शुक्रवार, 25 मई 2018

NDTV के रविश कुमार को मिली जान से मारने की धमकी

NDTV के रविश कुमार को मिली जान से मारने की धमकी

रविश का कसूर? 

क्योंकि उसने सत्ता के सामने घुटने ना टेकते हुए पत्रकारिता का धर्म निभाया
एक सच्चे पत्रकार का धर्म होता है की वो सत्ता की चापलूसी ना करते हुए, आम आदमी की रोजमर्रा की समस्याओं को सत्ता से सामने रखे, सत्ता से सवाल करे की लोगो की इस परेशानी का सरकार के पास क्या समाधान है?
और रविश वही कर रहा है |
वो 2014 से पहले भी यही काम कर रहा था, आज तो इंटरनेट का युग है जाकर देख लो रविश कुमार की डिबेट 2014 से पहले की तब वो कांग्रेस से सवाल करता था क्योंकि तब कांग्रेस की सरकार थी, आज वो भाजपा से सवाल कर रहा है क्योंकि सरकार भाजपा की है

बस फर्क इतना सा है की तब ये अंधभक्तों की फौज के सरदार सत्ता में नहीं थे तो वो सवाल उनके लिए फायदेमंद थे, रविश जब कांग्रेस से सवाल करता था तो यही भाजपा और इनके प्रवक्ता रविश के हर शो में रविश की प्रशंसा करते थे, क्योंकि तब सवाल उनसे नहीं हो रहे कांग्रेस से हो रहे थे और उन सवालों से भाजपा को फायदा हो रहा था

आज भाजपा के प्रवक्ता रविश की प्रशंसा तो बहुत दूर की बात है उनके में भी नहीं आना चाहते क्योंकि सत्ता बदल गयी लेकिन रविश नहीं बदला, वो कल भी सवाल करता था आज भी सवाल करता है|

रविश के खिलाफ नफरत फैलाकर ये अंधभक्तों की फौज खुद का ही नुक्सान कर रही है, रविश युवाओं की बात करता है, बेरोजगारों की बात करता है, किसानो की बात करता है, जवानों की बात करता है, आपके स्कूल में अच्छे शिक्षक और अच्छी बैठने की व्यवस्था क्यों नहीं है इसकी बात करता है.

आशा है एक ना एक दिन ये अंधभक्ति का चश्मा आपकी आँखों से उतरेगा और आप सच्चाई देख सकेंगे, बस कहीं देर ना हो जाए

शनिवार, 21 अप्रैल 2018

चाट भाई चाट

“चाट भाई चाट” के एक एपिसोड में एक मोहल्ले में चौराहे की ट्रेफिक लाईट बहुत समय से ख़राब थी, जिससे कोई नियमों का पालन नहीं करता था क्योंकि बत्ती नहीं तो नियम नहीं और रोज एक्सीडेंट होने लग गए, मोहल्ले के लोगो ने बहुत बार शिकायत की लेकिन कोई सुनने को तैयार ही नहीं था, रोज होते एक्सीडेंट पर कोई बोलता तो सरकार में बैठे लोग उन्हें ही गलत ठहराकर उन्हें चुप करा देते या उलटे उन्हें ही आरोपी बनाकर सजा सुना देते।

इस तानाशाही के चलते धीरे धीरे लोगो ने चुप रहना स्वीकार कर लिया, रोज होती मौत से सभी आहत थे लेकिन बोलने की हिम्मत कोई नही कर पा रहा था! अंत में मोहल्ले की एक बहादुर शेरनी ने प्रण किया की जब तक बत्ती ठीक नहीं होते और ट्रेफिक के नियम सही तरीके से लागू नहीं होते वो भोजन ग्रहण नहीं करेगी चाहे उसकी जान ही क्यों ना चली जाये।

पहले कुछ दिन तो सबने उसे नजर अंदाज किया, जिन्हें वो बत्ती ठीक करनी थी वो अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए वहाँ से कुछ दिनों के लिए पलायन कर गया, सोचा 1-2 दिन में खुद ही भूख लगेगी तो अपनी हठ छोड़ देगी और उन्हें वो बत्ती ठीक नहीं करनी पड़ेगी, लेकिन वो शेरनी अपनी जिद्द की पक्की थी क्योंकि रोज होने वाले एक्सीडेंट उसे झकझोर रहे थे।  

