ने CNN पर सवाल क्यों नहीं किया? अरविन्द जी सवाल नहीं अरविन्दजी ने तो पूरे यकीन के साथ कहा है की वो झूठ बोल रहे है(दुबारा सुनना एक बार अरविन्द का वीडियो) और उसी के झूठ को बेनकाब करने की मांग देश के प्रधानमंत्री जी से कर रहे है। लेकिन तुम्हारे पास तो टीवी स्टूडियो है तुमने क्या किया CNN को बेनकाब करने के लिए? अरविन्द जी के वीडियो पर 3-4 ट्वीट भी कर दिए, एक लंबी छोड़ी पोस्ट लिख डाली, स्पेशल शो कर रहे हो अरविन्द की बात को गलत तरीके से पेश कर भारत के लोगो में जहर भरने के लिए लेकिन एक भारतीय न्यूज़ चेनल होने के नाते जब दुनिया का कोई चेनल मेरे देश की सेना की बहादुरी पर ऊँगली उठा रहा है तो उस चेनल का झूठ दुनिया को दिखाने के लिए तुमने क्या किया? यो तो सोमनाथ भारती के कुत्ते तक पूरे पूरे दिन टीवी स्टूडियो में बहस करते रहते हो आम आदमी पार्टी को बदनाम करने के लिए लेकिन आज पाकिस्तान के झूठ और विदेशी मिडिया के झूठ को दुनिया के सामने लाने के लिए तुमने क्या किया?
थोड़ा बहुत जमीर यदि अभी भी ज़िंदा है तो अपने आप से सवाल जरूर पूछना रोहित सरदाना तुम हो किसकी तरफ?
राम किरोड़ीवाल
ज्ञात रहे विधानसभा के विशेष सत्र में भी आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार के सभी विधायको/मंत्रियो ने भारत सरकार के इस कदम की सराहना करते हुए, हमारे देश की सेना, प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, रक्षामंत्री, सभी सेनाध्य्क्षो और भारत की जनता को बधाई सम्बंधित विधेयक भी पारित किया था।
लेकिन कुछ दिनों से जिस तरह पाकिस्तान विदेशी मिडिया को लेकर इस बात का भ्रम फैला रहा है की भारत ने ऐसा कुछ नहीं किया तो देश में बैठे हर देशभक्त के सीने में आग लगती है की कैसे कोई देश हमारे सैनिको की इस बहादुरी को झूंठा बता सकता है, वो नकारते रहे वो उनकी प्रॉब्लम है पर यदि विदेश मिडिया तक ये कहने लग जाए की भारत झूठ बोल रहा है तो हर देशभक्त का खून खौलने लग जाना चाहिए। हमारे सैनिक जो अपनी जान की परवाह किये बिना दुश्मन देश में घुसकर उसी की धरती पर उसे सबक सिखाकर आये जिससे हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हुआ और आज यदि पाकिस्तान के साथ साथ विदेशी मीडिया (CNN वीडियो लिंक) भी ये कहने लग जाए की भारत झूठ बोल रहा है तो ये मेरे उन बहादुर सैनिको की बहादुरी का अपमान है ऐसे में एक सच्चे देशभक्त का कर्तव्य बनता है की वो सारे फुटेज (जो की भारत सरकार कह रही है की हमने पूरी कार्यवाही को ड्रोन से फिल्माया भी है) को पाकिस्तान और इन विदेशी मीडिया के मुँह पर दे मारना चाहिए जिससे हमारे सैनिको का सीना भी गर्व से और चौड़ा हो।
सोचिये जब भारत वो वीडियो सबके सामने रखेगा तो उन तमाम विदेशी मिडिया की कितनी किरकिरी होगी, वो भारत के सामने नजर मिलाने लायक नहीं रहेंगे।
पर अरविंदजी के ऐसा कहने पर कुछ लोगो को बहुत दर्द हुआ (आप समझ रहे होंगे पाकिस्तानियों को? नहीं भाई पाकिस्तानियों को नहीं कुछ लोग हमारे ही देश में मौजूद है जिन्हें दर्द हुआ की अरविंदजी ने पाकिस्तान के झूठ को बेनकाब करने की बात कैसे की) इनमे से एक है रोहित सरदाना।
कहने को तो रोहित सरदाना भारतीय है और एक पत्रकार भी है लेकिन वो क्यों पाकिस्तान के झूठ को बेनकाब नहीं करने देना चाहता? आखिर रोहित तुम हो किसकी तरफ जिस देश की धरती पर सांस ले रहे हो उसकी तरफ या उस झूंठे पाकिस्तान की तरफ?