धीरे धीरे लोग उस शेरनी के साथ अपनी आवाज बुलंद करने और बत्ती ठीक करने की मांग चारों तरफ से उठने लगी, अब तो धीरे धीरे देश के हर कौने में जहाँ भी बत्ती ख़राब थी वहाँ से लोग अपनी आवाज उठाने लग गए की ये ट्रेफिक लाईट ठीक होनी ही चाहिए कब तक लोग यो ही एक्सीडेंट में मरते रहेंगे।

अब तो जो अधिकारी विदेश भाग गया था उसे लोग विदेशों में भी कोसने लग गए की आखिर तुम बत्ती ठीक क्यों नहीं करना चाहते रोज एक्सीडेंट में लोग मर रहे है क्या तुम यही चाहते हो लोग ऐसे ही मरते रहे और उस अधिकारी के पास मुहं छुपाने के अलावा और कोई उपाय शेष नहीं था। दुनिया कहाँ की कहाँ पहुँच गयी है और तुम्हारे देश में अभी भी एक ट्रैफिक लाईट ठीक करवाने के लिए किसी को आमरण अनशन करना पड़ रहा है।

नौ दिन तक वो अपनी जिम्मेदारी से भागता रहा लेकिन वो बहादुर शेरनी भी अपनी जिद्द पर अड़ी रही, वो अधिकारी आखिर कितने दिन तक अपनी जिम्मेदारी से भाग सकता था, आखिर में उसे वापस देश में तो लौटना ही था।

चारों तरफ से जो आलोचना हो रही थी और देश और विदेशों में उस अधिकारी की जो थू थू रही थी उससे बचने का केवल एक ही उपाय था की ट्रेफिक लाईट को सही किया जाया अब मरता क्या ना करता आख़िरकार ना चाहते हुए भी उसे वो ट्रेफिक लाईट ठीक करने के आदेश जारी करने ही पड़े।

एक औरत की जिद्द और पूरे देश से उसे मिले सर्मथन के आगे वो अधिकारी हार गया और वो बहादुर शेरनी जीत गयी।

अब वो घमंडी अधिकारी ये कैसे स्वीकार कर सकता था की लोग ये कहे की एक औरत ने उस अधिकारी को आखिर झुका ही दिया तो इससे बचने के वो अधिकारी और उसके कुछ चापलूस चारों तरफ ये कहने लग गए की देखो हमारे साहब ने आपके मोहल्ले की बत्ती ठीक करने के आदेश दे दिए है।

“बलात्कार-मृत्यदंड के प्रावधान का श्रेय लेने की से इसका कोई लिंक नहीं है ।"

 

#DeathForChildRapists
 

 
 
 

 
 
 


बुधवार, 18 अप्रैल 2018

आपको ये गुलामी मुबारक हो

स्वाति किसके लड़ रही है?
क्या मांग है उसकी?
यदि उसकी मांग मोदी सरकार मान ले तो फायदा स्वाति को होगा
या पूरे हिंदुस्तान की बेटियाँ, बहने, माँ-बाप-भाई-पति को होगा?

फिर हिन्दुस्तान एक आवाज में स्वाति के साथ खड़ा क्यों नहीं है?
इसे ही कहते है गुलामी
आपको गुलाम बना दिया गया है
अब आप स्वविवेक से स्वयं और समाज के हित के लिए ना बोलते है, ना लिखते है और ना ही सड़को पर निकलते है
लेकिन जिसने आपको गुलाम बना लिया है
उसकी सेना के किसी सिपाही का छोटा सा झूंठा मेसेज भी व्हाट्सअप्प पर आपको मिल जाए तो
आप तुरंत गुस्से में लाल पिले होते हुए जो हथियार मिलेगा उसे लेकर सड़को पर निकल आते है

इसे ही गुलामी कहते है
जब आपका विवेक मर जाता है
और आपकी जिंदगी पर किसी और का कंट्रोल हो जाता है

आपको ये गुलामी मुबारक हो

जो ये गुलामी स्वीकार नहीं कर रहे है वो स्वाति के साथ खड़े है
अपने देश के बेटियों को इन्साफ दिलाने के लिए

 

सोमवार, 16 अप्रैल 2018

बलात्कार नहीं, मेरी आस्था तार तार हुई है

कठुआ में आठ साल की मासूम से बच्ची के साथ जो उन दरिंदों ने किया है वो महज एक बलात्कार नहीं है वो पूरी मानवता को झकझोर देने वाला वो घिनोना कृत्य है जिसने मेरी आस्था को भी तार तार किया है।