तुमने सवाल किया की अरविन्द जी ने CNN पर सवाल क्यों नहीं किया? अरविन्द जी सवाल नहीं अरविन्दजी ने तो पूरे यकीन के साथ कहा है की वो झूठ बोल रहे है(दुबारा सुनना एक बार अरविन्द का वीडियो) और उसी के झूठ को बेनकाब करने की मांग देश के प्रधानमंत्री जी से कर रहे है। लेकिन तुम्हारे पास तो टीवी स्टूडियो है तुमने क्या किया CNN को बेनकाब करने के लिए? अरविन्द जी के वीडियो पर 3-4 ट्वीट भी कर दिए, एक लंबी छोड़ी पोस्ट लिख डाली, स्पेशल शो कर रहे हो अरविन्द की बात को गलत तरीके से पेश कर भारत के लोगो में जहर भरने के लिए लेकिन एक भारतीय न्यूज़ चेनल होने के नाते जब दुनिया का कोई चेनल मेरे देश की सेना की बहादुरी पर ऊँगली उठा रहा है तो उस चेनल का झूठ दुनिया को दिखाने के लिए तुमने क्या किया? यो तो सोमनाथ भारती के कुत्ते तक पूरे पूरे दिन टीवी स्टूडियो में बहस करते रहते हो आम आदमी पार्टी को बदनाम करने के लिए लेकिन आज पाकिस्तान के झूठ और विदेशी मिडिया के झूठ को दुनिया के सामने लाने के लिए तुमने क्या किया?
थोड़ा बहुत जमीर यदि अभी भी ज़िंदा है तो अपने आप से सवाल जरूर पूछना रोहित सरदाना तुम हो किसकी तरफ?
राम किरोड़ीवाल
शुक्रवार, 9 सितंबर 2016
Chhattisgarh BJP Leader Mantu Ram’s son thrashed bikers who refused to give him his way
Chhattisgarh BJP Leader Mantu Ram’s son thrashed bikers who refused to give him his way
BJP, Gundagardi, Bhartiya Janta Party, Narendra Modi, Modi, India, BJP leader
Chhattisgarh: In a shocking incident, the Chhattisgarh BJP leader Mantu Ram’s son thrashed bikers who refused to give him way.
Mantu Ram’s son was caught on camera punching and kicking two bikers when they refused to give him way.
The incident happened on August 15th.
Mantu Ram, however, said that such incidents are normal in road rage cases. He also said that police can take action against his son.
Meanwhile, Kanker police is yet to receive a complaint regarding the matter.
#WATCH Kanker (15/8/16): Chhattisgarh BJP Leader Mantu Ram’s son thrashed bikers who refused to give him his way pic.twitter.com/UTYXAMPUyK— ANI (@ANI_news) 9 settembre 2016
BJP, Gundagardi, Bhartiya Janta Party, Narendra Modi, Modi, India, BJP leader
सोमवार, 15 अगस्त 2016
आजादी अभी बाकी है
आजादी के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनायेकेवल अंग्रेज राज खत्म हुआ वो एक तरह की आजादी थी पर अभी भी हम हजारों तरह की गुलामियों में जी रहे है, जिनसे भी आजाद होना बाकि है।
उदाहरण के तौर पर हम सभी सोशल मिडिया यूजर यदि आज मानसिक तौर पर आजाद हो पाए तो बहुत बड़ी आजादी की जीत होगी।
आज ही के दिन तय करले की बिना किसी मेसेज की सत्यता का पता लगाए मैं उसे आगे फॉरवर्ड नहीं करूँगा।
ये जो हम जोश और भावुकता में बिना तथ्यों को जाने मेसेज एक ग्रुप से दूसरे में फॉरवर्ड करते है ये हमारी मानसिक गुलामी है आइये कम से कम इससे तो आजाद हो आज के दिन, ना किसी से लड़ना है, ना धरना प्रदर्शन करना, ना पुलिस की लाठियाँ खानी केवल अपने सोये हुए विवेक को जगाना है।
जय हिन्द। जय भारत। वन्दे मातरम
राम किरोड़ीवाल
शनिवार, 30 जुलाई 2016
कौन हूँ मैं?
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| मातृभूमि से दूर |
देश की बात करे तो लोग कहते है किस देश की बात करते हो उसे तो आपने कभी का छोड़ दिया, अगर देश से ही आपको प्यार होता तो कभी उसे छोड़कर ना जाते।
और जब जिस देश में रहते है उस देश की बात करते है तो लोग कह देते है तुम तो यहाँ के हो ही नहीं तुम्हे बोलने का कोई अधिकार ही नहीं है।
आखिर क्या है मेरी पहचान?
कौन हूँ मैं? मेरे भारतीय होने की पहचान कैसे होगी? मेरे इन्डियन पासपोर्ट से जो की मेरे पास है, मेरा परिवार जो अभी भी उसी धरती पर रहता है उनसे या मेरे सीने में भारत माँ के लिए प्यार है उससे?
जब जब भारत माँ के आचंल के साथ कुछ भी गलत होता यहाँ इतनी दूर बैठा भी सिहर उठता हूँ, कई दिनों तक दिल में बैचैनी और तड़फ रहती है क्यों ऐसा हो रहा है मेरे देश में?
और जब जब देश में कुछ अच्छा होता है तो गर्व से सीना चार गुना चौड़ा हो जाता है, कई दिनों तक भारतीय जो यहाँ रहते है और जो भी इटालियन (इटली में रहता हूँ तो इटालियन दोस्त भी बहुत है ) दोस्त है के साथ बखान करते रहता हूँ, बार बार उसे दोहराता हूँ और जितनी बार भी बताता हूँ उतना ही जोश और आँखों में चमक बढ़ती जाती है।
तो मैं कौन हुआ?
मुझे कहाँ और किसके पक्ष में बोलने का अधिकार है?
या सदा इसी तरह जीना पड़ेगा? वहाँ रहते नहीं तो वहाँ के अब है नहीं, और यहाँ रहता हूँ पर विदेशी हूँ तो यहाँ का हो नहीं सकता?
शुक्रवार, 8 जुलाई 2016
अपाहिज होते पत्रकार
एक समय था जब पत्रकार और पत्रकारिता अपने दम पर बड़े बड़े सिंहासन हिला देती थी, जब एक पत्रकार अपना कैमरा नेताओं की तरफ घुमाकर सवाल के लिए मुहँ खोलता था तो उससे पहले नेताजी मुँह फिराकर भागने की सोचने लग जाते, की कही ये कोई सवाल कर लगा तो क्या जवाब देंगे।
तब नेता कैमरे का सामना करने की हिम्मत तभी करते थे जब उन्होंने सच में बहुत अच्छा काम कर दिया होता था। जब इतनी ताकत थी मीडिया के उस कैमरे और पत्रकार की कलम में तो आज फिर क्यों पत्रकार की कलम और मिडिया का कैमरा अपने आप में लाचार बेबस सा नजर आने लगता है?
सभी पत्रकार और संवाददाता तब भी किसी ना किसी दल के समर्थक होते थे पर उस समय उनमे भक्ति नहीं होती थी, उन्हें अपने राजनैतिक झुकाव से कहीं ज्यादा अपने दावित्य अपनी जिम्मेदारियों का ख्याल रहता था, हाँ कोई कोई तब भी अपवाद निकल जाता था पर आजकल तो पत्रकारिता को सही मायने में ज़िंदा रखने वाले एक अपवाद के तरह मिलते है।
जब से टीवी स्टूडियों के एंकर सवाल करते करते अचानक से खुद को प्रवक्ता समझ जिस दल के प्रति उनका रुझान होता है उसकी तरफ से सवाल करना शुरू करते करते धीरे धीरे अपने एंकर वाले पद से प्रवक्ता पद पर आकर उसी दल की तरफ से राज्य सभा में मंत्री या लोकसभा की टिकट हासिल करने लगे तब से कमोबेश हर तरफ टीवी स्टूडियों में बैठे एंकर अंदर ही अंदर ये चाहत रखने लग गए की वो गया है तो हम भी जा सकते है और इसी चाहत को बल देने के लिए अपने दावित्व को भूल उस दल विशेष के प्रति काम करना शुरू कर देते है और यही से शुरुआत होती है अपने शक्तियों को कम करने की, उस शक्तिशाली कैमरे को कमजोर करने की।