जिस मंदिर मुझ जैसे असंख्य लोग पवित्र जगह समझकर परेशानियों से भरी अपनी जिंदगी से कुछ पल निकालकर ईश्वर का धन्यवाद करने और कुछ पलों के लिए सकून महसूस करने जाते है उसी मंदिर में एक सप्ताह से भी अधिक समय तक महज एक आठ साल की गुड़िया को बंदी बनाकर, जबरदस्ती ड्रग्स देकर लगातार बलात्कार किया गया? (खबर का लिंक1 ) (खबर का लिंक २)

सोचिये जब मुझ जैसा कोई व्यक्ति मंदिर में शृद्धा के साथ सर झुकाकर प्रार्थना कर रहा होगा उसी समय उसी मंदिर के एक हिस्से में उस देवस्थान का पुजारी और कुछ लोग मिलकर एक मासूम सी  साल की बेटी को अपनी हवस और घृणा का शिकार बना रहे होंगे, सोचकर ही सहम जाता हूँ, मैं तो उस मंदिर में नहीं जाता क्योंकि मैं वहाँ का रहने वाला नहीं हूँ पर सोचो वहां रहने वाले लोग क्या ये सब जानने के बाद भी उस मंदिर में कैसे सकून से अपना सर झुका सकेंगे? क्या उस समय उनके जहन में उस मासूम सी आठ साल की आसिफा की चीख नहीं गूंज रही होगी? जिस समय वो ईश्वर को धन्यवाद कर रहे होंगे उस समय क्या सवाल उनके मन में नहीं आएगा की किस बात का धन्यवाद करू? कुछ दिन पहले इसी जगह एक आठ साल की बेटी की चीख किसी को सुनाई नहीं दे रही थी?
इसीलिए कह रहा हूँ की ये महज बलात्कार नहीं है बल्कि मेरी आस्था को तार तार किया है गया है, जिस जगह पर जाकर मैं सकून से बैठकर अपने ईष्ट का ध्यान कर सकता था अब वहाँ जाने पर मुझे एक मासूम बेटी की चीख सुनाई देंगी और कुछ दरिंदो के चेहरे जो एक समुदाय विशेष के प्रति अपनी नफरत की आग में इस कदर तक गिर गए की ना केवल उन्होंने अपने धर्म का अपमान किया बल्कि वो समूचे विश्व के अपराधी बन गए क्योंकि उन्होंने मेरी आस्था को भी तार तार किया है।

यदि आपके भीतर तनिक भी इंसानियत जिन्दा है तो जम्मू कश्मीर की क्राइम ब्रांच ने जो अपनी चार्जशीट में लिखा है उसे पढ़ेंगे तो आपकी रातों की नींद गायब हो जाएगी।

(चार्जशीट में जो लिखा था उसे सुनिए रविश कुमार की जुबानी)


उस आठ की मासूम के साथ जो हुआ वो तो एक घिनोना कृत्य था ही उससे से भी ज्यादा शर्मनाक था वो देखना जब कुछ लोग जिसमे भारतीय जनता पार्टी के मंत्री भी शामिल थे का तिरंगे के साथ सड़कों पर आना, आप सोच रहे होंगे शायद वो बलात्कारियों को सजा दिलाने के लिए तिरंगा लेकर निकले होंगे, अफ़सोस ऐसा नहीं था उलटे वो तिरंगा लेकर निकले थे उन बलात्कारियों को बचाने के लिए, क्राइम ब्रांच जो चार्जशीट पेश करने जा रही थी उसे रोकने के लिए और इसके लिए उन्होंने तिरंगे का इस्तेमाल किया तो जय श्री राम का भी इस्तेमाल किया, भारत माता की जय, जय श्री राम और तिरंगे हाथ में लिए भाजपा के मंत्री और कार्यकर्ता उस समय हिन्दू एकता मंच बनाकर बलात्कारियों को बचाने के लिए सड़कों पर निकले थे।
कोनसे भगवान को मानकर उनकी जय जयकार कर रहे है ये लोग? कौनसा भगवान खुश होगा की आज उसकी जय जयकार वो लोग लगा रहे है को एक बलात्कारी को बचाने के लिए सड़को पर आ गए है महज इसलिए की किसी एक समुदाय विशेष के प्रति वो नफरत पाले हुए है?