और ये फिर यहाँ तक ही सिमित नहीं रहता फिर वो अपनी चापलूसी और उस दल विशेष के प्रति अपनी आगाध शृद्धा को और मजबूत बनाने के लिए अपने ही पेशे में किसी अन्य एंकर के सवाल पर भी सवाल खड़े करने लग जाता है, उस दल विशेष से किये गए किसी भी एंकर के सवाल को तोड़ मरोड़ कर अपने टीवी स्टूडियों में पेश कर दूसरे एंकर की फजीहत करना ये लोग अपना परम कर्तव्य समझने लगते है और ऐसा करते करते हो वो एकदम से भूल जाते है की वो नेता नहीं एक जिम्मेदार पत्रकार/सवांददाता/एंकर है।
जब आप भूल जाते है की आप क्या है तो स्वतः ही आपकी सभी शक्तियाँ भी समाप्त हो जाती है जैसे पवन पुत्र हनुमान अपनी भूल गए थे की वो कौन है तो वो अपनी शक्तियाँ भी भूल गए थे फिर सभी वानरों ने उनकी स्तुति कर उन्हें उनकी शक्तियाँ याद दिलाई तो वही हनुमान जी जो समुद्र को देखकर ही डर रहे थे एक छलांग में की योजन लांघ गए थे।
कई बार तो मन में प्रश्न आता है की जब एक पुलिसकर्मी अपनी जिम्मेदारी का सही तरीके से पालन नहीं करता तो उसे नौकरी से हटा दिया जाता है, किसी शिक्षक का परीक्षा परिणाम थोड़ा कम रहने पर उसे हजार सवालों का जवाब देना होता है, यहां तक की सीमा पर अपनी जान की परवाह किये बगैर हमारी सुरक्षा करने वाले सैनिकों से भी थोड़ी सी गलती पर उन्हें बड़ी से बड़ी सजा दे दी जाती है तो फिर ये पत्रकार/संवाददाता/एंकर जब अपना काम सही तरीके से नहीं करते है तो फिर इन्हे कोई सजा क्यों नहीं देता? क्यों इन्हे इनके पद पर बने रहने दिया जाता है?
पत्रकारिता का विद्यार्थी तो नहीं रहा कभी पर इतना तो जानता हूँ की
जब तक इस देश का एक भी नागरिक भूखा सोता है, एक भी बच्चा शिक्षा से वंचित रहता है, देश के किसी भी कौने में एक भी किसान आत्महत्या करने पर मजबूर होता है तो पत्रकार का दावित्य होता है की सत्ता से सवाल करे, उसे जब मौका मिले सत्तापक्ष को सामने पाने का अपने कैमरा उनकी तरफ घुमाए और सवाल करे की ऐसा उनके साशन काल में कैसे हो गया?
पर यदि वो सवाल करने के बजाय गुणगान करने लग जाए तो समझो पत्रकारिता अपनी साख खो रही होती है और पत्रकार खुद तो अपाहिज होता ही है साथ ही साथ आने वाली पीढ़ियों को भी अपाहिज कर जाता है।
पर इस दौर में भी कुछ पत्रकार ऐसे बचे हुए है जिनके दम पर ये पत्रकारिता ज़िंदा है और आप और मुझ जैसे लाखो लोगो का पत्रकारिता पर भरोसा कायम रखे हुए है।
धन्यवाद उन सभी पत्रकारों का जो सत्ता की इस भेड़चाल के साथ ना होकर हजारो गालियाँ झेलते हुए भी पत्रकारिता को ज़िंदा रखे हुए है।
नाम लेने की जरूरत नहीं है क्योंकि चाहे हम उन एंकर/संवाददाताओं के हितेषी हो या गाली देने वालो में से पता आखिर सभी को है की सच्चा पत्रकार/एंकर/संवाददाता कौन है और कौन सत्ता के आधीन होकर खुद को अपाहिज बनाये हुए है।
धन्यवाद
जय हिन्द
तब नेता कैमरे का सामना करने की हिम्मत तभी करते थे जब उन्होंने सच में बहुत अच्छा काम कर दिया होता था। जब इतनी ताकत थी मीडिया के उस कैमरे और पत्रकार की कलम में तो आज फिर क्यों पत्रकार की कलम और मिडिया का कैमरा अपने आप में लाचार बेबस सा नजर आने लगता है?
सभी पत्रकार और संवाददाता तब भी किसी ना किसी दल के समर्थक होते थे पर उस समय उनमे भक्ति नहीं होती थी, उन्हें अपने राजनैतिक झुकाव से कहीं ज्यादा अपने दावित्य अपनी जिम्मेदारियों का ख्याल रहता था, हाँ कोई कोई तब भी अपवाद निकल जाता था पर आजकल तो पत्रकारिता को सही मायने में ज़िंदा रखने वाले एक अपवाद के तरह मिलते है।
जब से टीवी स्टूडियों के एंकर सवाल करते करते अचानक से खुद को प्रवक्ता समझ जिस दल के प्रति उनका रुझान होता है उसकी तरफ से सवाल करना शुरू करते करते धीरे धीरे अपने एंकर वाले पद से प्रवक्ता पद पर आकर उसी दल की तरफ से राज्य सभा में मंत्री या लोकसभा की टिकट हासिल करने लगे तब से कमोबेश हर तरफ टीवी स्टूडियों में बैठे एंकर अंदर ही अंदर ये चाहत रखने लग गए की वो गया है तो हम भी जा सकते है और इसी चाहत को बल देने के लिए अपने दावित्व को भूल उस दल विशेष के प्रति काम करना शुरू कर देते है और यही से शुरुआत होती है अपने शक्तियों को कम करने की, उस शक्तिशाली कैमरे को कमजोर करने की।
और ये फिर यहाँ तक ही सिमित नहीं रहता फिर वो अपनी चापलूसी और उस दल विशेष के प्रति अपनी आगाध शृद्धा को और मजबूत बनाने के लिए अपने ही पेशे में किसी अन्य एंकर के सवाल पर भी सवाल खड़े करने लग जाता है, उस दल विशेष से किये गए किसी भी एंकर के सवाल को तोड़ मरोड़ कर अपने टीवी स्टूडियों में पेश कर दूसरे एंकर की फजीहत करना ये लोग अपना परम कर्तव्य समझने लगते है और ऐसा करते करते हो वो एकदम से भूल जाते है की वो नेता नहीं एक जिम्मेदार पत्रकार/सवांददाता/एंकर है।
जब आप भूल जाते है की आप क्या है तो स्वतः ही आपकी सभी शक्तियाँ भी समाप्त हो जाती है जैसे पवन पुत्र हनुमान अपनी भूल गए थे की वो कौन है तो वो अपनी शक्तियाँ भी भूल गए थे फिर सभी वानरों ने उनकी स्तुति कर उन्हें उनकी शक्तियाँ याद दिलाई तो वही हनुमान जी जो समुद्र को देखकर ही डर रहे थे एक छलांग में की योजन लांघ गए थे।
कई बार तो मन में प्रश्न आता है की जब एक पुलिसकर्मी अपनी जिम्मेदारी का सही तरीके से पालन नहीं करता तो उसे नौकरी से हटा दिया जाता है, किसी शिक्षक का परीक्षा परिणाम थोड़ा कम रहने पर उसे हजार सवालों का जवाब देना होता है, यहां तक की सीमा पर अपनी जान की परवाह किये बगैर हमारी सुरक्षा करने वाले सैनिकों से भी थोड़ी सी गलती पर उन्हें बड़ी से बड़ी सजा दे दी जाती है तो फिर ये पत्रकार/संवाददाता/एंकर जब अपना काम सही तरीके से नहीं करते है तो फिर इन्हे कोई सजा क्यों नहीं देता? क्यों इन्हे इनके पद पर बने रहने दिया जाता है?
पत्रकारिता का विद्यार्थी तो नहीं रहा कभी पर इतना तो जानता हूँ की
"एक पत्रकार का कर्तव्य सत्ता से सवाल करना होता है सत्ता के गुणगान करना नहीं"
जब तक इस देश का एक भी नागरिक भूखा सोता है, एक भी बच्चा शिक्षा से वंचित रहता है, देश के किसी भी कौने में एक भी किसान आत्महत्या करने पर मजबूर होता है तो पत्रकार का दावित्य होता है की सत्ता से सवाल करे, उसे जब मौका मिले सत्तापक्ष को सामने पाने का अपने कैमरा उनकी तरफ घुमाए और सवाल करे की ऐसा उनके साशन काल में कैसे हो गया?