क्या हमारे देश के असंख्य लोगो ने इसीलिए अपने प्राणों की आहुति देकर हमे आजादी और तिरंगा दिया था की कल को इसी आजादी और तिरंगे का इस्तेमाल कर वो किसी बलात्कारी को बचा सकेंगे?

और क्या भारत माता अपने इस हाल पर रो नहीं रही होगी की पहली तो उसी भारत माता की एक आठ साल की बेटी के साथ कई दिनों तक बलात्कार होता है और फिर उस बेटी को इन्साफ दिलाने के बजाय लोगो का एक समूह भारत माता की जय बोलता हुआ बलात्कारियों को बचाने के लिए सड़कों पर उतर आएगा?

यदि कुछ लोग बलात्कारियों को सजा दिलाने की मांग करेंगे तो उन्हें ही डराया धमकाया जायेगा?

सोचिये ये कहाँ आ गए हम!
निर्भया - आसिफा
निर्भया से लेकर आसिफा तक कुछ नहीं बदला, बदली है तो केवल सरकारें बदली है और सरकार में बैठे लोगो की नीयत बदली है, जब सत्ता में नहीं थे इन्ही लोगो को देश के किसी भी कोने में होने वाले हर बलात्कार की चीख सुनाई देती थी आज सत्ता पाकर इन्हे उन मासूमों की चीख सुनाई देना तो दूर उलटे बलात्कारियों को बचाने का हर सम्भव प्रयास किया जा रहा है।

पूरा देश गुस्से में है लेकिन ना सरकार में बैठी महिलाओं को इस बात का दर्द है और ना ही सत्तानशीनों की इस बात की परवाह, शायद वो इस बात से आश्वस्त है की उन्होंने धर्म और जाति के नाम पर पर्याप्त जहर लोगो को जहन में भर दिया है की अब लोग बलात्कार जैसी नीचता को भी महज इसलिए स्वीकार कर लेंगे की वो किसी और समुदाय के साथ हुआ है।



भाजपा नेताओं के शर्मनाक बयान




शुक्रवार, 20 अक्टूबर 2017

'Sawa we h we s see see' Indian Version of 'covefefe'

'covefefe' पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गया था जब अमेरिकन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ये ट्वीट कर लोगो को अपनी योजनाओं के बारे में अपडेट किया था|
इस ट्वीट के बाद से ही भारत सरकार बड़ी पशोपेश में थी की ऐसा ही कुछ भारत की मोदी सरकार क्यों नहीं कर सकती, आखिर मोदी सरकार में एक से बढ़कर एक टेलेंटेड लोग भरे है|

समय गुजरता गया लेकिन समस्या जस की तस की थी, आखिर वो दिन आ ही गया जब मोदी सरकार के मंत्रिमंडल में सबसे उच्च स्थान रखने वाले अरुण जेटली (चुनाव हारकर भी मंत्री बनने वाले) के अधीन आने वाले वित्त मंत्रालय ने ये जिम्मेदारी अपने कंधो पर लेते हुए 'Sawa we h we s see see' और 'Ess'का आविष्कार किया|


दीपावली के ठीक दूसरे दिन गोर्वधन पूजा के अवसर पर वित्त मंत्रालय के आधिकारिक ट्विटर हेंडल से इन दो महत्त्वपूर्ण ट्वीट के द्वारा अपनी नयी योजनाओं के बारे जानकारी तो दी ही साथ ही साथ अमेरिकन राष्ट्रपति के एक ट्वीट के बदले में 2 शानदार ट्वीट कर अमेरिका को भी भारत ने पछाड़ दिया|

मेरा अनुमान है की अरुण जेटली जी शायद कुछ नए तरीके के टेक्स की घोषणा करने वाले थे जिसकी जानकारी वो केवल एक न्यूज़ चैनल CNNNews18 को देना चाहते थे लेकिन गलती से DM में मेसेज भेजने की बजाय open ट्वीट कर दिया|

लगभग 2 घंटे तक ये दोनों ट्वीट Ministry of Finance, Government of India के Official ट्विटर Account पर रहे इस दौरान 400 से अभी अधिक रीट्वीट, 300 से अधिक कमेंट और अनगिनत Quot इस ट्वीट पर हो चुके थे, तब जाकर वित्त मंत्रालय की नींद खुली और उन्होंने ये दोनों ट्वीट डीलीट किये|
ये है वित्त मंत्रालय के ओरिजनल ट्वीट और उनके निचे उनके स्क्रीनशॉट