पर यदि वो सवाल करने के बजाय गुणगान करने लग जाए तो समझो पत्रकारिता अपनी साख खो रही होती है और पत्रकार खुद तो अपाहिज होता ही है साथ ही साथ आने वाली पीढ़ियों को भी अपाहिज कर जाता है।
पर इस दौर में भी कुछ पत्रकार ऐसे बचे हुए है जिनके दम पर ये पत्रकारिता ज़िंदा है और आप और मुझ जैसे लाखो लोगो का पत्रकारिता पर भरोसा कायम रखे हुए है।
धन्यवाद उन सभी पत्रकारों का जो सत्ता की इस भेड़चाल के साथ ना होकर हजारो गालियाँ झेलते हुए भी पत्रकारिता को ज़िंदा रखे हुए है।
नाम लेने की जरूरत नहीं है क्योंकि चाहे हम उन एंकर/संवाददाताओं के हितेषी हो या गाली देने वालो में से पता आखिर सभी को है की सच्चा पत्रकार/एंकर/संवाददाता कौन है और कौन सत्ता के आधीन होकर खुद को अपाहिज बनाये हुए है।
धन्यवाद
जय हिन्द
मंगलवार, 31 मई 2016
सवाल क्या किया हम देशद्रोही हो गए
कई बार जब सोचने लगता हूँ अतीत में खो जाता हूँ, सरकारें तो आजादी के बाद से अब तक बनती आई है, इस बार ऐसा क्या हो गया की अपने देश के प्रधानमंत्री और उनकी केबिनेट के मंत्रियों से सवाल पूछना ही आप पर ऐसा आरोप लगा सकता है जिस आरोप के आधार पर यदि पुलिस एक्शन लेने लगे तो आपको तुरंत जेल हो और वो भी बिना जमानत वाली।
अर्थात आपको देशद्रोह के जुर्म में गिरफ्तार किया जाएगा।
अब कुछ मंदबुद्धि लोग कह सकते देशभक्तों की सरकार ही इस बार बनी है इससे पहले तो सभी देशद्रोहियों की सरकारें थी इसीलिए अब आपको पता चल रहा है।
तो क्या ये तथाकथित फर्जी राष्ट्रवादी लोग ये कहना चाहते है की माननीय अटल बिहारी वाजपेयी जी देशद्रोही थे? उनकी सरकार देशद्रोही थी? जिन अटल बिहारी वाजपेयी ने इस भारतीय जनता पार्टी नाम के संगठन को खड़ा किया और देश के कोने कोने तक पहुंचाया क्या ये लोग उन पर भी सवाल खड़े कर रहे है?
यदि नहीं कर रहे है तो क्या कोई बता पाएगा की उस समय सरकार पर सवाल उठाने वालो को तो देशद्रोही नहीं कहा जाता था? अब ही ऐसा क्यों हो रहा है?
कहीं ऐसा तो नहीं अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए वर्तमान सरकार देशद्रोह, हिन्दू, भारत माता, गाय, गोबर आदि का सहारा ले रही है?
जब भी कोई इस सरकार से सवाल करता है तो उन्हें या तो हिन्दू विरोधी, या देश विरोधी करार दे दिया जाता है। पर ये लोग भूल रहे है हम किसी तालिबानी देश में नहीं रह रहे है हम विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और लोकतंत्र में सवाल पूछना जनता का हक़ ही बल्कि कर्तव्य होता है की अपनी सरकारों से सवाल करे, जिन्हे हम चुनकर संसद में भेजते है उनसे समय समय पर सवाल पूछते रहे की हाँ बताइये आपने क्या किया, इस मुद्दे पर आपकी क्या राय है, हमे ये परेशानी है और हमारी इस आवाज को संसद में आपको पहुँचाना है क्योंकि आप संसद में हमारा प्रतिनिधित्व कर रहे है।
पर यहाँ तो जैसे ही हम ये सब बाते करते है तुरंत कुछ लोग अचानक से चिल्लाने लग जाते है ये देशद्रोही है, इसे मार डालो, इसे पिटो, इसे सजा दो, इसे पाकिस्तान भेज दो आदि आदि।
आम आदमी के पास अपनी बात इन सत्ता के मद में चूर हुए लोगो तक पहुँचाने के गिने चुने ही रास्ते है, पहले हम अपने नेताओ को पोस्टकार्ड भेजते थे, जब एक साथ हजारो पोस्टकार्ड सरकारों तक किसी एक ही बात को लेकर पहुँचते थे वो उन पर जरूर सोच विचार करती थी, फिर समय आया धरना प्रदर्शन का और अब सबसे बड़ा हथियार है सोशल मिडिया।
आप अपनी मांग, अपने सवाल सोशल मिडिया के द्वारा सरकार तक पहुंचा सकते है। पर ये क्या जैसे ही आप इस सरकार से सवाल करते है की किसान आत्महत्या क्यों कर रहे है तो अचानक से इनकी साइबर टीम का एक झुण्ड आप पर टूट पड़ता है (इसमें उस झुण्ड का कसूर बस इतना है की वो अपनी रोजी रोटी के लिए उनकी साइबर सेल में काम करते है और उन्हें इसी बात के पैसे मिलते है की कौन कितनी गालिया निकालता है पुरे दिन, कौन कितनी लोगो को देशद्रोही की धमकी देता है, कितने लोगो को पाकिस्तान भेजने के लिए कहता है।
ये कैसी सरकार चुन ली हमने जिससे सवाल पूछना ही गुनाह हो गया, और तो और कुछ लोग अपनी चमचागिरी चमकाने के चक्कर में जबरदस्ती ही इस सवाल जवाब की बहस में कूद पड़ते है और सवाल करने वालो पर तरह तरह के आरोप लगाकर कुछ लोगो की नजरो में आना चाहते है जिससे उन्हें भी सरकार कोई पद्म पुरस्कार दे सके आया किसी राज्य का राज्यपाल/उप राज्यपाल बना सके और वो इसमें बखूबी कामयाब भी हो रहे है, बोले तो चमचो की चाँदी हो रही है (आशा करता हूँ बिना नाम लिए ही आप समझ गए होंगे की मैं किनकी बार कर रहा हूँ)।
तो इस बार आपने और हमने सरकार चुनकर अपने मूलभूत अधिकारों को ही गिरवी रख दिया है, अब आप चुपचाप सहते रहो जो भी ये सरकार कहे उसे मानते रहो, पानी नहीं मिलता प्यासे मरते रहो पर सरकार से मत कहो की हमें पानी क्यों नहीं मिलता, कर्जे के तले दबा किसान आत्महत्या करले पर सरकार से ये मत पूछो की बड़े बड़े पूंजीपतियों का अरबो खरबों रूपये का लोन माफ़ कर दिया जाता है मुझ गरीब किसान का कुछ लाख रूपये का लोन माफ़ क्यों नहीं कर सकते?
अफ़सोस
दो साल तो निकल गए है तीन साल और झेलना ही पडेगा पर उम्मीद है की हम भारत के लोग इस बार सोच समझ कर सरकार चुनेंगे, जुमलों के बहकावों में नहीं आएंगे और नाही विज्ञापन देखकर प्रोडक्ट खरीदेंगे।
जय हिन्द! वन्दे मातरम! भारत माता की जय!
#देशद्रोही, #भारतमाता, #बीजेपी, #भाजपा, #नरेन्द्रमोदी, #मोदी,
अर्थात आपको देशद्रोह के जुर्म में गिरफ्तार किया जाएगा।
अब कुछ मंदबुद्धि लोग कह सकते देशभक्तों की सरकार ही इस बार बनी है इससे पहले तो सभी देशद्रोहियों की सरकारें थी इसीलिए अब आपको पता चल रहा है।
तो क्या ये तथाकथित फर्जी राष्ट्रवादी लोग ये कहना चाहते है की माननीय अटल बिहारी वाजपेयी जी देशद्रोही थे? उनकी सरकार देशद्रोही थी? जिन अटल बिहारी वाजपेयी ने इस भारतीय जनता पार्टी नाम के संगठन को खड़ा किया और देश के कोने कोने तक पहुंचाया क्या ये लोग उन पर भी सवाल खड़े कर रहे है?
यदि नहीं कर रहे है तो क्या कोई बता पाएगा की उस समय सरकार पर सवाल उठाने वालो को तो देशद्रोही नहीं कहा जाता था? अब ही ऐसा क्यों हो रहा है?
कहीं ऐसा तो नहीं अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए वर्तमान सरकार देशद्रोह, हिन्दू, भारत माता, गाय, गोबर आदि का सहारा ले रही है?