Sawa we h we s see see - tweet from @FinMinIndia
Sawa we h we s see see - tweet from @FinMinIndia



Ess - tweet from @FinMinIndia
Ess


सोचिये कैसे लोगो के हाथो में हमारे भारत देश की बागडौर है, गलती किसी से भी हो सकती है, हो सकता है वित्त मंत्रालय का ट्विटर हेंडल को भी व्यक्ति देख रहा हो उससे भी गलती हो गयी लेकिन सोचने वाली बात यह है की 2 घंटे तक जब पूरा सोशल मीडिया इस ट्विटर पर कमेंट कर रहा था, हर जगह चर्चा में था तब वित्त मंत्रालय क्या कर रहा था| Ministry of Finance का ट्वीटर नोटिफिकेशन जब ब्लास्ट कर रहा था तो भी उनका ध्यान इस तरफ नहीं गया?
सोचिये यदि कोई आम आदमी कुछ जानकारी वित्त विभाग के ट्विटर हेंडल से पूछ ले तो उसे तो कब जवाब देंगे ये? और हाँ ये वो सरकार है जो डिजिटल इण्डिया की बात करती है, कैशलेश इकॉनमी की बात करती है लेकिन 2 गलत ट्वीट डीलीट करने में इन्हे २ घंटे से भी अधिक का समय लग जाता है|

ये वही सरकार है जिसने दूरदर्शन के एक एंकर को महज इसलिए नौकरी से निकाल दिया था क्योंकि उससे चीन के राष्ट्रपति के नाम का उच्चारण सही नहीं हुआ था| (खबर)
और इस जिनके पास ये मंत्रलाय है वो वही अरुण जेटली है जो कभी चुनाव नहीं जीत सके, अर्थात देश के मतदाताओं ने कभी उन पर भरोसा नहीं किया बावजूद इसके मोदी सरकार में मंत्री बन जाते है|
खैर इनके कारनामे गिनाने लगेंगे तो कितनी ही पोस्ट करनी पड़ेंगी| आज केवल हम 'Sawa we h we s see see' की खुशिया मनाये और नए टेक्स सिस्टम Ess को लेकर एक दूसरे को बधाई दे जश्न मनाये|

यदि मेरी पोस्ट से किसी की भावनाये आहत हुयी हो तो उसके लिए क्षमा प्रार्थी हो लेकिन एक बार सोचियेगा जरूर जिन लोगो से एक ट्विटर हेंडल ठीक से नहीं चल सकता उन लोगो के हाथों में आपने देश सौंप दिया और मोदी जी उस विशेष व्यक्ति को देश की अर्थव्यवस्था सौंप दी, जिसका नतीजा केवल ये ट्वीट नहीं है बल्कि पूरे देश की अर्थव्यवस्था और गिरती हुयी GDP है|

बुधवार, 20 सितंबर 2017

अनपढ़ो की फौज

हाल ही में भारतीय जनता पार्टी की उत्तराखंड सरकार के शिक्षा मंत्री अरविन्द पांडे के नए अविष्कार (-1) + (-1 ) = 0 के बाद अभी अभी भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रिय टीम ने एक और नया आविष्कार किया है

14.98 ₹ + 9.02₹= 27.44 ₹

यक़ीन नहीं होता?

ये देखिये भारतीय जनता पार्टी की नेता अमित मालवीय जिनकी ट्विटर प्रोफाइल में लिखा है ( In-charge of BJP's national Information & Technology, ex-banker and an early stage investor. Interested in politics and economics.)

दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी होने का दावा करने वाली भाजपा के राष्ट्रिय इंचार्ज जो खुद को ex-banker भी बताते है ने आज एक पोस्टर ट्वीट किया जिसमे उन्होंने यही दर्शाया है की 14.98 ₹ + 9.02 ₹ = 27.44 ₹ होता है|
ये उनका ट्वीट और ट्वीट का स्क्रीनशॉट भी है




14.98 ₹ + 9.02 ₹ = 27.44 ₹
Amit Malviya @malviyamit tweeted this poster
In-charge of BJP's national Information & Technology, ex-banker and an early stage investor.