जब भी कोई इस सरकार से सवाल करता है तो उन्हें या तो हिन्दू विरोधी, या देश विरोधी करार दे दिया जाता है। पर ये लोग भूल रहे है हम किसी तालिबानी देश में नहीं रह रहे है हम विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और लोकतंत्र में सवाल पूछना जनता का हक़ ही बल्कि कर्तव्य होता है की अपनी सरकारों से सवाल करे, जिन्हे हम चुनकर संसद में भेजते है उनसे समय समय पर सवाल पूछते रहे की हाँ बताइये आपने क्या किया, इस मुद्दे पर आपकी क्या राय है, हमे ये परेशानी है और हमारी इस आवाज को संसद में आपको पहुँचाना है क्योंकि आप संसद में हमारा प्रतिनिधित्व कर रहे है।
पर यहाँ तो जैसे ही हम ये सब बाते करते है तुरंत कुछ लोग अचानक से चिल्लाने लग जाते है ये देशद्रोही है, इसे मार डालो, इसे पिटो, इसे सजा दो, इसे पाकिस्तान भेज दो आदि आदि।
आम आदमी के पास अपनी बात इन सत्ता के मद में चूर हुए लोगो तक पहुँचाने के गिने चुने ही रास्ते है, पहले हम अपने नेताओ को पोस्टकार्ड भेजते थे, जब एक साथ हजारो पोस्टकार्ड सरकारों तक किसी एक ही बात को लेकर पहुँचते थे वो उन पर जरूर सोच विचार करती थी, फिर समय आया धरना प्रदर्शन का और अब सबसे बड़ा हथियार है सोशल मिडिया।
आप अपनी मांग, अपने सवाल सोशल मिडिया के द्वारा सरकार तक पहुंचा सकते है। पर ये क्या जैसे ही आप इस सरकार से सवाल करते है की किसान आत्महत्या क्यों कर रहे है तो अचानक से इनकी साइबर टीम का एक झुण्ड आप पर टूट पड़ता है (इसमें उस झुण्ड का कसूर बस इतना है की वो अपनी रोजी रोटी के लिए उनकी साइबर सेल में काम करते है और उन्हें इसी बात के पैसे मिलते है की कौन कितनी गालिया निकालता है पुरे दिन, कौन कितनी लोगो को देशद्रोही की धमकी देता है, कितने लोगो को पाकिस्तान भेजने के लिए कहता है।
ये कैसी सरकार चुन ली हमने जिससे सवाल पूछना ही गुनाह हो गया, और तो और कुछ लोग अपनी चमचागिरी चमकाने के चक्कर में जबरदस्ती ही इस सवाल जवाब की बहस में कूद पड़ते है और सवाल करने वालो पर तरह तरह के आरोप लगाकर कुछ लोगो की नजरो में आना चाहते है जिससे उन्हें भी सरकार कोई पद्म पुरस्कार दे सके आया किसी राज्य का राज्यपाल/उप राज्यपाल बना सके और वो इसमें बखूबी कामयाब भी हो रहे है, बोले तो चमचो की चाँदी हो रही है (आशा करता हूँ बिना नाम लिए ही आप समझ गए होंगे की मैं किनकी बार कर रहा हूँ)।
तो इस बार आपने और हमने सरकार चुनकर अपने मूलभूत अधिकारों को ही गिरवी रख दिया है, अब आप चुपचाप सहते रहो जो भी ये सरकार कहे उसे मानते रहो, पानी नहीं मिलता प्यासे मरते रहो पर सरकार से मत कहो की हमें पानी क्यों नहीं मिलता, कर्जे के तले दबा किसान आत्महत्या करले पर सरकार से ये मत पूछो की बड़े बड़े पूंजीपतियों का अरबो खरबों रूपये का लोन माफ़ कर दिया जाता है मुझ गरीब किसान का कुछ लाख रूपये का लोन माफ़ क्यों नहीं कर सकते?
अफ़सोस
दो साल तो निकल गए है तीन साल और झेलना ही पडेगा पर उम्मीद है की हम भारत के लोग इस बार सोच समझ कर सरकार चुनेंगे, जुमलों के बहकावों में नहीं आएंगे और नाही विज्ञापन देखकर प्रोडक्ट खरीदेंगे।
जय हिन्द! वन्दे मातरम! भारत माता की जय!
#देशद्रोही, #भारतमाता, #बीजेपी, #भाजपा, #नरेन्द्रमोदी, #मोदी,
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