अब या तो भारतीय जनता पार्टी के फॉलो करने वालो को भाजपा की आईटी सेल के राष्ट्रिय इंचार्ज जी --- समझते है या फिर बेचारे ये खुद ही कभी स्कूल नहीं गए तो इन्हे ये जोड़ बाकी नहीं आता होगा, पर अफ़सोस ये खुद को बैंकर भी बताते है, सोचिये जिस व्यक्ति को 14.98 ₹ + 9.02 ₹ कितना होता है ये नहीं पता उसने यदि किसी बैंक की जिम्मेदारी संभाली होगी तो बैंक का तो दिवालिया निकाल दिया होगा|

आप देख सकते है कैसे भाजपा ने पूरी मशीनरी केवल और केवल झूंठ फैलाने में लगा रखी है|

रविवार, 17 सितंबर 2017

भारतीय जनता पार्टी की उत्तराखंड सरकार के शिक्षा मंत्री के अनुसार (-1) + (-1) = 0 होता है

कितने पढ़े लिखे हो?
हाँ, आपसे ही पूछ रहा हूँ भाई!
गणित के विद्वान पंडित हो?
चलो तो बताओ (-) + (-) = ?

भारतीय जनता पार्टी की उत्तराखंड सरकार के शिक्षामंत्री पर लगा महिला शि‍क्षक से अभद्रता का आरोप
भारतीय जनता पार्टी की उत्तराखंड सरकार के शिक्षामंत्री पर लगा महिला शि‍क्षक से अभद्रता का आरोप
भारतीय जनता पार्टी की उत्तराखंड सरकार में शिक्षा मंत्री अरविन्द पांडे जब निरीक्षण के लिए एक सरकारी स्कूल पहुंचे तो एक अध्यापिका से सवाल कर बैठे!
बताइये माइनस प्लस माइनस क्या होगा?

अक्सर जैसे सभी पढ़े लिखे लोग और विषय के जानकार व्यक्ति को जो जवाब देना चाहिए वही जवाब अध्यापिका ने भी दिया की माइनस प्लस माइनस बराबर माइनस ही होगा (-) + (-) = (-)
लेकिन भारतीय जनता पार्टी सरकार के शिक्षा मंत्री अरविन्द पांडे जी इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुए और उन्होंने अध्यापिका को सभी विद्यार्थियों और अधिकारियों के सामने पाठ पढ़ा दिया की (-) + (-) = + होगा लेकिन वो इस पर ही नहीं रुके इसके साथ साथ उन्होंने कई हिदायतें  दे डाली की ये एक बेसिक चीज है जो उन्हें पता होना चाहिए|
अब पता नहीं ये भारतीय जनता पार्टी अपने समर्थकों, विधायकों, मंत्रियों को कौनसी स्पेशल स्कूल में भेजकर क्या ख़ास पढ़ाई पढाते है जिसमे (-) + (-) = + हो जाता है|
देखिये पूरा विडिओ  (सौजन्य : NDTV India)
भारतीय जनता पार्टी की उत्तराखंड सरकार के शिक्षामंत्री पर लगा महिला शि‍क्षक से अभद्रता का आरोप 


फिर शिक्षा मंत्री जी ने उदाहरण भी दिया  (-1) + (-1 ) = 0 होगा
चलो एक बार तो मान भी लिया की बीजेपी ने शिक्षा मंत्री का पद किसी ऐसे व्यक्ति को दे दिया होगा जो इतना पढ़ा लिखा नहीं हो और उस बेचारे को ये सब नहीं पता हो लेकिन बस सत्ता के अहंकार में उनसे सवाल कर लिया और अपना रौब दिखाने के लिए उसने उस महिला शिक्षक को नीचा दिखाने के लिए गलत जवाब को सही ठहरा कर उसका अपमान कर खुद के मंत्री पद की धौंस जमा दी, लेकिन इस पूरे प्रकरण में सोचने वाली बात ये है की वहाँ मौजूद किसी अधिकारी की इतनी हिम्मत नहीं हुई की वो शिक्षामंत्री को ये कह सके की नहीं सर आप गलत है और महिला शिक्षक सही है (-) + (-) = (-) ही होगा, कोई एक अधिकारी की इतनी हिम्मत नहीं हो पाई की वो सत्य का साथ दे सके|
कभी देखिये आप जब आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार के मंत्री, विधायक, यहाँ तक मुख्यमंत्री तक जब जाते है लोग कैसे बिना किसी डर के अपनी रखते है, सवाल जवाब करते है|

आखिर भारतीय जनता पार्टी के झूंठ पर कुछ नहीं बोलने का ये डर लोगो के बीच कहाँ से आ गया, क्या ये एक महज संयोग है या लोगो को भी पता है की भारतीय जनता पार्टी के किसी भी नेता, मंत्री, विधायक के झूंठ पर यदि किसी ने कुछ बोला तो उसका अंजाम उसे भुगतना होगा?
यदि ऐसा नहीं नहीं तो फिर मेरे पास कोई और कारण नहीं है जिसकी वजह भाजपा सरकार के मंत्री झूंठ बोलकर एक पूरी पीढ़ी को गलत शिक्षा दे रहे थे तब सभी अधिकारी चुपचाप देखते रहे, वो मंत्री जी को ये कहने की हिम्मत नहीं जुटा पाए की आप गलत बता रहे है सर, हमारे विद्यार्थी इससे गलत सीखेंगे हमे उन्हें सही शिक्षा देनी चाहिए और सही ये है की (-) + (-) = (-) ही होता है|
दोस्तों यही तो गुलामी है, की आप ये जानते हुए की सामने वाला झूंठ बोल रहा है आप चुपचाप सहन करते है, सोचिये उसी कक्षा में यदि उनमे से किसी अधिकारी का बेटा/बेटी बैठी हो और वो बच्चा घर आने पर अपने उन अधिकारी पिताजी से पूछे की पापा वो मंत्री झूंठ बोल रहा था वो गलत पढ़ा रहा था आप चुप क्यों थे? आपने उन्हें सही क्यों नहीं किया?
अंग्रेजो की गुलामी के समय भी यही होता था हमे पता होता था की वो अंग्रेज अधिकारी झूंठ बोल रहा है लेकिन फिर भी देशवासियों को चुपचाप सहन करना पड़ता था|
इससे पहले की देर हो जाए अपनी आँखों पर पड़ा ये अंधभक्ति का पर्दा उठाइये और देखिये कैसे हम सब एक बार फिर गुलामी के दौर की तरफ बढ़ रहे है|
यदि मेरे इस लेख से किसी की भी भावनाये आहत हुयी हो तो मैं आप सबसे क्षमा चाहता हूँ|


BJP Govt Uttarakhand education minister arvind pandey gives new thery of arithmetic

मंगलवार, 8 अगस्त 2017

आज वर्णिका है कल कोई और होगी


IAS की बेटी से छेड़छाड़ मामले में बीजेपी के वरिष्ठ नेता का बेटा गिरफ्तारसभी बुद्धिजीवी जो आज चुपचाप अपने घरो में  बैठे है अपने दिल पर हाथ रखकर सच बोलना यदि ये लड़का भाजपा नेता का बेटा ना होकर किसी अन्य दल का होता तो क्या वो इसी तरह चुपचाप बैठे रहते? जो लोग गुरमेहर कौर को लेकर तरह तरह के कमेंट, गुस्सा, मारने, उसे पाकिस्तानी सिद्ध करने पर उतर आये थे वो आज अपने ही बीच की एक बेटी के साथ हुए इस डरावने सच पर चुप है| गुरमेहर ने केवल ये कहा था की युध्द समाधान नहीं है, उसने युद्ध में अपना पिता खोया है, और आज खुद प्रधानमंत्री मोदी और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भी यही बोल रही है की युद्ध कोई समाधान नहीं है लेकिन फिर भी एक सामान्य नागरिक से लेकर बड़ी बड़ी हस्तियाँ, जिन फ़िल्मी सितारों के पास 1 मिनट का समय नहीं होता वो भी गुरमेहर को गरियाने के लिए सोशल मिडिया से लेकर टीवी पर बाइट देने तक कही कोई कसर नहीं छोड़ रहे थे ताकि किसी तरह उस लड़की की आवाज को दबा दिया जाये| 


Chandigarh stalking case: Haryana chief Subhash Barala son Vikas Barala

एक IAS अधिकारी, वो भी उसी सरकार में जिसके नेता के बेटे ने उस अधिकारी की बेटी को दहशत भरे कुछ घंटे बिताने पर मजबूर कर दिया|
ऐसा ही कुछ हुआ था चंडीगढ़ की सड़को पर, वर्णिका की हिम्मत और किस्मत मानो की एक और निर्भया नहीं बनी, वरना जिस तरह से उस रात हरियाणा भाजपा अध्यक्ष सुभाष बराला के बेटे विकास बराला ने अपने दोस्त के साथ मिलकर वर्णिका का जिस तरह से पीछा किया उससे तो यही लगता है, यदि भाजपा अध्यक्ष का बेटा अपने मकसद में कामयाब हो जाता तो शायद हम सब एक शाम फिर से कैंडल मार्च कर अपनी सामजिक जिम्मेदारियां निभा देते लेकिन ऐसा नहीं हुआ और वर्णिका बच गयी उन दरिंदो के चंगुल से|
पर समाज के लिए मुश्किल समय अब आ गया जब वर्णिका बच गयी और उसके बहादुर पिता आईएएस अधिकारी ने अपराधियों को सजा दिलाने के लिए मोर्चा खोल दिया|
जितना मुश्किल समाज के लिए अब है उतना मुश्किल नहीं होता यदि विकास भाजपा अध्यक्ष का बेटा ना होकर  अन्य दल के नेता का बेटा होता|
लेकिन आज उन्ही सभी तथाकथित VIP के पास एक बेटी को न्याय मिल सके इसके लिए कुछ शब्द भी नहीं है?
चलो उन VIP की तो समझ में आती है क्योंकि उनके इतने काले कारनामे होते है की यदि वो सरकार के खिलाफ कुछ भी बोले तो 1 मिनट में सरकार उन्हें सड़क पर ला सकती है अपनी तमाम एजेंसी उनके पीछे लगाकर अतः हम ये मानकर चल सकते है की वो सभी अभिनेता, कलाकार, खिलाड़ी केवल सत्ता के लिए भोपू का काम करते है, सरकार कुछ बोलती है तो वो भोपू बनकर उस आवाज को दूर तक पहुंचाने में मदद करते है|
 लेकिन इस देश के आम आदमी को क्या हो गया? जिस मिडिया से सरकारे डरती थी उस मिडिया को क्या  हो गया?
ठीक है आप सबकी अपनी अपनी प्राथमिकता और राजनितिक प्रतिबद्धता है लेकिन सोचिये आज जब एक IAS अधिकारी अपनी बेटी को न्याय नहीं दिला पा रहा है, या न्याय के लिए आवाज उठाने से पहले वो डर से भर जाता है की न्याय के लिए आवाज उठाने के बाद उसके और उसके परिवार के साथ कुछ भी हो सकता है तो एक आम आदमी की तो सुनने वाला बचा ही कहाँ है?
आप चुप रहिये, निभाइये अपने राजनीतिक दल के प्रति निष्ठा पर याद रखिये आज वर्णिका है कल कोई और होगी, आज अगर आपके चुप रहने से ये रसूखदार लोग कानून के शिकंजों से बच निकलते है तो कल यदि ईश्वर ना करे ऐसा हो पर यदि आपके परिवार रिश्तेदार की बहन बेटी के साथ ऐसा होता है तो सच मानिये आप बहुत रोयेंगे उस दिन आज की अपनी इस ख़ामोशी पर|
जनता से बड़ा कुछ नहीं है, और जनता के पास जो ताकत है वो बड़े बड़े सिंहासनो को झुकने पर मजबूर कर सकती है फिर ये तो महज एक भाजपा नेता का बेटा है|
मैं ये नहीं कहता की भाजपा नेताओ की तरह आप उग्र प्रदर्शन करे, जैसे की हमे 2014 से पहले देखने को मिलते थे लेकिन कम से कम अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाइये, और आज वर्णिका के लिए इन्साफ की मांग कीजिये| आज आप बोलेंगे तो कल को कोई और विकास अपने पिता के राजनीतिक पद का फायदा उठाकर किसी और वर्णिका का पीछा नहीं करेगा, और यदि आज आप खामोश रहे तो कल कोई  वर्णिका होगी, कल कोई और निर्भया होगी, आज जो दो चार लोग बोलने की हिम्मत जुटा रहे है वो भी धीरे धीरे खामोश हो जायेंगे या खामोश कर दिए जायेंगे|
निर्णय आपको लेना है, कोई और निर्भया ना देखने को मिले|
जय हिन्द
वंदे मातरम्

नोट - मेरे इस लेख से किसी की भी भावनाये आहत हुई हो तो मैं इसके लिए क्षमा चाहता हूँ|


#ChandigarhStalking
#VarnikaKundu
BJP Haryana president Subhash Barala
Ashish 
Chandigarh Police
Chandigarh stalking case
#बेटी_बचाओ_भाजपा_से
#NoLaw4VVIPStalker
भाजपा के बेटे से भारत की बेटी बचाओ
 Link : IAS की बेटी से छेड़छाड़ मामले में बीजेपी के वरिष्ठ नेता का बेटा गिरफ्तार